असम में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का मामला सामने आया है। मामले में असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक रिटायर्ड Army जवान है, जो रिटायरमेंट के बाद कॉन्ट्रैक्ट पर Army के साथ काम कर रहा था।
दोनों पर पाकिस्तान से जुड़े एक Intelligence Operative के संपर्क में रहने और Army movement तथा सुरक्षा बलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है। फिलहाल रिटायर्ड जवान की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
शुरुआती जांच में दोनों को कथित तौर पर हनीट्रैप के जरिए संपर्क में लाए जाने की बात भी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस जासूसी में और कितने लोग शामिल हैं।
जासूसी नेटवर्क में कौन है दूसरा आरोपी ?
गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों में से दूसरे आरोपी की पहचान अभिषेक कुमार सिंह के तौर पर हुई है। उसकी उम्र 31 साल बताई गई है। वह मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण का रहने वाला है और पिछले कुछ समय से गुवाहाटी में रह रहा था।
- असम पुलिस की STF ने उसे 3 और 4 अक्टूबर की दरम्यानी रात एक ऑपरेशन के दौरान गुवाहाटी में किराये के मकान से पकड़ा।
- जांच एजेंसियों को शक है कि अभिषेक, पाकिस्तान से जुड़े एक Intelligence Operative के संपर्क में था।
- गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन, SIM कार्ड और कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं।
- इन चीजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके संपर्क किन लोगों से थे और किस तरह की जानकारी साझा की गई।
कैसे हुआ जासूसी नेटवर्क का खुलासा ?
इस पूरे मामले में Military Intelligence की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। असम पुलिस के अनुसार, अभिषेक कुमार सिंह के बारे में शुरुआती जानकारी तेजपुर स्थित Gajraj Corps की Military Intelligence से मिली थी। अभिषेक की गतिविधियों पर संदेह के बाद मामले की जानकारी असम पुलिस की STF तक पहुंची और उस पर नजर रखी गई।
जांच आगे बढ़ने पर उसके पाकिस्तान कनेक्शन की जानकारी सामने आई और फिर उसे दबोच लिया गिया। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि दोनों आरोपी एक-दूसरे से जुड़े थे या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि अभिषेक कैसे आर्मी से जुड़ी सूचनाओं तक पैठ रखता था।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक, दोनों पर पाकिस्तान के संपर्क में रहने और Army movement से जुड़ी जानकारी साझा करने का आरोप है।
रिटायर्ड Army जवान का रोल कितना चिंताजनक ?
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू पहला आरोपी यानी रिटायर्ड Army जवान है। क्योंकि वह Army से रिटायर हो चुका था, लेकिन इसके बाद भी वह कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर सेना के साथ काम कर रहा था। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से देख रही हैं।
अगर किसी व्यक्ति के पास सैन्य व्यवस्था या Army movement से जुड़ी जानकारी तक पहुंच हो और उस पर विदेशी Intelligence Operative को जानकारी देने का आरोप लगे, तो जांच में यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि उसके पास किस स्तर की जानकारी उपलब्ध थी।
कैसे पाकिस्तान जाल में फंसे दोनों आरोपी?
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू हनीट्रैप है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक दोनों आरोपियों को उन लोगों ने हनीट्रैप किया था, जो उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करना चाहते थे।
कुछ रिपोर्टों में ऑनलाइन सेक्स रैकेट के जरिए हनीट्रैप किए जाने की बात कही गई है, लेकिन इस पूरे तरीके और कथित पाकिस्तानी ऑपरेटिव की पहचान को लेकर जांच अभी जारी है। इसलिए इसे फिलहाल जांच का प्रारंभिक एंगल ही माना जाना चाहिए।
यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय में भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों को सोशल मीडिया के जरिए फंसाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने के कई मामले सामने आए हैं।
आखिर पाकिस्तान तक कौन-सी और क्या जानकारी पहुंचाई गई?
यह इस मामले का सबसे बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री ने दोनों आरोपियों पर पाकिस्तान के संपर्क में रहकर Army movement से जुड़ी जानकारी साझा करने का आरोप बताया है, जबकि असम पुलिस ने अभिषेक के मामले में सुरक्षा बलों से संबंधित गोपनीय जानकारी पाकिस्तान के Intelligence Operative तक पहुंचाने की बात कही है।
लेकिन पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वास्तव में कौन-सी सूचना, कितनी मात्रा में और कितने समय तक साझा की गई। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि जानकारी किसी ऑपरेशन, सैन्य यूनिट, सैनिकों की आवाजाही, वाहन/काफिले या किसी अन्य सुरक्षा गतिविधि से संबंधित थी।
केंद्रीय एजेंसियां संभालेंगी आगे की जांच
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि दोनों आरोपियों को आगे केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा। इसका मतलब है कि मामला अब सिर्फ स्थानीय स्तर की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा।
इस जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कथित पाकिस्तान कनेक्शन की पूरी श्रृंखला का पता लगाना होगा। अगर पूछताछ और डिजिटल सबूतों से किसी बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आती है, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।









धन्यावाद डीडी रिएक्ट 🪷 सतर्कता और निस्वार्थ देशभक्ति कभी भी व्यर्थ नहीं जाती ।
जयहिंद 🪷🇮🇳🪷🙏
इस तरह के किसी भी आदमी के साथ नरमी नहीं बरती जाए। ये लोग 140 करोड़ लोगों के दुश्मन हैं इसलिए इस की सजा भी बड़ी होनी चाहिए,,,,,, कैसे कुछ पैसों के लिए ये लोग भारत माता से गददारी करते हैं।