भारतीय सेना, रक्षा व्यवस्था और सैन्य वर्दी के प्रति आम जनता के मन में अपार सम्मान है। इसके बीच देश के दो महत्वपूर्ण राज्यों उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में फर्जी सैन्य अधिकारियों का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। इन घटनाओं ने देश की सुरक्षा एजेंसियों, मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और स्थानीय पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इंडियन एयर फोर्स के एयर शो के दौरान वायुसेना का ग्रुप कैप्टन बताकर एक युवक नमो घाट के हेलीपैड क्षेत्र तक पहुंच गया। पुलिस ने रोका तो तो वह खुद को ग्रुप कैप्टन बताकर रौब झाड़ने लगा, लेकिन जाँच में उसकी फर्जी पहचान की पोल खुल गई।
दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में भी फर्जी सैन्य अफसर बनकर घूमने का मामला सामने आया। सोलन जिले सामरिक रूप से संवेदनशील कसौली छावनी क्षेत्र के पास से एक फर्जी कर्नल को गिरफ्तार किया गया है।
दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की है। अब जांच आरोपियों की गतिविधियों, फर्जी पहचान के इस्तेमाल, उसके उद्देश्यों और दस्तावेजों के स्रोत पर केंद्रित है।
कौन हैं आरोपी और कब सामने आए मामले?
SSBcrack के मुताबिक वाराणसी में पकड़े गए आरोपी का नाम अर्पित चतुर्वेदी है। उसने पूछताछ में अपना पता वाराणसी कैंट क्षेत्र की पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, जद्दूमंडी बाजार के पास बताया।
- हालांकि वह आजमगढ़ का रहने वाला है।
- वह नमो घाट पर एयर शो के दौरान खुद को ग्रुप कैप्टन बता रहा था।
- पुलिस ने उसके पते और सैन्य सेवा के दावे का सत्यापन कराया तो पता चला कि वह सैन्य अधिकारी नहीं है।
- पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है
यह घटना ऐसे आयोजन में सामने आई, जिसके लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। नमो घाट पर आयोजित एयर शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ हस्तियों ने हिस्सा लिया था। ऐसे में हेलीपैड क्षेत्र में गलत पहचान बताकर किसी व्यक्ति का पहुंचना मामले का अहम पहलू है।
वहीं सोलन के कसौली कैंट एरिया के पास पकड़े गए आरोपी की पहचान 31 साल के अर्पण कटोच के तौर पर हुई है।
- वह कांगड़ा जिले की बैजनाथ तहसील के टिकरी गांव का निवासी है।
- सोलन के शामती के पास एक निजी होटल में काम करता था और सुनारडी गांव में किराये के कमरे में रहता था।
- वह होटल में शेफ था।
दोनों क्यों बने थे फर्जी ग्रुप कैप्टन और कर्नल ?
वाराणसी मामले में आदमपुर थाना प्रभारी विमल मिश्रा के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अर्पित ने पूछताछ में बताया कि-
- वह एयर शो देखने के लिए झूठी पहचान का सहारा लेकर पहुंचा था।
- उसने कैंट में तैनात एक वास्तविक सैन्य अधिकारी से दोस्ती की और उनके सामने भी खुद को सैन्य अधिकारी बताया।
- इस परिचय के सहारे वह आयोजन स्थल तक पहुंचा। इस विवरण में महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस अधिकारी से उसने संपर्क बनाया, उनसे भी अपनी वास्तविक पहचान छिपाई थी।
वहीं हिमाचल में स्थानीय पुलिस की शुरुआती जाँच में सामने आया है कि आरोपी अर्पण कटोच ने टोल टैक्स से बचने के लिए सेना के कर्नल का स्वांग रचा था।
- वह सैन्य वर्दी और फर्जी पहचान का सहारा लेकर खुद को अधिकारी बताता था।
- हालाँकि, उसने किन टोल बूथों पर इस पहचान का इस्तेमाल किया और कितनी बार टोल भुगतान से बचा, इसका पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
- इसके अलावा, अर्पण पर कसौली क्षेत्र के कोट गाँव और आसपास के इलाकों में सेना की वर्दी तथा सैन्य पदचिह्न लगाकर घूमने और खुद को सेवारत सैन्य अधिकारी बताने का आरोप है।
दोनों घटनाओं में फर्जी सैन्य पहचान के इस्तेमाल का तरीका अलग था। वाराणसी में आरोपी ने अधिकारी होने का दावा करके आयोजन तक पहुंच बनाई, जबकि सोलन में वर्दी, सैन्य बैज और कार्ड के जरिए अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश का मामला सामने आया।
पोल कैसे खुली?
वाराणसी में नमो घाट चौकी प्रभारी चंदन कुमार अपनी टीम के साथ एयर शो की सुरक्षा ड्यूटी पर थे। उन्हें सूचना मिली कि एक संदिग्ध व्यक्ति सैन्य अधिकारी बनकर हेलीपैड की तरफ घूम रहा है। टीम ने रोककर पूछताछ की तो उसने खुद को ‘ग्रुप कैप्टन अर्पित चतुर्वेदी’ बताया। पुलिस के अनुसार, वह रैंक का रौब दिखाने लगा। उसकी बातचीत और हुलिये से संदेह हुआ, जिसके बाद पहचान का सत्यापन कराया गया और उसका दावा गलत निकला।
जबकि सोलन में कार्रवाई की शुरुआत 23 अक्टूबर को खुफिया सूचना से हुई। पुलिस को मिलिट्री इंटेलिजेंस और स्टेट सीआईडी से जानकारी मिली थी कि कोट गाँव में एक व्यक्ति सैन्य वर्दी पहनकर खुद को सेना का अधिकारी बता रहा है। उसकी वर्दी पर सेना का बैज लगे होने की जानकारी भी दी गई थी।
इसके बाद स्थानीय पुलिस टीम टीम ने ने संदिग्ध की पहचान की और सुनारडी क्षेत्र में उससे पूछताछ की। जब सैन्य पहचान और संबंधित दस्तावेजों के बारे में सवाल हुए तो वह वैध कागजात पेश नहीं कर सका। यहीं से सैन्य अधिकारी होने के उसके दावे की पोल खुली।
आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद हुआ?
हिमाचल प्रदेश में पकड़े गए अर्पण कटोच के पास से सेना की वर्दी, बैज और लिकर कैंटीन का एक संदिग्ध कार्ड बरामद हुआ। कार्ड पर उसका नाम और सैन्य वर्दी में उसकी तस्वीर थी। पुलिस ने इसकी वैधता से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन वह पेश नहीं कर सका।
वहीं, वाराणसी एयर शो में पकड़े गए अर्पित चतुर्वेदी के पास से किसी फर्जी पहचान पत्र, वर्दी या हथियार की बरामदगी का उपलब्ध रिपोर्टों में उल्लेख नहीं है। उसकी फर्जी पहचान का खुलासा पूछताछ और सैन्य सेवा के दावे के सत्यापन से हुआ।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
वाराणसी में आदमपुर पुलिस ने अर्पित चतुर्वेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसका चालान किया। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट में दर्ज धाराओं का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। पुलिस ने उससे पूछताछ करने के साथ उसके बताए पते और अधिकारी होने के दावे की भी जाँच कराई।
हिमाचल प्रदेश में अर्पण कटोच के खिलाफ कसौली थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 168 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बरामद कार्ड और वर्दी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की है। परवाणू के डीएसपी अनिल शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि की है। रिपोर्टों के अनुसार, आगे जाँच में दूसरे अपराध सामने आने पर अतिरिक्त कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
BNS की धारा 168 ऐसे व्यक्ति पर लागू होती है, जो थलसेना, नौसेना या वायुसेना का सदस्य न होते हुए भी उनकी जैसी वर्दी पहने या पहचान चिह्न रखे, ताकि लोग उसे सैन्यकर्मी समझें।
दोष साबित होने पर अधिकतम तीन महीने की कैद, दो हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यानी सिर्फ वर्दी पहनना नहीं, बल्कि उसके जरिए खुद को सैन्यकर्मी समझाने की मंशा इस धारा का मुख्य आधार है।
जाँच किस दिशा में आगे बढ़ रही है?
वाराणसी मामले में अब तक सामने आया प्रमुख तथ्य आरोपी की झूठी पहचान और वास्तविक सैन्य अधिकारी से उसका परिचय है। पुलिस ने उसकी पहचान का सत्यापन और गहन पूछताछ की है। उपलब्ध रिपोर्टों में उसके किसी बड़े गिरोह से जुड़े होने या संवेदनशील जानकारी जुटाने का निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
सोलन में पड़ताल का केंद्र संदिग्ध कार्ड और सैन्य वर्दी का स्रोत है। पुलिस यह पता लगा रही है कि कार्ड कहां और किसकी मदद से बना, आरोपी कितने समय से अधिकारी बनकर घूम रहा था तथा उसने इस पहचान का कहां-कहां इस्तेमाल किया। छावनी क्षेत्र के आसपास उसकी गतिविधियों और किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।
दोनों मामलों में आगे की जाँच से यही स्पष्ट होगा कि आरोपियों का फर्जीवाड़ा सामने आए उद्देश्यों तक सीमित था या उन्होंने सैन्य पहचान का इस्तेमाल दूसरे लाभ लेने के लिए भी किया। फिलहाल वाराणसी में झूठी रैंक बताकर एयर शो तक पहुंचने और हिमाचल में वर्दी तथा संदिग्ध कार्ड के सहारे अधिकारी बनने के आरोपों पर कार्रवाई हुई है।








