स्वदेशी Akash Air Defence System अब सिर्फ भारतीय आसमान की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के तीन मध्य एशियाई देश (सेंट्रल एशियन कंट्रीज) कस्टमर हो गए हैं। यह सिस्टम Armenia के बाद Tajikistan और Turkmenistan को भी एक्सपोर्ट किया गया है।
इससे देश के सबसे अहम स्वदेशी डिफेंस एक्सपोर्ट (रक्षा निर्यात) की सफलताओं में से एक के तौर पर इस सिस्टम की स्थिति और मजबूत हुई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि आकाश के एक्सपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका प्रोडक्शन अब स्थिर हो गया है। एक्सपोर्ट बढ़ने के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र बलों से भी इसके लिए ऑर्डर मिल रहे हैं।
यह जानकारी भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट के लक्ष्यों के लिहाज से काफी अहम है। आकाश सिर्फ अलग-अलग मिसाइलों का एक्सपोर्ट नहीं है, बल्कि यह एक बड़े स्वदेशी एयर-डिफेंस सिस्टम को दिखाता है, जिसमें लॉन्चर, रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम और उससे जुड़ा सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।
Armenia के बाद Tajikistan और Turkmenistan में आकाश की पहुंच का मतलब है कि भारतीय air-defence technology अब South Caucasus से Central Asia तक पहुंच रही है।
रक्षा सचिव ने और क्या बताया ?
भारत के इस सिस्टम के विदेशी ग्राहकों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।
- Armenia आकाश सिस्टम का पहला विदेशी ग्राहक था।
- इसके बाद अब Central Asia के दो देशों—Tajikistan और Turkmenistan—को भी इसकी सप्लाई की गई है।
- इससे भारत के स्वदेशी मिसाइल सिस्टम की विदेशी पहुंच एक नए क्षेत्र तक पहुंच गई है।

आर्मेनिया पहला ग्राहक था, जिसने कई बैटरी खरीदीं। इसके बाद हमने इसे ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी एक्सपोर्ट किया है। हमारे पास अपनी सेनाओं के लिए भी अतिरिक्त ऑर्डर हैं। मुझे यकीन है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से और भी कई ऑर्डर मिलेंगे।
Rajesh kumar singh, defence secretary
हालांकि इन दोनों देशों के लिए कितनी बैटरियां, कितनी मिसाइलें, कौन-सा वैरिएंट और कितनी कीमत पर सौदा हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
आकाश में ऐसा क्या, जिसके वजह से दूसरे देश बन रहे ग्राहक?
आकाश एक Short Range Surface-to-Air Missile System है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। यह किसी एक मिसाइल तक सीमित हथियार नहीं, बल्कि मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया गया पूरा एयर डिफेंस सिस्टम है।
इसको संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण ठिकानों को हवाई हमलों से बचाने के लिए बनाया गया है। सिस्टम एक साथ कई लक्ष्यों को Group Mode या Autonomous Mode में engage कर सकता है और इसमें Electronic Counter-Counter Measures यानी ECCM क्षमता भी है। यह भारत में भी operational है।
आकाश की प्रमुख खूबियां:–
- करीब 25–30 किलोमीटर तक की engagement range वाला मूल Akash सिस्टम।
- तेज गति वाले हवाई लक्ष्यों को intercept करने की क्षमता।
- Fighter aircraft, helicopters और दूसरे aerial threats के खिलाफ इस्तेमाल।
- UAV और cruise missile जैसे खतरों के खिलाफ भी उपयोग की क्षमता।
- एक साथ कई targets को track और engage करने की क्षमता।
- मोबाइल लॉन्चर के कारण सिस्टम को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग स्थानों पर deploy किया जा सकता है।
- ECCM क्षमता के कारण electronic interference के बीच काम करने की क्षमता।
- भारतीय सेना और वायुसेना दोनों में इसका operational अनुभव।
- इसके आगे विकसित किए गए Akash-NG में करीब 50 किलोमीटर तक की intended range बताई जाती है।
- यानी विदेशी ग्राहक सिर्फ एक missile नहीं खरीद रहा, बल्कि एक ऐसा integrated air-defence solution ले रहा है जिसमें missile, launcher, radar, command-and-control और support infrastructure शामिल होते हैं।
आर्मेनिया को कब मिला था भारत का ‘आकाश’
Armenia भारत के स्वदेशी Akash Air Defence System का पहला विदेशी ग्राहक बना। दोनों देशों के बीच समझौता 2022 में हुआ था, जबकि इसकी पहली Akash battery नवंबर 2024 में Armenia के लिए रवाना की गई। डील की कीमत को लेकर रिपोर्टों में कुछ अंतर है—DRDO की अपनी 2024 की सूचना में इसे करीब ₹6,000 करोड़ बताया गया है, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में लगभग $720 मिलियन का आंकड़ा दिया गया।
| बिंदु | जानकारी |
| विदेशी ग्राहक | Armenia — Akash का पहला विदेशी ग्राहक |
| समझौते का साल | 2022 |
| ऑर्डर | 15 Akash systems |
| डील की कीमत | DRDO के अनुसार लगभग ₹6,000 करोड़; कुछ रिपोर्टों में करीब $720 million |
| कौन-सा सिस्टम | Akash-1S export variant की रिपोर्टिंग हुई |
| पहली डिलीवरी/dispatch | 11 नवंबर 2024 को पहली battery भारत से रवाना हुई |
| किसने भेजी | Bharat Electronics Limited (BEL) |
| पहली खेप में | 4 launchers, प्रत्येक पर 3 missiles; साथ में Rajendra fire-control radar |
| आधिकारिक पुष्टि | BEL ने 11 नवंबर 2024 को पहली Akash battery को एक “friendly foreign country” के लिए flag-off करने की जानकारी दी; बाद की रिपोर्टों ने ग्राहक की पहचान Armenia के रूप में की। |
| पूरे सिस्टम में भूमिका | BEL ने surveillance radar, missile guidance radar और C4I सहित ground-support equipment उपलब्ध कराया। |
| पहले विदेशी ग्राहक बनने का महत्व | इससे पहली बार भारतीय Akash Weap |
तीनों देशों को एयर डिफेंस की जरूरत क्यों?
आकाश के तीन विदेशी ग्राहक—Armenia, Tajikistan और Turkmenistan—तीन अलग-अलग सुरक्षा परिस्थितियों वाले देश हैं। Armenia की मुख्य चुनौती South Caucasus में Azerbaijan के साथ लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष और बदलता सैन्य संतुलन है। वहीं Tajikistan और Turkmenistan की सुरक्षा चिंता का बड़ा हिस्सा Afghanistan की अस्थिरता और उससे लगती सीमाओं से जुड़ा है।
| देश | भारत के साथ संबंध | प्रमुख सुरक्षा चुनौती/विरोधी पक्ष | एयर डिफेंस की जरूरत क्यों? |
| Armenia | 1992 में राजनयिक संबंध; पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा। भारत ने रडार, आर्टिलरी, ड्रोन, एंटी-ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम सहित कई रक्षा उपकरण दिए हैं। | Azerbaijan के साथ लंबे समय से संघर्ष इसका प्रमुख सैन्य संदर्भ है। 2020 और 2023 के संघर्षों के बाद Armenia ने अपनी रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर जोर बढ़ाया है। | युद्ध के दौरान ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, सैनिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए layered air defence महत्वपूर्ण है। |
| Tajikistan | भारत के साथ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग है। दोनों देशों के बीच Defence Cooperation पर Joint Working Group और Counter-Terrorism पर भी तंत्र मौजूद है। | Afghanistan से जुड़ी सुरक्षा अस्थिरता प्रमुख चिंता है। Tajikistan की लंबी सीमा Afghanistan से लगती है। आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा-पार अस्थिरता क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती हैं। | सीमा क्षेत्र और महत्वपूर्ण सैन्य/राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों को ड्रोन, विमान या अन्य हवाई खतरों से बचाने के लिए आधुनिक air defence उपयोगी है। भारत और Tajikistan दोनों ने आतंकवाद तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना है। |
| Turkmenistan | भारत के साथ राजनयिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंध हैं। भारत Ashgabat Agreement का सदस्य है और Turkmenistan ने Chabahar के इस्तेमाल का समर्थन किया है। | Afghanistan सीमा इसका प्रमुख सुरक्षा संदर्भ है। Turkmenistan सीधे Afghanistan से जुड़ा है और वहां की स्थिरता को अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों से जोड़ता है |
Defence Export में भारत की स्थिति ?
आकाश अकेला ऐसा भारतीय सिस्टम नहीं है जिसने विदेशी बाजार में जगह बनाई है। भारत का defence export basket अब missile systems से लेकर aircraft, radar, artillery, naval platforms और protective equipment तक फैल चुका है।
सबसे चर्चित नाम BrahMos है। जनवरी 2022 में Philippines ने भारत से Shore-Based Anti-Ship Missile System खरीदने के लिए $375 million का contract किया था। यह भारत के बड़े missile export deals में शामिल है।
इसके अलावा Pinaka Multi-Barrel Rocket Launcher System भी export market में पहुंच चुका है। Armenia को Pinaka system की supply की गई और जनवरी 2026 में guided Pinaka rockets की पहली खेप Armenia के लिए रवाना की गई।
भारत की defence export list इससे भी ज्यादा बड़ी है।
| भारतीय सिस्टम/उत्पाद | प्रमुख विदेशी ग्राहक/बाजार |
| Akash | Armenia, Tajikistan, Turkmenistan |
| BrahMos | Philippines; Indonesia के साथ सहयोग/बातचीत भी बढ़ी |
| Pinaka | Armenia |
| Swathi Weapon Locating Radar | Armenia सहित विदेशी ग्राहक |
| ATAGS/MArG artillery systems | Armenia |
| Do-228 aircraft | Maldives, Mauritius, Seychelles आदि |
| Helicopters | Maldives, Mauritius, Nepal आदि |
| Naval/Maritime platforms | Maldives, Mauritius, Mozambique, Myanmar, Seychelles, Sri Lanka, Vietnam आदि |
| WhAP | Morocco |
| Radar और अन्य electronic systems | कई विदेशी बाजार |
भारत की defence export story सिर्फ बड़े missile systems तक सीमित नहीं है। भारतीय defence companies bulletproof jackets, Do-228 aircraft, Chetak helicopters, fast interceptor boats और lightweight torpedoes जैसे उत्पाद भी दूसरे देशों को बेच रही हैं।
- भारत के defence export का आकार पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में defence exports ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
- यह 2024-25 के ₹23,622 करोड़ से 62.66 प्रतिशत अधिक था।
- FY 2025-26 में भारतीय defence products और equipment 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुके थे
- और defence exporters की संख्या बढ़कर 145 हो गई थी।








