आए दिन गीदड़-भभकी देने वाले पाकिस्तान के स्टॉक में अब इतना गेहूं नहीं है कि वह अपनी सभी डिमांड को पूरी कर पाए। हालत यह है कि वह POJK (पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू-कश्मीर) और गिलगित-बाल्टिस्तान (G-B) में सड़ा-गला गेहूं बांट रहा है। इसको लेकर दोनों जगहों पर अब बवाल मच गया है। दोनों जगहों की सरकारों ने गेहूं की क्वालिटी पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान के सामने गंभीर विरोध जताया है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक POJK और गिलगित-बाल्टिस्तान ने पाकिस्तान सरकार द्वारा दिए जा रहे गेहूं को लेने से हाथ खड़े करते हुए मांग की है कि 100 प्रतिशत लोकल लेवल पर खरीदा गया गेहूं उपलब्ध कराए।
मामला इसलिए और ज्यादा गंभीर है क्योंकि पाकिस्तान की सरकारी गेहूं एजेंसी PASSCO (The Pakistan Agricultural Storage and Services Corporation) के स्टॉक पर पहले से ही उपलब्धता का भारी दबाव है। जुलाई 2026 में पाकिस्तान के National Food Security Ministry ने खुद बताया था कि प्रांतों की सामूहिक मांग PASSCO के उपलब्ध गेहूं स्टॉक से ज्यादा हो गई है और करीब 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं इंपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
यानी यह बात एकदम साफ है कि पाकिस्तान में गेहूं के लाले पड़ गए हैं! मामले ने पाकिस्तान की फूड सिक्योरिटी और फूड डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
गेहूं पर क्यों है बवाल?
दरअसल ताजा विवाद की जड़ पहले से इंपोर्ट गेहूं स्टॉक की क्वालिटी है। फरवरी में Dawn ने रिपोर्ट किया था कि POJK में भेजे जा रहे कुछ इंपोर्ट गेहूं को लेकर अधिकारियों ने गंभीर आपत्ति जताई थी। अधिकारियों के मुताबिक यह गेहूं 2021-22 में यूक्रेन से खरीदा गया था और उसकी तय shelf life पार हो चुकी थी। उसमें दुर्गंध आ रही थी। यानी गेहूं सड़-गल चुका था।
National Institute of Health और PCSIR (Pakistan Council of Scientific and Industrial Research) की जांच में भी गेहूं के नमूने food-safety standards पर खरे नहीं उतरे। अधिकारियों ने पूरी तरह इसी इंपोर्ट गेहूं से बने आटे को इंसान के खाने के लिहाज से खतरनाक बताया था।
और अफसोस यह कि गेहूं के इस स्टॉक से भी POJK और G-B में गेहूं बांटा जा रहा था। यानी लोगों को खाने के लिए सड़ा-गला गेहूं दिया जा रहा था।लाजिमी है कि इस पर बवाल होना था और वह शुरू हो गया।
बवाल का असली पेंच कहां ?
समस्या का असली पेंच यूक्रेन का पुराना गेहूं स्टॉक ही है। पाकिस्तान ने 2021-22 में बड़े पैमाने पर गेहूं आयात किया था। Trading Corporation of Pakistan के रिकॉर्ड के अनुसार उस वित्त वर्ष में करीब 22.1 लाख टन गेहूं आयात किया गया था, जिसका बड़ा हिस्सा Ukraine और Russia से आया था। लगभग 17 लाख टन PASSCO को दिया गया था।
बाद में यही पुराना आयातित स्टॉक सरकारी गोदामों में पड़ा रहा। जनवरी 2026 में Dawn ने रिपोर्ट किया था कि PASSCO के पास लगभग 18 लाख टन गेहूं बचा हुआ था और उसमें लगभग 5.5 लाख टन 2021-22 के यूक्रेन से इंपोर्ट का था। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय इसका बड़ा हिस्सा खाने लायक नहीं रह गया था।
लेकिन इसी को खपाने का इंतजाम किया गया और पाकिस्तान की फूड सिक्योरिटी की कलई खुल गई।
POJK और G-B की सरकारों ने क्या कदम उठाया ?
PASSCO इन क्षेत्रों को सरकारी स्टॉक से गेहूं उपलब्ध कराती है। लेकिन POJK और गिलगित-बाल्टिस्तान की सरकारों ने PASSCO के इंपोर्ट गेहूं की क्वालिटी पर सवाल उठते हुए लेने से इंकार कर दिया। POJK के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर लोकल गेहूं देने की मांग की। गिलगित-बाल्टिस्तान की सरकार ने 30 मई 2026 को इसी तरह की मांग की थी।
20 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, PASSCO के पास 5 अगस्त तक करीब 10.88 लाख मीट्रिक टन गेहूं था। इसमें लगभग 87 प्रतिशत लोकल और 13 प्रतिशत इंपोर्ट गेहूं शामिल था। इसी सरकारी स्टॉक से इन दोनों क्षेत्रों को को गेहूं दिया जाना है। लेकिन दोनों ने इसे नहीं लेने का फैसला किया है।
कितना गेहूं चाहिए POJK और गिलगिट-बाल्टिस्तान को ?
मौजूदा स्टॉक में से, 2026-27 फूड ईयर (1 मई, 2026 से 30 अप्रैल, 2027 तक) के लिए POJK को 300,000 मीट्रिक टन और GB को 160,000 मीट्रिक टन गेहूं आवंटित किया गया है। यानी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर 4.60 लाख टन गेहूं का आवंटन है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक POJK करीब 63,801 टन और G-B करीब 38,015 टन गेहूं उठा चुका था।
अब असली सवाल है कि अगर दोनों इंपोर्ट गेहूं नहीं लेते हैं तो बाकी जरूरत का लोकल गेहूं पाकिस्तान कहां से और कितनी तेजी से उपलब्ध कराएगा?
| क्षेत्र | 2026-27 आवंटन | अब तक उठाया | अभी बाकी |
| POJK | 3 लाख MT | 63,801 MT | 2,36,199 MT |
| G-B | 1.60 लाख MT | 38,015 MT | 1,21,985 MT |
पाकिस्तान के सामने अब क्या चुनौती है?
पाकिस्तान की स्थिति का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि एक तरफ सरकार को भविष्य की जरूरत पूरी करने के लिए नया गेहूं इंपोर्ट करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ PASSCO के पास मौजूद पुराने इंपोर्ट गेहूं स्टॉक को भी निकालने की कोशिश हो रही है।
और इसी बीच POJK और G-B इंपोर्ट गेहूं स्टॉक नहीं चाहते हैं। इससे पाकिस्तान की सरकारी अनाज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के सामने दोहरी चुनौती पैदा होती है।
पहली चुनौती: इन क्षेत्रों को उनकी निर्धारित मात्रा में गेहूं उपलब्ध कराना।
दूसरी चुनौती: ऐसा गेहूं देना जिसकी गुणवत्ता को लेकर स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच सवाल न उठें।
अब पूरे घटनाक्रम को तीन आंकड़ों में समझिए—
- 10.88 लाख टन: 5 अगस्त तक PASSCO का कुल गेहूं स्टॉक।
- 4.60 लाख टन: 2026-27 में POJK और G-B को कुल आवंटन।
- 7.5 लाख टन: सितंबर में पाकिस्तान द्वारा नए गेहूं आयात के लिए आगे बढ़ाई गई मात्रा।
इन आंकड़ों के बीच सबसे बड़ा विवाद क्वालिटी का है।
गेहूं की सप्लाई का पूरा खेल: 50:50, 75:25 और 85:15 व्यवस्था क्या है?
मामला सिर्फ गेहूं की गुणवत्ता का नहीं है। इसके पीछे 2021-22 में किए गए बड़े पैमाने के गेहूं इंपोर्ट, सालों से सरकारी गोदामों में पड़े पुराने स्टॉक और उसे खपाने की पाकिस्तान की कोशिश की पूरी कहानी भी जुड़ी हुई है। PASSCO के पास मौजूदा लोकल और इंपोर्ट गेहूं को मिलाकर देने की व्यवस्था कम से कम सितंबर 2022 से लागू है, जो अलग-अलग रूप में है। पाकिस्तान की ECC ( Economic Coordination Committee ) ने इन क्षेत्रों में गेहूं डिस्ट्रीब्यूशन का यह सिस्टम दिया है।
| व्यवस्था | किसने तय की | कब | किसके लिए | स्थानीय गेहूं | आयातित गेहूं | उद्देश्य/मतलब |
| 50:50 | ECC | 2023 से POJKके लिए | POJK | 50% | 50% | PASSCO से AJK को मिलने वाले गेहूं में आधा स्थानीय और आधा आयातित स्टॉक |
| 75:25 | ECC | 2023 से G-B के लिए | गिलगित-बाल्टिस्तान | 75% | 25% | G-B को AJK की तुलना में ज्यादा स्थानीय और कम आयातित गेहूं देना |
| 85:15 | ECC | 24 अगस्त 2026 | सभी PASSCO recipient agencies | 85% | 15% | PASSCO के मौजूदा स्टॉक में पड़े आयातित गेहूं को स्थानीय गेहूं के साथ मिलाकर समय पर खपाना |
| 100:0 | AJK और G-B की मांग | सितंबर 2026 में मौजूदा विवाद | AJK + G-B | 100% | 0% | दोनों क्षेत्र अब आयातित गेहूं नहीं चाहते और पूरा गेहूं स्थानीय मांग रहे हैं |
पाकिस्तान के लिए यह एक रणनीतिक चुनौती क्यों?
POJK और गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के लिए सिर्फ दो सामान्य प्रशासनिक क्षेत्र नहीं हैं। ये भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सामने स्थित रणनीतिक क्षेत्र हैं। तथ्य यह है कि POJK और गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हैं, लेकिन वर्तमान में दोनों जगहों पर पाकिस्तान का कंट्रोल है। इसलिए वहां की कोई भी समस्या भारत के लिए बहुत मायने रखती है।
G-B की स्थिति रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र लद्दाख के उत्तर में और चीन के शिनजियांग क्षेत्र के पास स्थित है। इसी वजह से यहां होने वाली चीन-पाकिस्तान गतिविधियां भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान में केवल करीब 2% जमीन खेती योग्य बताई जाती है। वहां कठोर मौसम, छोटा कृषि मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गेहूं की खेती सीमित है। POJK में गेहूं की खेती होती है, लेकिन स्थानीय उत्पादन उसकी पूरी जरूरत के लिए पर्याप्त नहीं है।








