फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को जो कुछ हुआ, वह कुछ ही मिनटों में एक बड़े विमान हादसे में बदल सकता था। लेकिन उसी दौरान कैप्टन स्मित मछार के अलावा कुछ और लोगों ने भी ऐसी हिम्मत दिखाई, जिसने 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
ओमानी को-पायलट के हमले में घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद तीन यात्री हमलावर तक पहुंचे और उसे काबू किया, जबकि एक अन्य यात्री डॉक्टर ने घायल कैप्टन को तत्काल चिकित्सा सहायता दी।
दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने बाद में विमान को संभाला और सऊदी अरब के ताबुक में उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई। अब इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने इन घटनाओं में असाधारण साहस दिखाने वाले चार यात्रियों—यानीव हायून, त्स्विका मानेस, आसफ रेजुआन और डॉ. शोता मुसायेव—को President’s Medal for Civilian Bravery देने की सिफारिश करने का ऐलान किया है।
हर्जोग ने भारतीय कैप्टन स्मित, त्स्विका मानेस की पत्नी ताली मानेस और विमान में मौजूद वैकल्पिक पायलटों के योगदान के लिए भी विशेष धन्यवाद दिया है। जानिए इन जांबाजों के बारे में-
1- कैप्टन स्मित मछार –
फ्लाईदुबई के कमांडर कैप्टन स्मित मछार को भारत सरकार की ओर से ‘अशोक चक्र’ के लिए एक संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि अभी तक इसके लिए कोई आधिकारिक सिफारिश नहीं की गई है। लेकिन लोग उनके अदम्य साहस की तुलना नीरजा भनोट से कर रहे हैं। और उनके लिए अशोक चक्र की मांग कर रहे हैं।
- नीरजा भनोट Pan Am की Senior Flight Purser (सीनियर फ्लाइट पर्सर) थीं। उन्होंने 5 सितंबर 1986 को कराची में Pan Am Flight 73 के अपहरण के दौरान उन्होंने असाधारण साहस और सूझबूझ दिखाई और यात्रियों को बचाने में अहम भूमिका निभाई।
- नीरजा पैन एम की पर्सर थीं जिन्हें 1986 में फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान उनके साहस और सूझबूझ के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
- उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र दिया गया। यह सम्मान 1987 में प्रदान किया गया था। वे अशोक चक्र पाने वाली पहली महिला थीं।
अशोक चक्र – भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह ऐसे असाधारण साहस, वीरता या आत्म-बलिदान के लिए दिया जाता है, जो युद्ध के दौरान नहीं बल्कि शांतिकाल में प्रदर्शित किया गया हो।
2. यानीव हायून ने कैसे किया सहयोग ?
यानीव हायून उन यात्रियों में थे जिन्होंने सबसे महत्वपूर्ण क्षण में कॉकपिट में इंट्री की। उनके साथ त्स्विका मानेस और आसफ रेजुआन भी पहुंचे। हमलावर को काबू करने के साथ-साथ विमान को स्थिर रखना सबसे बड़ी चुनौती थी।
- राष्ट्रपति हर्जोग के अनुसार हायून ने विमान के कंट्रोल को संभालने और उसे स्थिर करने में मदद की।
- प्रत्यक्षदर्शी विवरणों के मुताबिक विमान तेजी से नीचे जा रहा था और यात्रियों को ऊपर खींचे जाने जैसा महसूस हो रहा था।
- यानी एक तरफ कॉकपिट में हमलावर से संघर्ष चल रहा था और दूसरी तरफ विमान के नियंत्रण को संभालना था।
3. त्स्विका मानेस ने क्या रोल निभाया ?
त्स्विका मानेस की कहानी इस घटना की भयावहता को और स्पष्ट करती है। उनकी पत्नी ताली मानेस अपनी छोटी बेटी के साथ विमान के आगे वाले हिस्से में टॉयलेट की ओर गई थीं। इसी दौरान उन्हें कॉकपिट से चीखने और संघर्ष की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने तुरंत चालक दल को इसकी जानकारी दी।
जब स्थिति स्पष्ट हुई तो त्स्विका मानेस अपनी बेटी को लेकर कॉकपिट की ओर पहुंचे और हमलावर को काबू करने में शामिल हो गए। उनके मुताबिक विमान उस समय तेजी से नीचे जा रहा था और यात्री घबराकर चीख रहे थे।
मानेस और उनके साथियों ने विमान में दिए गए मल्टीमीडिया हेडफोन के तारों का इस्तेमाल कर हमलावर को बांधने में मदद की। उन्होंने बताया कि उसे काबू करने में करीब 20-25 मिनट लगे।
4. आसफ रेजुआन ने क्या किया ?
आसफ रेजुआन भी उन यात्रियों में थे जिन्होंने कॉकपिट में जाकर हमलावर को काबू किया।
रेजुआन के मुताबिक जब वे कॉकपिट के पास पहुंचे तो दरवाजा खुला हुआ था और अंदर खून दिखाई दे रहा था। वह और दो अन्य यात्री अंदर गए और हमलावर को दबोचने में जुट गए।
बाद में उन्होंने कहा कि उस समय यह साफ था कि मामला “जिंदगी और मौत” का था। उनके अनुसार विमान नियंत्रण से बाहर जा रहा था और यात्रियों के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
5. डॉ. शोता मुसायेव का काम कितना अहम रहा ?
डॉ. शोता मुसायेव का रोल बाकी तीन यात्रियों से अलग था। वे दंत चिकित्सक हैं और विमान में मौजूद एकमात्र डॉक्टर थे।
जैसे ही उन्हें पता चला कि कॉकपिट में कुछ गंभीर हुआ है, वे वहां पहुंचे। उन्होंने घायल कैप्टन स्मित माछर को गंभीर हालत में देखा। उनके सिर समेत शरीर पर काफी चोटें थीं और खून बह रहा था।
मुसायेव ने तत्काल प्राथमिक उपचार देना शुर कर दिया। उनके अनुसार उन्होंने रक्तस्राव रोकने और कैप्टन का ब्लड प्रेशर स्थिर करने की कोशिश की। राष्ट्रपति हर्जोग ने भी उनकी इसी चिकित्सा सहायता को पदक की सिफारिश का आधार बताया है।
यानी कॉकपिट में हमलावर को रोकने के बाद अगली चुनौती घायल भारतीय पायलट की जान बचाने की थी।
5. कैप्टन स्मित मछार- यानी फ्लाईदुबई कांड का मुख्य हीरो
इन चार यात्रियों का काम भी अत्यंत साहसिक और महत्वपूर्ण है। लेकिन इस पूरी घटना में भारतीय कैप्टन स्मित माछर का रोल सबसे महत्वपूर्ण है। फ्लाईदुबई कांड के मुख्य हीरो हैं वह। यही वजह है कि पूरी दुनिया उनको सलाम कर रही है।
हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। यही वह रास्ता था जिससे बाहर मौजूद यात्रियों और चालक दल को अंदर पहुंचने का अवसर मिला।
इजरायली राष्ट्रपति हर्जोग ने कैप्टन मछार को सीधे संबोधित करते हुए उनके साहस, दृढ़ता और उन कार्रवाइयों के लिए धन्यवाद दिया, जिनसे कई लोगों की जान बची।
ताली मानेस और दो ऑफ-ड्यूटी पायलट भी भूले नहीं गए
इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ पांच लोगों की भूमिका नहीं थी। त्स्विका मानेस की पत्नी ताली मानेस ने कॉकपिट से आ रही असामान्य आवाजें सबसे पहले सुनीं और आसपास के लोगों तथा चालक दल का ध्यान उस ओर खींचा।
इसके बाद विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमलावर को काबू किए जाने के बाद उन्होंने कॉकपिट में जाकर विमान को संभाला और लैंडिंग तक उड़ान पूरी करने में मदद की।
इसलिए हर्जोग ने अपने संदेश में इन सभी लोगों का अलग से धन्यवाद किया है।
एक नजर में जानें- 174 लोगों वाली उड़ान कैसे तबाही से बची?
| संकट का चरण | किसने क्या किया |
| कॉकपिट में हमला | कैप्टन स्मित मछार ने मुकाबला किया |
| कॉकपिट का दरवाजा | घायल होने के बावजूद मछार ने दरवाजा खोला |
| खतरे का अलर्ट | ताली मानेस ने आवाजें सुनकर चेतावनी दी |
| हमलावर को काबू करना | हायून, मानेस और रेजुआन कॉकपिट में पहुंचे |
| विमान को संभालना | हायून ने कंट्रोल स्थिर करने में मदद की |
| घायल कैप्टन की चिकित्सा | डॉ. मुसायेव ने उपचार दिया |
| उड़ान को सुरक्षित पूरा करना | दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने नियंत्रण संभाला |
| इमरजेंसी लैंडिंग | विमान तबुक, सऊदी अरब पहुंचा |
क्या पुरस्कार मिलना तय ?
राष्ट्रपति हर्जोग ने चारों यात्रियों को फोन करके President’s Medal for Civilian Bravery देने की अपनी मंशा बताई है। उन्होंने मेडल के लिए सिफारिश करने की बात कही है। यानी एक तरह से इन बहादुर यात्रियों को मेडल मिलना लगभग तय है।
मामला राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली सलाहकार समिति के पास जाएगा। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार यह सम्मान ऐसे नागरिकों के लिए बनाया गया है जिन्होंने मानव जीवन बचाने के लिए असाधारण साहस, आत्म-बलिदान और आपसी जिम्मेदारी का प्रदर्शन किया हो।
इसलिए फिलहाल स्थिति यह है कि चार यात्रियों के लिए राष्ट्रपति पदक की सिफारिश की जाएगी, जबकि कैप्टन स्मित मच्छर को राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से विशेष धन्यवाद दिया है।









It’s inhumanity of Israel. Pilot Smit should also be honored. He is the main Hero to survive 174 passengers & 6 crue members.