यूक्रेनी आर्मी से किया पाक ने फर्जीवाड़ा, खराब पाकिस्तानी गोलों ने तोपों के बैरल फाड़े

By Defence Detective

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Fragments of a Pakistani 155mm artillery shell in Ukraine

रूस के खिलाफ जंग में यूक्रेन को जिस 155mm तोपखाने और ammunition की लगातार जरूरत है, उसी ammunition की क्वालिटी को लेकर अब उसकी फ्रंटलाइन  artillery unit के कमांडर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला इसलिए ज्यादा दिलचस्प हो गया है क्योंकि यूक्रेन तक पहुंचने वाले 155mm ammunition में पाकिस्तान का नाम पहले भी सामने आ चुका है।

यूक्रेन की 7वीं Artillery Brigade “Hrehit” के कमांडर Vitaliy Korniyenko ने 18 सितंबर को यूक्रेनी डिफेंस मैग्जीन Mezha को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनकी यूनिट को अलग-अलग देशों से 155mm shells मिलते हैं।

उनके मुताबिक पश्चिमी देशों से आए गोले अच्छी तरह काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ एशियाई मैन्युफैक्चरर्स के ammunition में गंभीर quality problems देखी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ shells इतने inconsistent हैं कि सैनिकों को उन्हें इस्तेमाल करने से पहले उनका वजन तक जांचना पड़ता है।

मामला केवल निशाना चूकने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ मामलों में artillery equipment को नुकसान पहुंचने और यहां तक कि gun barrel के फटने की बात भी उन्होंने कही।

कितनी गंभीर खामी कि यूक्रेनी सैनिक परेशान?

Korniyenko के मुताबिक 155mm shell का वजन करीब 46 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन बैटलफील्ड पर कुछ shells का वजन लगभग 45.4 kg, जबकि कुछ का 46.9 kg पाया गया। यानी एक ही कटेगरी के shells के वजन में करीब 1.5 kg का अंतर।

आर्टिलरी में यह मामूली अंतर नहीं है। Shell का वजन, propellant (यह गोले को गति देने के लिए इस्तेमाल होने वाला एनर्जी पैदा करने वाला मटेरियल है)  और दूसरे ballistic parameters बदलने पर उसकी flight trajectory भी बदल सकती है।

इसलिए commander के मुताबिक उनकी unit को अलग-अलग manufacturers के लिए अलग ballistic data तैयार करना पड़ रहा है और ammunition batches को वजन के हिसाब से भी जांचना पड़ रहा है।

सीधी भाषा में समझें तो—एक जैसा 155mm लिखा होने का मतलब यह नहीं कि हर manufacturer का shell बिल्कुल एक जैसा व्यवहार करेगा।

युद्ध के मैदान में यही अंतर एक्यूरेसी और सेफ्टी दोनों को प्रभावित कर सकता है।

मामला क्यों इससे भी बड़ा ?

मामला सिर्फ accuracy तक सीमित नहीं है। यूक्रेनी कमांडर ने बताया कि उनके artillerymen कुछ एशियाई ammunition को लेकर खास तौर पर सावधान रहते हैं। उनके मुताबिक ऐसे मामलों में तोप के muzzle brake (तोप की नली के मुंह पर लगा एक एक्विपमेंट जो फायरिंग के झटके को कम करता है) ) को नुकसान पहुंचा और एक घटना में gun barrel तक फटने की बात सामने आई है।

अगर artillery gun का barrel firing के दौरान damage हो जाए तो यह सिर्फ एक महंगा हथियार-loss नहीं है। बल्कि उस समय gun crew की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

फिर पाकिस्तानी ammunition की चर्चा क्यों?

यही इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।

पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से यूक्रेन को हथियार या ammunition supply करने से हमेशा इनकार किया है। फरवरी 2023 में पाकिस्तान के Foreign Office ने Ukraine को defence items की supply की खबरों को गलत बताया था। नवंबर 2023 में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने फिर कहा कि पाकिस्तान युद्ध क्षेत्र में किसी पक्ष को हथियार नहीं देता और उसने Ukraine को arms supply नहीं की है।

लेकिन Pakistan की Pakistan Ordnance Factories (POF) 155mm M107 artillery shells बनाती है। इसके अलावा पाकिस्तान से Ukraine के लिए 155mm ammunition की supply के documented records भी सामने आ चुके हैं।

2022 में अमेरिकी procurement records में दो contracts दर्ज हुए थे, जिनकी कुल value करीब $364 million थी। रिपोर्टिंग और उपलब्ध procurement data के मुताबिक इन contracts के तहत 155mm artillery shells की खरीद पाकिस्तान से जुड़ी थी।

यानी यह साफ है कि पाकिस्तान में बने 155mm ammunition यूक्रेन तक पहुंचते रहे हैं। procurement records इस supply chain के अस्तित्व का महत्वपूर्ण evidence हैं।

इसलिए 2026 में जब यूक्रेनी कमांडर ने कुछ Asian-made 155mm shells की क्वालिटी पर सवाल उठाया, तो डिफेंस सर्किल में पाकिस्तान का नाम फिर चर्चा में आ गया।

155mm ammunition इतना महत्वपूर्ण क्यों?

155mm artillery यूक्रेन की जमीन पर चल रही लड़ाई का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। Ukraine के पास पश्चिमी देशों से मिले कई 155mm artillery systems हैं। ऐसे में केवल आधुनिक artillery gun मिल जाना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ बड़ी मात्रा में reliable, standardised और compatible ammunition भी चाहिए।

यही वजह है कि Ukraine लगातार 155mm ammunition की खरीद बढ़ा रहा है। मई 2026 में यूक्रेन के Defence Procurement Agency ने 155mm long-range artillery ammunition की अपनी अब तक की सबसे बड़ी procurement का ऐलान किया था। इसमें छह manufacturers को contracts दिए गए थे।

यानी Kyiv के लिए ammunition की मात्रा जितनी महत्वपूर्ण है, उसकी quality और consistency भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

एक shell की खराब क्वालिटी का क्या-क्या असर?

आर्टिलरी में खराब ammunition की समस्या कई स्तरों पर असर डाल सकती है। quality खराब हुई तो पूरी artillery chain प्रभावित होती है।  

पहला—Accuracy:
वजन और ballistic characteristics में अंतर होने पर shell अनुमानित trajectory से अलग जा सकता है।

दूसरा—Safety:
अगर ammunition या उसके components में गंभीर manufacturing defect हो तो firing के दौरान gun को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है।

तीसरा—Logistics:
हर manufacturer के ammunition के लिए अलग ballistic data तैयार करना पड़े तो battlefield logistics और fire-control process जटिल हो जाता है।

चौथा—Gun life:
बार-बार खराब या unsuitable ammunition इस्तेमाल होने पर artillery system के महत्वपूर्ण components पर अतिरिक्त stress पड़ सकता है। यही कारण है कि Ukraine के commander की टिप्पणी को केवल “एक देश के खराब गोले” वाली कहानी से ज्यादा व्यापक रूप में देखना चाहिए।

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