भारत के रणनीतिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सितंबर की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में हवाई गतिविधि के लिए लगभग 2,995 किलोमीटर लंबा NOTAM यानी Notice to Air Missions जारी किया है। यह NOTAM 2 और 3 सितंबर 2026 के लिए संभावित मिसाइल गतिविधि से जुड़ा बताया जा रहा है। इतनी लंबी समुद्री सुरक्षा सीमा ने रक्षा विशेषज्ञों और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषकों का ध्यान खींचा है और इसी के साथ एक बार फिर भारत की बहुचर्चित Agni-6 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
इस लॉन्च के ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से होने की उम्मीद है। यह केंद्र डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) और स्ट्रैटेजिक फोर्सेज़ कमांड (SFC) द्वारा संचालित किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इस जगह पर भारत के सबसे महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण हुए हैं, जिनमें अग्नि सीरीज़ और पनडुब्बी से लॉन्च होने वाले सिस्टम शामिल हैं।
यह एडवाइज़री समुद्र की सतह से लेकर असीमित ऊंचाई तक लागू है, ताकि ‘Air Missions’ के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके तहत एक बड़े हिस्से में नागरिक विमानों और समुद्री जहाजों की आवाजाही पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी गई है।
रणनीतिक हथियारों के परीक्षण के दौरान ऐसे उपाय आम बात हैं, ताकि मलबे के गिरने या मिसाइल के रास्ते में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
क्या होता है NOTAM ?
NOTAM (Notice to Air Missions) विमानन क्षेत्र में जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक और तात्कालिक सूचना संदेश है। इसका उद्देश्य पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और विमान संचालन से जुड़े लोगों को फ़्लाइट रूट या एयरपोर्ट पर संभावित खतरों, ऑपरेशनल बदलावों या अस्थायी पाबंदियों के बारे में आगाह करना होता है।
NOTAM कई परिस्थितियों में जारी हो सकता है:-
- किसी रनवे के अस्थायी रूप से बंद होने पर
- किसी हवाई अड्डे की नेविगेशन सुविधा के उपलब्ध न होने पर
- एयरस्पेस में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने पर
- मिसाइल या रॉकेट परीक्षण के दौरान
- सैन्य अभ्यास या अन्य सैन्य गतिविधि के दौरान
- किसी क्षेत्र में ड्रोन गतिविधि के कारण
- हवाई क्षेत्र में संभावित खतरे या बाधा की स्थिति में
मिसाइल टेस्ट में NOTAM क्यों जारी होता है?
जब किसी देश की सेना या अंतरिक्ष एजेंसी समुद्र अथवा अन्य क्षेत्र की ओर मिसाइल/रॉकेट का परीक्षण करती है, तो उसकी संभावित उड़ान पथ या मलबा गिरने वाले क्षेत्र में सामान्य विमानन गतिविधि को रोकना जरूरी हो सकता है।
ऐसे में संबंधित विमानन प्राधिकरण NOTAM जारी कर सकता है। इसमें आम तौर पर क्षेत्र की भौगोलिक सीमाएं, तारीख, समय और गतिविधि से संबंधित operational restrictions दी जाती हैं।
उदाहरण के लिए, यदि समुद्र के ऊपर एक लंबा क्षेत्र NOTAM के तहत रखा गया है, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि उस अवधि में उस क्षेत्र में सामान्य विमान संचालन से बचने या विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अगस्त में अग्नि-4 का सफल परीक्षण
इस घटनाक्रम को समझने के लिए अगस्त में हुए परीक्षण को देखना जरूरी है। 6 अगस्त 2026 को भारत ने Agni-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित Integrated Test Range से किया गया और इसमें मिसाइल के सभी परिचालन तथा तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक सत्यापित किया गया।
यह परीक्षण Strategic Forces Command (SFC) की अगुआई में हुआ था। यानी यह केवल किसी प्रयोगशाला स्तर का परीक्षण नहीं था, बल्कि भारत की रणनीतिक मिसाइल क्षमता के परिचालन पक्ष से जुड़ा परीक्षण था।
- Agni-4 को भारत की मध्यम/मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल श्रेणी में रखा जाता है।
- इसकी रेंज लगभग 4,000 किलोमीटर तक है।
- यह ठोस ईंधन वाली दो-चरणीय मिसाइल है।
मई में हुआ था बड़ा MIRV परीक्षण
भारत के रणनीतिक मिसाइल कार्यक्रम में इस साल का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम मई में सामने आया था।
8 मई 2026 को भारत ने एक Advanced Agni missile का सफल flight trial किया था, जिसमें Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle यानी MIRV प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस परीक्षण में एक ही मिसाइल से कई payloads को अलग-अलग भौगोलिक लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया गया। इनके पूरे प्रक्षेप पथ को जमीन और समुद्र पर मौजूद tracking तथा telemetry systems ने मॉनिटर किया।
MIRV तकनीक का महत्व इसलिए है क्योंकि एक बैलिस्टिक मिसाइल के payload section में एक से अधिक re-entry vehicles रखे जा सकते हैं और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों की ओर भेजा जा सकता है।
यह तकनीक रणनीतिक मिसाइलों की क्षमता को केवल उनकी रेंज बढ़ाने से कहीं आगे ले जाती है। एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता किसी विरोधी के missile-defence calculations को भी जटिल बना सकती है।
भारत ने 2024 में भी Agni-5 के साथ MIRV technology का पहला flight demonstration किया था।
फिर Agni-6 की चर्चा क्यों?
यहीं से नए NOTAM को लेकर Agni-6 की चर्चा शुरू होती है। फिलहाल रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल के प्रकार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, जिससे कई संभावनाएं बनी हुई हैं। जैसे कि एक और AGNI-4 या AGNI-5 का परीक्षण, या फिर बेहद गोपनीय AGNI-6 ICBM का परीक्षण।
- AGNI-4 की रेंज 4,000 km बताई जाती है, जबकि AGNI-5 की रेंज 5,000 km से ज़्यादा है।
- सबसे अहम सवाल यह है कि यदि Agni-6, 8,000–10,000 किलोमीटर या उससे अधिक की श्रेणी की मिसाइल है, तो उसका NOTAM केवल 2,995 किलोमीटर क्यों होगा?
इसका सीधा उत्तर यह है कि किसी नई मिसाइल के हर परीक्षण में उसकी पूरी अधिकतम रेंज प्रदर्शित करना आवश्यक नहीं होता। विकासात्मक परीक्षण में propulsion, guidance, stage separation, re-entry vehicle या अन्य तकनीकों में से किसी एक को सत्यापित करने के लिए कम दूरी की flight भी की जा सकती है। अगर AGNI-6 का इस्तेमाल होता भी है, तो यह शायद कम रेंज वाली कंपोनेंट-वैलिडेशन फ़्लाइट होगी, न कि इसकी पूरी क्षमता का प्रदर्शन।
फिर भी, AGNI-6 को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। वहीं DRDO के पूर्व चेयरमैन समीर वी. कामथ कह चुके हैं कि मिसाइल तकनीकी रूप से तैयार है और बस सरकार की अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार है।
- बताया जाता है कि अग्नि-6 चार-स्टेज वाला, सॉलिड-फ्यूल वाला हथियार है जो 10 से 12 MIRV वॉरहेड ले जा सकता है।
- इसका पेलोड लगभग 3 टन और कुल वज़न 55–70 टन है।
फिलहाल 2,995 किलोमीटर का corridor भारत की मौजूदा रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों के कुछ संभावित परीक्षण प्रोफाइल के भीतर भी आ सकता है। इसलिए केवल NOTAM के आधार पर Agni-6 को पहचान लेना जल्दबाजी हो सकती है।
भारत की अग्नि श्रेणी की मिसाइलें बनाम चीनी और पाकिस्तानी मिसाइलें
भारत के पास एमआरबीएम से लेकर आइआरबीएम और आइसीबीएम श्रेणी की घातक मिसाइलें तो चीन के पास भी हैं। हालांकि पाकिस्तान आइआरबीएम और आइसीबीएम श्रेणी में कहीं नहीं है।
| देश | मिसाइल | श्रेणी | रेंज | स्थिति | MIRV | प्रमुख बात |
|---|
| भारत | Agni-II | MRBM | 2,000 किमी | Operational | नहीं | मोबाइल/रेल-आधारित |
| भारत | Agni-III | IRBM | 3,000 किमी | Operational | नहीं | भारी payload क्षमता |
| भारत | Agni-IV | IRBM | 4,000 किमी | Operational | नहीं | लंबी दूरी, मोबाइल |
| भारत | Agni-V | Long-range ballistic missile / ICBM-class* | 5,000+ किमी | Operational/inducted | हाँ, demonstrated | Mission Divyastra में MIRV flight test |
| भारत | Agni-VI | ICBM — प्रस्तावित | अनुमानित 10,000+ किमी† | Development pending approval | संभावित, पुष्टि नहीं | अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की प्रणाली |
| चीन | DF-21 | MRBM | 1,500–2,150 किमी | Operational | नहीं | कई variants |
| चीन | DF-26 | IRBM | 4,000–5,000 किमी | Operational | नहीं | Nuclear/conventional; anti-ship भूमिका |
| चीन | DF-31A/AG | ICBM | 11,000+ किमी | Operational | क्षमता variant-dependent | लंबी दूरी, mobile/silo variants |
| चीन | DF-41 | ICBM | 12,000–15,000 किमी | Operational | हाँ, reportedly | Road-mobile; चीन की सबसे लंबी-range missiles में से एक |
| पाकिस्तान | Shaheen-II | MRBM | 1,500–2,000 किमी | Operational | नहीं | Solid-fuel |
| पाकिस्तान | Shaheen-III | MRBM | 2,750 किमी | Operational/deployed* | नहीं | पाकिस्तान की सबसे लंबी घोषित Shaheen range |
| पाकिस्तान | Ababeel | MRBM | 2,200 किमी | Development | MIRV का दावा | स्वतंत्र पुष्टि सीमित |
निष्कर्ष ?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात Agni-6 का नाम नहीं, बल्कि भारत के रणनीतिक परीक्षणों की लगातार बढ़ती तकनीकी जटिलता है।
मई में Advanced Agni के साथ MIRV परीक्षण हुआ। अगस्त में Agni-4 का सफल operational test हुआ। अब सितंबर के लिए लगभग 2,995 किलोमीटर का समुद्री NOTAM सामने आया है।
यह घटनाक्रम बताता है कि भारत अपनी ballistic-missile force में केवल नई मिसाइलें जोड़ने पर नहीं, बल्कि re-entry technology, multiple payloads, guidance, survivability और operational reliability जैसी क्षमताओं को भी लगातार विकसित और सत्यापित कर रहा है।
क्योंकि भारत सरकार या रक्षा मंत्रालय ने आगामी परीक्षण की मिसाइल की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए सबसे तथ्यात्मक निष्कर्ष यही है कि सितंबर 2–3 का NOTAM एक संभावित लंबी दूरी की missile activity का संकेत देता है, लेकिन Agni-6 की पुष्टि अभी बाकी है।








