राजस्थान के सीकर में अवैध हथियार और संगठित अपराध से जुड़े एक मामले की जांच का संबंध सेना तक पहुंच गया है। दरअसल पुलिस ने मामले में सेना के एक लांस नायक को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान 32 साल के भोपाल सिंह के तौर पर हुई है।
पूरे मामले की शुरुआत करीब तीन महीने पहले एक ऐसी पुलिस कार्रवाई से हुई है, जिसमें एक फ्लैट से पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस मिले थे। इसके बाद पुलिस ने एक-एक करके आरोपियों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और जांच आगे बढ़ते हुए सेना के जवान तक पहुंच गई।
यह मामला अब इसलिए और खास हो गया है कि आरोपी सेना का एक जवान है। ऐसे में अब जांच केवल अवैध हथियारों की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गई है।
मामला कब और कैसे आया सामने?
इस कहानी की शुरुआत 17 जून 2026 से होती है। जब सीकर पुलिस ने शहर में एक अपार्टमेंट पर छापा मारकर रंगदारी (एक्सटॉर्शन) वसूलने वाले चार बदमाशों गुलाब, प्रदीप, मनोज और बाबूलाल को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 2 अवैध पिस्टल और 43 जिंदा कारतूस मिले थे।
इन गिरफ्तारियों के बाद जांच सिर्फ बरामद हथियारों तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ और जानकारी जुटाने का सिलसिला शुरू किया, तो भोपाल सिंह का नाम सामने आया।
आरोपों के मुताबिक, भोपाल सिंह ने ही इन हथियारों की कथित डिलीवरी की थी। पुलिस ने आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
कहां का है आरोपी जवान?
सीकर पुलिस और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के संयुक्त एक्शन में दबोचा गया भोपाल सिंह जयपुर के झोटवाड़ा का रहने वाला है। आरोप है कि यह जवान गैंगस्टर रोहित गोदारा सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था। कथित तौर पर वह इसका ‘हथियार सप्लायर’ बन चुका था।
पुलिस जांच के मुताबिक कुछ हथियार रोहित गोदारा गैंग के साथियों के इस्तेमाल के लिए थे और शेखावाटी इलाके में व्यापारियों की रेकी की गई थी
कैसे हथियार पहुंचाता था भोपाल सिंह ?
इस मामले को सामान्य आर्म्स केस से अलग बनाने वाला एक और आरोप बेहद गंभीर है। कथित तौर पर हथियार डिलीवरी के दौरान भोपाल सिंह ने Army uniform और Army vehicle का इस्तेमाल किया था।
यानी आरोप यह है कि उसने अपनी सैन्य पहचान और सैन्य वाहन का इस्तेमाल हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि सेना की वर्दी और वाहन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसका उद्देश्य हथियारों की कथित डिलीवरी को आसान बनाना था।
अभी किन सवालों के जवाब की तलाश ?
यह मामला इसलिए भी अहम हो गया क्योंकि भोपाल सिंह कोई पूर्व सैनिक नहीं, बल्कि वह अभी सेना में सेवारत है। पुलिस की जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उसकी भूमिका क्या थी। उसकी गिरफ्तारी को उसी अवैध हथियार और संगठित अपराध मामले से जोड़ा गया है, जिसमें जून में हथियार बरामद हुए थे।
अब जांच में कुछ बेहद महत्वपूर्ण सवाल हैं:-
- भोपाल सिंह का पहले गिरफ्तार आरोपियों से क्या संबंध था?
- हथियारों के मामले में उसकी कथित भूमिका क्या थी?
- क्या वह हथियारों की खरीद-बिक्री या सप्लाई से जुड़ा था?
- उसे इस नेटवर्क के बारे में कितनी जानकारी थी?
- इस पूरे मामले में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं?
मामले में मिलिट्री पुलिस की भी इंट्री ?
भोपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद मामले का सैन्य पहलू भी सामने आया। उसकी गिरफ्तारी के बाद मिलिट्री पुलिस के अधिकारी सीकर पहुंचे और उससे पूछताछ की। फिलहाल, जवान को जेल भेज दिया गया है।
अब पुलिस जांच के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सेना से जुड़े स्तर पर इस मामले में उसके आचरण और कथित गतिविधियों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।








