रूस ने अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 के साथ एक ऐसे नए हथियार को पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया है, जो आने वाले समय में स्टैंड-ऑफ एयर स्ट्राइक की तस्वीर बदल सकता है। S-71K ‘कोवयोर’ स्टील्थ क्रूज मिसाइल को सितंबर 2026 में मिस्र के El Alamein International Airshow में प्रदर्शित किया गया। खास बात यह है कि रूसी पक्ष के अनुसार यह हथियार केवल प्रदर्शनी के लिए तैयार नहीं किया गया, बल्कि यूक्रेन युद्ध में इसका इस्तेमाल भी हो चुका है।
यहां S-71K की खबर सीधे Su-57E India pitch से जुड़ जाती है। क्योंकि इस समय रूस भारत को Su-57E पांचवीं जेनरेशन के फाइटर प्लेन की पेशकश को आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली में 11 सितंबर की बातचीत में Su-57 समेत कई रक्षा प्रस्ताव चर्चा में रहे।
रिपोर्टों के अनुसार रूस भारत को Su-57 के साथ व्यापक औद्योगिक सहयोग की पेशकश कर रहा है। इसमें भारत में विमान का संयुक्त उत्पादन भी शामिल है। ऐसे में सवाल सिर्फ S-71K की क्षमता का नहीं है। सवाल यह है कि अगर भारत Su-57E लेता है, तो क्या उसे ऐसे नए रूसी हथियारों का पूरा लाभ मिल सकता है?
S-71K की क्या है खासियत ?
S-71K, को ‘कोवयोर’ भी कहते हैं और जिसका मतलब है “कार्पेट”। इसे रूस की United Aircraft Corporation (UAC) ने मुख्य रूप से Su-57 के लिए विकसित किया है। यह पारंपरिक बड़े क्रूज मिसाइल और कम लागत वाले स्ट्राइक ड्रोन के बीच के कॉन्सेप्ट को अपनाता है। Reuters के अनुसार रूसी निर्यातक Rosoboronexport ने भी इसे ऐसा सिस्टम बताया है जिसमें मिसाइल और ड्रोन दोनों की कुछ विशेषताएं हैं। S-71K की खासियत –
- नाम: S-71K Kovyor/Kover
- प्रकार: एयर-लॉन्च्ड स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइल
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: मुख्य रूप से Su-57 परिवार
- अनुमानित रेंज: करीब 300 किमी तक
- वारहेड: लगभग 250 किलोग्राम OFAB-250-270 हाई-एक्सप्लोसिव बम
- इंजन: R500 टर्बोजेट
- गति: सबसोनिक
- गाइडेंस: मुख्य रूप से INS बेस्ड नेविगेशन
- टर्मिनल सीकर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार नहीं
- निर्माण: मल्टी-लेयर फाइबरग्लास कंपोजिट एयरफ्रेम
यानी यह हर तरह के लक्ष्य के लिए हाई-एंड स्मार्ट मिसाइल नहीं है। इसकी असली ताकत इसकी अपेक्षाकृत सरल संरचना, स्टैंड-ऑफ दूरी और बड़े वारहेड में है।
S-71K में मिसाइल और ड्रोन जैसी खूबियां ?
| विशेषता | मिसाइल वाली खासियत | ड्रोन जैसी खासियत |
| प्रोपल्शन | टर्बोजेट इंजन से लगातार उड़ान, यानी क्रूज मिसाइल जैसा | छोटे जेट अटैक ड्रोन की तरह अपेक्षाकृत सरल इंजन व्यवस्था |
| एयरफ्रेम | फिक्स्ड-विंग क्रूज मिसाइल का डिजाइन | विमान/ड्रोन जैसा चौड़ा, अपेक्षाकृत सरल एयरफ्रेम |
| लॉन्च | विमान से एयर-लॉन्च्ड हथियार | ड्रोन की तरह अपने इंजन से लॉन्च के बाद लंबी दूरी तक उड़ सकता है |
| उड़ान | पूर्व-निर्धारित लक्ष्य तक ऑटोनॉमस रूप से पहुंचने वाली मिसाइल | UAV की तरह अपेक्षाकृत लंबी दूरी की ऑटोनॉमस उड़ान कॉन्सेप्ट |
| गाइडेंस | INS बेस्ड नेविगेशन जैसी क्रूज-मिसाइल तकनीक | यह सामान्य FPV ड्रोन की तरह ऑपरेटर के लगातार मैनुअल नियंत्रण पर निर्भर नहीं; ज्यादा ऑटोनॉमस हथियार |
| वारहेड | करीब 250 किग्रा OFAB-250-270—स्पष्ट रूप से मिसाइल/बम का स्ट्राइक पेलोड | कम लागत वाले अटैक ड्रोन की तरह उपलब्ध/सरल हथियार को एयरफ्रेम में एकीकृत करने की अवधारणा |
| लागत/निर्माण दर्शन | पारंपरिक महंगी क्रूज मिसाइल की तुलना में सरल डिजाइन | कम लागत और बड़ी संख्या में इस्तेमाल करने की दिशा |
| मुख्य भूमिका | स्टैंड-ऑफ एयर स्ट्राइक | “expendable” यानी मिशन पूरा करके न लौटने वाले अटैक ड्रोन जैसी अवधारणा |
| S-71K की पहचान | मिसाइल ही है | ड्रोन जैसी कुछ डिजाइन/ऑपरेशनल खूबियां |
‘स्टील्थ’ कितना है?
S-71K को कई रिपोर्टों में stealth missile कहा जा रहा है, लेकिन उपलब्ध तकनीकी जानकारी इससे कुछ अधिक सावधान तस्वीर देती है। यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी DIU के अनुसार मिसाइल में रडार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग या किसी विशेष stealth material के इस्तेमाल का प्रमाण नहीं मिला है।
हालांकि इसका डिजाइन ऐसा है जिससे इसका रडार सिग्नेचर कम हो सकता है। इसलिए इसे Su-57 जैसी पूर्ण stealth platform के बराबर stealth missile समझना सही नहीं होगा।
असल फायदा यह है कि Su-57 अपनी लो विजिबिलटी का इस्तेमाल करके अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से S-71K को लॉन्च कर सकता है।
S-71K कहां उपयोगी और क्या है लिमिटेशन?
S-71K में कोई पूरी तरह नया भारी वारहेड विकसित करने के बजाय OFAB-250-270 के 250 किलोग्राम बम को मिसाइल के आगे के हिस्से में इंटिग्रेट किया गया है। इससे डिजाइन अपेक्षाकृत सरल रहता है।
इसका मतलब यह हथियार मुख्य रूप से पहले से तय स्थिर टारगेट के खिलाफ ज्यादा उपयोगी है। उदाहरण के तौर पर कमांड पोस्ट, गोला-बारूद भंडार, सैन्य प्रतिष्ठान, एयरबेस या अन्य स्थिर सैन्य ढांचे इसके संभावित लक्ष्य हो सकते हैं।
लेकिन इसकी सीमा भी क्योंकि इसमें टर्मिनल सीकर नहीं है। यानी यह किसी चलते हुए टैंक या अचानक बदलते टारगेट को अंतिम स्टेज में पहचानकर हमला करने वाली अत्याधुनिक मल्टी-मोड मिसाइल नहीं है।
यही कारण है कि S-71K को कम लागत वाले बड़े पैमाने के स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक हथियार के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
Su-57 के लिए इसके क्या मायने?
Su-57 पहले से ही लंबी दूरी के हथियार ले जाने में सक्षम है। लेकिन S-71K जैसा सिस्टम उसे एक और विकल्प देता है—कम लागत वाले स्टैंड-ऑफ हथियारों से बार-बार हमला।
यूक्रेनी खुफिया के अनुसार S-71K का इस्तेमाल 2025 के अंत से किया जा रहा है, जबकि अप्रैल 2026 में इसकी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक हुई।
सितंबर में पहली बार इसे खुले तौर पर दिखाना रूस के लिए सिर्फ हथियार प्रदर्शन नहीं है। यह युद्ध में इस्तेमाल हो चुकी तकनीक को डिफेंस बाजार में पेश करने का संकेत भी है। El Alamein में S-71K के साथ S-71M और S8000 Banderol जैसी अन्य एयर-लॉन्च्ड प्रणालियां भी दिखाई गईं।
क्या अभी भारत के पास 300 किमी तक स्टैंड-ऑफ हमला की क्षमता नहीं ?
भारत के पास 300 किमी से अधिक की एयर-लॉन्च्ड स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता पहले से है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण Su-30MKI से लॉन्च होने वाली BrahMos-A है।
- BrahMos Aerospace ने एयर-लॉन्च्ड संस्करण की रेंज करीब 300 किमी बताई थी, जबकि बाद के extended-range परीक्षणों के बाद इसकी क्षमता 400 किमी से अधिक बताई गई।
- 2022 में IAF ने Su-30MKI से extended-range BrahMos का सफल परीक्षण भी किया था।
- इसके अलावा भारत के पास SCALP जैसी लंबी दूरी की एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल क्षमता भी है, जो Rafale से जुड़ी है।
| विशेषता | BrahMos-A | SCALP-EG |
|---|---|---|
| प्रकार | एयर-लॉन्च्ड सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल | एयर-लॉन्च्ड स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइल |
| भारतीय प्लेटफॉर्म | Su-30MKI | Rafale |
| रेंज | 300 किमी; extended-range वर्जन 400+ किमी वर्ग | 250+ किमी; वास्तविक operational range सार्वजनिक नहीं |
| गति | लगभग Mach 2.8 | सबसोनिक |
| वजन | लगभग 2.5 टन | लगभग 1.3 टन |
| वारहेड | लगभग 200–300 किग्रा श्रेणी | 450 किग्रा BROACH- पूरा नाम है Bomb Royal Ordnance Augmented Charge। यह SCALP-EG में इस्तेमाल होने वाला एक मल्टी-स्टेज पेनेट्रेटर वारहेड है, जिसे मजबूत और भूमिगत/कठोर लक्ष्यों के खिलाफ बनाया गया है। |
| गाइडेंस | INS/सैटेलाइट नेविगेशन + टर्मिनल गाइडेंस | INS + GPS + Terrain Reference + IIR |
| टर्मिनल क्षमता | हाई स्पीड से टारगेट पर हमला | IIR seeker से अंतिम चरण में लक्ष्य पहचान/टार्गेटिंग |
| मुख्य लक्ष्य | जहाज और जमीनी लक्ष्य | बंकर, कमांड सेंटर, hardened infrastructure जैसे स्थिर जमीनी लक्ष्य |
| सबसे बड़ी खूबी | बहुत तेज गति और भारी kinetic impact | लंबी दूरी से सटीक हमला और मजबूत लक्ष्यों के खिलाफ BROACH वारहेड |
तो फिर S-71K भारत के लिए कितना खास?
S-71K की अहमियत 300 किमी की दूरी नहीं, बल्कि Su-57 + स्टैंड-ऑफ हथियार के संयोजन में बताया जा रहा है। BrahMos-A और S-71K दो अलग हथियार हैं।
| BrahMos-A | S-71K |
|---|---|
| बहुत तेज | सबसोनिक |
| भारी | अपेक्षाकृत हल्का/सरल |
| बड़ी kinetic energy | करीब 250 किग्रा वारहेड |
| मजबूत air-defence penetration क्षमता | कम रडार सिग्नेचर वाला डिजाइन |
| Su-30MKI जैसे भारी फाइटर से लॉन्च | Su-57 जैसे stealth fighter के आंतरिक हथियार विन्यास के लिए ज्यादा अनुकूल अवधारणा |
| — | संभवतः बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए ज्यादा उपयुक्त |
इसलिए S-71K को BrahMos-A से बेहतर कहना गलत होगा। लेकिन यह अलग काम के लिए बनाया गया हथियार है। दरअसल सबसे महत्वपूर्ण अंतर Su-57 खुद है।
Su-30MKI + BrahMos-A में मिसाइल बहुत शक्तिशाली है, लेकिन Su-30MKI स्वयं stealth fighter नहीं है।
दूसरी तरफ:
Su-57E → लो रडार विजिबिलटी → दुश्मन के इलाके के करीब पहुंचने की बेहतर क्षमता → S-71K जैसे स्टैंड-ऑफ हथियार का लॉन्च → विमान को लक्ष्य के बिल्कुल पास जाने की जरूरत कम।
तो S-71K की असली अहमियत उसकी रेंज नहीं, बल्कि इसे Su-57 जैसे पांचवीं जेनरेशन के stealth fighter के साथ जोड़ने का कॉन्सेप्ट है। और यहां भारत की संभावित कमी यह हो सकती है कि भारत के पास अभी Su-57 जैसा operational fifth-generation fighter नहीं है।
चीन और पाकिस्तान की एयर लॉन्चड स्ट्राइक क्षमता?
चीन के पास पहले से ही लंबी दूरी के एयर-लॉन्च्ड स्ट्राइक हथियारों का काफी बड़ा परिवार है। उदाहरण के लिए चीन का KD-21 air-launched ballistic missile H-6K से लॉन्च होते हुए सामने आया है और इसे संभावित हाइपरसोनिक/बैलिस्टिक स्टैंड-ऑफ हथियार माना जाता है। इसकी संभावित रेंज लगभग 1,000–1,500 किमी है।
चीन की CJ-20 air-launched cruise missile की अनुमानित रेंज करीब 1,500–2,000 किमी, जिसे H-6K स्ट्रैटेजिक बॉम्बर से लांच किया जाता है।
पाकिस्तान के पास भी चीन से मिले स्टैंड-ऑफ हथियार हैं। CM-400AKG को JF-17 और J-10CE के साथ जोड़ा गया है। इसके प्रकाशित आंकड़ों में रेंज को लेकर बड़ा अंतर है। निर्माता के पुराने आंकड़े लगभग 100-240 किमी बताते हैं, जबकि बाद के पाकिस्तानी दावों में 400 किमी तक की रेंज बताई गई है।
Su-57 + S-71K बनाम चीन-पाकिस्तान ?
| पहलू | रूस: Su-57 + S-71K | चीन: J-20 + चीनी लंबी दूरी के हथियार | पाकिस्तान: J-10CE/JF-17 + चीनी हथियार | |
| फाइटर | Su-57 पांचवीं पीढ़ी | J-20 पांचवीं पीढ़ी | J-10CE 4.5-जनरेशन; JF-17 Block III भी उपलब्ध | |
| लो-ऑब्जर्वेबल क्षमता | Su-57 का मुख्य लाभ | J-20 का प्रमुख डिजाइन लक्ष्य | J-10CE/JF-17 stealth fighter नहीं | |
| स्टैंड-ऑफ विकल्प | S-71K, करीब 300 किमी तक की बताई गई रेंज | J-20 के लिए लंबी दूरी के एयर-लॉन्च्ड हथियार और precision-guided weapons | CM-400AKG जैसे चीनी एयर-लॉन्च्ड स्टैंड-ऑफ हथियार | |
| हथियार की प्रकृति | क्रूज मिसाइल और कम लागत वाले अटैक ड्रोन की कुछ विशेषताओं का मिश्रण | चीन के पास अलग-अलग भूमिका वाले missile/strike weapons का बड़ा परिवार | मुख्य जोर तेज/भारी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक और BVR weapons पर | |
| गति | S-71K सबसोनिक श्रेणी | हथियार के अनुसार काफी अलग | CM-400 परिवार सुपरसोनिक/हाई-स्पीड श्रेणी में | |
| मुख्य फायदा | Stealth fighter + अपेक्षाकृत सरल stand-off strike weapon | Stealth fighter + लंबी दूरी के air-to-air/strike weapons | अपेक्षाकृत बड़े मौजूदा fighter fleet के साथ चीनी हथियारों का एकीकरण | |








