सऊदी ने हूती ठिकानों पर की भीषण एयरस्ट्राइक, ताइज फिर बना जंग का बड़ा अखाड़ा

By Defence Detective

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Smoke rises after Saudi airstrike in Yemen

यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जंग और भड़क गई है। सऊदी फाइटर जेट ने यमन के ताइज प्रांत में एयरस्ट्राइक की है, जिसमें कम से कम 7 लोगों की मौत और 40 लोग घायल हुए हैं। घायलों में बच्चे भी शामिल बताए गए हैं।

हमला माविया जंक्शन के पास एक मार्केट एरिया में हुआ। हूतियों के मुताबिक सऊदी F-15 विमानों ने ताइज में माविया/मावियाह जंक्शन के बाजार पर दो एयरस्ट्राइक कीं।

वहीं यमनी सरकार से जुड़े सैन्य सूत्रों के मुताबिक इलाके में हूती अड्डों को निशाना बनाया गया। हूतियों ने बाजार के पास हाल में एक सैन्य शिविर स्थापित किया था और कार्रवाई का लक्ष्य वह सैन्य परिसर तथा वहां मौजूद Vehicle थे।

27 सितंबर को यमनी सरकारी बलों ने भी ताइज, लहिज और अल-धाले में हूती ठिकानों पर ड्रोन और हवाई हमले किए। यह एयरस्ट्राइक ऐसे समय हुई है जब ताइज समेत दक्षिण-पश्चिमी यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई कई मोर्चों पर तेज हो चुकी है।

पिछले कुछ दिनों में सऊदी और यमनी सरकारी बलों ने हूती ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं, जबकि हूतियों ने भी सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखने का दावा किया है।

सऊदी ने क्यों की एयरस्ट्राइक ?

दरअसल सितंबर में हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। 15 सितंबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा था कि हूती हमलों में खामिस मुशैत, अबहा और ताइफ में 13 नागरिक घायल हुए। घरों और ऑयल सप्लाई, ऑयल फैसिलिटीज को नुकसान पहुंचा है। यहां तक कि हूतियों पर मक्का को भी निशाना बनाने का आरोप लगाया।

इसी क्रम में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती हमलों का “ठोस” जवाब देने की बात कही थी। हालांकि ताइज में 27 सितंबर की मौजूदा एयरस्ट्राइक को केवल एक अलग और जवाबी घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

क्योंकि सऊदी अरब लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का सैन्य समर्थक है। यानी मौजूदा सऊदी एयरस्ट्राइक के पीछे दो समानांतर सैन्य वजहे हैं:-

  • पहला: सऊदी क्षेत्र पर हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब देना।
  • दूसरा: यमनी सरकारी बलों को हूतियों के खिलाफ चल रहे जमीनी अभियान में सैन्य समर्थन देना।

कितनी भीषण एयरस्ट्राइक ?

27 सितंबर को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि सऊदी विमानों ने पिछले 24 घंटों में यमन के छह प्रांतों में 27 हवाई हमले किए। हूतियों के अनुसार इन हमलों में ताइज के अलावा मारिब, सादा, अमरान, इब और हज्जाह जैसे इलाके शामिल थे।

हूतियों ने दावा किया कि कुछ हमले महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों पर भी हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि अभियान का मकसद केवल हूती लड़ाकों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उनकी और सामान की आवाजाही बाधित करना भी हो सकता है।

हालांकि 27 हमलों के हूती आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के 26 सितंबर के आकलन के अनुसार, जिन पुलों और सड़कों पर हमले बताए गए, वे हूती इलाकों से ताइज के मोर्चे तक सैनिकों और संसाधनों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण जमीनी मार्ग हैं।

ताइज अब सबसे अहम युद्धक्षेत्र क्यों?

यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित ताइज लंबे समय से सरकार तथा हूतियों के बीच संघर्ष का प्रमुख मोर्चा रहा है। लेकिन इस बार इसकी अहमियत और बढ़ गई है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक हूती बल ताइज शहर के पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दबाव उस सड़क पर भी है जो ताइज को अदन से जोड़ती है।

अगर यह जमीनी संपर्क मार्ग हूतियों के नियंत्रण में जाता है तो ताइज में मौजूद सरकारी बलों की स्थिति काफी कठिन हो सकती है।

ताइज की लड़ाई का दूसरा बड़ा पहलू समुद्र से जुड़ा है। ताइज के पश्चिम में लाल सागर का तट है और दक्षिण में बाब-अल-मंदेब का रणनीतिक समुद्री मार्ग।

Reuters के मुताबिक हूती लड़ाकों ने ताइज और पड़ोसी लहिज प्रांत के बीच स्थित कहबूब पहाड़ियों जैसे रणनीतिक इलाकों पर कब्जे की कोशिश तेज की है। ये ऊंचाई वाले इलाके लाल सागर के तट को यमन के दक्षिणी हिस्से से जोड़ने वाले रास्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

कहबूब पहाड़ियों पर नियंत्रण इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां से लाल सागर तट और बाब-अल-मंदेब की दिशा में आने-जाने वाले इलाकों पर निगरानी और सैन्य दबाव बनाया जा सकता है।

यानी ताइज में चल रही लड़ाई का मकसद सिर्फ शहर या गांवों पर कब्जा नहीं है। इसके पीछे लाल सागर तट और बाब-अल-मंदेब के आसपास सैन्य स्थिति मजबूत करने की लड़ाई भी है।

यही वजह है कि सऊदी और यमनी सरकारी बल ताइज के आसपास हूती ठिकानों तथा उनकी सप्लाई लाइन पर लगातार हमला कर रहे हैं। ताइज में सितंबर में हुई एयरस्ट्राइक-

तारीखकिसने हमला कियाइलाकाएयरस्ट्राइक/कार्रवाई
7 सितंबरसऊदीताइज, अलग-अलग इलाकेताइज उन प्रांतों में शामिल था जहां सऊदी एयरस्ट्राइक की सूचना दी गई, संख्या अलग से नहीं बताई गई
8 सितंबरसऊदीअल-वाजियाहकई एयरस्ट्राइक
9 सितंबरसऊदीताइज समेत कई प्रांतकुल 43 स्ट्राइक, लेकिन ताइज का अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं
10 सितंबरसऊदीदुबाब (Dhubab)10 एयरस्ट्राइक
10 सितंबरसऊदीताइज समेत 4 प्रांतलगभग 40 स्ट्राइक, लेकिन ताइज का अलग आंकड़ा नहीं
11 सितंबरयमन सरकारमोखा और दुबाबहूती ठिकानों, हथियार/सुदृढीकरण पर हवाई हमले; संख्या नहीं बताई गई
12 सितंबरयमन सरकारताइजहथियारों से लदे दर्जनों ट्रकों पर एयरस्ट्राइक, 60th Street के पास
13 सितंबरसऊदीअल-रुबाई, अल-ताइजियाह3 एयरस्ट्राइक
13 सितंबरयमन सरकारअल-वाजियाहहूती जमावड़े पर एयरस्ट्राइक; संख्या नहीं बताई गई
15 सितंबरसऊदीदुबाब13 एयरस्ट्राइक
16 सितंबरयमन सरकारदुबाब, मोखा व उत्तरी मोर्चेहूती ठिकानों/हथियारों पर एयरस्ट्राइक; संख्या नहीं बताई गई
16 सितंबरयमन सरकारअल-रुबाईहूती कैंप पर एयरस्ट्राइक
17 सितंबरसऊदीअल-राहिदाहटेलीकॉम टावर पर एयरस्ट्राइक
26 सितंबरसऊदीताइज समेत कई प्रांतहूती प्रवक्ता ने 27 एयरस्ट्राइक बताईं, लेकिन ताइज का अलग आंकड़ा नहीं
27 सितंबरसऊदीताइज शहरबाजार क्षेत्र पर 2 एयरस्ट्राइक का हूती दावा; कम-से-कम 7 लोगों के मारे जाने का दावा, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई
27 सितंबरयमन सरकारपूर्वी ताइज, माविया जंक्शनहूती कैंप और वाहनों पर एयरस्ट्राइक

लड़ाई का आम लोगों पर क्या असर ?

यमन में बढ़ती लड़ाई का सबसे गंभीर पहलू मानवीय संकट है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सितंबर में तेज हुई लड़ाई के कारण 1.30 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ चुके थे। इनमें से अधिकांश यमन के भीतर ही विस्थापित हुए हैं, जबकि 3,000 से अधिक लोग लाल सागर पार करके अफ्रीकी देशों की ओर चले गए हैं।

WHO ने 24 सितंबर को बताया था कि हालिया संघर्ष में 6 अगस्त से 18 सितंबर के बीच 3,672 casualties दर्ज हुईं, जिनमें 674 मौत और 2,998 घायल शामिल थे। ताइज और वेस्ट कोस्ट क्षेत्र में ही 1,349 casualties दर्ज की गई थीं। 

ताइज जैसे इलाकों में अगर सैन्य अभियान और तेज होता है तो सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ता है।

सऊदी अरब-यमन सरकार बनाम हूती क्यों ?

हूती यानी अंसार अल्लाह उत्तरी यमन से निकला ज़ायदी शिया विद्रोही आंदोलन है। उसने 2014 में धर्म के साथ सत्ता और क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई में राजधानी सना पर कब्जा कर यमन की सरकार को चुनौती दी। और तब से सुन्नी बहुल यमन में गृह युद्ध चल रहा है।

सुन्नी बहुल सऊदी अरब ने 2015 में यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, क्योंकि रियाद नहीं चाहता था कि उसकी दक्षिणी सीमा पर हूतियों का नियंत्रण मजबूत हो।

वहीं शिया बहुल ईरान हूतियों का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समर्थक है। ईरान ने हूतियों को हथियार, सैन्य तकनीक, प्रशिक्षण और खुफिया सहायता दी है। इसलिए यमन का संघर्ष सऊदी-ईरान क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता का भी हिस्सा बन गया है।

2022 में एक संघर्षविराम के बाद लड़ाई काफी हद तक धीमी पड़ गई थी। लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ यमन में भी पुराने मोर्चे फिर सक्रिय हो गए हैं।

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