DRDO (भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने अपनी अगली पीढ़ी के इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV) प्रोग्राम के तहत एक बड़ी और अहम सफलता हासिल की है। DRDO के नई पीढ़ी का बख्तरबंद सैनिक वाहन ‘विक्रम VT-21’ के wheeled variant (पहिए वाले संस्करण) ने अपने विकास परीक्षणों (Development Trials) में महत्वपूर्ण मानकों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
इसने आवाजाही (mobility), खाइयां पार करने (trench-crossing) और जल-थल दोनों पर चलने की क्षमता (amphibious capability) का प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि भारतीय सेना के उस पुराने बेड़े को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो दशकों से देश की सीमाओं की रक्षा कर रहा है।
अब भारतीय सेना अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में इसकी क्षमताएं परखेगी। यह प्रोजेक्ट पुराने BMP-II पैदल सेना लड़ाकू वाहनों के स्वदेशी विकल्प की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हालांकि, सेना में शामिल होने से पहले इसे आगे के परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विक्रम VT-21 wheeled variant ने क्या-क्या क्षमताएं दिखाईं ?
29 अक्टूबर 2026 की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ DRDO अधिकारी के हवाले से बताया गया कि इस पहियों वाले प्लेटफॉर्म के व्यापक परीक्षणों के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं।
- इस इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल ने विभिन्न रास्तों और चुनौतीपूर्ण इलाकों में अपनी तेज गति और स्थिरता का प्रदर्शन किया है।
- युद्धक्षेत्र में आने वाली खंदकों या गड्ढों को पार करने की क्षमता को सफलतापूर्वक दिखाया।
- विक्रम VT-21 ने पानी के भीतर उतरकर तैरने और अपनी 30mm की अनमैन्ड (चालक रहित) टर्रट के साथ पानी में भी संतुलन व संचालन क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
अनमैन्ड टर्रेट यानी ऐसा हथियारों वाला घूमने वाला हिस्सा, जिसके अंदर किसी सैनिक को बैठना नहीं पड़ता। सैनिक वाहन के सुरक्षित अंदरूनी हिस्से से कैमरे, स्क्रीन और कंट्रोल की मदद से इसे घुमाता, निशाना लगाता और फायर करता है।
क्या है विक्रम VT-21 और युद्ध में इसका क्या काम होगा ?
विक्रम VT-21 एक Advanced Armoured Platform (AAP) यानी उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म है। इसे पैदल सैनिकों को सुरक्षा के साथ ले जाने और लड़ाई के दौरान उनकी सहायता करने के लिए विकसित किया गया है।
- डिजाइन में Infantry Combat Vehicle—ICV और Armoured Personnel Carrier—APC, दोनों भूमिकाएं रखी गई हैं।
- आसान भाषा में समझें तो ऐसा वाहन सैनिकों को युद्धक्षेत्र तक पहुंचाने के साथ अपने हथियारों से उन्हें फायर सपोर्ट भी देता है।
- इसके मूल डिजाइन को अलग-अलग भूमिकाओं के अनुसार तैयार करने की गुंजाइश रखी गई है।
इसके दो संस्करण बन रहे हैं।
- AAP Wheeled: पहियों वाला संस्करण, जिसकी ताजा परीक्षण उपलब्धि सामने आई है।
- AAP Tracked: टैंक जैसी ट्रैक पट्टियों वाला संस्करण।
दोनों के प्रोटोटाइप 25 अप्रैल 2026 को पेश किए गए थे। ट्रैक वाले संस्करण के परीक्षण भी जारी हैं। प्लेटफॉर्म में लगभग 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है, जिसे 90 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है।
निजी क्षेत्र की साझेदारी के साथ हो रही इसकी मैन्युफैक्चरिंग
विक्रम VT-21 के विकास में ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ (DCPP) मॉडल का पालन किया गया है। इसका मतलब है कि DRDO की प्रमुख प्रयोगशाला व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (VRDE, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र) ने इसके डिजाइन और शोध पर काम किया है, जबकि देश के दिग्गज औद्योगिक घरानों ने इसके निर्माण में भागीदारी की है।
- Tata Advanced Systems Limited (TASL)
- Bharat Forge Limited (कल्याणी ग्रुप)
- इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की एक लंबी श्रृंखला ने भी इसमें पुर्जों और तकनीक का सहयोग दिया है।
इसकी अहम क्षमता 30 मिमी अनमैन्ड टर्रेट कैसे काम आता है?
विक्रम VT-21 में स्वदेशी 30 मिमी क्रूलेस टर्रेट लगाया गया है। टर्रेट वाहन के ऊपर लगा हथियारों का घूमने वाला हिस्सा होता है। क्रूलेस होने का मतलब है कि इसे चलाने के लिए सैनिक को उसके अंदर बैठने की जरूरत नहीं होती।
ऑपरेटर वाहन के सुरक्षित बख्तरबंद ढांचे के भीतर रहकर हथियार नियंत्रित कर सकता है। यहां ‘अनमैन्ड’ शब्द टर्रेट के लिए है, इसका मतलब पूरा वाहन चालक रहित होना नहीं है।
हथियार व्यवस्था में ये सुविधाएं हैं:-
- 30 मिमी का स्वदेशी क्रूलेस टर्रेट।
- 7.62 मिमी PKT मशीनगन।
- एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागने की व्यवस्था।
इससे वाहन को अलग-अलग तरह के लक्ष्यों के खिलाफ सैनिकों की सहायता करने की क्षमता मिलती है।
हथियार लगे होने पर पानी में परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?
वाहन का केवल पानी में उतरना और हथियारों सहित संतुलित रहकर संचालन करना अलग चुनौतियां हैं। टर्रेट लगाने से वजन और वजन का वितरण प्रभावित होता है। इसलिए टर्रेट के साथ एम्फीबियस क्षमता का प्रदर्शन प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण है।
इस विक्रम प्लेटफॉर्म में हाइड्रोजेट लगाए गए हैं, जो पानी में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। ऐसी क्षमता पानी की बाधाओं वाले क्षेत्रों में सैन्य संचालन के विकल्प बढ़ाती है।
सैनिकों की सुरक्षा और मोबिलिटी के लिए क्या सुविधाएं हैं?
प्लेटफॉर्म में हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की जानकारी दी है। डिजाइन में बेहतर पावर-टू-वेट अनुपात, ढलान चढ़ने और बाधाएं पार करने की क्षमता पर जोर है। पावर-टू-वेट अनुपात बताता है कि वाहन के वजन के मुकाबले इंजन से कितनी शक्ति मिलती है।
- सुरक्षा के लिए मॉड्यूलर बैलिस्टिक और ब्लास्ट प्रोटेक्शन दिया गया है।
- डबल-फ्लोर ब्लास्ट प्रोटेक्शन, अतिरिक्त कंपोजिट कवच, डिजिटल ड्राइवर डैशबोर्ड और क्रू विजन सिस्टम जैसी सुविधाओं भी हैं।
- इनका उद्देश्य सुरक्षा के साथ वाहन संचालन और आसपास की स्थिति समझने में सहायता देना है।
BMP-II बनाम विक्रम VT-21: नए लड़ाकू वाहन में कितना बदलाव?
भारतीय सेना का BMP-II ‘सारथ’ सैनिकों को सुरक्षित पहुंचाने और लड़ाई में फायर सपोर्ट देने वाला बख्तरबंद वाहन है। विक्रम VT-21 में इसी भूमिका के लिए मानवरहित टर्रेट, मॉड्यूलर सुरक्षा और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं विकसित की गई हैं। दोनों में 30 मिमी हथियार और पानी में चलने की क्षमता है।
नए वाहन का प्रमुख बदलाव हथियार संचालन, सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था में है, जबकि इसके कई संख्यात्मक स्पेसिफिकेशन अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हैं।
- प्रोजेक्ट भारतीय सेना की पुरानी BMP-II पैदल सेना लड़ाकू वाहन फ्लीट के स्वदेशी विकल्प की दिशा में है। DRDO ने इसे स्वदेशी Future Infantry Combat Vehicle—FICV की आवश्यकता का संभावित समाधान बताया है।
- BMP-II ‘सारथ’ का निर्माण भारत में ऑर्डनेंस फैक्ट्री मेडक, तेलंगाना में होता है, जो अब Armoured Vehicles Nigam Limited (AVNL) के अंतर्गत है।
- यह मूल रूप से सोवियत संघ के BMP-2 का भारतीय लाइसेंस-निर्मित संस्करण है। भारतीय सेना में 1980 के दशक से सेवा में है।
| क्षमता/स्पेसिफिकेशन | BMP-II ‘सारथ’—मूल संस्करण | विक्रम VT-21—घोषित खूबियां | प्रमुख अंतर |
| वाहन का स्वरूप | ट्रैक वाला पैदल सेना लड़ाकू वाहन | पहियों और ट्रैक वाले दो प्लेटफॉर्म | अलग परिचालन जरूरतों के लिए दो विकल्प |
| मुख्य हथियार | 30 मिमी 2A42 ऑटोमैटिक तोप | स्वदेशी 30 मिमी क्रूलेस टर्रेट | कैलिबर समान; टर्रेट और संचालन की व्यवस्था नई |
| टर्रेट का संचालन | सैनिक टर्रेट के अंदर बैठकर संचालन करते हैं | ऑपरेटर वाहन के मुख्य बख्तरबंद ढांचे के भीतर से नियंत्रण करता है | हथियार चलाने के लिए टर्रेट में बैठने की जरूरत समाप्त |
| मशीनगन | 7.62 मिमी PKT मशीनगन | 7.62 मिमी PKT मशीनगन | मशीनगन का कैलिबर समान |
| एंटी-टैंक मिसाइल | लगभग 4 किमी रेंज वाली वायर-गाइडेड Konkurs | तीसरी पीढ़ी की ATGM का प्रावधान; अंतिम मिसाइल और रेंज सार्वजनिक नहीं | नई पीढ़ी की मिसाइल व्यवस्था विकसित करने पर जोर |
| कवच और सुरक्षा | चारों ओर बख्तरबंद प्लेटें | मॉड्यूलर बैलिस्टिक व ब्लास्ट सुरक्षा; STANAG (Standardization Agreement) स्तर 4 और 5 का उल्लेख | नई सुरक्षा संरचना; दोनों के बीच सुरक्षा का सटीक गुणात्मक अनुपात उपलब्ध नहीं |
| विस्फोट से सुरक्षा | पारंपरिक बख्तरबंद ढांचा | डबल-फ्लोर ब्लास्ट प्रोटेक्शन और अतिरिक्त कंपोजिट कवच | विस्फोट से बचाव पर विशेष डिजाइन फोकस |
| इंजन | 300 हॉर्सपावर | हाई-पावर डीजल इंजन; आधिकारिक हॉर्सपावर सार्वजनिक नहीं | शक्ति की संख्यात्मक तुलना अभी संभव नहीं |
| ट्रांसमिशन | पारंपरिक व्यवस्था | पूरी तरह ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन | संचालन आसान बनाने की दिशा में बदलाव |
| वजन | लगभग 14 टन | अंतिम आधिकारिक वजन सार्वजनिक नहीं | वजन के आधार पर तुलना बाकी |
| अधिकतम सड़क गति | 65 किमी/घंटा | आधिकारिक अधिकतम गति सार्वजनिक नहीं | अभी इसे निश्चित रूप से अधिक तेज नहीं कहा जा सकता |
| पानी में संचालन | उभयचर; शांत पानी में लगभग 7 किमी/घंटा | उभयचर; हाइड्रोजेट से पानी में संचालन | पानी पार करने की क्षमता दोनों में; विक्रम में हाइड्रोजेट व्यवस्था |
| खाई पार करना | आधिकारिक सरकारी विवरण में 2.5 मीटर | पहियों वाले संस्करण ने क्षमता प्रदर्शित की; चौड़ाई सार्वजनिक नहीं | परीक्षण सफल, लेकिन संख्यात्मक बढ़त स्पष्ट नहीं |
| सीधी बाधा/ढलान | लगभग 0.7 मीटर बाधा और 35° ढलान | बाधाएं और ढलान पार करने के लिए डिजाइन; अंतिम आंकड़े सार्वजनिक नहीं | प्रदर्शन की विस्तृत तुलना सेना के परीक्षणों के बाद |
| डिजिटल सुविधाएं | मूल संस्करण की पारंपरिक व्यवस्था | डिजिटल ड्राइवर डैशबोर्ड और क्रू विजन सिस्टम | संचालन और आसपास की स्थिति समझने में सहायता |
| सैनिक क्षमता | 3 चालक दल सदस्य और 7 सैनिक | अंतिम आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं | अधिक सैनिक ले जाने का दावा अभी पुष्ट नहीं |
| वर्तमान स्थिति | सेना में परिचालन सेवा में | विकास और परीक्षण के चरण में | विक्रम की अंतिम क्षमताएं सेना की स्वीकृति से तय होंगी |
अगला स्टेप सेना के कड़े ट्रायल, फिर कब तक होंगे शामिल?
विकास परीक्षणों में अहम आवश्यकताएं पूरी करने के बाद अब विक्रम VT-21 का पहियों वाला संस्करण भारतीय सेना के आगे के यूजर ट्रायल्स (User Trials) की दिशा में बढ़ रहा है। इसके ट्रैक वाले संस्करण के परीक्षण भी समानांतर रूप से जारी हैं।
- अलग-अलग इलाके: भारतीय सेना इस वाहन का परीक्षण रेगिस्तानी इलाकों, मैदानी क्षेत्रों और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में करेगी।
- किन बातों पर होगा जोर: इन परीक्षणों में वाहन की गतिशीलता, हथियार प्रणालियों, फायरिंग क्षमता और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन को परखा जाएगा। नतीजों और सेना के सुझावों के आधार पर जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
- इंडक्शन का लक्ष्य: DRDO का लक्ष्य वर्ष 2029 तक इन प्लेटफॉर्म को भारतीय सेना में शामिल (Induct) कराना है। यह समयसीमा परीक्षणों में सफलता और सेना की स्वीकृति पर निर्भर करेगी।








