पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा (डूरंड लाइन) पर एक बार फिर गंभीर सैन्य टकराव शुरू हो गया है। दोनों देशों के बीच अंगूर अड्डा बॉर्डर क्रॉसिंग एरिया में भारी गोलाबारी हुई है। इस ताज़ा सैन्य संघर्ष में अफगान तालिबान बलों ने मोर्टार दागे, जबकि पाकिस्तानी सेना ने तोपखाने और छोटे व भारी हथियारों से अफगान सीमा चौकियों को निशाना बनाया।
27 अक्टूबर को हुई इस नई झड़प ने दोनों के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है। यह लड़ाई ऐसे समय हुई है, जब सीमा पार आतंकी गतिविधियों और लगातार सैन्य कार्रवाइयों को लेकर इस्लामाबाद तथा काबुल के संबंध बिगड़े हुए हैं।
झड़प की शुरुआत कैसे हुई, इसे लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के उलट दावे किए हैं। अंगूर अड्डा में लगभग एक सप्ताह पहले भी झड़प की रिपोर्टें आई थीं। अब दोबारा हुई गोलाबारी का असर आसपास रहने वाले लोगों और स्थानीय बाज़ार पर भी पड़ा है।
गोलाबारी में किसे और क्या नुकसान हुआ ?
पाकिस्तानी प्रशासन के मुताबिक अफगान तालिबान की मोर्टार गोलाबारी में एक नागरिक की मौत हो गई और पाँच लोग घायल हुए। अंगूर अड्डा बाज़ार की कई दुकानों को भी नुकसान पहुँचा।
पाकिस्तानी सैन्य डिपो में आग लगने और एक सैनिक की मौत की स्थानीय रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसकी स्वतंत्रत पुष्टि अभी बाकी है।
वहीं, पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में कई अफगान सीमा चौकियाँ नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अफगान पक्ष के मृतकों या घायलों की कोई सत्यापित संख्या भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
अंगूर अड्डा कहाँ है और झड़प किस इलाके में हुई?
अंगूर अड्डा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित कस्बा और सीमा पार आवाजाही का केंद्र है। इसका क्षेत्र सीमा के दोनों ओर फैला हुआ बताया जाता है। पाकिस्तानी तरफ लोअर दक्षिण वज़ीरिस्तान है, जबकि अफगान साइड पक्तिका प्रांत का बरमल ज़िला पड़ता है।
अंगूर अड्डा बॉर्डर क्रॉसिंग इन दोनों क्षेत्रों को जोड़ती है। समाचारों में अंगूर अड्डा नाम का इस्तेमाल कस्बे और बॉर्डर क्रॉसिंग के साथ आसपास के सीमा क्षेत्र के लिए भी किया जाता है।
झड़प की शुरुआत कैसे हुई ?
अंगूर अड्डा सीमा क्षेत्र में 27 अक्टूबर की दोपहर शुरू हुई झड़प को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान बलों ने पहले उनकी सीमा चौकियों पर गोलीबारी की, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की।
वहीं, Afghanistan International ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि तालिबान बल पहले छोड़ी गई सीमा चौकियों पर लौटने की कोशिश कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी बलों ने उन पर हमला किया। कुछ महीने पहले पाकिस्तानी हमलों के दौरान इन पोज़िशनों को खाली किया गया था।
पहली गोली किसने चलाई और टकराव का तत्काल कारण क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्यों सुलग रहा है अंगूर अड्डा सेक्टर ?
अंगूर अड्डा और बरमल क्षेत्र में यह हाल के दिनों की पहली झड़प नहीं है। खामा प्रेस के मुताबिक, 19 अक्टूबर की देर रात शुरू हुई गोलीबारी 20 अक्टूबर तक कई घंटे चली थी। उस दौरान भी भारी हथियारों के इस्तेमाल और कुछ स्थानीय लोगों के घर छोड़ने की जानकारी सामने आई थी।
एक ही क्षेत्र में बार-बार लड़ाई होना बताता है कि सीमा पर तनाव बना हुआ है। हालांकि, पिछली और ताज़ा घटना के तत्काल कारणों को एक मानने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
Afghanistan International के स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, तालिबान बल पहले छोड़ी गई चौकियों पर लौट रहे थे, तभी पाकिस्तानी बलों ने ताजा हमला किया।
दोनों के बीच तनाव की असली वजह क्या है?
पाकिस्तान आरोप लगाता है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP अफगान क्षेत्र से उसके खिलाफ हमले करता है और काबुल उसे रोक नहीं रहा। अफगान तालिबान यह आरोप खारिज करता है।
TTP और अफगान तालिबान अलग संगठन हैं। हालांकि उनके करीबी संबंध हैं। अफगान तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में है, जबकि TTP पाकिस्तान में सक्रिय है। बार-बार की सीमा झड़पों और अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों ने तनाव बढ़ाया है।
इसके अलावा दोनों देशों में डूरंड लाइन विवाद भी है। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि तालिबान नेतृत्व औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता। बाड़ लगाने पर पहले टकराव हुए हैं।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ?
यह पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय एक आतंकी संगठन है, जिसे “पाकिस्तानी तालिबान” भी कहा जाता है।
- इसका घोषित उद्देश्य पाकिस्तान की निर्वाचित सरकार को उखाड़कर अपनी व्याख्या वाले इस्लामी कानून पर आधारित अमीरात स्थापित करना है।
- यह पाकिस्तान की मौजूदा शासन व्यवस्था की जगह अपना कट्टरपंथी शासन थोपना चाहता है।
- यह पाकिस्तानी सेना, पुलिस और अन्य सरकारी ठिकानों के साथ नागरिकों पर भी हमले करता रहा है।
- इसका मौजूदा प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद (Mufti Noor Wali Mehsud) है। जून 2018 में पिछले प्रमुख मौलाना फ़ज़लुल्लाह की मौत के बाद उसने संगठन की कमान संभाली थी।
यह एक कट्टरपंथी सुन्नी इस्लामी आंदोलन है, जो अगस्त 2021 में दोबारा अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ। इसका शासन खुद को “इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान” कहता है।
- इसका लक्ष्य अफगानिस्तान में अपनी कठोर व्याख्या वाले शरिया कानून पर आधारित शासन चलाना और उसे कायम रखना है।
- इसका सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा (Hibatullah Akhundzada) है। संगठन में उसे “अमीर-उल-मोमिनीन” कहा जाता है। वह तालिबान शासन का सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक प्राधिकारी है।








