भारत के मिसाइल टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में अब एक नया अध्याय शुरू होता दिखाई दे रहा है। पश्चिम बंगाल के Purba Medinipur जिले के Junput में तैयार किए जा रहे DRDO के नए टेस्टिंग रेंज से जुड़ा एक अहम NOTAM सामने आया है। इसमें बंगाल की खाड़ी के एक बड़े इलाके में हवाई गतिविधियों को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
NOTAM के मुताबिक यह प्रतिबंधित क्षेत्र 6 अक्टूबर सुबह 10 बजे से 9 अक्टूबर शाम 4 बजे तक प्रभावी रहेगा और इसकी ऊंचाई सीमा Surface से Unlimited है। ऐसी चेतावनी किसी संवेदनशील हवाई या रक्षा गतिविधि से पहले जारी की जाती है।
सबसे बड़ा संकेत यह है कि NOTAM में क्षेत्र को Junput DRDO Missile Testing Range से जोड़ा गया है। इससे संभावना बढ़ गई है कि इस विंडो में किसी मिसाइल या दूसरे हथियार सिस्टम का परीक्षण किया जा सकता है। हालांकि अभी तक DRDO ने यह नहीं बताया है कि कौन-सी मिसाइल का परीक्षण होने वाला है।
6 से 9 अक्टूबर की विंडो ने बढ़ाई हलचल
सामने आए NOTAM में चार दिनों की एक लंबी परीक्षण विंडो दिखाई देती है। इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि चारों दिन लगातार मिसाइलें दागी जाएंगी। टेस्टिंग के लिए पहले से बड़ा समय-क्षेत्र निर्धारित किया जा सकता है, ताकि मौसम, समुद्री यातायात, तकनीकी तैयारी या दूसरे कारणों से परीक्षण का समय बदला जा सके।
यहां सबसे जरूरी सावधानी यही है कि NOTAM को मिसाइल टेस्ट की पुष्टि नहीं माना जा सकता। यह किसी संभावित खतरनाक गतिविधि के लिए हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने की सूचना है। लेकिन Junput की मौजूदा भूमिका को देखते हुए इस NOTAM का मिसाइल टेस्ट से संबंध काफी महत्वपूर्ण है।
NOTAM यानी Notice to Airmen विमान संचालन से जुड़ी ऐसी आधिकारिक सूचना होती है, जिसके जरिए किसी इलाके में अस्थायी तौर पर हवाई गतिविधियों के लिए खतरे या प्रतिबंध की जानकारी दी जाती है। भारत में NOTAM व्यवस्था Aeronautical Information Service का हिस्सा है और इसे विमानन क्षेत्र को महत्वपूर्ण अस्थायी सूचनाएं देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Junput आखिर क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
Junput कोई अचानक सामने आया नया स्थान नहीं है। DRDO काफी समय से पश्चिम बंगाल के इस तटीय क्षेत्र को अपने परीक्षण ढांचे के विस्तार के लिए विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।
इसका मुख्य उद्देश्य ओडिशा के Chandipur स्थित Integrated Test Range (ITR) पर बढ़ते परीक्षण भार को कम करना है।
Chandipur भारत के सबसे महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण केंद्रों में से एक है। यहां अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों और हथियार प्रणालियों के परीक्षण होते रहे हैं। जैसे-जैसे भारत का स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम बड़ा हुआ है, परीक्षणों की संख्या और जटिलता भी बढ़ी है।
ऐसे में पूर्वी तट पर एक अतिरिक्त टेस्टिंग क्षेत्र भारत को ज्यादा flexibility देगा। सितंबर 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार ने Junput में DRDO के हथियार और मिसाइल परीक्षण केंद्र परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया था।
Chandipur से करीब 70 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के किनारे बनने वाली फैसिलिटी है।
Chandipur का विकल्प नहीं, उसकी ताकत बढ़ाएगा Junput
Junput को Chandipur का replacement समझना गलत होगा। इसका उद्देश्य मौजूदा परीक्षण ढांचे को खत्म करना नहीं बल्कि उसे अतिरिक्त क्षमता देना
- Junput को Chandipur और Abdul Kalam Island से जुड़े मौजूदा परीक्षण कॉरिडोर के साथ इस्तेमाल करने की योजना है।
- इससे समुद्र की तरफ उपलब्ध परीक्षण क्षेत्र बढ़ सकता है और लंबी engagement distance वाले परीक्षणों के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकती है।
यह भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले वर्षों में केवल ballistic missiles ही नहीं, बल्कि air-defence interceptors, surface-to-air missiles और दूसरी precision weapon systems की टेस्टिंग भी बढ़ने वाली है।
क्या Junput से पहली बार मिसाइल दागी जाएगी?
यही इस पूरी खबर का सबसे बड़ा सवाल है। IDRW ने 4 अक्टूबर की रिपोर्ट में 6 से 9 अक्टूबर की NOTAM विंडो को Junput में संभावित पहले disclosed missile-test window के रूप में देखा है।
कौन-सी मिसाइल का टेस्ट हो सकता है?
फिलहाल किसी खास मिसाइल का नाम लेना जल्दबाजी होगी। NOTAM में मिसाइल का नाम नहीं दिया गया है। इसलिए इसे Agni, BrahMos, Akash, QRSAM या किसी अन्य खास सिस्टम के परीक्षण से जोड़ना अभी पुष्टि के बिना दावा होगा।
भारत के पिछले परीक्षणों में भी अक्सर पहले सुरक्षा क्षेत्र से संबंधित NOTAM जारी होते हैं और परीक्षण के बाद रक्षा मंत्रालय/DRDO की आधिकारिक जानकारी से सिस्टम का नाम सामने आता है।
रक्षा मंत्रालय ने 2024 में इस फैसिलिटी को “very high importance” वाली मिसाइलों के परीक्षण के लिए उपयोगी बताया था, लेकिन किसी विशेष मिसाइल सिस्टम का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया था।
कब शुरू हुई थी Junput की कहानी ?
Junput टेस्ट रेंज की योजना 2024 में सामने आई थी। रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2024 में संसद में बताया था कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और सड़क तथा hard-standing जैसे शुरुआती बुनियादी काम किए जा चुके थे। हालांकि स्थानीय स्तर की परिस्थितियों के कारण आगे का काम प्रभावित हुआ था।
सितंबर 2026 में परियोजना को लेकर फिर से गतिविधियां तेज हुईं। पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से परियोजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी मिलने के बाद Junput एक बार फिर राष्ट्रीय रक्षा चर्चा में आया।
भारत को नए टेस्ट रेंज की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत के पास मिसाइलों की पूरी एक नई पीढ़ी तैयार हो रही है। Ballistic missiles, cruise missiles, air-defence interceptors, anti-ship systems और BMD-related technologies पर काम लगातार आगे बढ़ रहा है।
- हर नई प्रणाली को operational deployment से पहले कई चरणों में टेस्ट करना पड़ता है।
- इसमें अलग-अलग परिस्थितियों में flight test, guidance test, seeker test, interception test और range instrumentation जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
- अगर हर परीक्षण के लिए एक ही प्रमुख तटीय रेंज पर निर्भर रहना पड़े तो scheduling मुश्किल हो सकती है।
यही वजह है कि Junput जैसे अतिरिक्त क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
बंगाल की खाड़ी में सुरक्षा क्षेत्र इतना बड़ा क्यों?
मिसाइल परीक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक होती है safety corridor। मिसाइल जमीन से लॉन्च होकर समुद्र की तरफ जा सकती है। परीक्षण के दौरान उसका flight path, संभावित debris area और target area पहले से निर्धारित किया जाता है।
इसलिए आसपास के airspace और समुद्री क्षेत्र में civilian aircraft और ships की आवाजाही को नियंत्रित करना जरूरी होता है।
यही कारण है कि NOTAM और maritime warnings जैसी सूचनाएं परीक्षण से पहले जारी की जाती हैं।
अब असली नजर 6-9 अक्टूबर पर
अगर निर्धारित NOTAM window में परीक्षण होता है तो Junput भारत के missile-testing infrastructure में एक नया operational node बनकर सामने आ सकता है।
लेकिन यहां फिर एक बात साफ रखना जरूरी है—अभी यह नहीं कहा जा सकता कि कौन-सी मिसाइल का परीक्षण होगा या परीक्षण निश्चित रूप से होगा।








