इस्लामाबाद में ‘आयरन ब्रदर’ चीन के नागरिकों के घर में पुलिस की डकैती, पहले भी आ चुका है ऐसा शर्मनाक मामला

By Defence Detective

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Security personnel deployed in Islamabad, Pakistan, in a file photograph.

पाकिस्तान में चीनी नागरिक कितने सुरक्षित हैं ?  राजधानी इस्लामाबाद में चीनी नागरिकों के घर में फिर एक बार शर्मनाक डकैती का मामला सामने आया है। इसमें एक बड़ी बात यह कि डकैती किसी आपराधिक गैंग ने नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के एक ग्रुप ने डाली है।

पुलिसकर्मियों ने चीनी नागरिकों के घर में घुसकर बंदूक की नोक पर डकैती की वारदता को अंजाम दिया। इस कड़ी में दो चीनी नागरिकों और घरेलू कर्मचारियों को बंधक बनाया गया और लाखों रुपये लूटे गए। मामले में चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।

इस गिरफ्तारी ने सुरक्षा व्यवस्था, खासकर चीनी नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल उठाए हैं। बीते कुछ हफ़्तों में चीनी नागरिकों को निशाना बनाने वाली यह चौथी बड़ी डकैती है।

रक्षा और भू-राजनीतिक (Geopolitics)  एक्सपर्ट के लिए यह घटना केवल एक साधारण कानून-व्यवस्था का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के गहरे प्रशासनिक भ्रष्टाचार, सुरक्षा बलों के चरमराते ढांचे को सामने तो लाती ही है, चीन के साथ पाकिस्तान की ‘आयरन ब्रदर’ कही जाने वाली साझेदारी के संदर्भ में भी यह घटना उसके सुरक्षा आश्वासनों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

पाकिस्तान, चीन को अपना ‘आयरन ब्रदर’ यानी सबसे भरोसेमंद दोस्त बताता है।

इस्लामाबाद में कब और कहां हुई डकैती ?

पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की धारा 395 (डकैती) के तहत दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के मुताबिक, घटना 18 अक्टूबर 2026 को तड़के करीब 2:20 बजे, इस्लामाबाद के पॉश इलाके F-7/1 सेक्टर स्थित एक मकान में हुई। यहां दो चीनी नागरिक रह रहे थे। वारदात के संबंध में कोहसार पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। पाकिस्तानी मीडिया में इसकी विस्तृत खबरें 20 अक्टूबर को प्रकाशित हुईं।

घटना की पूरी टाइमलाइन और तरीका किसी सोची-समझी फिल्मी साजिश जैसा कांड सामने लाती है। आरोप है कि चार पुलिसकर्मियों ने एक अन्य साथी के साथ मिलकर डकैती डाली।

वर्दी और पुलिस लाइट का दुरुपयोग: आरोपी पुलिसकर्मियों ने वारदात के लिए बकायदा अपनी आधिकारिक वर्दी का इस्तेमाल किया। वे एक काले रंग की टोयोटा कोरोला कार में सवार होकर आए, जिस पर पुलिस की घूमने वाली नीली फ्लैशिंग लाइट लगी हुई थी।

घर में कैसे दाखिल हुए डैकत पुलिसकर्मी ?

शिकायत के मुताबिक, पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति पहले कर्मचारियों के क्वार्टर तक पहुंचा। उसने वहां सो रहे सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर को जगाया तथा बाहर ले गया, जहां उसके साथी मौजूद थे। सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर को बंधक बना लिया गया। इसके बाद हथियारबंद लोग परिसर में दाखिल हुए और खिड़की के रास्ते मुख्य मकान में घुसे।

इसके बाद दोनों चीनी नागरिकों और उनके नौकरों को बंदूक दिखाकर ड्राइंग रूम में रोककर रखा गया। शिकायत के मुताबिक, वहां से 20 लाख पाकिस्तानी रुपये नकद लूटे गए। शिकायतकर्ता का करीब 15 हजार पाकिस्तानी रुपये कीमत का मोबाइल फोन भी छीना गया।

क्या डकैती में घर के अंदर से मिली थी मदद, कैसे पकड़े गए आरोपी ?

जांच अधिकारियों के अनुसार, मुख्य गेट खोलने और डकैतों को रास्ता देने में रात की शिफ्ट के एक निजी सुरक्षा गार्ड की मिलीभगत का संदेह है। वारदात के बाद इस्लामाबाद पुलिस ने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले और अपनी ही फोर्स के जवानों को संदिग्ध पाया, जिसके बाद चारों को तुरंत दबोच लिया गया।

उपलब्ध रिपोर्टों में चारों गिरफ्तार कर्मचारियों के नाम, पद और तैनाती का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

क्या पहले भी चीनी नागरिक ऐसे निशाने पर आए हैं?

पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट ProPakistani के मुताबिक, 29 अगस्त 2026 के बाद इस्लामाबाद में चीनी नागरिकों के घर डकैती की यह चौथी घटना है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तीन मामलों में हमलावरों ने अधिकारियों जैसी पहचान या वेशभूषा का इस्तेमाल किया। दो मामलों की जांच में  पुलिसकर्मियों पर आरोप सामने आए। इससे पुलिस की आंतरिक निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।

सितंबर में हुई डकैती का मामला क्या था?  डकैती की इस ताजी वारदात के पहले 13 सितंबर, 2026 की रात इस्लामाबाद के G-10/4 सेक्टर में दो चीनी नागरिकों के घर डकैती हुई थी।  

  • इस मामले में छह लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनमें तीन पुलिस अधिकारी शामिल थे।
  • लगभग 80 लाख पाकिस्तानी रुपये की नकदी और कीमती सामान लूटे जाने की सूचना थी।

चीनी नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा का वादा क्या था?

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने जनवरी 2026 में इस्लामाबाद में विशेष सुरक्षा इकाई (Special protection unit) बनाने की घोषणा की थी। बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष वांग शियाओहोंग के साथ बैठक के दौरान उन्होंने चीनी नागरिकों और संयुक्त विकास परियोजनाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया था।

दोनों पक्षों ने पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के प्रशिक्षण तथा पेशेवर क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा की थी। इन आश्वासनों के बाद राजधानी में ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता का सवाल खड़ा करती

6 फरवरी 2025 के चीन–पाकिस्तान संयुक्त बयान में पाकिस्तान ने चीनी कर्मचारियों, परियोजनाओं और संस्थानों की सुरक्षा अपनी प्रमुख जिम्मेदारी मानी थी। उसी बयान में आर्थिक, निवेश और रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी थी।

क्या चीनियों का CPEC से संबंध है?

उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों चीनी नागरिकों का चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC की किसी परियोजना से संबंध स्थापित नहीं हुआ है। उनके पेशे और पाकिस्तान में उनकी भूमिका की भी स्पष्ट पुष्टि नहीं है। चीन की ओर से भी फिलहाल मामले में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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