एयर इंडिया की फ्लाइट में हाईजैक अलर्ट से हड़कंप, बीच रास्ते रूट बदलकर जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग

By Defence Detective

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Air India passenger aircraft parked at an airport apron

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में एक ऐसा अलर्ट आया, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया। दरअसल विमान से एक हाईजैक अलर्ट आया, जिसकी वजह से दिल्ली पहुंचने से पहले विमान का रास्ता बदलना पड़ा और राजस्थान की राजधानी जयपुर में उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई। विमान में 293 यात्री और 13 क्रू मेंबर थे।

यह घटना 14 अक्टूबर 2026 को एयर इंडिया की उड़ान AI2030 के साथ हुई। शुरुआती खबरों में विमान को हाईजैक किए जाने की बात सामने आई। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विमान सुरक्षित उतर गया है।

फिलहाल इस प्रकरण ने यूएई के फ्लाईदुबई हाईजैकिंग कांड को फिर से ताजा कर दिया। मामले की जांच जारी है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि हाईजैक अलर्ट की असली वजह क्या थी। विमान को बम से उड़ाने की धमकी की भी बात कही जा रही है।

विमान में हाईजैक का अलर्ट आया कैसे ?

रिपोर्टं के मुताबिक विमान के मुंबई फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन में रहने के दौरान विमान के एक खास कोड के सक्रिय होने की प्रारंभिक जानकारी सामने आई। वह कोड है स्क्वॉक 7500 (Squawk 7500। अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को विमान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान अपहरण या गैरकानूनी हस्तक्षेप (Unlawful Interference) दर्शाने वाला एमरजेंसी स्क्वॉक कोड (Squawk Code 7500) प्राप्त हुआ था, जिसके बाद देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हाई अलर्ट पर आ गईं।

इसके बाद विमान को जयपुर डायवर्ट किए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन इस मामले में एक अहम सवाल अभी बाकी है। क्या यह कोड किसी वास्तविक खतरे के कारण सक्रिय किया गया था, या इसे गलती से इस्तेमाल कर लिया गया?     

शुरुआती रिपोर्टों में पायलट की ओर से कोड गलती से सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। हालांकि इसे अभी अंतिम नतीजा नहीं माना जा सकता।

क्या है स्क्वॉक 7500 कोड ?

विमानन व्यवस्था में ट्रांसपोंडर (एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) के जरिए विमान अपनी पहचान और संबंधित संकेत हवाई यातायात नियंत्रण यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) तक पहुंचाता है।

  • इसी सिस्टम के जरिए पायलट कुछ खास परिस्थितियों में चार अंकों वाले स्क्वॉक कोड का इस्तेमाल करते हैं।
  • स्क्वॉक 7500 ऐसा आपात संकेत है, जिसका इस्तेमाल विमान पर गैरकानूनी कब्जे या हाईजैक जैसी स्थिति बताने के लिए किया जाता है।
  • जब कोई पायलट ट्रांसपोंडर में 7500 कोड सेट करता है, तो यह संबंधित हवाई यातायात नियंत्रण केंद्र के लिए सुरक्षा चेतावनी होती है।
  • इसके बाद अधिकारी तय विमानन सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत स्थिति का आकलन करते हैं और जरूरत के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया जाता है।

हालांकि, स्क्वॉक 7500 कोड दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि विमान वास्तव में हाईजैक हो चुका है। कोड गलती से भी सेट हो सकता है या किसी अन्य परिस्थिति में इसकी सूचना सामने आ सकती है।

लैंडिंग के बाद CISF और बम निरोधक दस्ते ने संभाला मोर्चा

जयपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग के बाद एयर इंडिया की फ्लाइट AI2030 को मुख्य पार्किंग क्षेत्र से अलग आइसोलेशन बे में ले जाया गया। यहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), स्थानीय पुलिस और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) के जवानों ने विमान की जांच शुरू की। सुरक्षा एजेंसियों ने विमान के अंदर और यात्रियों के सामान की तलाशी ली, ताकि किसी संदिग्ध वस्तु या संभावित खतरे का पता लगाया जा सके।

यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित विमान से उतारकर एयरपोर्ट टर्मिनल के निर्धारित क्षेत्र में ले जाया गया। विमान को डायवर्ट करने और उसकी जांच कराने के पीछे सुरक्षा अलर्ट की वास्तविक वजह का पता लगाना मुख्य उद्देश्य था।

फिलहाल जांच जारी है और यह स्पष्ट होना बाकी है कि हाईजैक अलर्ट कैसे जारी हुआ तथा क्या इसके पीछे कोई वास्तविक खतरा था।

क्या विमान को हाईजैक करने की कोशिश हुई थी?

घटना के शुरुआती चरण में हाईजैक अलर्ट और बम की धमकी की खबरें सामने आईं। इसके बाद कुछ रिपोर्टों में संकेत दिया गया कि हाईजैक का अलर्ट गलती से सक्रिय हो सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स ने एक अधिकारी के हवाले से हाईजैक की अफवाह का उल्लेख किया, जबकि NDTV ने बम की धमकी को बाद में फर्जी बताया।

इसलिए फिलहाल नहीं लगता है कि विमान को हाईजैक करने की वास्तविक कोशिश हुई थी। इसी तरह, बिना जांच के यह भी अंतिम रूप से नहीं कहा जा सकता कि पूरा मामला केवल तकनीकी या मानवीय गलती का था। जांच में तीन प्रमुख सवालों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे:

  • विमान में खतरे की सूचना किस माध्यम से मिली?
  • स्क्वॉक 7500 कोड किस परिस्थिति में सक्रिय हुआ?
  • क्या किसी व्यक्ति ने जानबूझकर झूठी सूचना दी, या यह अनजाने में हुई गलती थी?

इन सवालों का जवाब मिलने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

विमानन सुरक्षा के लिहाज से घटना के क्या मायने ?

हवाई यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है। इसमें विमान के चालक दल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, हवाई अड्डे की सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित प्रशासन के बीच समन्वय शामिल है। हाईजैक का संकेत मिलने पर खतरे की पुष्टि होने का इंतजार करते हुए सामान्य उड़ान जारी रखना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए शुरुआती संकेत को गंभीरता से लेना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत विमान को सुरक्षित उतारना अहम होता है।

हालांकि, अगर जांच में यह साबित होता है कि अलर्ट गलती से सक्रिय हुआ था या किसी ने जानबूझकर झूठी सूचना दी थी, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा। ऐसे मामलों में अलर्ट जारी होने की परिस्थितियों को समझना, संचार व्यवस्था की समीक्षा करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने की तैयारी बनाए रखना जरूरी होता है।

एयर इंडिया AI2030 का मामला इस बात को सामने लाता है कि विमानन सुरक्षा में एक संकेत भी बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर सकता है। लेकिन किसी संकेत को वास्तविक खतरे का प्रमाण मानने से पहले जांच के निष्कर्षों को देखना आवश्यक है।

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