अजमेर में ‘चाचा’ बनकर छिपा बांग्लादेशी घुसपैठिया 25 साल बाद गया दबोचा

By Defence Detective

Published On:

Date:

Suspected Bangladeshi national Ghulam Mustafa, known as Chacha in Ajmer's Dargah area, detained by Rajasthan Police

राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अजमेर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्थानीय प्रशासन से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक के कान खड़े कर दिए हैं। सालों से जिस व्यक्ति को स्थानीय लोग प्यार और सम्मान से ‘चाचा’ कहकर बुलाते थे, वह कोई भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि बांग्लादेशी निकला।  

अजमेर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान में पुलिस ने 52  साल के गुलाम मुस्तफा को दबोचा है, जो मूल रूप से बांग्लादेश के लालमुनिरहाट जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।

अब तक चलाए गए अभियान में 61 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान/हिरासत की जानकारी सामने आई है। यह पुलिस की इस दिशा में 27वीं कार्रवाई थी।  इस घुसपैठिए की गिरफ्तारी ने एक बार फिर लंबे समय तक देश में रहने वाले विदेशी नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन पर सवाल खड़े किए हैं।

कब दबोचा गया गुलाम मुस्तफा ?

12 अक्टूबर 2026 को राजस्थान पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), दरगाह थाना पुलिस और सीआईडी की संयुक्त टीम के सघन सत्यापन अभियान के दौरान गुलाम मुस्तफा की पोल खुली।

अब पुलिस गुलाम मुस्तफा से पूछताछ के साथ उसकी पहचान, भारत में प्रवेश के तरीके और अलग-अलग राज्यों में उसके रहने के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

मुस्तफा कब और कैसे आया था भारत ?

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान गुलाम मुस्तफा ने बताया कि करीब 25 साल पहले उसने पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में इंट्री की थी।

  • भारत आने के बाद कुछ समय वह पश्चिम बंगाल में रहा। इस दौरान उसने एक किराने की दुकान पर काम भी किया।
  • बाद में वह ट्रेन से अजमेर पहुंचा और दरगाह शरीफ के आसपास रहने लगा।
  • पुलिस के अनुसार, वह केवल अजमेर तक सीमित नहीं रहा।
  • उसने दिल्ली, उत्तराखंड, हरिद्वार, असम, गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई स्थानों पर समय बिताया।
  • लगभग तीन महीने पहले वह महाराष्ट्र से दोबारा अजमेर लौटा था।

अजमेर में कहां एक्टिव रहता था मुस्तफा ?

गुलाम मुस्तफा का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह अजमेर के दरगाह क्षेत्र में एक परिचित चेहरे के रूप में रहता था। स्थानीय स्तर पर लोगों से इस कदर घुलमिल कर रह रहा था कि उसे लोग ‘चाचा’ कहकर बुलाते थे।

बताया जा रहा है कि दो दशक से अधिक समय से वह यहां रह रहा था। लेकिन हैरत की बात है कि उसकी बांग्लादेशी पहचान इतने लंबे समय तक छिपी रही।  

अजमेर पुलिस का बांग्लादेशियों के विरुद्ध क्या है अभियान ?

अजमेर में यह कार्रवाई किसी एक व्यक्ति की तलाश तक सीमित नहीं थी। पुलिस ने जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चला रखा है। इस 27वीं कार्रवाई में मुस्तफा धरा गया। कार्रवाई के बाद उसे दरगाह थाने ले जाकर पूछताछ की गई।

पुलिस की विशेष टीम ने दरगाह बाजार, जालियान कब्रिस्तान, अंदरकोट, नई सड़क, तारागढ़ की पहाड़ी, सिलावट मोहल्ला, बड़े पीर का चिल्ला, लंगर खाना गली, त्रिपोलिया गेट और लाखन कोटड़ी सहित कई इलाकों में तलाश की।

इस अभियान में स्थानीय सूचनाओं, तकनीकी साधनों और पुलिस की जांच का इस्तेमाल किया गया।

आधार कार्ड और वोटर आईडी को लेकर क्या है स्थिति?

गुलाम मुस्तफा के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भारतीय पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित दावे भी चर्चा में हैं। हालांकि, उपलब्ध पुलिस संबंधी रिपोर्टों में उसके पास आधार कार्ड और वोटर आईडी मिलने की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि उसके पास वैध भारतीय दस्तावेज भी नहीं मिले हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने क्या हैं बड़े सवाल?

करीब 25 साल पहले भारत में प्रवेश करने का दावा इस मामले का सबसे अहम पहलू है। अगर सामने आया घटनाक्रम सही साबित होता है, तो जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल होंगे।

  • वह अलग-अलग राज्यों में कैसे आता-जाता रहा?
  • उसकी पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि किन दस्तावेजों या रिकॉर्ड से हुई?
  • क्या उसने किसी अन्य व्यक्ति की पहचान या दस्तावेजों का इस्तेमाल किया?
  • क्या उसके संपर्क में ऐसे दूसरे लोग भी थे जो अवैध रूप से भारत में रह रहे हों?

आंतरिक सुरक्षा के लिए कितना अहम है मामला?

भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध प्रवेश और विदेशी नागरिकों की पहचान का मुद्दा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रहा है। यह मामला सिर्फ राजस्थान के अजमेर तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई अन्य हिस्सों में भी अवैध घुसपैठियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाए गए हैं।

गुजरात पुलिस और एसओजी (SOG) द्वारा अहमदाबाद समेत विभिन्न जगहों पर की गई कार्रवाइयों में सैकड़ों बांग्लादेशियों को पकड़ा गया है।

महाराष्ट्र में भी बादशाल अफजल मुल्ला नाम के एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा गया था जो करीब 35 साल पहले अवैध रूप से भारत आया था और फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहा था।

इस मामले में पुलिस का अभियान एक व्यापक सवाल सामने रखता है—क्या संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए मौजूदा सत्यापन व्यवस्था पर्याप्त है, और क्या अलग-अलग राज्यों में उनके आवागमन से जुड़े रिकॉर्ड समय पर साझा किए जा पा रहे हैं?

इन सवालों का जवाब केवल एक गिरफ्तारी से नहीं मिलेगा। इसके लिए जांच के निष्कर्ष, दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई सामने आना जरूरी है।

Leave a Comment

Related News