पाकिस्तानी DG-ISPR का नया चूरन, काफिरों से दोस्ती स्वीकार नहीं

By Defence Detective

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पाकिस्तान बलूचिस्तान के रूप में आतंरिक अशांति और हिंसा के साथ गंभीर आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। लेकिन भारत के प्रति दुश्मनी और धार्मिक संदर्भों के सहारे यहां के मुसलमानों को भड़काने की अपनी कुटिलताओं से बाज नहीं आता है। पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने अपने बयान से एक गंभीर विवाद को जन्म दे दिया है। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वह कह रहे हैं कि मुसलमानों को काफिरों से दोस्ती नहीं रखनी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग इस बात को नहीं मानेंगे, उन्हें मुसलमान नहीं माना जाएगा। यह बातें रावलपिंडी में उन्होंने पाकिस्तान के आतंकरोधी अभियानों, बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति और अफगानिस्तान के साथ संबंधों पर एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान कहीं। बोले, अब हमारी जनसंख्या 20-25 करोड़ है। हमारे पास अभी चार प्रांत : पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान हैं। सभी राजनीतिज्ञों द्वारा, चाहे वह सत्ता में हों, सत्ता में रह चुके हों और वे जो पाकिस्तान के लोगों प्रति जवाबदेह हैं, इस पर समझदारी भरी चर्चा करते आ रहे हैं।

भारत-अफगानिस्तान संबंधों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि दोनों देशों का डीएनए एक होने के अतिरिक्त इनके मध्य साझा क्या है? इसके अलावा केवल एक चीज साझा है, वह है आतंकवाद। दावा किया कि आतंकवाद, अफगान तालिबान शासन का ‘बिजनेस’ है। भारत पर भी आतंकवाद का आरोप मढ़ा। ध्यान रहे कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के कृषि, सिंचाई और पशुधन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी हाल ही में भारत आए थे। तब उन्होंने कहा था-

पाक आर्मी ने क्यों खेला इस्लामिक कार्ड ?

पाकिस्तानी आर्मी जब भी घरेलू मोर्चे पर फेल साबित होने लगती है, तो वो मज़हबी कार्ड का इस्तेमाल करती हैI इसके पीछे पाकिस्तानी हुक्मरानों की एक गंभीर सोची-समझी साजिश होती है। इनका इससे मुख्यतः दो तरह का उद्देश्य साधने का प्रयास होता है। पहली बात जान लें कि पाकिस्तान आर्थिक रूप से कंगाल, अशांत, हिंसाग्रस्त है। पाकिस्तान से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से लेकर जून तक 3,100 से ज्यादा हमले हो चुके हैं। ज़ाहिर है इससे लोगों का गुस्सा भड़क रहा है, तो ऐसे में हमेशा पाकिस्तानी आर्मी इस्लामिक कार्ड खेलती है। वह इन मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नित नई चालें चलती रहती हैं और पाकिस्तानियों की भावनाओं को भारत से शत्रुता की ओर मोड़ने का प्रयास होता है। इतिहास गवाह रहा है कि पाक आर्मी मज़हब, इस्लाम आधारित बयानों का हथियार की तरह इस्तेमाल करती रही है।

दूसरी बात है कि इस्लाम-मुस्लिम पहचान के आधार पर वह भारत के मुसलमानों को भी बरगलाना चाहता है। अनुमान के मुताबिक भारत में 20 करोड़ से अधिक मुसलमान हैं, जो कि पाकिस्तान की जनसंख्या से थोड़ी ही कम है। पाकिस्तानी नेता व सैन्य अधिकारी आए दिन कुरान की आयतों का हवाला देकर मुसलमानों को अन्य समुदायों से दूर करने वाली, मुसलमानों को धार्मिक आधार पर एकजुट करने वाली टिप्पणियां करते हैं। यहां तक कि कथित अल्पसंख्यक उत्पीड़न की आड़ में वह सीधे-सीधे भारत के आतंरिक मामलों में भी हस्तक्षेप से बाज नहीं आता है। जनरल अहमद शरीफ चौधरी की मुसलमानों से जुड़ी यह विवादास्पद टिप्पणी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

निशाने पर भारत-अफगानिस्तान क्यों ?

अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी और वहां पर तालिबान शासन आने के बाद विशेषज्ञों का आंकलन था कि यह पाकिस्तान के हित में होगा, जबकि भारत के लिए परेशानी का सबब बनेगा। किंतु समय बीतते जाने के साथ विशेषज्ञों के दावे उल्टे साबित होने लगे। भारत के संबंध अफगान-तालिबान के साथ सुधरते गए, पाकिस्तान के बिगड़ गए। स्थिति यह है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मध्य सीमा पर तनाव, आए दिन झड़पें देखने को मिल रही हैं।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मध्य हुई झड़पें व क्षति

  • UN की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2025 से जून 2026 के अंत तक 95 से अधिक सीमा पार झड़पें और हवाई हमले
  • इस सैन्य टकराव के कारण अफगानिस्तान में लगभग 500 नागरिकों की मौत, एक हजार से अधिक घायल हुए
  • मृतकों में महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक
  • सीमावर्ती क्षेत्रों से एक लाख से अधिक लोगों का विस्थापन

DG-ISPR का पिता था अल-कायदा आतंकी

लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी के पिता सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद का ‘संबंध’ एक समय विश्व के सबसे खतरनाक आतंकियों में से एक ओसामा बिन लादेन के साथ था । इसलिए अहमद शरीफ चौधरी की आतंकियों से हमदर्दी व भारत विरोधी भावना पर अचरज करने की आवश्यकता नहीं है।

  • सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद पाकिस्तान का एक सीनियर न्यूक्लियर साइंटिस्ट था।
  • कहूटा न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्लांट और चश्मा परमाणु परियोजना में काम किया था।
  • सेवानिवृत्ति के बाद ‘उम्मा तमेर-ए-नू’ (UTN) संगठन बनाया जिसे अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी घोषित किया था।
  • वर्ष 2001 (9/11 से कुछेक माह पहले) में उसने अफगानिस्तान जाकर ओसामा बिन लादेन और अयमान अल-जवाहरी से मुलाकात की थी।

इन सारी बातों से आसानी से समझा जा सकता है कि DG-ISPR को भारत से इतनी ज्यादा चिढ़ क्यों है। इन महाशय के अपने देश में खाने को भले ही लाले हैं, लेकिन भारत को गीदड़भभकी देने से बाज नहीं आते हैं। वर्ष 2023 में बोले थे कि युद्ध की स्थिति में हम भारत को उसके क्षेत्र में घुसकर मारेंगे। अब मुसलमानों को बरगलाने के लिए काफिरों से दूर रहने (असलियत में हिंदुओं से दूर रहने) की सलाह दे रहे हैं। इनकी यह सलाह कूड़ेदान में ही जाएगी, जबकि जहां तक घर में घुसकर मारने की बात है, तो आपरेशन सिंदूर आदि में दुनिया निर्णायक रूप से वास्तविकता देख चुकी है।

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