ड्रोन वारफेयर की दुनिया का एक नया योद्धा Autonomous Strike Aircraft Venom

By Alok Ranjan

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दूसरे ड्रोन्स से अलग कैसे ?

दुनिया में हज़ारों तरह के अटैक ड्रोन्स हैं लेकिन ये ड्रोन पूरे UAV प्रोडक्शन के सेक्टर में एक क्रांति है…..इस UAV का नाम है Venom….Venom एक Autonomous Strike Aircraft है | नॉर्मली किसी भी अटैक ड्रोन्स को बनाने में उसकी प्लानिंग, डिजाइन, पार्ट्स तैयार करने, असेंबल करने और प्रोटोटाइप बनाने में ही करीब-करीब 10 साल का समय लग जाता है, लेकिन ये Autonomous Strike Aircraft Venom-केवल 71 दिनों में ना केवल उड़ान भर रहा है बल्कि जंग के मैदान में भी उतरने के लिए भी तैयार है।इस Autonomous Strike Aircraft को बनाया है अमेरिका के कैलिफोर्निया बेस्ड दो डिफेंस स्टार्टअप्स Divergent Technologies और Mach Industries ने।दोनों कंपनियों ने पिछले हफ्ते अपने इस स्ट्राइक ड्रोन को दुनिया के सामने लॉन्च भी कर दिया है।दोनों कंपनियों ने इस एयरक्राफ्ट के बिल्कुल नये तरीके से तैयार किया है। इसके हर पार्ट्स या टेक्नोलॉजी को नये सिरे से बनाने के बजाय कई पहले से फ्लाइट प्रूवन टेक्नोलॉजी और सिमुलेशन का इस्तेमाल किया गया है।

वेनम की खूबियां

Mach Industries पहले से मौजूद फ्लाइट-प्रूवन टेक स्टैक से एवियोनिक्स और सिमुलेशन का इस्तेमाल करके बेसलाइन और आर्किटेक्चर बनाया। इसमें एक मॉड्यूलर और ओपन-सिस्टम आर्किटेक्चर था ताकि कॉन्सेप्ट से फ्लाइट तक डेवलपमेंट में तेज़ी आए।इसके एवियोनिक्स, सॉफ्टवेयर और सेंसर को खास, वेल्ड किए गए सिस्टम के बजाय बिल्डिंग ब्लॉक के तौर पर डिज़ाइन किया गया है जिसे ज़रूरत पड़ने पर आसानी से बदला भी जा सकता है। हर कंपोनेंट को नए सिरे से बनाने के बजाय, Mach ने उन सबसिस्टम का इस्तेमाल किया जो पहले ही दूसरे प्लेटफॉर्म पर उड़ चुके थे। तो Divergent Technologies ने वेनम स्ट्रक्चर का डिजिटल डिज़ाइन और 3D प्रिंट बनाया। इसमें विंग्स, फ्यूज़लेज, स्किन्स और कंट्रोल सरफेस शामिल थे। ये पूरी तरह से डिजिटल पाइपलाइन थी। 3D डिज़ाइन फ़ाइल्स से लेकर रोबोट से असेंबल किए गए पार्ट्स तक। इसके सारे सभी बड़े स्ट्रक्चर पूरी तरह से सॉफ्टवेयर में डिज़ाइन किए गए हैं। इसके एयरफ्रेम का बड़ा हिस्सा अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ 3D प्रिंट से बनाया हुआ है। इस वजह से आम तौर पर स्ट्राइक ड्रोन में लगाये जाने वाले कई पार्ट्स कम हो गये। ट्रेडिशनल फाइटर जेट में केवल फ्यूजलेज़ में ही सैकड़ों अलग-अलग पार्ट्स होते हैं जिन्हें वेल्ड करके या नट-बोल्ट से जोड़ा जाता है। ये बहुत ही मुश्किल और समय लेने वाला काम होता है लेकिन वेनम में ये अलग-अलग होने के बजाय एक साथ जुड़े हैं और इसी वजह से इन्हें तैयार करने में भी बहुत कम समय लगता है। पूरा प्रोसेस डिजिटल होने की वजह से इसमें और तेज़ी आ जाती है…लुकास जिंगर डाइवर्जेंट के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने इस सिस्टम के डेवलपमेंट को बड़ी कामयाबी करार दिया है। उन्होंने कहा-

वेनम जैसे ड्रोन की ज़रूरत क्यों ?

अब भई केवल 71 दिनों में ड्रोन को पेपर से उतार कर हवा में उड़ा देना और वो भी हर पैमाने पर खरा उतरने के साथ-साथ, तो इस कमाल को करने वाली कंपनियों को खुद पर गर्व तो होगा ही। लेकिन इसके पीछे ड्रोन वारफेयर को लेकर अमेरिका की फ्यूचर प्लानिंग भी है।वेनम के डेवलपमेंट के पीछे अमेरिका की एक बड़ी स्ट्रैटेजी बताई जा रही है। ये स्ट्रैटेजी है कम समय और कम लागत में बड़ी संख्या में ऑटोनॉमस सिस्टम्स को फील्ड में लाना जिन्हें अपडेट करना भी आसान हो। यानी अमेरिका ऐसे स्ट्राइक ड्रोन चाहता है जो सस्ते हों, जल्द से जल्द बनाये जा सकें और ज़रूरत के हिसाब से उनमें बदलाव भी किया जा सके। पेंटागन इसे अफोर्डेबल मास कहता है। एलेक्स लवेट, अमेरिका के प्रिंसिपल डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ वॉर हैं। उन्होंने इस प्रोग्राम की कामयाबी पर कहा-

अमेरिका पहले से ही अनमैन्ड फाइटर जेट्स पर काम कर रहा है। लेकिन वेनम का मॉडल उससे काफी छोटा है। ये आने वाले समय में स्वार्म अटैक के साथ-साथ हाई रिस्क ऑपरेशन्स को भी अंजाम दे सकता है। अभी कंपनी ने इसके स्पेसिफिकेशन्स पब्लिक नहीं किये हैं लेकिन उम्मीद है कि ये Autonomous Strike Aircraft ड्रोन वारफेयर ही नहीं, ड्रोन डेवलपमेंट और प्रोडक्शन वर्ल्ड को ही बदल कर रख देगा।

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