बंगाल की खाड़ी में भारत के आगामी मिसाइल परीक्षणों से जुड़ी सूचना सामने आई उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 के बीच चार अलग-अलग टेस्ट विंडो निर्धारित की गई हैं।
इस संबंध में जारी नोटम के मुताबिक परीक्षण क्षेत्र की अधिकतम लंबाई करीब 590 किलोमीटर बताई जा रही है। साझा विवरण में इस क्षेत्र को ओडिशा तट के पास अब्दुल कलाम द्वीप से जोड़ा गया है। इस सूचना ने भारत के अगले मिसाइल परीक्षण को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
सवाल है कि इन तारीखों में किस हथियार को परखा जा सकता है और इतना बड़ा क्षेत्र निर्धारित करने का क्या मतलब है? फिलहाल सामने आई जानकारी परीक्षण की तैयारी से जुड़ी है। इससे किसी खास मिसाइल का नाम, उसकी अधिकतम रेंज या परीक्षणों की संख्या तय नहीं होती।
NOTAM का मतलब क्या है?
मिसाइल परीक्षण की तैयारियों के तहत NOTAM (Notice to Airmen) यानी विमान संचालन से जुड़े कर्मियों के लिए आवश्यक सूचना जारी की जाती है। इसमें बताया जाता है कि किस समय और किस हवाई क्षेत्र में परीक्षण प्रस्तावित है, ताकि विमानों की आवाजाही उसी के अनुसार सुरक्षित रखी जा सके।
NOTAM के जरिए पायलटों, एयरलाइंस और एयर ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े लोगों को ऐसी परिस्थितियों की जानकारी दी जाती है, जिनका उड़ानों की सुरक्षा या मार्ग पर असर पड़ सकता है।
इसका इस्तेमाल केवल मिसाइल परीक्षण के लिए नहीं होता। किसी हवाई अड्डे के रनवे पर काम, नेविगेशन उपकरण में खराबी या अस्थायी हवाई प्रतिबंध जैसी स्थितियों में भी ऐसी सूचना जारी की जाती है।
मिसाइल परीक्षण के दौरान इसका उद्देश्य निर्धारित क्षेत्र से सामान्य विमानों को सुरक्षित दूरी पर रखना होता है। संबंधित सूचना के आधार पर उड़ान मार्ग या संचालन की योजना में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
नोटिस में भौगोलिक निर्देशांक, लागू रहने की अवधि और ऊंचाई संबंधी सीमाएं महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हीं से उसका वास्तविक दायरा समझ में आता है।
परीक्षण क्षेत्र कहाँ बताया गया है?
साझा विवरण के अनुसार, परीक्षण क्षेत्र ओडिशा के तट के पास अब्दुल कलाम द्वीप से बंगाल की खाड़ी की ओर बताया गया है। इस मामले को समझने के लिए लॉन्च स्थल और अधिसूचित परीक्षण क्षेत्र के बीच अंतर करना जरूरी है।
लॉन्च स्थल वह जगह होती है, जहां से मिसाइल छोड़ी जाती है। वहीं अधिसूचित क्षेत्र में उसकी संभावित उड़ान और परीक्षण से जुड़ी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार समुद्र तथा उसके ऊपर का हवाई क्षेत्र शामिल हो सकता है।
इसलिए किसी नक्शे में लंबा क्षेत्र दिखने का अर्थ यह नहीं होता कि उसके हर हिस्से में एक जैसी गतिविधि होगी। उसकी वास्तविक सीमा और इस्तेमाल की शर्तें मूल नोटिस में दर्ज विवरण से स्पष्ट होती हैं।
कौन-कौन सी तारीखें हैं परीक्षण की ?
किसी परीक्षण कार्यक्रम में मुख्य अवसर के साथ वैकल्पिक अवसर भी रखे जा सकते हैं। तकनीकी जांच पूरी करने, मौसम के अनुकूल होने और परीक्षण क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय की जरूरत पड़ सकती है।
सामने आए विवरण में परीक्षण के लिए चार अलग-अलग विंडो बताई गई हैं। यहां टेस्ट विंडो का अर्थ परीक्षण के लिए निर्धारित समय-अवसर है।
| टेस्ट विंडो | निर्धारित तारीख |
| पहली | 29–30 अक्टूबर 2026 |
| दूसरी | 2–3 नवंबर 2026 |
| तीसरी | 5 नवंबर 2026 |
| चौथी | 6 नवंबर 2026 |
इसी तरह अलग-अलग तारीखों का उल्लेख अपने आप यह भी नहीं बताता कि हर दिन अलग मिसाइल परखी जाएगी। इसके लिए परीक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी आवश्यक है।
फिलहाल इन तारीखों से इतना स्पष्ट होता है कि अक्टूबर के अंतिम दिनों से नवंबर के पहले सप्ताह तक परीक्षण गतिविधि के लिए अवसर निर्धारित होने की खबर है।
590 किलोमीटर का मतलब क्या है?
इस खबर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा करीब 590 किलोमीटर है। इसे अधिसूचित परीक्षण क्षेत्र की अधिकतम लंबाई बताया गया है। हालांकि परीक्षण क्षेत्र की लंबाई और मिसाइल की अधिकतम मारक क्षमता दो अलग बातें हैं।
किसी मिसाइल की घोषित अधिकतम रेंज उसकी तकनीकी क्षमता से संबंधित होती है। वहीं किसी खास परीक्षण में तय दूरी उस परीक्षण के उद्देश्य के अनुसार हो सकती है। हर परीक्षण में हथियार को उसकी अधिकतम सीमा तक उड़ाना आवश्यक नहीं होता।
परीक्षण क्षेत्र निर्धारित करते समय उड़ान मार्ग के साथ सुरक्षा की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। इसलिए नक्शे पर दिखाई गई दूरी को सीधे हथियार की क्षमता का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
किस मिसाइल का परीक्षण होगा?
फिलहाल किसी खास मिसाइल का नाम सामने नहीं आया है। उपलब्ध विवरण से उसके प्रकार, लॉन्च प्लेटफॉर्म, पेलोड या परीक्षण के उद्देश्य की पहचान नहीं होती।
केवल क्षेत्र की लंबाई देखकर इसे ब्रह्मोस, प्रलय या किसी अन्य मिसाइल से जोड़ना अनुमान होगा। अलग-अलग हथियारों के परीक्षण में अधिसूचित क्षेत्र और उड़ान संबंधी आवश्यकताएं बदल सकती हैं।
परीक्षण का उद्देश्य भी महत्वपूर्ण होता है। मिसाइल की उड़ान, मार्गदर्शन, नियंत्रण और निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने जैसी क्षमताएं परखी जा सकती हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में इनमें से किस पहलू की जांच होगी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
करीब 590 किलोमीटर लंबे परीक्षण क्षेत्र से मिसाइल की अधिकतम रेंज का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। अधिक रेंज वाली मिसाइल को भी इस क्षेत्र के भीतर कम दूरी पर परखा जा सकता है।
590 किमी से कम रेंज वाली प्रमुख भारतीय मिसाइलों की सूची यह है। ब्रह्मोस के अलग-अलग संस्करणों की रेंज अलग है।
| मिसाइल | सार्वजनिक रूप से बताई गई रेंज | प्रकार |
| प्रलय | 150–500 किमी | जमीन से जमीन पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल |
| ब्रह्मोस—एक्सटेंडेड रेंज संस्करण | लगभग 450 किमी | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल |
| पृथ्वी-II | 350 किमी | जमीन से जमीन पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल |
| ब्रह्मोस—मूल संस्करण | 290 किमी | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल |
| प्रहार | 150 किमी | सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल |
| अस्त्र Mk-I | 80–110 किमी | हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल |
| MRSAM | 70 किमी | जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल; भारत–इजरायल संयुक्त विकास |
| आकाश—मूल संस्करण | 25 किमी | जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल |
क्या परीक्षण हो चुका है?
27 अक्टूबर 2026 तक सामने आए इस विवरण में आगामी परीक्षण की तैयारी का उल्लेख है। बताई गई पहली विंडो 29 अक्टूबर से शुरू होती है।
NOTAM जारी होने और मिसाइल परीक्षण संपन्न होने के बीच स्पष्ट अंतर है। पहला निर्धारित गतिविधि के लिए सूचना देता है, जबकि वास्तविक लॉन्च और उसके परिणाम की पुष्टि अलग से होती है।
इसी तरह लॉन्च होने भर से परीक्षण को सफल घोषित नहीं किया जा सकता। सफलता इस पर निर्भर करती है कि निर्धारित तकनीकी उद्देश्य पूरे हुए या नहीं।
अभी नजर 29 अक्टूबर से शुरू होने वाली परीक्षण विंडो पर है। इसके बाद आने वाली आधिकारिक जानकारी ही मिसाइल की पहचान, वास्तविक परीक्षण तारीख और प्राप्त परिणामों को स्पष्ट करेगी।








