पाकिस्तानी एजेंटों से संपर्क में भारतीय लेफ्टिनेंट कर्नल का कोर्ट मार्शल

By Defence Detective

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AI generated conceptual image of a military court martial proceeding related to a Lieutenant Colonel facing an inquiry.

भारतीय सेना मुख्यालय में सामने आए एक गंभीर मामले ने सैन्य तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया है। नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई हो रही है। इस अधिकारी पर पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव से संपर्क रखने, पाकिस्तान के कई फोन नंबरों से संपर्क और स्मार्टफोन में प्रतिबंधित ऐप रखने समेत कई आरोप हैं।

मामला उस समय का है, जब अधिकारी नई दिल्ली स्थित Army Headquarters के Staff Duties (SD) Directorate में General Staff Officer-1 यानी GSO-1 के पद पर काम कर रहा था। यानी मामला किसी सामान्य प्रशासनिक पोस्टिंग से नहीं, बल्कि सेना मुख्यालय में की गई संवेदनशील ड्यूटी से जुड़ा है।

GSO-1 एक स्टॉफ नियुक्ति है और यहां अधिकारी की भूमिका उस समय के उसके सैन्य दायित्वों से जुड़ी थी। इसलिए जांच का महत्व सिर्फ किसी निजी मोबाइल संपर्क तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि जिस समय कथित संपर्क हो रहे थे, उस समय अधिकारी की आधिकारिक भूमिका क्या थी और क्या उसके पास ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी या सैन्य संसाधन थे जिनका दुरुपयोग हो सकता था।

अब इसमें सैन्य ज्युडिशियल प्रोसेस आगे बढ़ रहा है। हालांकि अभी तक अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। कोर्ट मार्शल में अभियोजन को प्रत्येक आरोप को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा और आरोपी अपना बचाव पेश कर सकता है।

खबर लिखे जाने के समय तक इस खास मामले पर आर्मी हेडक्वार्टर की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला था।

कब का है यह मामला, क्या-क्या हैं आरोप ?

चार्जशीट के मुताबिक यह कोई हालिया मामला नहीं है, बल्कि 24 दिसंबर 2019 से 16 सितंबर 2022 के बीच के कथित संपर्कों से जुड़ा है। तब यह अधिकारी GSO-1 के पद पर तैनात था। इस पर कुल नौ आरोप हैं। इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं-

  • संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव से जुड़े दो नंबरों से संपर्क का आरोप।
  • इसी अवधि में +92 से शुरू होने वाले 10 पाकिस्तान-आधारित नंबरों से संपर्क का आरोप।
  • जनवरी 2020 से अगस्त 2022: ‘Anatoly’ नाम से पहचाने गए एक विदेशी नागरिक से बिना अनुमति संपर्क का आरोप।
  • इसके अलावा अधिकारी के स्मार्टफोन में प्रतिबंधित/अनधिकृत ऐप्स पाए जाने से जुड़े आरोप भी हैं।

इन आरोपों में पहले तीन को Army Act की Section 45 के तहत रखा गया है। यह धारा अधिकारी के ऐसे आचरण से संबंधित है जिसे उसके पद और अपेक्षित चरित्र के अनुरूप नहीं माना जाता।

अभी कहां तैनात है अधिकारी?

मामला जिस अवधि से जुड़ा है, वह उसकी पुरानी पोस्टिंग थी। हालांकि इस समय भी वह Army Headquarters के Staff Duties Directorate में पोस्टेड है, लेकिन बतौर GSO-1 नहीं। बल्कि 226 Company, Army Service Corps (Supply) Type ‘G’ से attached कर दिया गया  है।

यानी आरोप जिस समय के हैं और उसकी वर्तमान प्रशासनिक स्थिति अलग-अलग है। सार्वजनिक रिपोर्ट में अधिकारी का नाम भी नहीं बताया गया है।

कौन है ‘Anatoly’ और उससे संपर्क का क्या है मामला ?

इस मामले का एक दिलचस्प और अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ हिस्सा ‘Anatoly’ नाम का विदेशी नागरिक है। चार्जशीट के अनुसार अधिकारी ने जनवरी 2020 से अगस्त 2022 के बीच उससे संपर्क रखा, जबकि इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।

यानी यह भी उसी दौर का मामला है जब अधिकारी Army Headquarters में GSO-1 था। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट में ‘Anatoly’ की पूरी पहचान, उसकी नागरिकता, पेशा, वह किस देश से था, अधिकारी से उसकी मुलाकात कैसे हुई या दोनों के बीच किस तरह की बातचीत हुई—इन सवालों का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।

पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान-linked जासूसी के कितने मामले?

 दिसंबर 2023 से सितंबर 2026 तक सार्वजनिक रूप से सामने आए प्रमुख मामलों को देखें तो भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और DRDO से जुड़े कम से कम 8 अलग-अलग प्रमुख मामले/केस-ट्रैक सामने आते हैं। इनमें कुछ में कोर्ट मार्शल के बाद सजा हुई, कुछ में गिरफ्तारी और चार्जशीट हुई, जबकि मौजूदा लेफ्टिनेंट कर्नल का मामला अभी कोर्ट मार्शल के स्तर पर है।

कब का मामलाकौन और आरोपअब तक क्या कार्रवाई हुई?मौजूदा स्थिति
दिसंबर 2023Army Naik, 22 Rajputana Rifles — पाकिस्तानी ऑपरेटिवों को Army units की movement, exercises, deployment, photographs और formations से जुड़ी जानकारी देने का आरोपGeneral Court Martial ने 5 साल RI और सेवा से बर्खास्तगी की सजा दी। रिपोर्ट के अनुसार उसने कई आरोप स्वीकार किए थे।दोषसिद्धि और सजा
2020-21 का मामला, 2024 में सामने आयाNorthern Command, Udhampur — classified operational information के leakage का मामला; इसमें Subedar K.T. Murugan समेत सैन्यकर्मी जांच के घेरे में आएMurugan पर GCM चला; बाद में उसे आरोपों से बरी कर दिया गया। इसी बड़े मामले में तीन अन्य Army jawans पर classified information पाकिस्तान तक पहुंचाने के आरोप साबित हुए।एक ही केस में अलग-अलग परिणाम
सितंबर 2024उसी Northern Command leak के तीन jawans — पाकिस्तान को classified military information देने का आरोपGCM ने 10, 13 और 14 साल RI की सजा दी। एक Army Major को information-handling lapses के लिए Reprimand (कड़ी आधिकारिक फटकार या सख्त चेतावनी।)मिला।दोषसिद्धि और लंबी जेल की सजा
मई 2023 से मार्च 2026 तक कार्रवाई जारीDRDO scientist Pradeep Kurulkar — Pakistan-based operative ‘Zara Dasgupta’ से कथित संपर्क और sensitive/classified information साझा करने का आरोप; कथित honey-trap angleMaharashtra ATS ने 3 मई 2023 को गिरफ्तार किया और जुलाई 2023 में chargesheet दाखिल की। मार्च 2026 में अदालत ने Official Secrets Act से जुड़ी प्रक्रिया के तहत chargesheet को Magistrate court में पेश करने का निर्देश दिया।ज्युडिशियल प्रोसेस जारी
जून-जुलाई 2025Gurpreet Singh और serving Army soldier Devinder Singh — Pakistan-linked espionage network में संवेदनशील सैन्य जानकारी हासिल/साझा करने के आरोपGurpreet को गिरफ्तार किया गया; 14 जुलाई 2025 को Devinder Singh को Uri से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार Devinder की भूमिका Gurpreet की पूछताछ में सामने आई।जांच/लीगल प्रोसेस
मई 2025 से आगेCRPF ASI Moti Ram Jat — Pakistani operative को classified information देने का आरोप; जांच में उसी handler के Army, paramilitary और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े 15 नंबरों से संपर्क की बात सामने आईJat को 27 मई 2025 को NIA ने गिरफ्तार किया; केंद्रीय एजेंसियां संबंधित संपर्कों का डेटा जांच रही थीं।जांच/Prosecution Process
11 मार्च 2026Indian Navy Lance Naik Adarsh Kumar उर्फ Lucky — ISI agent के संपर्क में रहने और sensitive naval assets/warships की तस्वीरें साझा करने का आरोप। कथित गतिविधि करीब 2023-24 सेUP ATS ने गिरफ्तार किया, कोर्ट ने judicial custody में भेजा।जांच/ज्युडिशियल प्रोसेस
मई 2026IAF Wing Commander — कथित Pakistani intelligence honey-trap के जरिए sensitive defence information साझा करने का आरोप30 मई 2026 को गिरफ्तारी; Delhi Police ने 30 जुलाई 2026 को chargesheet दाखिल की।ज्युडिशियल प्रोसेस
सितंबर 2026Army Lieutenant Colonel — 2019-22 के दौरान दो suspected PIO numbers और 10 Pakistan-based +92 numbers से संपर्क; ‘Anatoly’ नामक विदेशी नागरिक से बिना अनुमति संपर्क और banned apps रखने समेत 9 आरोपCourt Martial की कार्रवाई। आरोपों की अवधि 24 दिसंबर 2019–16 सितंबर 2022 है; उस समय वह Army HQ में GSO-1 था।

तो सेना में पाकिस्तान की पहुंच ?

यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। हाल के सालों के सार्वजनिक मामलों से यह साफ है कि पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क भारतीय सैन्यकर्मियों और रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करता है। इसके तरीके भी केवल पारंपरिक जासूसी तक सीमित नहीं हैं—सोशल मीडिया संपर्क, कथित honey-trap, मोबाइल संचार, आर्थिक लालच और दूसरे स्थानीय नेटवर्कों के इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं।

Operation Sindoor के बाद मई-जून 2025 में Punjab Police ने सात अलग-अलग espionage cases में नेटवर्क पकड़े जाने की जानकारी दी थी और कहा था कि serving military personnel तथा defence establishments से जुड़े लोगों को target करने के प्रयास हो रहे थे।

कोर्ट मार्शल आखिर होता क्या है?

कोर्ट मार्शल सेना की सामान्य विभागीय जांच नहीं, बल्कि Army Act और Army Rules के तहत सैन्य न्यायिक प्रक्रिया है।

सरल भाषा में इसकी प्रक्रिया को ऐसे समझ सकते हैं:

आरोप → आरोप की सुनवाई → साक्ष्य/जांच → Summary of Evidence → Court Martial की मंजूरी/गठन → ट्रायल → गवाह और दस्तावेज → बचाव पक्ष → फैसला → सजा

Army Rules के Rule 22 के मुताबिक आरोप Commanding Officer के सामने सुना जाता है और आरोपी को गवाहों से जिरह करने, अपने गवाह बुलाने तथा अपना बचाव रखने का अधिकार होता है। यदि मामला आगे बढ़ता है तो साक्ष्य रिकॉर्ड किए जा सकते हैं और फिर उचित सैन्य प्राधिकारी के पास मामला भेजा जाता है।

इसके बाद Court Martial गठित होने से पहले संबंधित अधिकारी को यह संतुष्ट करना होता है कि आरोप Army Act के तहत आते हैं और उपलब्ध साक्ष्य ट्रायल के लिए पर्याप्त हैं।

Army Act में चार तरह के Court Martial की व्यवस्था है—General Court Martial, District Court Martial, Summary General Court Martial और Summary Court Martial। General Court Martial में कम से कम पांच अधिकारी होते हैं।

Court Martial के findings और sentence के खिलाफ कानून में आगे की Legal Process भी उपलब्ध है। Armed Forces Tribunal को Court Martial के orders, findings और sentences से संबंधित appeals सुनने का अधिकार है।

Army Act की Section 71 के तहत Court Martial दोषी पाए गए सैन्यकर्मी को कानून में निर्धारित विभिन्न सजाएं दे सकता है। इनमें कैशियरिंग, सेवा से बर्खास्तगी, कारावास, रैंक में कमी, वरिष्ठता की हानि और reprimand जैसी सजाएं शामिल हैं।

अधिकारी के मामले में cashiering का अर्थ सैन्य सेवा से अधिकारी के रूप में हटाया जाना है।

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