कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने की अमेरिकी कोशिशों को उत्तर कोरिया ने फिलहाल पलीता लगा दिया है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सालाना सैन्य अभ्यास उलची फ्रीडम शील्ड (Ulchi Freedom Shield) को छोटा किए जाने के ठीक बाद उत्तर कोरिया ने करीब 10 शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें समुद्र की ओर दाग दीं। दक्षिण कोरिया के अनुसार, मिसाइलें राजधानी प्योंगयांग के आसपास के इलाके से गुरुवार शाम करीब 5 बजे छोड़ी गईं और लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करके उत्तर कोरिया के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में गिरीं।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ फिर बातचीत शुरू करने की कूटनीतिक कोशिश के बीच दक्षिण कोरिया के साथ अमेरिकी सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती का आदेश दिया था। लेकिन प्योंगयांग ने इसे पर्याप्त रियायत मानने से इनकार कर दिया। मिसाइल परीक्षण से साफ है कि उत्तर कोरिया, अमेरिका के इस कदम को तत्काल बातचीत की शुरुआत का आधार बनाने के बजाय अपनी सैन्य और रणनीतिक स्थिति मजबूत रखने को प्राथमिकता दे रहा है।
अमेरिका ने क्यों घटाया था सैन्य अभ्यास?
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले से हुई। ट्रंप ने पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास को “substantially reduce” करने का निर्देश दिया था। इसके पीछे उन्होंने अभ्यास की लागत और ईरान युद्ध के मुद्दे पर दक्षिण कोरिया के समर्थन की कमी का हवाला दिया। साथ ही ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया।
- इस साल का उलची फ्रीडम शील्ड अभ्यास 17 अगस्त से शुरू हुआ था और मूल कार्यक्रम के अनुसार 27 अगस्त तक चलना था।
- इसमें करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक शामिल होने थे।
- अभ्यास में केवल पारंपरिक युद्ध ही नहीं, बल्कि ड्रोन, GPS व्यवधान, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी आधुनिक चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी शामिल थी।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन अभ्यासों को रक्षात्मक बताते हैं। इसके विपरीत उत्तर कोरिया इन्हें अपने खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी मानता है। यही वजह है कि हर साल इन अभ्यासों के दौरान प्योंगयांग की तरफ से मिसाइल परीक्षण या कड़े बयान सामने आते हैं।
अमेरिकी पहल कैसे हुई खारिज ?
अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने इस बार उलची अभ्यास की अवधि लगभग आधी कर दी और कुछ फील्ड ट्रेनिंग गतिविधियों को भी रद्द किया। बाद में दोनों देशों की सेनाओं ने अभ्यास को तय समय से छह दिन पहले समाप्त कर दिया।
लेकिन किम जोंग उन की बहन और उत्तर कोरिया की प्रभावशाली नेता किम यो जोंग ने अमेरिकी पहल को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि अभ्यास का आकार और अवधि कम करने से उसकी “उकसावे वाली और आक्रामक प्रकृति” नहीं बदलती। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका इस कदम को सद्भावना का संकेत मानकर पेश कर रहा है तो उसे अपनी अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी।
यानी प्योंगयांग का संदेश है कि केवल सैन्य अभ्यासों में कटौती पर्याप्त नहीं है। वह अमेरिका से अपनी नीति में कहीं अधिक बड़ा बदलाव चाहता है।
ट्रंप-किम मुलाकात में सबसे बड़ी अड़चन क्या?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस साल किम जोंग उन से फिर मुलाकात करना चाहते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने भी कहा है कि वह उत्तर कोरिया के साथ बिना पूर्व शर्त बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन प्योंगयांग का रुख फिलहाल बेहद सावधान है।
किम यो जोंग ने ट्रंप और अपने भाई के बीच व्यक्तिगत संबंधों को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने दोनों नेताओं के रिश्ते को “excellent” बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि व्यक्तिगत संबंध उत्तर कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को नहीं बदल सकते। उन्होंने ट्रंप के उस दावे का भी खंडन किया कि किम जोंग उन ने बातचीत के उनके अनुरोध का जवाब दिया है।
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। उत्तर कोरिया दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं कर रहा, लेकिन वह बातचीत की मेज पर कमजोर स्थिति में भी नहीं जाना चाहता।
उत्तर कोरिया की क्या है रणनीति?
2019 में ट्रंप और किम के बीच परमाणु वार्ता उस समय टूट गई थी जब अमेरिका और उत्तर कोरिया प्रतिबंधों में राहत तथा परमाणु हथियार कार्यक्रम को खत्म करने की शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए थे। उसके बाद प्योंगयांग ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को और आगे बढ़ाया।
आज उत्तर कोरिया की स्थिति 2018-19 के मुकाबले अलग है। उसने रूस के साथ सैन्य और आर्थिक संबंध बढ़ाए हैं और चीन के साथ भी उसके संबंध महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इससे प्योंगयांग की अमेरिका से तत्काल प्रतिबंध राहत हासिल करने की निर्भरता कम हुई है।
इसीलिए मिसाइल प्रक्षेपण को एक तरह की रणनीतिक दबाव की नीति के रूप में भी देखा जा सकता है। उत्तर कोरिया यह दिखाना चाहता है कि अमेरिका सैन्य अभ्यास घटाए या बातचीत का प्रस्ताव दे, लेकिन प्योंगयांग अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमता को कमजोर करने के लिए तैयार नहीं है।
दक्षिण कोरिया के लिए क्या मायने?
दक्षिण कोरिया के लिए यह घटनाक्रम दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक तरफ वह अमेरिका की ओर से सैन्य अभ्यासों में कटौती से संयुक्त सैन्य तैयारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर उत्तर कोरिया की सैन्य-रक्षा क्षमता में विस्तार की महात्वाकांक्षा पर कोई नियंत्रण नहीं दिख रहा है। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया से बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण रोकने की अपील की है।
उलची फ्रीडम शील्ड का उद्देश्य केवल युद्धाभ्यास करना नहीं है। यह दोनों सेनाओं के बीच कमांड, संचार और संयुक्त प्रतिक्रिया की क्षमता को परखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके आकार में कटौती से दक्षिण कोरिया की तत्काल युद्ध क्षमता खत्म नहीं होती, लेकिन लंबे समय में संयुक्त तैयारी की निरंतरता पर सवाल जरूर उठ सकते हैं।
दक्षिण कोरिया को अब एक कठिन संतुलन बनाना होगा—एक ओर वह उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने की कोशिश करे और दूसरी ओर अमेरिकी सुरक्षा छतरी तथा सैन्य तैयारी को कमजोर भी न होने दे।
जापान भी चिंतित-
मिसाइल परीक्षण का असर केवल दोनों कोरिया तक सीमित नहीं है। जापान ने भी प्रक्षेपण का पता लगाया और अमेरिका, दक्षिण कोरिया तथा जापान के बीच सुरक्षा सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। शुक्रवार को तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर कोरियाई मिसाइल प्रक्षेपण के बाद तत्काल बातचीत की। उत्तर कोरिया जापान की बढ़ती सैन्य क्षमता और अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग को अपने लिए एक बड़ी चुनौती मानता है।
आगे क्या?
आने वाले दिनों में तीन संभावनाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहली, उत्तर कोरिया और मिसाइल परीक्षण कर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन जारी रख सकता है। दूसरी, वह कड़े बयान जारी करते हुए अमेरिका से और बड़ी रियायतों की मांग कर सकता है। तीसरी और सबसे दिलचस्प संभावना यह है कि लंबे समय तक दबाव बनाने के बाद वह बातचीत की ओर लौटे—लेकिन अपनी शर्तों पर।
Reuters के मुताबिक, उत्तर कोरिया की मौजूदा प्रतिक्रिया पूरी तरह संवाद का दरवाजा बंद करने जैसी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग अमेरिकी नीति में अधिक अनुकूल बदलाव चाहता है और भविष्य की बातचीत के लिए जमीन तैयार कर रहा हो सकता है।
उत्तर कोरिया द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण ट्रंप की कूटनीतिक पहल, अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य गठबंधन और किम जोंग उन की बदलती रणनीति—तीनों के बीच शक्ति परीक्षण भी है।
वाशिंगटन ने सैन्य अभ्यास घटाकर बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश की, लेकिन प्योंगयांग ने जवाब में मिसाइलें दागकर दिखाया कि वह केवल अमेरिकी रियायत से प्रभावित होने वाला नहीं है। उत्तर कोरिया अब बातचीत में परमाणु निरस्त्रीकरण को स्वीकार करने के बजाय अपनी परमाणु ताकत को वास्तविकता के रूप में स्वीकार कराने और आर्थिक-सैन्य रियायतें हासिल करने की कोशिश करता दिख रहा है।








