बेंगलुरु की भारतीय रोबोटिक्स कंपनी Strider Robotics ने अपने चार पैरों वाले M3 Quadruped UGV (Unmanned Ground Vehicle) की ताकत का एक दिलचस्प प्रदर्शन किया है। कंपनी ने M3 से एक Honda Amaze कार को खिंचवाकर दिखाया। इस परीक्षण ने सिर्फ रोबोट की ताकत नहीं, बल्कि भारत में विकसित हो रहे चार-पैर वाले ऑटोनॉमस जमीनी रोबोटों की संभावनाओं को भी सामने ला दिया है।
हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर एक बात साफ समझना जरूरी है। Honda Amaze को खींचना और 20 किलो payload लेकर चलना दो अलग क्षमताएं हैं। कार को खींचने वाला प्रदर्शन M3 की पकड़, मोटर और जमीन पर traction जैसी क्षमताओं को दिखाता है। यह जरूरी नहीं कि M3 की आधिकारिक towing capacity भी इतनी ही हो।
Strider Robotics के अनुसार M3 को मुख्य रूप से कठिन औद्योगिक इलाकों में inspection, material handling और asset monitoring जैसे कामों के लिए विकसित किया गया है। लेकिन इसकी तकनीक का इस्तेमाल आगे चलकर रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है।
M3 आखिर है क्या?
M3 एक Quadruped Unmanned Ground Vehicle यानी चार पैरों वाला अनमैन्ड Ground Vehicle है।
आमतौर पर UGV का मतलब पहियों या tracks पर चलने वाले unmanned vehicle से होता है। लेकिन quadruped robot में चार articulated legs होते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ऐसी जगहों पर भी चल सकता है जहां छोटे पहियेदार Vehicle आसानी से फंस सकते हैं।
- सीढ़ियां, असमान जमीन, टूटे हुए रास्ते, ढलान, मलबा और industrial complex जैसे जगहों पर चार पैरों वाला robot अपने पैरों की position बदलकर balance बनाए रख सकता है।
- कंपनी ने M3 को autonomous navigation और multi-sensor integration के साथ डेवलप किया है।
- कंपनी के robots का मुख्य पर्पज ऐसे कामों को करना है जिनमें इंसानों को बार-बार खतरनाक वातावरण में भेजने की जरूरत पड़ती है।
Honda Amaze को कैसे खींचा गया?
सितंबर 2026 में Strider Robotics ने M3 का एक controlled demonstration किया, जिसमें robot ने एक Honda Amaze passenger car को खींचा। कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक:-
- कार का engine बंद था।
- Driver seat पर कोई व्यक्ति नहीं था।
- कार में दो लोग मौजूद थे।
- सुरक्षा के लिए उनमें से एक व्यक्ति handbrake संभाल रहा था।
- demonstration controlled conditions में किया गया।
- M3 में 80 प्रतिशत से अधिक indigenous content होने का दावा किया गया है, जिसमें actuators भी शामिल हैं।
यह प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि quadruped robot के लिए सिर्फ वजन उठाना ही चुनौती नहीं है। उसे जमीन पर पर्याप्त grip बनाए रखते हुए अपनी चारों टांगों के बीच force को नियंत्रित करना पड़ता है। यानी M3 के मामले में यह demonstration उसके traction, balance और actuator capability को समझने का एक उपयोगी संकेत है।
M3 की प्रमुख स्पेसिफिकेशन क्या हैं ?
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर M3 के बारे में अभी निम्न बातें सामने आई हैं:
| क्षमता | उपलब्ध जानकारी |
| प्रकार | Autonomous Quadruped UGV |
| विकासकर्ता | Strider Robotics, Bengaluru |
| सामान्य Payload | लगभग 20 kg |
| Heavy-payload test | 40 kg payload पर परीक्षण |
| Indigenous content | 80%+ के आसपास |
| Actuators | कंपनी के अनुसार indigenous development |
| Navigation | Autonomous navigation capability |
| Mobility | Uneven और challenging terrain |
| प्रमुख उपयोग | Inspection, monitoring, material movement |
| Sensor integration | Multi-sensor integration |
| AI/Software | Inspection, navigation, mission planning और analytics |
| Development background | IISc StochLab से निकली research |
| वर्तमान स्थिति | Prototype/commercialisation phase |
कंपनी ने 40 किलो payload configuration में sit-to-stand recovery, controlled locomotion और stability under load का परीक्षण भी किया है। इसका मतलब यह है कि M3 platform को सिर्फ हल्के payload के लिए नहीं, बल्कि अधिक भार के साथ balance और movement के लिए भी विकसित किया जा रहा है।
Payload का मतलब है कि रोबोट अपने ऊपर या साथ में कितना वजन लेकर चल सकता है।
80 प्रतिशत Indigenous होना क्यों महत्वपूर्ण है?
M3 की सबसे महत्वपूर्ण बात शायद उसका चार पैर वाला design नहीं, बल्कि इसका भारतीय विकास और indigenous component base है। Strider Robotics का कहना है कि उसके platform के 80 प्रतिशत से अधिक components cost basis पर भारत में sourced हैं। Defense applications में इसका महत्व काफी ज्यादा है।
किसी विदेशी robotic platform को सेना में इस्तेमाल करने के लिए सिर्फ robot खरीदना पर्याप्त नहीं होता। Spare parts, software updates, communication architecture, batteries, actuators और maintenance ecosystem भी जरूरी होते हैं।
अगर इन महत्वपूर्ण हिस्सों पर घरेलू नियंत्रण हो तो सेना के लिए platform को अपनी जरूरत के हिसाब से बदलना और लंबे समय तक maintain करना आसान हो सकता है।
भारतीय सेना के लिए M3 बने तो कहां आएगा काम?
चार पैरों पर चलने वाला M3 अभी Strider Robotics का industrial-use platform है, लेकिन इसकी autonomous navigation, sensor integration और करीब 20 किलो payload क्षमता को देखते हुए इसे भविष्य में सैन्य जरूरतों के हिसाब से ढाला जा सकता है। खासकर उन जगहों पर जहां सैनिकों को भारी सामान लेकर चलना पड़ता है या किसी जोखिम वाले इलाके में पहले पहुंचना जरूरी होता है। भारतीय सेना भी robotic mules को कठिन इलाकों में last-mile logistics, surveillance और reconnaissance के लिए आगे बढ़ा रही है।
| संभावित सैन्य भूमिका | M3 कैसे काम आ सकता है? |
|---|---|
| पहाड़ी लॉजिस्टिक्स | करीब 20 किलो तक का अतिरिक्त सामान लेकर कठिन रास्तों पर चलने वाला robotic mule |
| Forward Posts की सप्लाई | ammunition, battery, communication equipment और medical supplies जैसी हल्की जरूरी सामग्री पहुंचाने में मदद |
| Surveillance | कैमरा, thermal sensor, LiDAR आदि लगाकर दिन-रात निगरानी और इलाके की जानकारी जुटाना |
| Reconnaissance | सैनिकों से पहले कठिन या संदिग्ध इलाके में भेजकर वहां की तस्वीर/वीडियो और sensor data जुटाना |
| खतरनाक इलाके की जांच | संभावित IED, bunker, tunnel या hazardous area की शुरुआती जांच; इसके लिए अतिरिक्त EOD sensors/robotic arm की जरूरत होगी |
| High-altitude support | बर्फ, चट्टानों और संकरे रास्तों वाले इलाकों में सैनिकों का physical load कम करने वाला unmanned support platform |
| Human-Machine Teaming | सैनिक की जगह लेने के बजाय उसे सामान, surveillance और reconnaissance में support करने वाला robotic साथी |
सबसे अहम बात: M3 को सेना के लिए उपयोगी बनाने के लिए सिर्फ उसका 20 किलो payload पर्याप्त नहीं होगा। उसे कम तापमान, ऊंचाई, बर्फीली जमीन, secure communication, GPS-denied navigation और लंबे समय तक field operation जैसी सैन्य परिस्थितियों में भी परीक्षण पास करना होगा। भारतीय सेना की मौजूदा robotic-mule requirements में भी autonomous movement, obstacle avoidance और कठिन terrain जैसी क्षमताओं पर जोर दिया गया है।
सेना में उतरने से पहले M3 को किन मुश्किलों से गुजरना होगा?
Honda Amaze को खींचने का प्रदर्शन M3 की mechanical और traction क्षमता जरूर दिखाता है, लेकिन एक demonstration और battlefield-ready military robot के बीच कई चरण होते हैं। सेना में इस्तेमाल के लिए M3 को सिर्फ चलने और वजन खींचने से आगे बढ़कर मौसम, संचार, navigation, reliability और field maintenance जैसी कठिन परिस्थितियों में भी भरोसेमंद साबित होना होगा।
| चुनौती | सेना के लिए क्यों अहम? | M3 के सामने सवाल |
|---|---|---|
| Battery Endurance | पहाड़ों में charging आसान नहीं होती | भारी payload के साथ कितने घंटे लगातार चलेगा? |
| Extreme Weather | लद्दाख जैसे इलाकों में बेहद कम तापमान | क्या कम तापमान में battery और motors भरोसेमंद रहेंगे? |
| Communication Link | पहाड़ों और इमारतों के पीछे signal कमजोर हो सकता है | Link टूटने पर robot खुद सुरक्षित तरीके से क्या करेगा? |
| GPS-denied Navigation | युद्ध में GPS signal बाधित या unavailable हो सकता है | क्या M3 बिना GPS के रास्ता पहचान सकेगा? |
| Actuator Reliability | एक leg में failure से mobility प्रभावित हो सकती है | क्या एक actuator खराब होने पर भी robot आगे बढ़ पाएगा? |
| Cyber Security | Unmanned system का communication link target बन सकता है | क्या इसे jamming या unauthorized access से सुरक्षित रखा जा सकता है? |
| Field Maintenance | Forward posts में repair facility सीमित होती है | खराब leg, motor या actuator को कितनी जल्दी बदला जा सकेगा? |
Honda Amaze वाला Test क्यों महत्वपूर्ण ?
एक चार-पैर वाला छोटा robot जब अपने से कई गुना भारी वाहन को नियंत्रित परिस्थितियों में खींचता है तो यह उसके motor torque + actuator control + traction + balance + mechanical strength की क्षमता का संकेत देता है। हालांकि इसे military towing capability का direct प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
फिर भी यह बताता है कि भारत में quadruped robotics अब सिर्फ laboratory research तक सीमित नहीं है। IISc Bengaluru की research से शुरू हुआ यह ecosystem अब commercial deployment की दिशा में बढ़ रहा है।
भारत के लिए असली महत्व
भारत को आने वाले वर्षों में सिर्फ drones ही नहीं, बल्कि unmanned ground systems की भी बड़ी जरूरत होगी।
Drone आसमान से देख सकता है।
लेकिन जमीन पर मौजूद robot:-देख सकता है + सामान ले जा सकता है + sensor लगा सकता है + कठिन terrain पार कर सकता है।
और अगर यह platform भारत में ही विकसित हो, तो सेना की operational requirements के अनुसार इसमें बदलाव करना भी आसान हो सकता है। M3 अभी एक industrial-focused robotic platform है और इसे भारतीय सेना के operational system के रूप में घोषित नहीं किया गया है। इसलिए इसे फिलहाल defence potential वाली indigenous technology के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।








