जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बडगाम के यूसमर्ग इलाके में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तानी आतंकी को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT)के इस आतंकी की पहचान Mohammad Asif alias Hashim Moosa के रूप में हुई है।
बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान जंगल से उसकी लाश, हथियार और अन्य सामग्री बरामद की गई। मूसा, पहलगाम हमले का गुनहगार था। यह मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक था। एक और खास बात यह कि मूसा, पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में पैरा-कमांडो रह चुका था।
हाशिम मूसा का कैसे काम तमाम हुआ ?
29 सितंबर की रात सुरक्षा बलों को यूसमर्ग के ऊपरी इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी की विशेष खुफिया सूचना मिली। इसके बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने मिलकर यूसमर्ग के कोराग इलाके में संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
सुरक्षा बल इलाके में आगे बढ़ रहे थे, तभी जवानों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। आतंकियों को चुनौती दिए जाने पर उनकी तरफ से फायरिंग शुरू कर दी गई। इसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई और एक आतंकी को मार गिराया गया।
चिनार कॉर्प्स ने बताया कि शव की पहचान पाकिस्तान बेस्ड लश्कर-ए-तैयबा आतंकी Mohammad Asif alias Hashim Moosa के रूप में हुई और उसके पास से war-like stores (युद्ध में इस्तेमाल होने वाली सैन्य सामग्री/हथियार-सैन्य सामान) भी बरामद किए गए।
ऑपरेशन के आगे भी जारी रहने की जानकारी दी गई थी।
कौन था हाशिम मूसा?
Hashim Moosa लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। रिपोर्टों के अनुसार वह लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख ऑपरेटर था और पीर पंजाल के दोनों तरफ जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।
उसकी पहचान का एक और सबसे अहम पहलू उसका पाकिस्तानी सैन्य प्रशिक्षण था। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वह पाकिस्तान की Special Service Group यानी SSG में भी रह चुका था।
यानी वह वह सामान्य रूप से प्रशिक्षित आतंकी नहीं था, बल्कि उसे सैन्य स्तर की ट्रेनिंग मिली हुई थी। इसीलिए इसे ‘फौजी मूसा’ के तौर पर भी जाना जाता था।
पहलगाम हमले में क्यों था वांटेड?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन में हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत 26 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले की जांच में लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क और मूसा का भी नाम गुनहगारों के तौर पर सामने आया।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान नागरिक और LeT आतंकी आदिल हुसैन ठोकर, अली भाई और Hashim Musa की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी।
पहले भी कई हमलों में आया था हाशिम मूसा का नाम
पहलगाम हमले के बाद सामने आए रिकॉर्ड और सुरक्षा एजेंसियों की जांच के मुताबिक Hashim Moosa का नाम सिर्फ पहलगाम हमले तक सीमित नहीं था। J&K Police ने 2025 में उसे घाटी और जम्मू क्षेत्र में हुए कम से कम चार अन्य आतंकी हमलों से जोड़कर तलाश की थी। बाद की सुरक्षा रिपोर्टों में उसके साथी यासिर के साथ मिलकर 2021 से 2024 के बीच हुए कई हमलों में उसके कथित रोल की भी जांच सामने आई।
| कब | कहां हमला | क्या हुआ | हाशिम मूसा का नाम/कनेक्शन |
| अक्टूबर 2021 | चमरर और भट्टा दुर्रियां, पुंछ | हमले में 9 सैनिक शहीद | 2026 की सुरक्षा जांच में मूसा और उसके साथी यासिर के मॉड्यूल को इस हमले की श्रृंखला से जोड़ा गया |
| अप्रैल 2023 | भट्टा दुर्रियां, पुंछ | आतंकी हमले में 5 जवान शहीद | बाद की जांच में मूसा-यासिर समूह की गतिविधियों से जोड़ा गया |
| दिसंबर 2023 | डेरा की गली, राजौरी | सेना के जवानों पर घात लगाकर हमला; 4 सैनिक शहीद | J&K Police ने मूसा को इस हमले से जुड़े आतंकियों में शामिल बताया |
| मई 2024 | शाहसितार, पुंछ | भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमला; 1 IAF जवान शहीद और 4 घायल | सुरक्षा सूत्रों के अनुसार मूसा और उसके मॉड्यूल का नाम इस हमले में आया |
| अक्टूबर 2024 | बुटापथरी, गुलमर्ग/बारामुला | आतंकियों के हमले में 2 सैनिक और 2 नागरिक पोर्टर बलिदान | मूसा और यासिर को इस हमले का संदिग्ध बताया गया |
| अक्टूबर 2024 | गगनगीर/जेड-मोड़, गांदरबल | निर्माण परियोजना से जुड़े लोगों पर हमला; 7 लोगों की मौत | मूसा के व्यापक आतंकी नेटवर्क से इस हमले की कड़ी की जांच हुई; इसे सीधे मूसा का हमला बताने में सावधानी जरूरी है |
एक बार सुरक्षा बलों से बच निकला था ?
Hashim Moosa की तलाश हाल के दिनों में और तेज हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक 5 सितंबर 2026 को यूसमर्ग की पहाड़ियों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान उसका करीबी सहयोगी Yasir मारा गया, जबकि मूसा के उस ऑपरेशन से बच निकलने की बात सामने आई थी।
इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने यूसमर्ग और आसपास के जंगलों में उसकी गतिविधियों पर नजर और मजबूत की। आखिरकार विशेष खुफिया सूचना के आधार पर कोराग इलाके में ऑपरेशन शुरू किया गया।
हाशिम का सफाया कितनी बड़ी कामयाबी ?
Hashim Moosa का मारा जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां उसे पहलगाम हमले से जुड़े प्रमुख वांटेड आतंकियों में गिनती रही थीं और उसके बारे में पाकिस्तानी सैन्य/पैरा-कमांडो बैकग्राउंड की जानकारी भी सामने आती रही है। अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि वह हाल के महीनों में किन आतंकियों के संपर्क में था और उसके नेटवर्क की जमीनी मौजूदगी कितनी बची है।
क्या है पाकिस्तान का Special Service Group (SSG) ?
यह Pakistan Army की special forces / special operations unit है। इसे आम तौर पर पाकिस्तानी सेना की कमांडो फोर्स कहा जाता है।
SSG क्या करता है?
- कमांडो और विशेष अभियान: दुश्मन के इलाके में विशेष ऑपरेशन और हाई-रिस्क मिशन।
- आतंकवाद-रोधी अभियान: आतंकवाद और बंधक संकट जैसी परिस्थितियों में कार्रवाई।
- Reconnaissance: दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाना।
- छापामार/छोटे दल के ऑपरेशन: सीमित संख्या में प्रशिक्षित सैनिकों के साथ विशेष मिशन।
- हवाई और पर्वतीय ऑपरेशन: पैराशूट, एयर-असॉल्ट और कठिन भूभाग में ऑपरेशन की ट्रेनिंग।
SSG कमांडो को कैसी ट्रेनिंग मिलती है?
SSG की ट्रेनिंग सामान्य सैनिकों की तुलना में विशेष होती है। इसमें पैराशूटिंग, हथियार संचालन, क्लोज-क्वार्टर बैटल, जंगल और पहाड़ी युद्ध, सर्वाइवल तथा विशेष अभियान जैसी क्षमताओं पर जोर दिया जाता है।








