दोस्तों, ये मिसाइल याद है आपको। 12 नवंबर 2024 को DRDO ने ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से पहली बार इस मिसाइल का परीक्षण किया था। ये मिसाइल थी Long Range Land Attack Cruise Missile यानी LRLACM….अपने पहले ही परीक्षण में इस मिसाइल ने दुनिया भर का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था।कौन सी मिसाइल है- क्या रेंज है-क्या स्पीड है- हर कोई यही जानने के लिए बेचैन था जबकि DRDO अपनी इस नई मिसाइल के मेडेन टेस्ट फायर के कामयाब होने की खुशी मना रहा था….इस लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल की रेंज 1000 किलोमीटर की थी।
भारत ने अपनी इस मिसाइल को पिछले साल मई में एथेंस में हुए DEFEA 2025 में भी शो केस किया था…फिर जून में ये भी ख़बर आई कि DRDO बहुत जल्द इस मिसाइल के दूसरे परीक्षण की तैयारी कर रहा है…लेकिन इस मिसाइल को लेकर अब जो ख़बर आई है दोस्तों, वो बहुत हाहाकारी है। बताया जा रहा है कि DRDO ने इस मिसाइल की रेंज 1000 किलोमीटर से बढ़ाकर 2500 किलोमीटर तक करने के प्रोजेक्ट पर काम तेज़ कर दिया है।इसके लिए DRDO मिसाइल के स्ट्रक्चर से लेकर उसकी डिजाइन और कंपोनेन्ट्स में बदलाव कर रहा है।इस बदलाव को बताने से पहले आपको LRLACM की डिटेल बताता हूं।…1000 किलोमीटर की रेंज वाली LRLACM की लंबाई करीब 6 मीटर और वजन 1500 किलोग्राम का है। इसमें Mid-Course Guidance के लिए INS और GPS जबकि Terminal Phase के लिए Active Radar Seeker लगा है। ये क्रूज मिसाइल है इसलिए ये Waypoint Navigation से भी लैस है। इसी के ज़रिये ये टारगेट तक जाने के लिए अपना रास्ता बदल सकती है…इस मिसाइल में जो इंजन लगा है वो GTRE का बनाया हुआ माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन यानी STFE है।ये 50 मीटर से लेकर 4 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है। इसमें 450 किलोग्राम तक का वारहेड होता है जो कन्वेशनल और न्यूक्लियर दोनों हो सकता है।
इसकी स्पीड .09 Mach है यानी ये एक सबसोनिक मिसाइल है..अब आपको बताता हूं कि 1000 से 2500 किलोमीटर तक की रेंज को बढ़ाने के लिए DRDO इस मिसाइल में कौन-कौन से बदलाव कर रहा है।तो जैसा कि मैंने बताया कि इस मिसाइल में जो इंजन लगा है वो GTRE का बनाया हुआ माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन यानी STFE है। GTRE के मुताबिक ये इंजन पहले से ही अधिक एन्ड्योरेंस मार्जिन के साथ बनाया हुआ है। ये मौजूदा समय से 3 गुना अधिक समय तक काम कर सकता है यानी ये इंजन 1000 ही नहीं 2500 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल के लिए भी फिट रहेगा।तो ये तो हुई इंजन की बात लेकिन 2500 किलोमीटर की रेंज के लिए इस मिसाइल के वेट में कटौती ज़रूरी है। अभी इस मिसाइल का वजन 1500 किलोग्राम है लेकिन DRDO इसे कम करके 1000 किलो तक करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए मिसाइल के एयरफ्रेम में एल्यूमिनियम की जगह कार्बन फाइबर कंपोजिट लगाया जा रहा है। मिसाइल में High Density Fuel के इस्तेमाल पर भी काम किया जा रहा है। ये फ्यूल कम जलकर अधिक ऊर्जा पैदा करता है। इससे मिसाइल में फ्यूल स्टोरेज कम होगा जबकि रेंज बढ़ जाएगी…इनके अलावा कुछ और बदलावों पर भी काम किया जा रहा है। तो एक तरफ DRDO 1000 किलोमीटर वाली LRLASM के दूसरे टेस्ट की तैयारी कर रहा है जिसे पहले से ही सेना में शामिल करने की हरी झंडी मिल चुकी है तो दूसरी तरफ इस मिसाइल की रेंज 1000 से बढ़ाकर 2500 किलोमीटर तक करने के प्रोजेक्ट पर भी तेज़ी से काम कर रहा है।










