देश की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य गोपनीयता को लेकर एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। तमिलनाडु में एक रिटायर्ड Indian Army captain को गिरफ्तार किया गया है। इस पूर्व सैन्य अधिकारी पर सेना की खुफिया जानकारी (confidential military secrets) लीक करने का आरोप है।
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में यह गिरफ्तारी की गई है। शुरुआती जांच के मुताबिक आरोपी सेवानिवृत्त अधिकारी सोशल मीडिया पर एक अनजान महिला के ‘हनीट्रैप’ (Honeytrap) में फंस गया था और उसे सेना की गोपनीय जानकारियां दे रहा था।
महिला की वास्तविक पहचान अभी सामने नहीं आई है। उसके किसी जासूसी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है जो कथित तौर पर देश विरोधी और विदेशी खुफिया तंत्रों के लिए काम कर रही थी। उसकी पहचान और उसे किसी विदेशी संगठन से संभावित संबंध और संपर्क की जाँच की जा रही है।
हालांकि times of india के मुताबिक संदिग्ध महिला उत्तर प्रदेश की बताई जा रही है।
कौन है गिरफ्तार रिटायर्ड आर्मी कैप्टन,कितनी लंबी रही सैन्य सर्विस ?
गिरफ्तार रिटायर्ड आर्मी कैप्टन की पहचान 52 साल के बाबू पी. के तौर पर हुई है। वह वेल्लोर जिले में कनियम्बाडी के पास स्थित कीझवल्लम गाँव के रहने वाले हैं। सेना से रिटायर होने के बाद वह अपने पैतृक गाँव में रह रहे थे।
- भारतीय सेना में उनकी लगभग 28 साल की सर्विस रही है।
- उन्होंने सैन्य उपकरणों (Equipment Division) और आर्टिलरी से जुड़े विभागों समेत सेना की विभिन्न यूनिटों में काम किया।
- लंबे समय तक संवेदनशील विभागों में तैनात रहने से उसे सेना के आधुनिक साजो-सामान और तकनीकी सिस्टम की गहरी समझ थी।
- वह साल 2025 में कैप्टन पद से रिटायर हुआ।
उनकी लंबी सैन्य सेवा और पुराने सहयोगियों से संपर्क का उल्लेख इस मामले की जाँच में भी सामने आया है। पुलिस का आरोप है कि महिला की माँग पर उन्होंने इन्हीं संपर्कों के जरिए अतिरिक्त जानकारी जुटाई।
संदिग्ध महिला के संपर्क में कैसे आए बाबू पी. ?
पुलिस के मुताबिक करीब एक साल पहले एक अनजान महिला ने बाबू से WhatsApp पर संपर्क किया था। यानी मामले की शुरुआत WhatsApp पर संपर्क से हई। शुरुआती परिचय में उस महिला ने दावा किया कि वह DRDO के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसी पहचान के सहारे उसने उनसे बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ाई। इसके बाद दोनों के बीच नियमित संपर्क होने लगा।
इस तरह लगभग एक साल पहले शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे व्यक्तिगत संपर्क और वीडियो कॉल तक पहुँच गई। इस तरह महिला ने नजदीकी बढ़ाने के बाद उनसे धीरे-धीरे भारतीय सेना से संबंधित जानकारियां मांगनी शुरू कीं।
फिलहाल जांचकर्मी अब उस WhatsApp अकाउंट के वास्तविक संचालक का पता लगा रहे हैं।
कैसे जुटाई गई जानकारी और क्या-क्या जानकारियां लीक ?
पुलिस के अनुसार, महिला ने खुद को DRDO के एक प्रोजेक्ट से जुड़ा बताकर बाबू से सैन्य जानकारी माँगी। आरोप है कि बाबू ने उसे सेना के उपकरणों और अन्य संवेदनशील सैन्य विषयों से जुड़े गोपनीय विवरण साझा किए।
- इस मामले में बाबू पर सिर्फ अपनी ही जानकारी महिला को बताने का आरोप नहीं है।
- जब महिला किसी ऐसे विषय पर सवाल करती थी जिसका जवाब उन्हें मालूम नहीं होता था, तो वह दूसरे लोगों से संपर्क करते थे।
- टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, बाबू ने सेवारत और रिटायर्ड सैन्य सहयोगियों से जानकारी जुटाई।
- वहीं ANI की रिपोर्ट में सेना के कार्यालयों में फोन करके विवरण हासिल करने का भी उल्लेख है।
आरोप है कि इसके बाद वह जानकारी महिला तक पहुँचाई गई। इस तरह जाँच का एक अहम पहलू यह भी है कि उनके जरिए और किन स्रोतों से विवरण जुटाए गए।
कैसे मिला बाबू पी. की हरकतों का सुराग ?
रिपोर्टों के अनुसार, बाबू की गतिविधियों को लेकर मिली सूचना के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसियाँ सक्रिय हुईं। ANI ने बताया कि सेना के अधिकारियों को उनके व्यवहार पर संदेह हुआ था, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियों की सहायता से पूछताछ की गई।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इंटेलिजेंस ब्यूरो ने बाबू और महिला के इस्तेमाल वाले मोबाइल नंबरों की निगरानी की। इस प्रक्रिया में गोपनीय जानकारी साझा किए जाने का पता चलने की बात कही गई है। इसके बाद केंद्रीय खुफिया अधिकारियों ने बाबू को वेल्लोर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। फिर उनसे करीब दो दिन पूछताछ की गई।
जाँच में महिला से उनके संपर्क और गोपनीय सैन्य जानकारी साझा करने के आरोपों को खंगाला गया। बाबू को 24 अक्टूबर की रात स्थानीय पुलिस के हवाले किया गया और मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में वेल्लोर सेंट्रल जेल भेजा गया।
बाबू पी. पर किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने बाबू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 152 और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धाराएँ 3(1)(c) तथा 5(1)(a) लगाई हैं। यह धाराएं बेहद कठोर हैं।
| धारा | किस अपराध से संबंधित है? | दोष सिद्ध होने पर सजा |
| BNS की धारा 152 | जानबूझकर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य; अलगाव, सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियों को उकसाना अथवा बढ़ावा देना। | आजीवन कारावास या सात वर्ष तक की कैद, साथ में जुर्माने का भी प्रावधान। |
| ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3(1)(c) | देश की सुरक्षा या हितों के प्रतिकूल उद्देश्य से ऐसी गोपनीय जानकारी, दस्तावेज, नक्शे या कोड जुटाना, दर्ज करना या साझा करना, जो दुश्मन के काम आ सकते हों अथवा जिनके खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा आदि प्रभावित हो सकती हो। | रक्षा और सैन्य मामलों या गोपनीय सरकारी कोड से जुड़े अपराध में 14 वर्ष तक की कैद; अन्य मामलों में तीन वर्ष तक। |
| ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 5(1)(a) | अपने पास मौजूद या सरकारी पद के कारण मिली संरक्षित जानकारी अथवा दस्तावेज जानबूझकर किसी अनधिकृत व्यक्ति को देना। यह प्रावधान पूर्व सरकारी कर्मियों पर भी लागू हो सकता है। | धारा 5(4) के तहत तीन वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों। |
टाइम्स ऑफ इंडिया ने पुलिस के हवाले से आगे की जाँच में NIA तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों की संभावित भागीदारी का उल्लेख किया है।
महिला का पाकिस्तान से संबंध कितना स्पष्ट है?
इस मामले को लेकर प्रसारित कुछ विवरणों में महिला को पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव भी बताया गया है। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में उसकी पहचान और पाकिस्तान से संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने स्पष्ट लिखा है कि महिला के पाकिस्तान से जुड़े होने की खबरें अपुष्ट हैं।
ANI के अनुसार, जाँचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि WhatsApp अकाउंट कौन चला रहा था और क्या किसी विदेशी नागरिक या विदेश स्थित संगठन की भूमिका थी। इसलिए फिलहाल प्रमाणित स्थिति यही है कि जानकारी हासिल करने वाली महिला की वास्तविक पहचान और उसके पीछे के नेटवर्क की जाँच जारी है।








