अरब सागर में भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के युद्पोतों के बीच हुई टक्कर ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई है। भारत ने इस मामले को केवल एक सामान्य समुद्री हादसा मानकर छोड़ने के बजाय कूटनीतिक स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 16 सितंबर को पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और पाकिस्तानी नौसैनिक यूनिटों के इस व्यवहार को “अन-ऐक्सेप्टेबल और गैर-पेशेवर” बताया।
सबसे अहम बात यह है कि भारत ने इस घटना को 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के अनुच्छेद 10 से जोड़ते हुए आपत्ति जताई है। यही प्रावधान दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक-दूसरे के बहुत करीब आने से रोकता है।
कैसे हुई यह टक्कर ?
भारतीय पक्ष की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज का संचालन तेज गति और असुरक्षित तरीके से किया गया था। पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज भारतीय नौसेना के जहाज के बहुत करीब आया और तेज गति से उसके पास पहुंचा। दोनों जहाजों के बीच सुरक्षित दूरी नहीं रही और टक्कर हो गई।
भारत ने पाकिस्तान से भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सैन्य यूनिटों को जरूरी सावधानी बरतने को कहा है।
कोई नुकसान हुआ है ?
अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक टक्कर से किसी बड़े सैन्य नुकसान, युद्धपोत के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने या बड़े पैमाने पर हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन समुद्र में दो देशों के सैन्य जहाजों का आपस में टकराना सामान्य घटना नहीं होती। युद्धपोतों पर हथियार, सेंसर, संचार और अन्य संवेदनशील प्रणालियां होती हैं। इसलिए नौसेनाएं ऐसे मामलों में जहाजों के बीच सुरक्षित दूरी और समुद्री नियमों को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं।
फिर, नौसेना के मामले में सवाल सिर्फ यह नहीं होता कि जहाज को कितना नुकसान हुआ। सवाल यह भी होता है कि दो सैन्य जहाज एक-दूसरे के इतने करीब पहुंचे कैसे?
दोनों युद्धपोतों की पहचान हुई ?
घटना में शामिल पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का नाम PNS Hunain बताया जा रहा है। जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में केवल “a unit of the Indian Navy” कहा गया है। यानी सरकार ने अभी जहाज का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि मीडिया रिपोर्टें इसे Indian Navy frontline warship कह रही हैं।
PNS Hunain की सबसे खास बात यह है कि यह पाकिस्तानी नौसेना का अपेक्षाकृत नया Yarmook-class Batch-II offshore patrol vessel (OPV) है। इसे 2024 में पाकिस्तान नौसेना में शामिल किया गया था। पाकिस्तान ने इसे आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस बहुउद्देश्यीय जहाज के तौर पर पेश किया है। PNS Hunain को Damen Shipyards, Romania में बनाया गया था।
PNS Hunain की खासियत –
| खासियत | जानकारी |
| क्लास | Yarmook-class, Batch-II |
| भूमिका | Offshore Patrol Vessel; समुद्री निगरानी और गश्त |
| लंबाई | करीब 98 मीटर |
| डिस्प्लेसमेंट | करीब 2,600 टन |
| प्रोपल्शन | 4 डीजल इंजन |
| अधिकतम गति | करीब 22 नॉट यानी लगभग 41 किमी/घंटा |
| हेलिकॉप्टर | हेलिकॉप्टर ऑपरेशन की क्षमता |
| UAV | ड्रोन/UAV ऑपरेशन की क्षमता |
| स्पेशल ऑपरेशन | RHIB जैसी तेज नावें और मिशन मॉड्यूल ले जाने की क्षमता |
पाकिस्तान के Charge d’Affaires को क्यों बुलाया गया ?
घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को विदेश मंत्रालय में तलब किया।
सरल भाषा में समझें तो Charge d’Affaires उस समय राजनयिक मिशन का प्रमुख अधिकारी होता है जब High Commissioner या Ambassador उस भूमिका में नहीं होता। पाकिस्तान के भारत में Charge d’Affaires साद अहमद वाराइच हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने उन्हें बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
भारत की ओर से उन्हें यह संदेश देने को कहा गया कि पाकिस्तान की संबंधित सैन्य यूनिटों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए और दोनों देशों के बीच मौजूद समझौतों का सम्मान करना चाहिए, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।
विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में भारत के Charge d’Affaires को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
क्या है भारत-पाकिस्तान के बीच एक समझौता और उसका अनुच्छेद 10 ?
भारत और पाकिस्तान ने 1991 में सैन्य अभ्यास, सैन्य गतिविधियों और सैनिकों की आवाजाही से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troop Movements नाम का समझौता किया था।
इस समझौते के अनुच्छेद 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित दूरी का प्रावधान है।
इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से 3 नॉटिकल मील से कम दूरी पर नहीं आना चाहिए। यानी लगभग 5.56 किलोमीटर की दूरी बनाए रखने का प्रावधान है। इसका अससल मकसद है कि दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच ऐसा नजदीकी संपर्क न हो जिससे टक्कर, गलतफहमी या अचानक तनाव पैदा हो।
एक नॉटिकल मील करीब 1.852 किलोमीटर होता है।
भारत का आरोप है कि इस घटना में पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण इसी समझौते के अनुच्छेद 10 के सीधे विपरीत था। ऐसे में यह घटना के बाद यह चर्चा के केंद्र में आ गया।
भारत-पाकिस्तान के बीच ऐसा पहले भी हो चुका है ?
भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों से जुड़ा ऐसा विवाद पहले भी सामने आ चुका है।
जून 2011 में पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज PNS Babur और भारतीय नौसेना के INS Godavari के बीच अरब सागर में एक घटना हुई थी। उस समय दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समुद्र में गलत या खतरनाक तरीके से जहाज चलाने के आरोप लगाए थे।
भारत ने तब भी पाकिस्तान के खिलाफ International Regulations for Prevention of Collisions at Sea के साथ-साथ 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला देते हुए विरोध दर्ज कराया था। भारत ने कहा था कि PNS Babur की गतिविधियों से INS Godavari और उसके चालक दल की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
क्या इसे सैन्य टकराव माना जाए?
अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
भारत ने इस घटना पर कड़ा विरोध जरूर दर्ज कराया है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक विवरण इसे जानबूझकर किया गया हमला नहीं बताते। अभी तक किसी बड़े नुकसान की पुष्टि भी नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल इसे दो नौसैनिक यूनिटों के बीच हुई टक्कर और उससे पैदा हुए कूटनीतिक विवाद के रूप में देखना ज्यादा लगता है।
लेकिन मामला संवेदनशील है।
अब नजर पाकिस्तान के जवाब पर
भारत ने अपना विरोध दर्ज करा दिया है। अब आगे पाकिस्तान के आधिकारिक रिएक्शन और घटना के बारे में सामने आने वाले अतिरिक्त जानकारी महत्वपूर्ण होगी। यह भी देखना होगा कि दोनों पक्ष घटना के संचालन संबंधी पहलुओं पर कोई विस्तृत जानकारी देते हैं कि नहीं।
क्या होता है अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र ?
यह समुद्र का वह हिस्सा है जो किसी एक देश के क्षेत्रीय समुद्री अधिकार (Territorial Sea) के अंदर नहीं आता और जहां किसी एक देश की जमीन जैसी पूरी संप्रभुता नहीं होती। इसे आसान तरीके से ऐसे समझिए:-
| समुद्री क्षेत्र | तट से दूरी | स्थिति |
| क्षेत्रीय समुद्र (Territorial Sea) | 0–12 नॉटिकल मील तक | तटीय देश की संप्रभुता |
| सन्निहित क्षेत्र (Contiguous Zone) | 12–24 नॉटिकल मील | सीमित कानूनी अधिकार |
| EEZ | 200 नॉटिकल मील तक | संसाधनों पर तटीय देश के विशेष अधिकार |
| High Seas / अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र | सामान्यतः EEZ से आगे | किसी एक देश की संप्रभुता नहीं |
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत किसी देश का Territorial Sea अधिकतम 12 nautical miles यानी करीब 22.2 किमी तक हो सकता है। इसके आगे EEZ 200 nautical miles तक जा सकता है, लेकिन EEZ को भी सीधे-सीधे उस देश का “इलाका” नहीं माना जाता।
अब जानें EEZ
EEZ का पूरा नाम Exclusive Economic Zone है, हिंदी में विशेष आर्थिक क्षेत्र।
किसी देश के समुद्र तट से अधिकतम 200 नॉटिकल मील (लगभग 370 किमी) तक का समुद्री क्षेत्र EEZ हो सकता है। इस क्षेत्र में उस तटीय देश को मछली, तेल-गैस और दूसरे समुद्री संसाधनों की खोज और इस्तेमाल पर विशेष अधिकार मिलते हैं।
और EEZ के आगे का समुद्री क्षेत्र सामान्यतः High Seas/अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र कहलाता है।








