पूरी दुनिया जानती है कि भारत का सबसे अच्छा दोस्त कौन है। ग्लोबल डिप्लोमेसी के प्लेटफॉर्म पर जब भी भारत के सबसे पक्के दोस्तों की बात होती है, तो जुबां पर पहला नाम रूस का आता है। लेकिन रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे अच्छा दोस्त कौन है? क्या वह महाशक्ति अमेरिका है या फिर टेक्नोलॉजी का बादशाह जापान?
हिंदी पट्टी के पांच राज्यों में इंडिया-इजरायल सेंटर के नए सर्वे में इस सवाल का जवाब है इजरायल। इस सवाल पर इजरायल से आगे सिर्फ रूस रहा। मुश्किल वक्त में भारत का साथ देने के सवाल पर भी दोनों देशों का यही क्रम रहा। यानी दोस्ती और मुश्किल वक्त में साथ देने के मामले में रूस के बाद इजरायल है।
लेकिन भरोसे के सवाल पर तस्वीर बदली दिखी। इसमें रूस के साथ जापान भी इजरायल से आगे रहा। वहीं, अमेरिका, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर इस सवाल पर इजरायल से पीछे रहे। इसमें चीन, पाकिस्तान और तुर्की का कहीं कोई जिक्र नहीं है।
कहां-कहां हुआ सर्वे और क्या हुए सवाल ?
नई दिल्ली के इंडिया-इजरायल सेंटर ने अक्टूबर 2026 में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड में यह सर्वे किया। इसमें 21 से 40 साल के 1,023 लोगों ने हिस्सा लिया। उनसे हिंदी में सवाल पूछे गए और जवाब ऑनलाइन तथा आमने-सामने इंटरव्यू के जरिए जुटाए गए।
‘हिंदी पट्टी की नजर में भारत के साझेदारों के बीच इजरायल की जगह’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के मुताबिक, 62 फीसदी लोगों ने इजरायल को भारत का अच्छा दोस्त माना। जबकि 57 फीसदी ने कहा कि इजरायल मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़ा रहा है। दोनों मामलों में रूस पहले स्थान पर रहा।
- भारत-इजरायल संबंधों पर रिसर्च करने वाले इस सेंटर का 2026 में युवाओं की राय जानने के लिए किया गया यह तीसरा सर्वे था।
- सर्वे में दोस्ती, मुश्किल वक्त में भारत का साथ, विकास में मदद और भरोसे को अलग-अलग सवालों में परखा गया।
किन सवालों पर इजरायल रूस के बाद दूसरे नंबर पर रहा?
हिंदी पट्टी के इस सर्वे में इजरायल दोस्ती, मुश्किल वक्त में साथ और भारत के विकास में मदद, तीनों सवालों पर रूस के बाद दूसरे स्थान पर रहा। लेकिन जब प्रतिभागियों से सीधे पूछा गया कि वे किस देश पर भरोसा करते हैं, तो जापान भी इजरायल से आगे रहा। अमेरिका, जापान और फ्रांस इन पैमानों पर इजरायल से पीछे रहे।
| सर्वे में किस बात पर राय ली गई? | इजरायल के पक्ष में जवाब | इजरायल का स्थान |
| भारत का अच्छा दोस्त | 62% | दूसरा, रूस के बाद |
| मुश्किल वक्त में भारत का साथ देने वाला देश | 57% | दूसरा, रूस के बाद |
| भारत के विकास में मदद करने वाला देश | 42% | दूसरा, रूस के बाद |
| भरोसेमंद देश | 57% | तीसरा, रूस और जापान के बाद |
- जापान की रैंकिंग में फर्क सबसे दिलचस्प है। दोस्ती, मुश्किल वक्त में साथ और विकास में मदद के सवालों पर वह इजरायल से पीछे रहा, लेकिन भरोसे में उससे आगे निकल गया।
- वहीं अमेरिका चारों सवालों पर इजरायल से पीछे रहा। भरोसे की तुलना में फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर भी इजरायल से नीचे रहे।
भारत-इजरायल सहयोग की जानकारी रखने वालों में कितना ज्यादा भरोसा?
हिंदी पट्टी के सर्वे में कुल 57 फीसदी प्रतिभागियों ने इजरायल पर भरोसा जताया। लेकिन भारत में इजरायल के योगदान की जानकारी रखने वालों में यह आंकड़ा 75 फीसदी था। जिन्हें इस सहयोग की जानकारी नहीं थी, उनमें 43 फीसदी ने इजरायल पर भरोसा जताया।
| सर्वे में किस बात पर राय ली गई? | सहयोग की जानकारी थी | सहयोग की जानकारी नहीं थी | दोनों समूहों में अंतर |
| इजरायल पर भरोसा जताया | 75% | 43% | 32 प्रतिशत अंक |
| रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग को भारत के लिए फायदेमंद माना | 83% | 46% | 37 प्रतिशत अंक |
रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग पर क्या राय रही?
सर्वे में 61 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि इजरायल के साथ रक्षा और टेक्नोलॉजी सहयोग से भारत को फायदा हुआ है। कुल प्रतिभागियों में 30 फीसदी ने इस सहयोग को भारत के लिए बहुत बड़े पैमाने पर फायदेमंद बताया। एक अलग सवाल पर 63 फीसदी ने इजरायल को तकनीकी रूप से उन्नत देश माना।
इंडिया-इजरायल सेंटर के मई 2026 के सर्वे में 51 फीसदी प्रतिभागियों ने इजरायल को तकनीकी रूप से उन्नत माना था। मई में 18 से 29 साल के 500 शहरी युवाओं से राय ली गई थी। अक्टूबर के सर्वे में पांच हिंदीभाषी राज्यों के 21 से 40 साल के 1,023 लोग शामिल थे। दोनों आंकड़े अलग-अलग समूहों की राय बताते हैं।
खेती, पानी और कारोबार में सहयोग को कितने लोग अहम मानते हैं?
60 फीसदी प्रतिभागियों ने खेती, जल प्रबंधन और कारोबार में इजरायल के साथ सहयोग को भारत के लिए अहम माना। साझेदारी की जानकारी रखने वालों में यह आंकड़ा 75 फीसदी था। खबर में भारत-इजरायल कृषि परियोजना का उदाहरण दिया गया है।
इसके तहत देश में 35 कृषि उत्कृष्टता केंद्र बनाए गए हैं। सर्वे वाले क्षेत्र में चार केंद्र बताए गए हैं। उत्तर प्रदेश में बस्ती और कन्नौज, और बिहार में वैशाली और नालंदा। इन केंद्रों में ड्रिप सिंचाई, सिंचाई के पानी के साथ खाद देने और नियंत्रित वातावरण में खेती की तकनीकें दिखाई और सिखाई जाती हैं
गोरखपुर और वाराणसी के आंकड़े क्यों चर्चा में हैं?
आमने-सामने हुए इंटरव्यू में गोरखपुर के 91 फीसदी और वाराणसी के 88 फीसदी प्रतिभागियों ने इजरायल पर भरोसा जताया। रिपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि सहयोग और इजरायल में रोजगार के लिए भारतीय कामगारों की भर्ती को सीधे जुड़ाव के उदाहरण के तौर पर देखती है। ये प्रतिशत उन शहरों में इंटरव्यू देने वाले लोगों के हैं। रिपोर्ट ने किसी एक वजह को इस ऊंचे भरोसे का कारण तय नहीं किया है।
कितने लोग भारत-इजरायल के रिश्ते और मजबूत करना चाहते हैं?
- 50 फीसदी चाहते हैं कि रिश्ते और मजबूत हों।
- 28 फीसदी मौजूदा स्तर पर संबंध बनाए रखने के पक्ष में हैं।
- 13 फीसदी चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच जुड़ाव कम हो।
इस तरह 78 फीसदी प्रतिभागी रिश्ते मजबूत करने या मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के पक्ष में थे।
व्यापार के मोर्चे पर क्या हो रहा है?
खबर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 3.62 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 3.93 अरब डॉलर हो गया।
दोनों देशों ने सितंबर 2025 में द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर दूसरे दौर की बातचीत 24 जुलाई 2026 को पूरी हुई।








