केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ अब बड़ा एक्शन शुरू हो गया है। 5 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर से 150 बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई हुई है। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से श्रीनगर से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा ले जाया गया, जहां उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल यानी BSF को सौंप दिया गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान और उनके नेटवर्क की जांच को सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से लिया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर में इस कार्रवाई का महत्व और बढ़ जाता है। पाकिस्तान से लगती संवेदनशील सीमा, आतंकवाद और घुसपैठ की चुनौती के बीच सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह पता लगाना अहम है कि बिना वैध दस्तावेज यहां रहने वाले बांग्लादेशी आखिर कब, कैसे और किस नेटवर्क के जरिए भारत पहुंचे।
देश की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा बने इन बांग्लादेशियों के डिपोर्ट करने की कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। प्रशासन के मुताबिक अभी और बांग्लादेशियों को बाहर निकाला जाएगा।
अचानक हुआ यह एक्शन ?
जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक ये लोग राज्य में अवैध रूप से रह रहे थे। पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद इनके खिलाफ डिपोर्टेशन की कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के अनुसार 7 अक्टूबर को 150 बांग्लादेशियों का एक और जत्था डिपोर्ट किए जाने की तैयारी है। यानी दो चरणों में करीब 300 लोगों को जम्मू-कश्मीर से हटाने की कार्रवाई सामने आ रही है।
बिना वैध दस्तावेजों के इन बांग्लादेशियों का उस जम्मू-कश्मीर में पहुंचना और बस जाना यह सोचने को मजबूतर कर देता है कि इनका नेटवर्क कितना संगठित और व्यापक है।
श्रीनगर से IAF के विशेष विमान से बागडोगरा
इस पूरी कार्रवाई का बेहद खास पहलू इसका परिवहन तरीका है। इन 150 लोगों को सामान्य सड़क या रेल मार्ग से बांग्लादेश सीमा तक भेजने के बजाय भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से बागडोगरा ले जाया गया।
यह सिर्फ 150 लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की सामान्य परिवहन व्यवस्था नहीं है। श्रीनगर से बागडोगरा तक का हवाई रूट बताता है कि प्रशासन ने इस पूरी डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज और नियंत्रित तरीके से अंजाम दिया।
सड़क या लंबे रेल रूट के बजाय विशेष विमान का इस्तेमाल करने से बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों को एक साथ सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है और सुरक्षा व्यवस्था भी ज्यादा मजबूत रहती है।
बागडोगरा ही क्यों बना अगला पड़ाव?
इसकी व्यावहारिक वजह यह है कि बागडोगरा, पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी हब है और यह भारत-बांग्लादेश सीमा वाले क्षेत्र के करीब पड़ता है।
- जम्मू-कश्मीर से सीधे सड़क मार्ग से वहां तक लोगों को ले जाना लंबा और सुरक्षा की दृष्टि से अधिक जटिल हो सकता था।
- बागडोगरा एयरपोर्ट पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में स्थित है और सिलीगुड़ी क्षेत्र के पास है।
- यहां से फुलबाड़ी सीमा मार्ग के जरिए बांग्लादेश की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर जुड़ता है।
- ऐसे में यहां के बाद संबंधित एजेंसियां सीमा तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक बेहतर ढंग से संभाल सकती हैं।
J&K में कितने बांग्लादेशी ?
यह कार्रवाई अचानक सामने आई घटना नहीं लगती। अगस्त 2026 में जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र की High-Level Committee on Demographic Change के सामने विदेशी नागरिकों को लेकर आंकड़े साझा किए थे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में 504 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई थी। इनमें से 46, जम्मू डिवीजन में और 458 कश्मीर घाटी में बताए गए थे। इसी में 7,656 रोहिंग्याओं की भी पहचान की गई थी।
| क्षेत्र | पहचाने गए बांग्लादेशी नागरिक |
| जम्मू डिवीजन | 46 |
| कश्मीर घाटी | 458 |
| कुल J&K | 504 |
यही आंकड़ा इस ताजा कार्रवाई को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
अगस्त में बनिहाल में पकड़े गए थे 21 बांग्लादेशी
इसी ऑपरेशन के संदर्भ में देखें तो अगस्त की एक कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है। 4 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने रामबन जिले के बनिहाल इलाके में 21 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया था। इनमें तीन महिलाएं और सात नाबालिग बच्चे शामिल थे।
समूह दो वाहनों में जम्मू से कश्मीर की तरफ जा रहा था और दस्तावेजों की जांच के दौरान उसे रोका गया। अधिकारियों के मुताबिक इनके पास भारत में प्रवेश या रहने से जुड़े वैध यात्रा अथवा आव्रजन दस्तावेज नहीं थे। मामले में Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
जम्मू-कश्मीर कोई सामान्य भौगोलिक क्षेत्र नहीं है। यह पाकिस्तान लगती संवेदनशील सीमाओं वाला रणनीतिक इलाका है। ऐसे क्षेत्र में किसी भी विदेशी नागरिक का बिना वैध दस्तावेज रहना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अतिरिक्त सावधानी और सत्यापन का विषय बनता है।
अगस्त में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के दौरान भी विदेशी नागरिकों की मौजूदगी को विशेषकर सीमा से लगे इलाकों में सुरक्षा चिंता से जोड़कर देखा गया था। केंद्र की हाई-लेवल कमेटी का उद्देश्य भी जनसांख्यिकीय बदलाव, migration patterns और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन जैसे मुद्दों की समीक्षा करना है।
2025 का नया कानून बना कार्रवाई का कानूनी आधार
भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश, रहने और बाहर निकलने से जुड़े नियमों के लिए अब Immigration and Foreigners Act, 2025 महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा है। यह कानून 4 अप्रैल 2025 को बनाया गया और 1 सितंबर 2025 से लागू हुआ।
गृह मंत्रालय के अनुसार बिना वैध यात्रा दस्तावेज भारत में प्रवेश करने वाले या वीजा की अवधि से अधिक रुकने वाले विदेशी नागरिक इस कानून की चपेट में आते हैं।
आंकड़ों के आइने में बांग्लादेशियों के हाल के बड़े डिपोर्टेशन –
| तारीख/अवधि | जगह | संख्या | तरीका/मुख्य जानकारी |
| 5 अक्टूबर 2026 | जम्मू-कश्मीर | 150 | श्रीनगर से विशेष IAF विमान से Bagdogra; वहां BSF को सौंपे गए। 7 अक्टूबर को और 150 भेजे जाने की जानकारी। |
| 23 सितंबर 2026 | बेंगलुरु/कर्नाटक | 160 | विशेष विमान से भेजे गए; पुलिस, FRRO, IAF और BSF के समन्वय से कार्रवाई। |
| जुलाई 2026 तक | तमिलनाडु | 50 | विशेष detention camp से 44 पुरुष और 6 महिलाएं; ट्रेन से पश्चिम बंगाल, फिर Haridaspur सीमा पर BSF को सौंपने की प्रक्रिया। |
| जुलाई 2025–मार्च 2026 | ओडिशा | 42 | भुवनेश्वर और कटक से कुल 42 लोगों को वापस भेजा गया; कुछ land checkpoints और एक special chartered flight के जरिए। |
| 2025 | महाराष्ट्र | 2,376 पूरे साल में | यह एक single batch नहीं है। राज्य सरकार के अनुसार 2025 में कुल 2,376 बांग्लादेशी नागरिक deport किए गए। |
| 2025 | मुंबई/MMR | 1,000 पूरे साल में | नवंबर 2025 तक मुंबई पुलिस के आंकड़े के अनुसार 1,000 deportations; 2024 में 160 और 2023 में 60 थे। |
| 9 महीने, जून 2025–फरवरी 2026 | दिल्ली | 1,589 | Delhi Police के अनुसार Agartala–Bangladesh border के जरिए भेजे गए; Pahalgam attack के बाद special flights से कई batches भेजे गए। |
| 11 जून 2025 तक | दिल्ली | 161 + 160 = 321 | तीन दिनों में दो बड़े batches; Hindon से special flight द्वारा Agartala और फिर Bangladesh। |
| 2 जून 2025 | दिल्ली | 160 | Special flight से deportation; यह बाद के 161 वाले batch से अलग कार्रवाई थी। |
| मई–जून 2025 | असम | 303 | Reuters के अनुसार मई से जून 2025 तक 303 लोगों को Bangladesh में push back किया गया। यह “formal deportation” और “pushback” की शब्दावली में अलग मामला है। |
| जुलाई 2025 | गुजरात/Vadodara | 200+ | 200 से ज्यादा लोगों को विशेष IAF flight से border states तक ले जाया गया और BSF को सौंपा गया। |
| अगस्त 2025 | मुंबई/MMR | 112 | 92 मुंबई से और 20 Mira-Bhayandar/Thane से; विशेष IAF aircraft से Assam-Bangladesh border तक ले जाया गया। |
| मई 2025 | राजस्थान/Sikar | लगभग 150 | करीब 148-150 लोगों को Jodhpur Air Force Station लाया गया और विशेष विमान से West Bengal भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई |








