रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग अब एक नए और अधिक गंभीर चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। Defence Intelligence of Ukraine (DIU/GUR) के अनुसार, उत्तर कोरिया ने रूस को अपनी भारी Hwasong-11C बैलिस्टिक मिसाइलें उपलब्ध कराई हैं। इसे पश्चिमी वर्गीकरण में KN-30 कहा जाता है और और इसे KN-23 परिवार का भारी तथा उन्नत संस्करण माना जाता है।
यह पहली बार है जब KN-30 के रूस पहुंचने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि रूस पहले से ही उत्तर कोरिया के KN-23 और KN-24 जैसे बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर चुका है। अब KN-30 की इंट्री से रूस के पास यूक्रेन के खिलाफ हमलों के लिए उत्तर कोरिया निर्मित एक और भारी मिसाइल का विकल्प उपलब्ध हो गया है।
रूस के पास 50 उत्तर कोरियाई मिसाइलें
यूक्रेन की Defence Intelligence के मुताबिक जुलाई 2026 तक रूस के पास उत्तर कोरिया की लगभग 50 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। इनमें KN-23, KN-24 और KN-30 शामिल हैं। यह आंकड़ा केवल KN-30 का नहीं, बल्कि इन तीनों प्रकारों का संयुक्त अनुमान है। उपलब्ध जानकारी में KN-30 की अलग संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों की निगरानी में उत्तर कोरियाई मिसाइलों की पहचान लंबे समय से KN-23 परिवार के रूप में होती रही है। विशेषज्ञ स्रोतों के अनुसार Hwasong-11 परिवार में Hwasong-11A यानी KN-23, Hwasong-11B यानी KN-24 और भारी Hwasong-11C शामिल हैं।
KN-30 कितना खतरनाक?
Hwasong-11C यानी KN-30 ठोस ईंधन वाला शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है और मूल KN-23 की तुलना में भारी पेलोड ले जाने के लिए विकसित किया गया है। इसे Hwasong-11Da के नाम से भी जाना जाता है।
- यह मिसाइल सॉलिड-फ्यूल वाले इंजन से चलती है और इसे मोबाइल ग्राउंड-बेस्ड लॉन्चर से लॉन्च किया जाता है।
- ह्वासोंग-11C का पहला ज्ञात टेस्ट लॉन्च 25 मार्च, 2021 को हुआ था। उस समय, टेस्ट मिसाइल ने कम से कम 600 किलोमीटर की रेंज दिखाई थी।
- फिर भी KN-30 का मूल महत्व उसके भारी वारहेड और बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र में है।
- उत्तर कोरियाई दावे के अनुसार यह 2,500 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकता है
- ऐसे मिसाइलों को रोकना सामान्य क्रूज मिसाइलों की तुलना में अधिक कठिन होता है क्योंकि उनकी उड़ान गति और प्रक्षेप वक्र वायु रक्षा के लिए अलग चुनौती पैदा करते हैं।
रूस ने Voronezh में तैनात किए लॉन्चर?
यूक्रेनी खुफिया से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने Voronezh Oblast में उत्तर कोरियाई मिसाइलों के लिए छह लॉन्चरों की तैनाती की दिशा में कदम उठाया है। ISW के अनुसार इन छह लॉन्चरों से कुल मिलाकर 120 मिसाइलों को फायर करने की क्षमता बताई गई है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 120 मिसाइलों की क्षमता का अर्थ यह नहीं है कि रूस के पास अभी 120 KN-30 मिसाइलें मौजूद हैं। यह लॉन्चर यूनिट की संभावित कुल मिसाइल क्षमता को दर्शाता है, जबकि DIU ने जुलाई तक KN-23, KN-24 और KN-30 की संयुक्त संख्या करीब 50 बताई है।
कुछ रिपोर्टों में लगभग 90 उत्तर कोरियाई सैन्य कर्मियों के Voronezh क्षेत्र में पहुंचने और छह लॉन्चरों के संचालन से जुड़े होने का दावा भी किया गया है।
किन यूक्रेनी इलाकों पर बढ़ सकता है खतरा?
Voronezh की भौगोलिक स्थिति इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाती है। ISW के अनुसार वहां से उत्तर कोरियाई मिसाइलें यूक्रेन के Sumy, Kharkiv, Chernihiv, Poltava, Kyiv, Dnipropetrovsk और Zaporizhia क्षेत्रों को निशाना बनाने की क्षमता रखती हैं।
इसका मतलब यह है कि उत्तर कोरियाई मिसाइलों का इस्तेमाल केवल अग्रिम मोर्चे के नजदीकी सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकता। लॉजिस्टिक हब, सैन्य डिपो, ऊर्जा प्रतिष्ठान, रेलवे नेटवर्क और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा भी संभावित लक्ष्य बन सकते हैं।
हालांकि अभी तक KN-30 के यूक्रेन के खिलाफ वास्तविक युद्धक इस्तेमाल का स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिला है।
रूस को उत्तर कोरिया की जरूरत क्यों ?
इस घटनाक्रम को रूस के व्यापक मिसाइल उत्पादन और भंडार के संदर्भ में देखना जरूरी है। DIU के अनुसार रूस के पास बड़ी संख्या में अपने मिसाइल सिस्टम मौजूद हैं और उसका सैन्य औद्योगिक परिसर अब भी तेज गति से उत्पादन कर रहा है।
- 5 अगस्त 2026 तक रूस के पास करीब 130 Iskander-M 9M723 बैलिस्टिक मिसाइलें, लगभग 120 Zircon, 100 Kh-101 और करीब 50 Kinzhal मिसाइलें होने का अनुमान था। इसके अलावा करीब 600 Oniks और 450 Kalibr मिसाइलों का भंडार भी बताया गया।
- रूस हर महीने 200 से अधिक क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन करने की क्षमता रखता है।
- जुलाई में उसने 65 Iskander-M मिसाइलें और 87 Kh-101 क्रूज मिसाइलें बनाई थीं।
- इसलिए उत्तर कोरियाई मिसाइलों की जरूरत का मतलब यह नहीं कि रूस के पास अपने मिसाइल खत्म हो गए हैं।
- बल्कि यह रूस को अतिरिक्त मिसाइल स्टॉक, अलग-अलग हथियार प्रणालियों और बड़े संयुक्त हमलों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराता है।
पहले भी यूक्रेन पर इस्तेमाल हो चुकी हैं उत्तर कोरियाई मिसाइलें
रूस द्वारा उत्तर कोरियाई मिसाइलों का इस्तेमाल कोई नया घटनाक्रम नहीं है। Reuters ने जुलाई 2026 में रिपोर्ट किया था कि रूस ने Kryvyi Rih के पास Radushne पर हुए हमले में संभवतः उत्तर कोरियाई KN-23 या KN-24 मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इस हमले में एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत हुई थी। यूक्रेनी रडार डेटा में उत्तर कोरियाई मिसाइलों के अनुरूप उड़ान पथ पाए गए थे, जबकि अंतिम पुष्टि के लिए मलबे की जांच की जा रही थी।
इससे पहले 2023 के अंत और 2024 की शुरुआत में भी रूस द्वारा उत्तर कोरियाई KN-23/KN-24 मिसाइलों के इस्तेमाल की पुष्टि संबंधी रिपोर्टें सामने आई थीं। Reuters के अनुसार यूक्रेनी जांचकर्ताओं ने 2023 के अंत से 2024 की शुरुआत तक रूस द्वारा दागी गई लगभग 50 उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों के मलबे की जांच की थी।
रूस-उत्तर कोरिया सैन्य गठजोड़ का नया चरण
KN-30 का रूस पहुंचना केवल एक हथियार सौदे का मामला नहीं है। यह Moscow-Pyongyang सैन्य साझेदारी के गहराने का संकेत है। उत्तर कोरिया पहले ही रूस को भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री उपलब्ध करा चुका है। बदले में रूस से तकनीकी सहायता, सैन्य अनुभव और अन्य प्रकार के समर्थन मिलने की आशंका पश्चिमी देशों में लंबे समय से व्यक्त की जाती रही है।
यूक्रेन का युद्ध उत्तर कोरिया के लिए वास्तविक युद्धक्षेत्र में अपने हथियारों के प्रदर्शन का अवसर भी बन रहा है। किसी मिसाइल को वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल करने से उसके प्रदर्शन, विश्वसनीयता, नेविगेशन और वायु रक्षा के खिलाफ उसकी प्रभावशीलता से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा हासिल किया जा सकता है।
यही वजह है कि KN-30 की तैनाती का प्रभाव केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं माना जा रहा। यदि उत्तर कोरिया को रूस के साथ सहयोग से अपने मिसाइलों की तकनीकी कमियों को दूर करने में मदद मिलती है, तो इसका असर भविष्य में दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए खतरे पर भी पड़ सकता है।
क्या बदल सकता है युद्ध का समीकरण?
KN-30 की मौजूदगी रूस की स्ट्राइक क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव करती है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। रूस के पास पहले से ही बड़ी संख्या में Iskander, Kalibr, Oniks, Zircon और अन्य मिसाइल प्रणालियां हैं।
लेकिन उत्तर कोरियाई मिसाइलों की अतिरिक्त आपूर्ति रूस को अपने मौजूदा हथियार भंडार को बचाने और अलग-अलग प्रणालियों को मिलाकर बड़े हमले करने में मदद कर सकती है। ISW ने भी आकलन किया है कि रूस लगातार बड़े संयुक्त मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए मिसाइलें जमा कर रहा है।








