पश्चिम बंगाल में बॉर्डर के पास हथियारों से लैस बांग्लादेशी घुसपैठियों का बीएसएफ पर हमला, जवानों ने चलाया ग्रेनेड

By Defence Detective

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I-generated illustration of BSF personnel near a smoke cloud as a group retreats across a shallow river along the India-Bangladesh border.

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से लगी सीमा के पास घुसपैठियों ने बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया। भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए बांग्लादेशियों को रोकने पहुँचे सीमा सुरक्षा बल यानी BSF के जवानों पर लोहे की राड, लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया गया। जवानों ने ग्रेनेड का इस्तेमाल कर इन घुसपैठियों को खदेड़ा।

घटना 24 अक्टूबर 2026 की बताई जा रही इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। कूचबिहार जिले में नदी से अवैध बालू निकासी रोकने की कार्रवाई के दौरान शुरू हुआ विवाद जवानों और सीमा पार से आए लोगों के बीच सीधे टकराव में बदल गया।

बांग्लादेश की ओर से इस घटनाक्रम का अलग विवरण दिया गया है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानी BGB ने BSF पर सीमा पार करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया।

कूचबिहार की घटना के बीच असम में भी सीमा पर घुसपैठ रोकने की कार्रवाई सामने आई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के मुताबिक, असम पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे 25 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर वापस भेज दिया।

कूचबिहार के किस क्षेत्र में हुई घटना?

यह घटनाक्रम कूचबिहार जिले के मेखलीगंज ब्लॉक में भोटबाड़ी/वोटबाड़ी के पास सनियाजन नदी के सीमावर्ती हिस्से का है। बांग्लादेशी घुसपैठिए नदी के भारतीय हिस्से में रेत और पत्थर निकालने पहुँचे थे। इसी गतिविधि को रोकने के दौरान विवाद हुआ।

सीमा पर मौजूद जवानों ने बांग्लादेशियों को रोकने की कोशिश की थी। इसके बाद हालात बिगड़े और जवानों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। घटना के अगले दिन भी इलाके में तनाव बना रहा।

बांग्लादेश की तरफ यह इलाका लालमोनिरहाट जिले के पाटग्राम उपजिले से जुड़ता है।

कितनी घुसपैठिए थे ?

बांग्लादेश से सीमा पार कर आए लोग नदी से रेत, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री की अवैध निकासी कर रहे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया  की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इनकी संख्या लगभग 30 बताई गई है।

सूचना मिलने पर कोशी बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात BSF की 62वीं बटालियन के जवान मौके पर पहुँचे और नदी में उतरकर उन्हें वापस भेजने की कोशिश की। जिस पर बवाल हुआ।

स्थानीय लोगों ने ऐसी गतिविधियों को लेकर पहले भी शिकायतें होने की बात कही है।  ग्रामीणों का आरोप है कि सीमा पार से बालू और मिट्टी निकालने के साथ तस्करी की कोशिशें भी होती हैं। विरोध करने पर हमले की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सीमा पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की माँग की है।

टकराव कैसे गंभीर हुआ ?

BSF जवानों ने भारतीय क्षेत्र में अवैध खनन गतिविध देखी और उसमें शामिल लोगों को वहाँ से हटने के लिए कहा। इसके बाद मौके पर और बांग्लादेशी जमा हो गए। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

बांग्लादेशियों के समूह ने जवानों पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस तरह नदी में रेत-पत्थर निकालने से रोकने की कार्रवाई हिंसक टकराव में बदल गई।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने बाँस के डंडों और लोहे की छड़ों के इस्तेमाल का भी जिक्र किया है। उसके अनुसार, समूह की संख्या मौके पर मौजूद BSF जवानों से कम-से-कम चार गुनी थी। हालाँकि, रिपोर्ट में जवानों की सटीक संख्या नहीं बताई गई है।

BSF ने क्या किया?

जवानों ने अपनी सुरक्षा और हमलावर समूह को पीछे हटाने के लिए ग्रेनेड इस्तेमाल किए। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इन्हें स्मोक ग्रेनेड बताया है। उसकी रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद बांग्लादेशी समूह को खदेड़ दिया गया।

कुछ अन्य रिपोर्ट में भी लाठी-पत्थरों से हमले के बाद जवानों की जवाबी कार्रवाई और हमलावरों के भागने का जिक्र है। बीएसएफ की कार्रवाई के बाद घुसपैठिए बांग्लादेश की तरफ लौट गए।  

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है।

बांग्लादेश का क्या कहना है?

बांग्लादेशी विवरण में भारतीय क्षेत्र में इंट्री की बात मानी गई है, लेकिन उसे मजदूरों की गलती बताया गया है। द डेली स्टार ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से लिखा कि आठ से दस पत्थर निकालने वाले मजदूर नदी में काम करते समय भारतीय क्षेत्र में चले गए थे।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पीछा करते हुए कुछ BSF जवान भी बांग्लादेश में प्रवेश कर गए। मजदूरों की आवाज सुनकर स्थानीय लोग डंडे और अन्य स्थानीय हथियार लेकर पहुँचे तथा जवानों से भिड़ गए।

BGB अधिकारी करीमुल इस्लाम के मुताबिक, इस घटनाक्रम पर BSF के सामने विरोध दर्ज कराया गया। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि पत्थर निकालने के लिए किसी भी परिस्थिति में भारतीय सीमा पार न करें।

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ कितनी लंबी सीमा ?

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216.7 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। भारत के किसी भी राज्य की बांग्लादेश के साथ इतनी लंबी सीमा नहीं है। भारत–बांग्लादेश की कुल सीमा लगभग 4,096.7 किलोमीटर है, यानी इसका करीब 54 प्रतिशत हिस्सा अकेले पश्चिम बंगाल में पड़ता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, आवाजाही और सीमापार अपराधों से जुड़े मामलों में पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, राज्य के 10 जिले बांग्लादेश की सीमा से जुड़े हैं। इनमें उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण में सुंदरबन क्षेत्र तक के जिले शामिल हैं।

क्षेत्रबांग्लादेश से सटे जिले
उत्तर बंगालकूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा
दक्षिण बंगालमुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना

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