मुंबई में बांग्लादेशी मुसलमानों को हिंदू नाम से बसाने के रैकेट का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार

By Defence Detective

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Six Bangladeshi nationals in police custody in Mumbai

देश में बांग्लादेशियों की घुसपैठ और उनके अवैध रूप से बसने की समस्या विकराल होती जा रही है। अब इस महामारी ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां बांग्लादेशियों को संगठित-सुनियोजित रूप से लाया और बसाया जा रहा है।

मुंबई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने और शहर में बसाने की कोशिश से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मामले में छह बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में उनके पास से भारतीय पहचान से जुड़े कई संदिग्ध दस्तावेज और यात्रा से संबंधित रिकॉर्ड मिलने की बात सामने आई है।

अब जांच का फोकस इस नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बांग्लादेश से इन लोगों को भारत लाने, मुंबई में रहने-रोजगार दिलाने और भारतीय पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराने में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उनके इस्तेमाल के बारे में भी जांच की जा रही है।

कैसे खुला पूरा मामला, क्या है पहचान बदलने का खेल?

यह कार्रवाई 29 सितंबर 2026 को शुरू हुई। पुलिस की एंटी-टेररिज्म सेल की टीम ने बांद्रा ट्रैफिक चौकी के पास कुछ लोगों को संदिग्ध परिस्थितियों में देखा। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस को उनके बांग्लादेशी नागरिक होने का पता चला। इसके बाद इन्हें हिरासत में ले लिया गया।

जांच में सामने आया कि कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर हिंदू नामों का इस्तेमाल कर भारतीय पहचान बनाने की कोशिश की थी। पकड़े गए छह लोगों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इनकी पहचान इकबाल अकबरअली शेख उर्फ गौतम सुनील दत्ता, राणा मोल्ला इमदादुल मोल्ला (20), समीम मिझानुर सरदार उर्फ राजू नरेंद्र, मोसमद मुंजिला खातून उर्फ सिला सरदार उर्फ रिया दत्ता (23),  मफुजा अख्तर लिमा उर्फ कविता शाह (25) और हलीमा अख्तर उर्फ मोनिका दत्ता (26) के रूप में हुई है।

पुलिस का कहना है कि उनके पास भारत में रहने के लिए वैध पासपोर्ट, वीजा या अन्य जरूरी यात्रा दस्तावेज नहीं थे। इनमें से कुछ लोगों के बारे में पुलिस को पहले भी अवैध रूप से भारत में रहने से संबंधित जानकारी मिली थी।

मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ?

मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इकबाल अकबरअली शेख को माना जा रहा है। पुलिस ने उसके खिलाफ खार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है।

  • पूछताछ में यह सामने आया कि वह बांग्लादेश से लोगों को भारत आने में मदद करने के साथ-साथ उनके लिए रहने की जगह और रोजगार की व्यवस्था करता था।
  • इकबाल के मोबाइल की जांच में अलग-अलग नामों वाले करीब 40 आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेजों की तस्वीरें मिलीं।
  • इसके साथ महिलाओं की तस्वीरें, QR कोड और रेलवे टिकटों से जुड़ी डिजिटल जानकारी भी मिली। इसके बाद उसके आवास की तलाशी ली गई, जहां से 20 संदिग्ध आधार कार्ड और बांग्लादेश की Banglalink कंपनी का SIM कार्ड बरामद हुआ।

कौन-कब आया भारत ?

छह में से चार लोगों ने बताया कि उन्होंने 20 सितंबर को बिना वैध दस्तावेज के सीमा पार की और इसके लिए इकबाल को पैसे दिए थे। एक अन्य महिला ने पुलिस को बताया कि वह करीब छह महीने पहले इकबाल की मदद से भारत आई थी।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सीमा पार से भारत तक पहुंचाने वाले एजेंट कौन थे, मुंबई में उनके संपर्क में कौन-कौन थे और फर्जी या संदिग्ध भारतीय दस्तावेज तैयार कराने की व्यवस्था किस स्तर पर होती थी।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल कराने में इकबाल के साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे।

QR कोड वाले रेलवे टिकट क्यों अहम ?

जांच में मिले QR कोड वाले रेलवे टिकट भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग हो सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार आरोपी के मोबाइल में डिजिटल ट्रेन टिकटों से जुड़ी जानकारी मिली है।

रेल यात्रा की जानकारी से जांचकर्ता यह पता लगा सकते हैं कि संबंधित लोग भारत में आने के बाद किन स्थानों तक गए, किसके संपर्क में रहे और किन लोगों ने उनके यात्रा इंतजाम किए।

इसी कारण पुलिस अब केवल मुंबई तक सीमित नेटवर्क की जांच नहीं कर रही है। यात्रा रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और दस्तावेजों के बीच संबंध जोड़कर संभावित मध्यस्थों की पहचान की जा रही है।

अभी तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की है ?

पुलिस ने मामले में Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 24 के तहत कार्रवाई की है। पांच लोगों के खिलाफ आगे की प्रक्रिया और डिपोर्टेशन से संबंधित कार्रवाई की बात भी पुलिस की ओर से सामने आई है, जबकि इकबाल शेख के खिलाफ कथित तौर पर प्रवेश, आवास और रोजगार की व्यवस्था कराने के आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया गया है।

जांच का पहलूपुलिस क्या पता कर रही है
भारत में प्रवेशसीमा पार कराने वाले एजेंट कौन थे
पहचानभारतीय दस्तावेज किस तरह हासिल किए गए
आधार-पैनदस्तावेज असली हैं या जाली
रेल यात्राटिकट किस नाम से और किसने बुक किए
आवासमुंबई में रहने की व्यवस्था किसने की
रोजगारनौकरी दिलाने में किसकी भूमिका थी
नेटवर्कस्थानीय एजेंट और मध्यस्थ कौन हैं

बांग्लादेश से मुंबई तक कौन कर रहा था मदद? पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है। अब पुलिस कथित नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

मुंबई में बढ़ती कार्रवाई: कब-कब पकड़े गए बांग्लादेशी, सामने आया कैसा नेटवर्क?

मुंबई पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच कार्रवाई का पैमाना काफी बड़ा रहा है। जनवरी 2024 से अगस्त 2026 तक मुंबई पुलिस ने कथित अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ 658 मामले दर्ज कर 995 लोगों को गिरफ्तार किया। अगस्त 2026 के अंत तक 1,066 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी थी।

तारीख/अवधिकार्रवाईसंख्या/मुख्य खुलासा
2024मुंबई पुलिस की कार्रवाईकरीब 165 मामले; 156 बांग्लादेशी डिपोर्ट किए गए।
1 जनवरी–12 फरवरी 2025अवैध बांग्लादेशी नागरिकों पर कार्रवाई240 गिरफ्तार, 160 मामले; 12 को डिपोर्ट किया गया।
जनवरी 2025घाटकोपर पुलिस की कार्रवाई13 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार; इसी दौर की जांच में फर्जी Aadhaar उपलब्ध कराने और एजेंटों के नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
अप्रैल 2025फर्जी पहचान दस्तावेज का खुलासापुलिस के अनुसार एजेंटों के जरिए फर्जी Aadhaar बनवाने की जानकारी सामने आई; RTI के मुताबिक 2015–2025 में 4,930 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार हुए थे।
अगस्त 2025मुंबई क्राइम ब्रांचएक दंपती गिरफ्तार; आरोप था कि वे बांग्लादेशी नागरिकों के लिए Aadhaar, PAN, Voter ID और बैंक दस्तावेज तैयार करते थे।
8 अगस्त 2025मुंबई-MMR में बड़ी डिपोर्टेशन कार्रवाई112 लोगों को डिपोर्ट किया गया—92 मुंबई और 20 मीरा-भायंदर/ठाणे से। 2025 में मुंबई से डिपोर्ट किए गए लोगों की संख्या तब 719 हो गई थी।
फरवरी 2026मुंबई पुलिस की विशेष कार्रवाई1 जनवरी–20 फरवरी तक 113 हिरासत में, 27 डिपोर्ट; पिछले तीन वर्षों में कुल 1,758 हिरासत में, जिनमें 1,238 डिपोर्ट किए जा चुके थे।
अप्रैल 2026 तकमुंबई में लगातार अभियान2026 की शुरुआत से करीब 450 बांग्लादेशी हिरासत में, 200 से अधिक डिपोर्ट।
7 जून 2026अंधेरी MIDC पुलिस की कार्रवाई7 बांग्लादेशी गिरफ्तार; पुलिस के मुताबिक वे करीब 15 साल से अवैध रूप से मुंबई में रह रहे थे।
20 जुलाई 2026मुंबई क्राइम ब्रांच की विशेष ड्राइव37 बांग्लादेशी हिरासत में; बिना वैध दस्तावेज मुंबई में रहने का आरोप।
29 सितंबर 2026खार पुलिस ATC6 बांग्लादेशी गिरफ्तार, जिनमें 3 महिलाएं; एक व्यक्ति पर पांच लोगों को भारत में प्रवेश, आवास और रोजगार दिलाने में मदद का आरोप।
29 सितंबर–1 अक्टूबर 2026खार और जुहू पुलिस की संयुक्त कार्रवाईअलग-अलग ऑपरेशन में 13 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए; जांच का फोकस अवैध प्रवेश कराने वाले लोगों तक पहुंचने पर।

इस पूरे सिलसिले में सबसे अहम कड़ी फर्जी पहचान दस्तावेजों की है।

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