उसे लेडी अल-कायदा के नाम से पुकारा गया। कभी उसे अल-कायदा की माता हारी का नाम दिया गया। तो कभी उसे ‘क़ौम की बेटी’ करार दिया गया। आज पाकिस्तान की ये महिला सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रही है। इसकी पुरानी कहानी एक बार फिर लोगों के सामने आ गई है। इसकी ख़तरनाक आतंकी प्लानिंग एक बार फिर लोगों को डरा रही है। लोग इसी बात से खौफ खा रहे हैं कि अगर इस पाकिस्तानी महिला की साज़िश कामयाब हो जाती तो दुनिया की तस्वीर आज बहुत भयावह होती। इस महिला का नाम है आफिया सिद्दीकी।
आफिया पिछले 16 सालों से अमेरिका के टेक्सास की जेल में बंद है। वो इस जेल में 86 साल क़ैद की सज़ा काट रही है। मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट ने आफिया को सितंबर 2010 में अमेरिकी नेशनल्स की हत्या समेत छह और अपराधों का दोषी करार दिया था। तो सवाल उठता है कि करीब 16 साल बाद आफिया सिद्दीकी आज अगस्त 2026 में क्यों वायरल हैं? इसका जवाब है एक क़िताब, नाम है Biological War A Scenario।
किसने लिखी है यह किताब ?
28 जुलाई 2026 को रिलीज़ हुई इस क़िताब को लिखा है Investigative Journalist और Bestselling Writer एनी जैकबसन ने। वह वार, डिफेंस, नेशनल सिक्योरिटी, मिलिट्री-गर्वमेंट सीक्रेट्स जैसे मुद्दों पर रिसर्च और रिपोर्टिंग भी कर चुकी हैं। और इन्हीं अनुभवों को उन्होंने किताबों की शक्ल दी है। इससे पहले उन्होंने न्यूक्लियर वार, फर्स्ट प्लाटून और सरप्राइज़-किल-वैनिस जैसी किताबें लिखी हैं। बायलॉजिकल वार उनकी सबसे नई क़िताब है और इसी क़िताब की लॉन्चिंग के बाद आफिया सिद्दीकी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
किताब और आफिया का कनेक्शन
असल में इस क़िताब में उन्होंने बायोलॉजिकल वारफेयर के साथ-साथ बायो वेपन के आतंकियों के हाथ लगने के बारे में लिखा है और ये सीधे-सीधे पाकिस्तानी महिला आफिया सिद्दीकी से कनेक्ट होता है जो अमेरिका की जेल में बंद है। भले ही आफिया को अमेरिकी नेशनल्स की हत्या की कोशिश का दोषी ठहराते हुए जेल की सज़ा सुनाई गई है लेकिन उसे आतंकी संगठन अल-कायदा के बायोलॉजिकल वेपन प्रोग्राम का लीडर भी माना जाता है।
आफिया के जन्म, पढ़ाई-लिखाई एवं एफबीआइ की मोस्ट वांटेड बनने तक पर एक नजर
- जन्म – 1972 में कराची में
- पिता- सलाय सिद्दीकी, ब्रिटिश ट्रेन्ड न्यूरोसर्जन
- आफिया के भाई का नाम मोहम्मद और बहन का नाम फौज़िया।
- तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई पाकिस्तान से बाहर ही हुई।
- आर्किटेक्चर का काम करने वाला भाई मोहम्मद ह्यूस्टन में रहता था।
- 1990 में आफिया भी स्टूडेंट वीज़ा पर अमेरिका चली गई और उसी के साथ रह कर पढ़ाई करने लगी।
- यूनिवर्सिटी ऑफ हॉस्टन से अंडरग्रेजुएट हुई
- मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बायोलॉजी में बीएससी यानी बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की
- मैसाचुसेट्स के Brandeis University से PhD किया
- लेकिन इतनी पढ़ाई करने वाली आफिया FBI की मोस्ट वांटेड लिस्ट में दर्ज हो गई
- उस पर अल क़ायदा की बायो वेपन बनाने वाली टीम का लीडर होने का भी आरोप लगा।
कैसे अल-कायदा की बायो वेपन विंग हेड बनी थी आफिया ?
बताया जाता है कि पढ़ाई के दौरान ही वो MSA यानी मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन में शामिल हो गई थीं। MSA पर ओसामा बिन लादेन के गुरु अब्दुल्ला अज़्ज़ाम का प्रभाव पड़ चुका था। अब्दुल्ला अज़्ज़ाम ने ब्रूकलिन की फारुख़ मस्जिद में अल किफाह रिफ्यूज़ी सेंटर की शुरुआत की थी। कहने को तो ये संगठन रिफ्यूज़ीज़ की मदद के लिए बना था लेकिन इसमें कई इस्लामिक रैडिकल्स लोग भी शामिल थे। ये संगठन अफगानिस्तान के मुजाहिद्दीनों के लिए फंड इकट्ठा करता था और दुनिया भर से लोगों को अफगानिस्तान में लड़ने के लिए भर्ती करता था। MSA से जुड़ने के बाद आफिया ने अल किफाह रिफ्यूज़ी सेंटर में वॉलेंटियर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। आफिया इस संगठन के लिए चंदा इकट्ठा करती थी। और यहीं से आफिया की सोच बदलती चली गई। आपको बता दूं कि ब्रूकलिन की इसी फारुख़ मस्जिद को अमेरिका में अल-क़ायदा का सेंटर माना जाता है।
क्यों बहुत अग्रेसिव हो जाती थी आफिया और हो गया पहले पति से तलाक
आफिया के पूर्व पति डॉक्टर अमजद ने बताया था कि 2001 के हमले के बाद आफिया लगातार अमेरिका छोड़ कर पाकिस्तान लौटने का दबाव डाल रही थी। इतना ही नहीं वो अमजद को अफगानिस्तान जाने के लिए भी मजबूर कर रही थी और इंकार करने पर वो बहुत अग्रेसिव हो जाया करती थी और इसी वजह से दोनों का तलाक भी हो गया था। अमजद के मुताबिक आफिया अमेरिका में ही अल-कायदा के सम्पर्क में आ चुकी थी और तलाक के बाद कराची में रहते हुए उसने इस संबंध को और मजबूत बना लिया। अमजद के मुताबिक आफिया ने कराची में अम्मार अल बलूची से दूसरी शादी कर ली थी। अम्मार ना केवल अल कायदा का मेंबर था बल्कि 9-11 की प्लानिंग करने वाले खालिद शेख मोहम्मद का भतीजा भी था।
खालिद की गिरफ्तारी के बाद आफिया का नाम हुआ उजागर
एक मार्च 2003 को खालिद को पाकिस्तान के रावलपिंडी में गिरफ्तार किया गया था। तो पाकिस्तान ने केवल ओसामा को ही नहीं छिपाया हुआ था बल्कि 9-11 के मास्टरमाइंड को भी शेल्टर दिया हुआ था। वो तो अमेरिका का प्रेशर इतना था कि खालिद को गिरफ़्तार करना पड़ गया था। बताया जाता है कि गिरफ़्तारी के बाद की गई पूछताछ में खालिद शेख मोहम्मद ने ही आफिया का नाम लिया था और यहीं से FBI और CIA के कान खड़े हो गये थे। फिर आफिया की तलाश शुरू हुई थी।
खालिद की गिरफ़्तारी के कुछ ही दिनों बाद आफिया अपने तीनों बच्चों के साथ लापता हो गई। 5 साल बाद 17 जुलाई 2008 को वो अफगानिस्तान में गजनी के बजाजी मस्जिद के बाहर पकड़ी गई। उसके साथ उसका केवल एक ही बेटा था। उसकी पहचान होने के बाद आफिया को गिरफ़्तार कर लिया था। तब इस गिरफ़्तारी को CIA ने 5 साल में सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर बताया था। उसके पास से जो बैग बरामद हुआ था उसमें बायोलॉजिकल वेपन्स बनाने के फ़ॉर्मूले, कई ख़तरनाक कैमिकल्स और न्यू यॉर्क की कई महत्वपूर्ण जगहों की लिस्ट बरामद की गई थी।
बायो वेपन योजना चढ़ती परवान तो दुनिया में मचती तबाही

आफिया रेबीज़ और चिकन पॉक्स का एक ख़तरनाक कॉम्बिनेशन तैयार कर रही थी जो हवा से फैल सकता था। यानी अगर ये बायो वेपन बन गया होता तो दुनिया में तबाही ही तबाही मच जाती लेकिन उससे पहले ही आफिया को गिरफ़्तार कर लिया गया। और शायद तभी आफिया FBI की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल थी।
Annie Jacobsen, American journalist and author
जब आफिया ने पुलिस स्टेशन में की थी फायरिंग
अच्छा, एक गज़ब की बात ये कि 17 जुलाई 2008 को आफिया को गिरफ्तार किया गया था और इसकी ख़बर CIA और FBI को दे दी गई थी। अमेरिकी टीम पूछताछ के लिए 18 जुलाई को गजनी पहुंची थी। गजनी के पुलिस स्टेशन में आफिया से पूछताछ चल ही रही थी कि आफिया ने वहां रखी M4 कार्बाइन उठाकर उपस्थित लोगों पर फायरिंग शुरू कर दी थी। आफिया की गोली से तो किसी को नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन जवाबी फायरिंग में आफिया ज़रूर घायल हो गई थी। करीब 20 दिन इलाज के बाद 4 अगस्त 2008 को आफिया को अफगानिस्तान से अमेरिका लाया गया।और फिर 2010 में उसे 86 साल की क़ैद की सज़ा सुनाई गई। हालांकि इस बीच उसका दिमागी संतुलन बिगड़ने की वजह से उसे टेक्सास के मेंटल इंस्टीट्यूट में रखा गया है।
इस पूरे केस में एक और पहलू ये है कि आफिया और उसके घरवालों का दावा है कि कराची से उसे उसके बच्चों समेत अगवा कर लिया गया था। उसे अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस में बंदी बनाकर रखा गया और फिर 2008 में उसकी गिरफ़्तारी दिखा दी गई थी।
इस आतंकी को पाकिस्तान आज भी मानता है हीरोइन
पाकिस्तान में आफिया को छुड़ाने के लिए कई आंदोलन हो चुके हैं- कई प्रदर्शन किये जा चुके हैं। यहां तक आफिया को पाकिस्तान ने क़ौम की बेटी का भी तमगा दिया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ ने 2024 में तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जो बाइडेन से आफिया को माफी देने और जेल से रिहा करने की अपील भी की थी। तो आप समझिये कि पाकिस्तान का आतंकवाद और आतंकवादियों के प्रति क्या नज़रिया है। फिलहाल आफिया फिलहाल अमेरिकी नेशनल्स पर किये गये जानलेवा हमले के मामले में 86 साल की जेल की सज़ा काट रही है और उम्मीद है कि उसकी सारी ज़िंदगी जेल में ही बीतने वाली है।








