भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए सितंबर 2026 एक महत्वपूर्ण महीना बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) लंबे इंतजार के बाद अपने स्वदेशी HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान की पहली खेप वायुसेना को सौंपने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ Tejas Mk1A की डिलीवरी भी अब आगे बढ़ने की स्थिति में है।
दोनों विमानों की भूमिका बिल्कुल अलग है। HTT-40 का काम नए पायलटों को उड़ान की शुरुआती ट्रेनिंग देना है, जबकि Tejas Mk1A भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने वाला 4+ पीढ़ी का फाइटर विमान है। यानी एक विमान पायलट तैयार करेगा और दूसरा उन्हीं प्रशिक्षित पायलटों को युद्धक भूमिका के लिए आधुनिक प्लेटफॉर्म देगा।
लेकिन इन दोनों कार्यक्रमों में एक समान चुनौती भी सामने आई है—विदेशी इंजन की सप्लाई में देरी। HTT-40 में अमेरिकी कंपनी Honeywell के इंजन की आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि Tejas Mk1A में अमेरिकी GE Aerospace के F404 इंजन की उपलब्धता लंबे समय तक डिलीवरी की रफ्तार को प्रभावित करती रही।
HTT-40की पहली खेप मिलने वाली है
HAL अब तीन HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमानों की पहली खेप भारतीय वायुसेना को सौंपने की तैयारी में है। इनमें दो विमान बेंगलुरु और एक विमान नासिक में बनाया गया है। यह डिलीवरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि HTT-40 कार्यक्रम को इंजन की उपलब्धता में आई समस्या के कारण देरी का सामना करना पड़ा।
IAF ने 2023 में HAL से 70 HTT-40विमानों की खरीद का अनुबंध किया था।
इसकी कीमत करीब 6,838करोड़ रुपये थी।
इन विमानों का मुख्य उद्देश्य नए पायलटों को बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग देना है।
HAL को वित्त वर्ष 2025-26 में शुरुआती 12 विमान देने थे, लेकिन इंजन की सप्लाई में देरी के कारण एक भी विमान डिलीवर नहीं हो पाया।
अब Honeywell से TPE331-12B टर्बोप्रॉप इंजनों की आपूर्ति शुरू होने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है।
इंजन की समस्या क्यों बनीHTT-40के लिए अड़चन?
HTT-40 में Honeywell TPE331-12B टर्बोप्रॉप इंजन इस्तेमाल होता है। HAL और Honeywell के बीच करीब 100मिलियन डॉलर का अनुबंध 88 इंजनों और किट की आपूर्ति के लिए है। इनमें कुछ इंजन Honeywell सीधे उपलब्ध कराएगा, जबकि बाकी का निर्माण HAL तकनीक हस्तांतरण के तहत करेगा।
इसका मतलब यह है कि विमान का डिजाइन और उत्पादन भारत में होने के बावजूद इंजन की समय पर उपलब्धता कार्यक्रम की गति के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
HAL बेंगलुरु और नासिक फैसिलटी को मिलाकर सालाना करीब 20 HTT-40 बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए अगर इंजन की सप्लाई नियमित रहती है तो शुरुआती देरी के बाद उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
HTT-40की क्या है खूबियां?
अभी नए IAF पायलटों की शुरुआती उड़ान ट्रेनिंग Pilatus PC-7 Mk II पर होती है। बेसिक ट्रेनिंग के बाद पायलटों को उनकी भूमिका के अनुसार फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में आगे भेजा जाता है। HTT-40 का उद्देश्य इसी शुरुआती प्रशिक्षण में भारतीय विकल्प उपलब्ध कराना है। विमान में आधुनिक ग्लास कॉकपिट, आधुनिक एवियोनिक्स और सुरक्षा सुविधाएं हैं। यह पूरी तरह एरोबैटिक बेसिक ट्रेनर है। इससे भारत को अपने पायलट ट्रेनिंग इकोसिस्टम में विदेशी बेसिक ट्रेनर पर निर्भरता कम करने का मौका मिलेगा।
श्रेणी
HTT-40 की प्रमुख जानकारी
निर्माता
Hindustan Aeronautics Limited (HAL)
भूमिका
Basic/Initial Military Pilot Training
इंजन
Honeywell TPE331-12B Turboprop
इंजन पावर
लगभग 1,100 shp
अधिकतम गति
लगभग 450 किमी/घंटा
रेंज
लगभग 1,009 किमी
एंड्योरेंस
लगभग 3.09 घंटे
सर्विस सीलिंग
लगभग 6 किमी
अधिकतम टेकऑफ वजन
3,040 किग्रा
सीटिंग
2 सीट, एक के पीछे एक (Tandem)
एरोबेटिक क्षमता
Fully Aerobatic
लोड फैक्टर
+6G / -3G
कॉकपिट
Full Glass Cockpit
एवियोनिक्स
आधुनिक Digital Avionics
नेविगेशन
VOR-ILS, TACAN
कम्युनिकेशन
आधुनिक Radio Communication
अन्य सिस्टम
Radio Altimeter, IFF, ISIS
इजेक्शन सीट
Zero-Zero Ejection Seat
ईंधन भरने की सुविधा
Hot Refuelling
पायलट बदलने की सुविधा
Quick/Running Pilot Change-over
मुख्य ट्रेनिंग
Basic Flying, Aerobatics, Instrument Flying
अन्य प्रशिक्षण
Navigation, Formation Flying, Night Flying
लो-स्पीड हैंडलिंग
नए पायलटों की ट्रेनिंग के लिए बेहतर नियंत्रण
सिम्युलेटर
Full Mission Simulator अनुबंध में शामिल
स्वदेशीकरण
शुरुआती अनुबंध में लगभग 56%; 60%+ करने का लक्ष्य
एरोबेटिक ट्रेनर – HTT-40 सिर्फ सामान्य उड़ान सिखाने वाला विमान नहीं है। यह fully aerobatic है, यानी पायलट इसमें विभिन्न एरोबेटिक अभ्यास कर सकते हैं। इसका +6/-3G load factor भी इसे ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त maneuverability देता है।
आधुनिक Glass Cockpit– इसमें पारंपरिक एनालॉग इंस्ट्रूमेंट के बजाय Glass Cockpit दिया गया है। इससे प्रशिक्षु पायलट को आगे चलकर आधुनिक फाइटर और अन्य सैन्य विमानों के डिजिटल कॉकपिट के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।
Zero-Zero Ejection Seat- इसकी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा खूबियों में Zero-Zero Ejection Seat शामिल है। इसका मतलब है कि इजेक्शन सीट को विमान की शून्य ऊंचाई और शून्य गति जैसी स्थिति में भी पायलट की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।
Hot Refuelling और जल्दी दोबारा उड़ान– HTT-40 में hot refuelling की सुविधा दी गई है। इसका मतलब है कि निर्धारित प्रक्रियाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान को इंजन बंद किए बिना ईंधन भरने की क्षमता। इसके साथ quick/ running pilot change-over भी है, जिससे ट्रेनिंग सॉर्टी के बीच समय कम करने में मदद मिलती है।
अब नजरTejas Mk1Aकी डिलीवरी पर
IAF को अपने लड़ाकू विमान बेड़े की संख्या और क्षमता दोनों बढ़ाने की जरूरत है। Tejas Mk1A इसी आवश्यकता को पूरा करने वाला महत्वपूर्ण स्वदेशी प्लेटफॉर्म है। HTT-40 के अलावा HAL लंबे समय से IAF के लिए Mk1A तैयार कर रहा है, लेकिन इसकी डिलीवरी भी इंजन सप्लाई और कुछ तकनीकी तथा स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाओं के कारण पीछे खिसकी।
HAL ने फरवरी 2026 में स्पष्ट किया था कि पांच Mk1A विमान डिलीवरी के लिए पूरी तरह तैयार हैं और अतिरिक्त नौ विमान बनकर उड़ान भर चुके हैं। हालांकि बाकी विमानों को GE से इंजन मिलने के बाद डिलीवरी के लिए तैयार किया जाना था।
इसके बाद GE Aerospace से F404 इंजन की सप्लाई में सुधार हुआ है। अगस्त 2026 में तीन और F404-IN20 इंजन HAL को मिलने की जानकारी सामने आई, जिससे Mk1A उत्पादन और डिलीवरी प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
HAL को उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक उसे 22 इंजन मिल जाएंगे, जिससे प्रोडक्शन लाइन्स की रफ़्तार और बढ़ सकेगी।
2021 में IAF के लिए 48 हजार करोड़ रुपेय में 83 विमानों का अनुबंध हुआ था।
सितंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय ने 97 और LCA Mk1A के लिए HAL के साथ 62,370करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध किया।
इसमें 68 सिंगल-सीटर फाइटर और 29 ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं।
Tejas Mk1Aकी क्या है खासियत?
HAL के अनुसार Mk1A, Tejas का सबसे उन्नत संस्करण है। इसमें AESAरडार, Beyond Visual RangeयानीBVRमिसाइल क्षमता,इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और हवा में ईंधन भरने की क्षमता जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
श्रेणी
Tejas Mk1Aकी प्रमुख जानकारी
निर्माता
Hindustan Aeronautics Limited (HAL)
भूमिका
Multirole Fighter — Air Defence, Air-to-Air, Air-to-Ground और Maritime Operations
पीढ़ी
4.5 Generation
इंजन
GE Aerospace F404-IN20 Afterburning Turbofan
इंजन पावर
लगभग 85 kN afterburner thrust
अधिकतम गति
लगभग Mach 1.6–1.8; कॉन्फिगरेशन/स्रोत के अनुसार आंकड़ा अलग मिलता है
कॉकपिट
आधुनिक Glass Cockpit
रडार
AESA Radar
AESAका फायदा
एक साथ कई लक्ष्यों को खोजने, ट्रैक करने और बेहतर situational awareness में मदद
Electronic Warfare
आधुनिक EW Suite, Radar Warning और Self-Protection Jamming
फ्लाइट कंट्रोल
Digital Flight Control Computer (DFCC) Mk1A
कम्युनिकेशन
आधुनिक Software-Defined Radio/secure communication क्षमता
डेटा लिंक
Network-centric operations के लिए आधुनिक data-link architecture
IFF
Combined Interrogator & Transponder (CIT) सहित आधुनिक पहचान प्रणाली
नेविगेशन
आधुनिक digital navigation systems
कॉकपिट डिस्प्ले
Smart Multi-Function Displays (SMFD)
Digital Map
Digital Map Generator (DMG)
Radio Altimeter
Advanced Radio Altimeter
BVRक्षमता
Beyond Visual Range air-to-air combat
हथियार
Air-to-Air missiles, BVR missiles, Air-to-Ground weapons और precision-guided weapons
मिसाइल क्षमता
Astra जैसी भारतीय BVR मिसाइलों के एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म
हार्डपॉइंट
बाहरी हथियार/पॉड ले जाने के लिए multiple hardpoints
Payload
लगभग 4टन वर्ग का बाहरी payload; वास्तविक load mission/configuration पर निर्भर
हवा में ईंधन भरना
Air-to-Air Refuelling (AAR) क्षमता
ऑल-वेदर क्षमता
दिन-रात और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में ऑपरेशन
भूमिका परिवर्तन
Air Defence से Ground Attack तक multi-role मिशन
स्वदेशी सामग्री
नए 97-विमान अनुबंध में 64%से अधिकindigenous content
नया ऑर्डर
97 LCA Mk1A के लिए ₹62,370करोड़ से अधिक का अनुबंध
IAFके लिए कुल बड़ा कार्यक्रम
पहले 83 विमानों के अनुबंध के बाद 97 अतिरिक्त Mk1A का ऑर्डर
मुख्य फायदा
IAF को आधुनिक स्वदेशी multirole fighter और fighter fleet संख्या बढ़ाने का विकल्प
Tejas Mk1A के पहले स्क्वाड्रन की तैनाती कहां ?
ऑपरेशनल असर को ज़्यादा से ज़्यादा करने के लिए, तेजस Mk1A के पहले स्क्वाड्रन राजस्थान में आगे की जगहों पर तैनात किए जाएंगे, खासकर बीकानेर के नाल एयर बेस पर। अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ ही किलोमीटर दूर तैनात होने की वजह से, इस रणनीतिक तैनाती से प्रतिक्रिया का समय बहुत कम हो जाता है। अगर हवाई क्षेत्र का उल्लंघन होता है, तो ये फाइटर जेट तुरंत उड़ान भरकर खतरों को रोक सकते हैं, जिससे भारत का पश्चिमी हवाई सुरक्षा तंत्र और मज़बूत होगा।
तेजस Mk1A बनाम J-10C
तेजस Mk1A की एक खास बात इसका बहुत कम रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) है। इसे बड़े पैमाने पर कम्पोजिट मटीरियल से बनाया गया है, इस पर रडार-एब्जॉर्बेंट पेंट की कोटिंग है, और इसके Y-शेप के एयर इनटेक इंजन के घूमते ब्लेड को छिपाते हैं; इस वजह से दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए इस जेट को पहचानना मुश्किल होता है।
डिफेंस एनालिसिस से पता चलता है कि Mk1A का फ्रंटल RCS, चेंगदू J-10C (चीन में बना फाइटर जेट जिसे पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) में शामिल किया जा रहा है) के मुकाबले लगभग 60% कम है।
हालांकि J-10C में भी रडार सिग्नेचर कम करने की खूबियां हैं, लेकिन इसका एयरफ्रेम बड़ा होने के कारण इसका रडार सिग्नेचर ज़्यादा होता है—एविएशन एनालिस्ट के अनुसार यह आमतौर पर 0.5 से 1.5 स्क्वायर मीटर के बीच होता है।
क्योंकि तेजस को डिटेक्ट करना मुश्किल है, इसलिए इसे भारी और आसानी से दिखने वाले दुश्मनों के मुकाबले “पहले ट्रैक करो, पहले शूट करो” का अहम फ़ायदा मिलता है।
‘बियॉन्ड विज़ुअल रेंज’ (BVR) कॉम्बैट में, भारतीय जेट देश में बनी ‘अस्त्र Mk1‘ एक्टिव रडार-गाइडेड मिसाइल पर निर्भर करता है। DRDO के हालिया सुधारों ने ‘अस्त्र Mk1’ की आमने-सामने की प्रभावी स्ट्राइक रेंज को लगभग 160 किलोमीटर तक बढ़ा दिया है।
इससे इसे PAF के J-10C बेड़े पर एक खास बढ़त मिलती है, जो PL-15E एक्सपोर्ट मिसाइल का इस्तेमाल करता है; यह हथियार आम तौर पर लगभग 145 किलोमीटर की रेंज तक ही सीमित है।