रूस के साथ चल रही लड़ाई के बीच यूक्रेन के हाथ एक नया और घातक युद्क ड्रोन हाथ लगने जा रहा है। यूक्रेनी डिफेंस टेक्नोलाजी कंपनी SkyFall ने एक नया मध्यम दूरी का स्ट्राइक ड्रोन बनाने में सफलता हासिल की है। 600 किमी. की रेंज वाला यह नया हथियार रूस को निशाना में यूक्रेन का मददगार होगा।
इस नए स्ट्राइक ड्रोन में हैं खतरनाक खूबियां
- इसमें लगभग 50 किग्रा वजन का वारहेड लगा है।
- ड्रोन की अनुमानित यूनिट लागत 25000 से 30000 डालर है।
- इस सिस्टम ने आपरेशनल स्थितियों में सफल कॉम्बैट परफॉर्मेंस (युद्धक क्षमता का प्रदर्शन) किया है।
हर माह मिलेंगे 1000 ड्रोन
मिशन रिक्वायरमेंट के हिसाब से इस सिस्टम में फ्रैगमेंटेशन वारहेड, हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन (HE-FRAG) वारहेड या दूसरे तरह के वारहेड लगाए जा सकते हैं। कंपनी का लक्ष्य साल के आखिर तक हर महीने 1000 ड्रोन बनाने की क्षमता हासिल करना है। यही नहीं, उसने यूक्रेनी रक्षा बलों को ये सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए पहले ही अंतरराष्ट्रीय पार्टनर के साथ समझौते कर लिए हैं।
यह किस प्रकार होगा उपयोगी
- 600 किमी की रेंज के कारण यह फ्रंट लाइन से काफी दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंच सकता है।
- लागत कम होने के कारण बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- महंगे हथियारों, मिसाइलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
- रूस के अंदर या अग्रिम मोर्चे पर स्थित सैन्य और लॉजिस्टिक ठिकानों पर हमले को और बनाएगा घातक
डिफेंस टेक्नोलाजी व वेपन डेवलपमेंट में क्यों अग्रणी है स्काईफाल
स्काईफाल मुख्य रूप से अपने Vampire बॉम्बर ड्रोन, Shrike FPV ड्रोन और P1-SUN इंटरसेप्टर ड्रोन के लिए जानी जाती है। बीते जुलाई में कंपनी ने P1-SUN इंटरसेप्टर ड्रोन का एक नया वर्जन पेश किया था, जिसे जेट-पावर्ड अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है। जेटकिलर कहा जा रहा यह नया वर्शन पहली बार फार्नबोरो इंटरनेशनल एयरशो में पेश किया गया था।

SkyFall’s P1-SUN JetKiller interceptor drone. Photo credits: SkyFall
इसकी युद्धक खूबियां नहीं हैं कम
- यह इंटरसेप्टर 370 km/h तक की रफ़्तार पकड़ सकता है।
- इसकी ऑपरेशनल रेंज 30 km तक है, यह 9,000 मीटर तक की ऊंचाई पर काम कर सकता है।
- 15 मिनट तक हवा में रह सकता है। इसमें 500 ग्राम का वॉरहेड लगा होता है।
- P1-SUN जेटकिलर कई कॉन्फ़िगरेशन में उपलब्ध है, जिसमें दिन या रात में काम करने वाले एनालॉग या डिजिटल कैमरों वाले वर्शन शामिल हैं।
- साथ ही, इसमें एक ऐसा वर्शन भी है जिसमें टारगेट का अपने-आप पता लगाने, उसे ट्रैक करने और उसे लॉक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉड्यूल लगा है।
- AI-आधारित टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम इंटरसेप्टर को 1 किमी. की दूरी तक दुश्मन के टारगेट का पता लगाने और उन्हें लाक करने में मदद करता है। यह काम इंसानी रिएक्शन टाइम टाइम से भी तेजी से होता है।
- एआइ माड्यूल स्वतः टारगेट का पता लगाता है, उसे ट्रैक करता है और उस पर लाक बनाए रखता है। इससे आपरेटर मुश्किल लड़ाई वाले हालात में भी ज्यादा तेजी और सटीकता से टारगेट पर कार्रवाई कर पाता है।
ऐसे ड्रोन आज के दौर में क्यों हैं महत्वपूर्ण
- कम लागत में लंबी दूरी के विध्वसंक हमले संभव।
- पायलट की जान जोखिम में नहीं पड़ती।
- दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली पर दबाव बढ़ता है।
- बड़ी संख्या में उपयोग करके स्वार्म अटैक की रणनीति पर अमल आसान।
- दुश्मन के ईंधन डिपो, सैन्य अड्डे, ऊर्जा और औद्योगिक केंद्र जैसे स्थल थोड़ा आसानी से टारगेट बन जाते हैं।








