फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर विमान को तबाही की तरफ ले जाने की कोशिश करने वाले हैवान ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी पर मौत की सजा का शिकंजा कसता दिख रहा है। इजरायली मीडिया के मुताबिक UAE उसके खिलाफ सबसे कड़ी सजा, जिसमें मौत की सजा शामिल हो सकती है, चाहता है। हालांकि अदालत ने अभी अंतिम सजा नहीं सुनाई है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती जा रही है, सामने आ रही नई जानकारियां इस मामले को और भी गंभीर बना रही हैं। दावा है कि हमामी का मकसद सिर्फ कॉकपिट पर कब्जा करना नहीं था, बल्कि विमान को इजरायल के तेल अवीव में बेन गुरियन एयरपोर्ट तक ले जाकर उसे जानबूझकर क्रैश करना था।
सऊदी अरब के तबुक में पकड़े जाने के बाद हमामी को एक अक्टूबर को UAE के हवाले कर दिया गया था,जहां उससे पूछताछ चल रही है।
हमामी की मौत की सजा कैसे ?
UAE अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल-शम्सी ने 3 अक्टूबर को कहा था कि जांच में को-पायलट द्वारा आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की कोशिश सामने आई है। उसने क्रैश एक्स से कैप्टन पर जानलेवा हमला किया और विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की।
इसके बाद 4 अक्टूबर को इजरायली न्यूज पोर्टल Ynet की सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट आई कि UAE हमामी के लिए सबसे कड़ी सजा चाहता है और उसके खिलाफ मौत की सजा की मांग की जा सकती है।
क्या कहता है UAE कानून ?
UAE के आतंकवाद विरोधी कानून में आतंकी मकसद से विमान पर कब्जा करने या उसकी सुरक्षा को जानबूझकर खतरे में डालने पर मौत की सजा का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। सबसे अहम बात कि मृत्युदंड के लिए हर स्थिति में किसी यात्री की मौत होना जरूरी नहीं है।
Federal Law No. 7 of 2014 on Combating Terrorist Crimes की धारा 5 और 6 इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण हैं। कानून के मुताबिक-
- आतंकी उद्देश्य से विमान पर अवैध कब्जा करने पर सामान्य तौर पर उम्रकैद है, लेकिन अगर इस कार्रवाई में किसी व्यक्ति को चोट लगती है या आरोपी सरकारी अधिकारियों का बलपूर्वक विरोध करता है, तो सजा मौत या उम्रकैद हो सकती है।
- विमान को आतंकी उद्देश्य से जानबूझकर नुकसान पहुंचाने, उसकी कार्यक्षमता बिगाड़ने या उसकी सुरक्षा को खतरे में डालने पर भी उम्रकैद का प्रावधान है और किसी व्यक्ति के घायल होने की स्थिति में मौत या उम्रकैद की सजा हो सकती है।
- धारा 5(2) में विमान पर आतंकी कब्जे की कार्रवाई से किसी व्यक्ति के घायल होने की स्थिति में ही मौत या उम्रकैद का प्रावधान है।
- धारा 6(2) में आतंकी उद्देश्य से विमान को नुकसान पहुंचाने या खतरे में डालने और उसके कारण किसी व्यक्ति के घायल होने पर मौत या उम्रकैद का प्रावधान है।
हमामी के मामले में मृत्युदंड का आधार क्या बन सकता है?
| मामले का पहलू | UAE कानून से संभावित संबंध |
| आतंकी उद्देश्य से विमान पर नियंत्रण लेने की कोशिश | धारा 5 |
| कॉकपिट में कैप्टन पर हमला और चोट | धारा 5(2) के तहत मृत्युदंड/उम्रकैद का आधार बन सकता है |
| विमान को जानबूझकर खतरे में डालना | धारा 6 |
| विमान को कथित तौर पर क्रैश कराने की योजना | धारा 6 से संबंधित गंभीर आरोप |
| आतंकी उद्देश्य साबित होना | कानून की धारा 1-2 के तहत महत्वपूर्ण |
| कार्रवाई में किसी व्यक्ति की मौत साबित होना | धारा 5(3)/6(3) में मृत्युदंड का स्पष्ट प्रावधान |
| अंतिम मृत्युदंड | अदालत के फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद |
विमान कैसे क्रैश करना चाहता था हमामी ?
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हमामी का क्रैश टारगेट इजरायल का बेन गुरियन एयरपोर्ट था। वह कैप्टन स्मित को रास्ते से हटाने के बाद विमान को सामान्य तरीके से तेल अवीव तक ले जाता।
इसके बाद लैंडिंग की सारी जरूरी मंजूरियां लेने और आखिरी चरण तक सामान्य व्यवहार करने के बाद वह विमान को एयरपोर्ट की किसी इमारत या वहां खड़े विमान से टकराने की कोशिश करता।
यानी आखिरी वक्त तक उसकी सब कुछ सामान्य रखने की रणनीति थी। वह तुरंत हमला करके अलर्ट नहीं कराना चाहता था। इस तरीके से सुरक्षा एजेंसियों को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिलता।
जब कैप्टन स्मित बच गए तो उसका प्लान-बी ?
हमामी की मूल योजना कैप्टन को हटाकर विमान को इजरायल तक ले जाने की थी। लेकिन कैप्टन स्मित ने हमले के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों ने हमलावर ओमानी को काबू करना शुरू कर दिया तो
रिपोर्टों के मुताबिक इसी दौरान हमामी ने विमान को तेजी से नीचे ले जाकर रेगिस्तान में गिराने की कोशिश की और कंट्रोल को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। यह भी दावा है कि हमामी ने विमान पर कंट्रोलिंग के प्रयास के दौरान इंजन बंद करने की कोशिश भी की हो।
हालांकि ऑफ-ड्यूटी पायलटों और यात्रियों ने विमान को संभाला और सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग कराई गई।
हमामी पहले भी दुबई-तेल अवीव रूट पर चल चुका था ?
यह जानकारी भी जांच का बड़ा हिस्सा बन गई है कि 30 सितंबर की घटना से पहले हमामी कथित तौर पर दुबई-तेल अवीव रूट पर कई बार उड़ान भर चुका था। यानी घटना से पहले इस रूट की जानकारी हासिल कर चुका था। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या उसने हमले से कुछ दिन पहले भी इसी रूट पर उड़ान भरी थी।
इसके अलावा इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हमामी ने जुलाई में भी हमले की योजना पर विचार किया था, लेकिन आखिरी समय पर उस योजना को छोड़ दिया। इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। लेकिन अगर जुलाई में भी योजना थी तो सितंबर तक उसे रोकने वाली चीज क्या थी और इस दौरान उसकी निगरानी क्यों नहीं हुई?
इजरायल की एविएशन सिक्योरिटी पर भी सवाल क्यों ?
इस मामले ने इजरायल की एविएशन सिक्योरिटी पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया है। रिपोर्टों के मुताबिक फ्लाईदुबई ने उड़ान से पहले इजरायली अधिकारियों को क्रू की जानकारी दी थी। इसमें हमामी का नाम भी मौजूद था। लेकिन इसके बावजूद उसके नाम से कोई सुरक्षा चेतावनी नहीं जुड़ी।
यानी मामले का एक बड़ा सुरक्षा सवाल अब इजरायल की तरफ भी घूम गया है। ओमान और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं।
हमामी का ऑस्ट्रेलिया कनेक्शन ?
हमामी के ऑस्ट्रेलिया से जुड़े पुराने कनेक्शन की भी अब जांच शुरू हो गई है। ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस ने पुष्टि की है कि उसकी Victorian Joint Counter Terrorism Team, जिसमें Victoria Police और ASIO (Australian Security Intelligence Organisation) शामिल हैं।
- हमाम अल-हमामी को 2014 में ऑस्ट्रेलिया का छात्र वीजा मिला था।
- वह 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में रहा और मेलबर्न की RMIT University में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था,
- लेकिन उसने यह कोर्स पूरा नहीं किया।
- ऑस्ट्रेलिया में उसके कट्टरपंथी वेबसाइटों और कुछ मस्जिदों से संपर्क की भी जांच हो रही है।
हमामी लोन वुल्फ अटैक की तैयारी में था ?
अभी तक के सबसे अहम सवालों में से एक यह भी है। अमेरिकी न्यूज नेटवर्क CBS के अनुसार शुरुआती इजरायली जांच में हमामी के lone-wolf attacker होने की संभावना जताई गई है। हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और किसी बाहरी संगठन या व्यक्ति की भूमिका की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
जांच पर मोसाद के पूर्व काउंटर-टेररिज्म चीफ ओडेड आइलम ने भी कहा है कि हमलावर को-पायलट शायद किसी संगठित आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा होने के बजाय “लोन वुल्फ” (अकेले काम करने वाला) के तौर पर काम कर रहा था। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वह “इस्लामिस्ट जिहादियों” और ईरान से काफ़ी प्रभावित था।
क्या है लोन वुल्फ अटैक ?
“लोन वुल्फ अटैक” यानी अकेले हमलावर द्वारा किया गया आतंकवादी हमला या एकल-हमलावर आतंकी हमला कहा जा सकता है। इसमें हमलावर किसी बड़े आतंकी नेटवर्क की प्रत्यक्ष कमान में नहीं होता, बल्कि खुद योजना बनाकर और खुद हमला करता है। हालांकि वह किसी संगठन की विचारधारा से प्रेरित हो सकता है।
लोन-वुल्फ हमले की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती यह है कि हमलावर का मामले में दूसरों से सहयोग, कनेक्शन नहीं होता, ऐसे में खुफिया एजेंसियों के लिए उसे पहले से ट्रैक करना-पकड़ना मुश्किल होता है।
लोन-वुल्फ अटैक की कुछ खास घटनाएं-
| वर्ष | घटना | स्थान | क्या हुआ |
| 1995 | ओक्लाहोमा सिटी बम विस्फोट | अमेरिका | टिमोथी मैकवे ने सरकारी इमारत को निशाना बनाया; 168 लोगों की मौत हुई। FBI इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे घातक घरेलू आतंकी हमलों में गिनता है। |
| 2014 | Jewish Museum हमला | ब्रसेल्स, बेल्जियम | एक अकेले हमलावर ने गोलीबारी की; 4 लोगों की मौत हुई। |
| 2015 | San Bernardino हमला | अमेरिका | सैयद रिजवान फारूक और तशफीन मलिक ने हमला किया; इसे अक्सर lone-actor संदर्भ में उद्धृत किया जाता है |
| 2016 | Nice हमला | फ्रांस | एक व्यक्ति ने ट्रक को भीड़ पर चढ़ा दिया; 85 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसे lone-actor आतंकवाद के प्रमुख उदाहरणों में गिना जाता है। |
| 2016 | Orlando Pulse हमला | अमेरिका | एक हमलावर ने नाइट क्लब में गोलीबारी की; 49 लोगों की मौत हुई। इसे lone-wolf jihadist attack के प्रमुख उदाहरणों में रखा गया है। |
| 2019 | Christchurch मस्जिद हमला | न्यूजीलैंड | एक अकेले हमलावर ने दो मस्जिदों को निशाना बनाया; 51 लोगों की मौत हुई। न्यूजीलैंड की आधिकारिक जांच ने इसे lone-actor terrorism के संदर्भ में अध्ययन किया। |
| 2026 | Mira Road हमला | भारत | जांच एजेंसियों ने 27 अप्रैल की घटना को संभावित lone-wolf attack के रूप में देखा; आरोपी पर दो सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमला करने का आरोप लगा और कथित ISIS समर्थन वाला नोट मिलने की बात सामने आई। |








