मुंबई में बिहार का संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद आतंकी गिरफ्तार, पीएम मोदी के लिए कही थी ‘बहुत बुरे अंजाम’ की बात

By Defence Detective

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Illustrative image of police escorting a motorcycle taxi driver against a symbolic Mahim, Mumbai backdrop.

महाराष्ट्र में आतंकवाद और देशविरोधी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) मुंबई में जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया है। माहिम इलाके से गिरफ्तार इस शख्स पर पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध और डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत में कट्टरपंथ व जिहादी दुष्प्रचार फैलाने का आरोप है। 

जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसके फोन में जैश सरगना मसूद अजहर के भाषणों के ऑडियो और भड़काऊ सामग्री मिली है। आरोपी के पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स से संभावित संपर्क भी जांच के दायरे में हैं। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

कौन है आरोपी और कब हुई गिरफ्तारी ?

ATS की कालाचौकी यूनिट द्वारा माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से दबोचे गए इस आतंकी की पहचान 33  साल के मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है।

  • यह करीब एक दशक से मुंबई में रह रहा था। अख्तर, रैपिडो बाइक राइडर के तौर पर काम करता था और इत्र भी बेचता था।
  • रिपोर्ट में उसकी गिरफ्तारी 22 अक्टूबर को होने और 23 अक्टूबर को अदालत द्वारा पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
  • ATS के मुताबिक, वह इन कामों के साथ सोशल मीडिया पर आतंकी विचारधारा का प्रचार और सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश भी कर रहा था।
  • इसके बाद उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़े लोगों की जांच शुरू हुई।

मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में ऐसी गतिविधियों से संबंधित सामग्री मिलने के बाद उसके संपर्कों और ऑनलाइन गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू की गई।

कैसे पकड़ में आया जैश का संदिग्ध?

मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर तक जांच एजेंसी के पहुंचने की शुरुआत उसके संदिग्ध संपर्कों की सूचना से हुई। एटीएस को सूचना मिली थी कि माहिम इलाके का एक व्यक्ति पाकिस्तानी ऑपरेटिव के संपर्क में हो सकता है। इसी सूचना के आधार पर कालाचौकी यूनिट ने कार्रवाई की और माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से उसे पकड़ा।

इसके बाद पूछताछ और उसके मोबाइल फोन की जांच हुई। उसके मोबाइल और सोशल मीडिया खातों की जांच में आतंकी और भड़काऊ सामग्री मिली, जिसके बाद पूरा मामला गंभीर हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ATS ने उसे माहिम पुलिस के हवाले किया, जिसने 22 अक्टूबर को गिरफ्तार किया।

उसके मोबइल से क्या-क्या चीजें मिलीं ?

जांच अधिकारियों ने आरोपी मोहम्मद हसन के मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच की, तो उसमें चौंकाने वाले और बेहद संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए।  एटीएस के आधिकारिक बयानों के अनुसार, आरोपी के फोन से निम्नलिखित आपत्तिजनक सामग्रियां मिली हैं।

  • मालाना मसूद अजहर के भाषण: जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और वैश्विक आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर की आवाज वाले कई भड़काऊ ऑडियो क्लिप्स और भाषण।
  • जिहादी दुष्प्रचार (Propaganda): भारत के खिलाफ धार्मिक विद्वेष फैलाने वाली और ‘जिहाद’ के समर्थन में लिखी गई दर्जनों सोशल मीडिया पोस्ट।
  • पाकिस्तानी टेलीग्राम चैनल्स: आरोपी कई ऐसे टेलीग्राम ग्रुप्स और चैनल्स का सक्रिय सदस्य (Subscriber) था, जिन्हें सीधे तौर पर पाकिस्तान समर्थित आतंकी तत्वों द्वारा संचालित किया जा रहा था।

फोन से टेलीग्राम तक पहुंची जांच

मोबाइल फोन की पड़ताल में पता चला कि आरोपी एक टेलीग्राम ग्रुप चलाता था, जिसमें उसने 1 जून 2026 को मसूद अजहर के भड़काऊ ऑडियो भाषण अपलोड किए थे। इन भाषणों में बाबरी मस्जिद और दूसरे मुद्दों का उल्लेख था।

इस आरोप के कारण जांच में दो पहलू जुड़े हैं—उसके पास मसूद अजहर की सामग्री का पहुंचना और फिर उसे ग्रुप में साझा किया जाना। एजेंसी उसके डिजिटल संपर्कों की जांच कर रही है, ताकि इन गतिविधियों से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

टेलीग्राम पर ही अख्तर का एक अन्य चैनल से जुड़ाव सामने आया है। ATS का दावा है कि वह ‘इब्न-ए-कासिम’ नाम के चैनल का सक्रिय सब्सक्राइबर था। एजेंसी ने इस चैनल को पाकिस्तान समर्थित आतंकी प्रचार से जुड़ा बताया है।

पीएम मोदी के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली टिप्पणी

टेलीग्राम पर मसूद अजहर के भाषण साझा करने के अलावा अख्तर पर इंस्टाग्राम और एक्स के जरिए भी भड़काऊ बातों का आरोप है। फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, जांचकर्ताओं को उसके इंस्टाग्राम खाते से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाने वाली एक टिप्पणी मिली है।

एटीएस के मुताबिक, अख्तर के इंस्टाग्राम खाते से 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुंबई यात्रा से संबंधित सुरक्षा चूक की एक खबर पर भड़काऊ टिप्पणी की गई थी। आरोप है कि टिप्पणी में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का संदर्भ देते हुए पीएम मोदी के साथ भी वैसा ही होने की बात कही गई थी।

जांचकर्ताओं को उसके इंस्टाग्राम और एक्स खातों पर सशस्त्र जिहाद का समर्थन करने और हथियार उठाने के लिए उकसाने वाली अन्य टिप्पणियां भी मिली हैं।

पाकिस्तानी संपर्क और ऑनलाइन गतिविधियों के बीच क्या संबंध?

अब जांच का महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संदिग्ध पाकिस्तानी संपर्क और आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियों के बीच कोई संबंध था या नहीं। जिस खुफिया सूचना से कार्रवाई शुरू हुई थी, उसकी पुष्टि के साथ पुलिस यह भी जांच रही है कि भड़काऊ सामग्री साझा करने में अन्य लोग शामिल थे या नहीं।

न्यूज9 की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने सोशल मीडिया सामग्री के 39 स्क्रीनशॉट दस्तावेज के तौर पर दर्ज किए हैं। माहिम पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक किशोर पवार ने बताया कि संदिग्ध संपर्क की सूचना का सत्यापन और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है।

जिस धारा में मामला दर्ज हुआ, उसमें क्या प्रावधान है?

अख्तर के खिलाफ BNS की धारा 196(1) लगाई गई है। इसमें धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय जैसे आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच घृणा, वैमनस्य या दुर्भावना फैलाने अथवा उसकी कोशिश को अपराध माना गया है।

  • यह प्रावधान बोले और लिखे गए शब्दों के साथ संकेतों, दृश्य सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक संचार पर भी लागू होता है।
  • सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने तथा सार्वजनिक शांति भंग करने वाले कृत्य भी इसके दायरे में आते हैं।
  • अपराध साबित होने पर तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

क्या है जैश-ए-मोहम्मद, जिसके नाम ने बढ़ाई मामले की गंभीरता?

जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जिसका सरगना मसूद अजहर है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 17 अक्टूबर 2001 को इसे प्रतिबंध सूची में शामिल किया था।

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड में संगठन के अल-कायदा और तालिबान से संबंधों तथा आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का उल्लेख है।

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