‘बदले की आग’ में जल रहा था ओमानी जिहादी को-पायलट, अमेरिका को भी झुलसाने की थी तैयारी!

By Defence Detective

Updated On:

Date:

Hamam al-Hammami, Omani Flydubai co-pilot accused in cockpit attack

Flydubai हाईजैकिंग कांड को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, 30 सितंबर को हुई cockpit की वह खौफनाक घटना अब पहले से कहीं बड़ी साजिश की तस्वीर दिखा रही है। भारतीय Captain Smit Machchhar पर हमला कर विमान पर कंट्रोल हासिल करने की कोशिश करने वाले ओमानी को-पायलट Hamam al-Hammami के बारे में पहले सामने आया था कि वह विमान को इजरायल में crash कराना चाहता था। लेकिन यह उसकी साजिशों की कड़ी का प्लान-ए था।

अब पूछताछ से जुड़े नए दावों में इस साजिश का एक और खतरनाक पहलू सामने आया है। अगर इजरायल वाला प्लान सफल नहीं होता तो उसने प्लान-बी भी तैयार कर रखा था। जिसमें अमेरिका का झुलसना तय था।

और एक बड़ी बात कि हैवान ओमानी मुस्लिम को-पायलट ऐसा क्यों करना चाहता था ? तो इसका जवाब भी सामने आ गया है कि वह बदले की आग में झुलस रहा था।

यानी जिस घटना को शुरुआत में cockpit में हुई हिंसक झड़प के तौर पर देखा जा रहा था, उसके पीछे पहले से पूरी तरह सोची-समझी खौफनाक आतंकी योजना थी। UAE अभियोजन इसे terrorist attack बता चुका है और अब जांच कई देशों तक फैल चुकी है।

बदले की आग का में क्यों झुलस रहा था जिहादी को-पायलट ?

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक al-Hammami ने UAE में पूछताछ के दौरान अपने मकसद को Gaza युद्ध का बदला लेने से जोड़ा है। रिपोर्टों में “revenge for Gaza” की भावना से हमला करने और शहीद होने की इच्छा जताने की बात सामने आई है।

यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमले का मकसद व्यक्तिगत दुश्मनी से निकलकर इजरायल-गाजा लड़ाई से पैदा हुई बदले की सोच से जुड़ता है। जांच एजेंसियां उसके वैचारिक झुकाव, पुराने संपर्कों और आतंकी कनेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

अमेरिका क्यों और कैसे झुलसता?

यह इस पूरे मामले का एक और नया सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है। हमाम al-Hammami की इजरायली राजधानी तेल अवीव स्थित Ben Gurion Airport पर क्रैश की योजना सफल होती हुई नहीं दिखती तो उसने प्लान-बी भी तैयार कर रखा था। जिसमें प्लेन को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर क्रैश कराने की योजना थी।

इस तरह प्लेन क्रैश में इजरायली यात्री तो मारे जाते ही, अमेरिकी सैन्य बेस पर भी तबाही मचती। यानी इस हाईजैकिंग कांड में अमेरिका भी झुलस सकता था।

इससे साजिश का दायरा काफी बड़ा दिखाई देता है। मामला केवल Israel-bound विमान या Ben Gurion Airport तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि योजना में अमेरिकी सैन्य हित भी निशाने पर आ जाते हैं।

Flydubai में नौकरी से पहले ही बना चुका था प्लान?

नए खुलासों का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि हमले का प्लान Flydubai में नौकरी मिलने के बाद अचानक नहीं सोचा गया था। इजरायली अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि al-Hammami ने airline में नौकरी मिलने से पहले ही हमले की योजना बना ली थी।

इसके बाद जांच का अहम सवाल यह बन गया है कि क्या उसने इसी योजना को अंजाम देने के लिए Flydubai को चुना, क्योंकि एयरलाइन की उड़ानें Tel Aviv जाती थीं।

इससे जांच का सवाल और गंभीर हो जाता है—क्या Flydubai में उसकी नौकरी महज करियर का फैसला था या हमले को अंजाम देने के लिए cockpit तक पहुंच हासिल करने का माध्यम?

अभी इस सवाल का अंतिम जवाब नहीं मिला है।

जांच की एक और कड़ी किस देश तक पहुंची ?

अब इस मामले की जांच एक और कड़ी New Zealand तक पहुंच गई है New Zealand Police ने 6 अक्टूबर को पुष्टि की है कि –

  • al-Hammami 30 नवंबर 2018 से 23 मई 2019 तक न्यूजीलैंड में था।
  • वह छह महीने के student visa पर वहां गया था और एक UK-based flight training company के लिए अपने pilot training के एक हिस्से को पूरा किया था।
  • New Zealand Police अब उसके वहां बिताए समय के records और गतिविधियों की जांच कर रही है।

इसके अलावा वह ऑस्ट्रेलिया में भी कुछ समय रहा था, तो वहां भी उसके रिकॉर्ड, गतिविधियां जांच के दायरे में हैं।

क्या कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क पीछे था?

यह जांच के सबसे बड़े अनसुलझे सवालों में से एक है। एक तरफ उसके पुराने extremist red flags, jihadist सामग्री और Gaza revenge motive की बातें सामने आ रही हैं। दूसरी तरफ शुरुआती Israeli assessment में उसके अकेले काम करने की संभावना बताई गई है।

अभी उसके आइएसआइएस जैसे किसी सगंठन से जुड़े होने की आधिकारिक बाता सामने नहीं आई है। लेकिन 30 सिंतबर की घटना के बाद एक अलग चिंता भी सामने आई है।

Al-Qaeda समर्थकों के साप्ताहिक अरबी प्रकाशन ‘Al-Bayan’ ने Flydubai cockpit हमले का जिक्र किया और इसे अमेरिकी तथा इजरायली विमानों के खिलाफ इसी तरह के हमलों के लिए उदाहरण की तरह पेश किया। प्रकाशन में 9/11 का संदर्भ देते हुए copycat attacks की अपील भी की गई।

International aviation security के सामने भी सवाल  

अब तक की जांच में जो दिख रहा है, उसमें एक तरफ Gaza revenge motive, दूसरी तरफ Jordan में अमेरिकी सैन्य ठिकाने का Plan B, तीसरी तरफ al-Hammami के extremist और al-Qaeda-संबंधित डिजिटल footprint, और चौथी ओर Oman Air की पुरानी चेतावनी के बावजूद उसका दोबारा commercial cockpit तक पहुंचना—ये सभी सवाल अंतरराष्ट्रीय aviation security के सामने खड़े हैं।

अब जांच Australia के बाद New Zealand तक पहुंच चुकी है। एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या Hamam al-Hammami अकेला radicalized व्यक्ति था, या उसकी कहानी के पीछे कोई ऐसा नेटवर्क है जिसका एक हिस्सा अभी सामने आना बाकी है?

Leave a Comment

Related News