भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंचती दिख रही है, जहां स्वदेशी प्रलय मिसाइल दोनों देशों के सैन्य सहयोग का अगला बड़ा अध्याय बन सकती है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आर्मेनिया भारत की प्रलय मिसाइल में गहरी रुचि दिखा रहा है और इस पर बातचीत आगे बढ़ रही है।
कई मिलियन डॉलर की ये बातचीत 50 से ज़्यादा ‘प्रलय’ मिसाइलों की खरीद पर केंद्रित बताई जा रही है। अगर यह सौदा पक्का हो जाता है, तो आर्मेनिया इस एडवांस्ड टैक्टिकल हथियार प्रणाली का इस्तेमाल करने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटर बन जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत तेजी से आर्मेनिया के प्रमुख रक्षा साझेदारों में शामिल हो रहा है। 17-18 अगस्त 2026 को भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आर्मेनिया का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा एवं सैन्य-तकनीकी सहयोग के साथ-साथ प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा अनुसंधान एवं विकास पर विस्तार से चर्चा की। संयुक्त सहयोग, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी हुआ।
‘प्रलय’ क्यों है खास ?
प्रलय केवल एक और मिसाइल प्रणाली नहीं है। यह भारत की उस रक्षा तकनीकी क्षमता का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे अब घरेलू इस्तेमाल से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
- प्रलय एक स्वदेशी, अर्द्ध-बैलिस्टिक और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
- इसे DRDO ने विकसित किया है और इसमें आधुनिक गाइडेंस एवं नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।
- इस मिसाइल की रेंज 150-500 किलोमीटर है और इसे मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है।
- हालांकि एक्सपोर्ट-वर्शन की रेंज 290–300 किलोमीटर तक हो सकती है।
- इसकी पेलोड क्षमता 500 से 1000 किलोग्राम है।
- यह विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है और इसे उच्च सटीकता के साथ अलग-अलग लक्ष्यों के विरुद्ध इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है।
आर्मेनिया को प्रलय से क्या फायदा ?
आर्मेनिया के लिए प्रलय की सबसे बड़ी उपयोगिता उसकी मोबाइल और सटीक स्ट्राइक क्षमता हो सकती है। इसके अलावा, क्वासी-बैलिस्टिक उड़ान प्रोफाइल और उच्च गति वाली उड़ान इसे पारंपरिक आर्टिलरी सिस्टम से अलग श्रेणी की क्षमता प्रदान करती है।
आर्मेनिया की सुरक्षा चिंताएं मुख्य रूप से अजरबैजान के साथ उसके लंबे समय से चले आ रहे तनाव से जुड़ी हैं। उसको क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए इस तकनीक की ज़रूरत है।
ऐसे वातावरण में जमीन से लॉन्च होने वाली मोबाइल मिसाइल प्रणाली किसी देश को महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और अन्य लक्ष्यों के खिलाफ दूर से प्रहार करने की क्षमता प्रदान कर सकती है।
प्रलय का मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म इसकी तैनाती में लचीलापन बढ़ाता है। ऐसी प्रणाली को अलग-अलग स्थानों पर तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे उसकी survivability बढ़ती है और दुश्मन के लिए लॉन्चर का पता लगाना कठिन हो सकता है।
एक्सपोर्ट कॉन्फ़िगरेशन मुख्य मुद्दा
‘प्रलय’ मिसाइल को लेकर हो रही चर्चाओं में सबसे अहम बात यह है कि भारत विदेशी ग्राहकों को इसका कौन सा कॉन्फ़िगरेशन (वर्ज़न) ऑफ़र कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सपोर्ट के लिए ‘प्रलय’ को लगभग 290-300 किलोमीटर की रेंज और कम पेलोड के साथ तैयार किया जा सकता है, ताकि भारत मिसाइल एक्सपोर्ट से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के दायरे में रहे।
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि ‘मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम’ (MTCR) उन रक्षा उत्पादों के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगाता है जो 300 किलोमीटर या उससे ज़्यादा की दूरी तक 500 किलोग्राम का पेलोड ले जाने में सक्षम हों।
ऐसे में, इन सीमाओं से कम क्षमता वाला एक्सपोर्ट कॉन्फ़िगरेशन भारत को ज़्यादा लचीलापन दे सकता है और साथ ही आर्मेनिया को सटीक हमले (प्रिसिजन-स्ट्राइक) की बड़ी क्षमता भी प्रदान कर सकता है।
आर्मेनिया पहले से खरीद रहा है भारतीय हथियार
प्रलय की संभावित डील को समझने के लिए भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंधों की पिछली प्रगति को देखना जरूरी है। आर्मेनिया पहले ही भारत से कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियां खरीद चुका है। इनमें पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, स्वाथी वेपन लोकेटिंग रडार और अन्य भारतीय रक्षा उपकरण शामिल हैं।
जनवरी 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर में आर्मेनिया के लिए गाइडेड पिनाका रॉकेटों की पहली खेप रवाना की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि पिनाका रॉकेटों का निर्यात शुरू हो चुका है और यह भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती निर्यात क्षमता का प्रमाण है।
इससे पता चलता है कि भारत और आर्मेनिया के बीच संबंध केवल संभावित भविष्य के सौदों तक सीमित नहीं हैं। भारतीय हथियार प्रणालियां पहले से आर्मेनिया की रक्षा संरचना का हिस्सा बन रही हैं।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अगस्त यात्रा के दौरान दोनों देशों ने Joint Services Staff Talks को संस्थागत रूप देने के लिए Terms of Reference का आदान-प्रदान किया। इससे दोनों सेनाओं के बीच नियमित सैन्य संवाद का ढांचा मजबूत होगा।
भारत के लिए प्रलय निर्यात कितना बड़ा कदम होगा?
अगर आर्मेनिया के साथ प्रलय का सौदा अंतिम रूप लेता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। कारण यह है कि भारत अब केवल गोला-बारूद, रडार और तोपखाने जैसे उपकरणों का निर्यातक नहीं रहेगा, बल्कि उन्नत सटीक-स्ट्राइक मिसाइल तकनीक के वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह मजबूत करेगा।
कई अन्य एशियाई देश भी इस उन्नत सामरिक मिसाइल प्रणाली का आकलन कर रहे हैं।
भारत का रक्षा निर्यात पहले ही तेज गति से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपये से 62.66 प्रतिशत अधिक है।
ऐसे माहौल में प्रलय जैसा स्वदेशी हथियार भारत के लिए उच्च तकनीक वाले रक्षा निर्यात का महत्वपूर्ण उत्पाद बन सकता है।








