पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में चल रहे विद्रोह ने अब एक और अधिक खतरनाक रूप दिखाया है। India Today के मुताबिक बलूच विद्रोहियों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार अपनी विशेष महिला लड़ाकू (कॉम्बैट) यूनिट लांच की है। खास बात यह कि यूनिट ने दस्तक देने के साथ ही 9 पाकिस्तान सैनिकों को मौत के घाट उतारकर अपना जबर्दस्त दमखम दिखाया है।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट यानी BLF ने अपनी नई बनी महिला लड़ाकू यूनिट Karima Armed Assault Division यानी KAAD का वीडियो जारी किया है। संगठन का दावा है कि इस यूनिट ने बलूचिस्तान के तुरबत और कलात इलाके में दो अभियानों के दौरान 9 पाकिस्तानी फौजियों को मार गिराया और कई अन्य को घायल किया।
वीडियो में एक महिला कमांडर लड़ाकों को ऑपरेशन से पहले ब्रीफ करती दिखाई देती है। इसके बाद हथियारबंद लड़ाकों को सैन्य वाहनों पर फायरिंग करते और सड़क पर वाहनों की जांच करते दिखाया गया है। BLF इसे अपनी महिला यूनिट की ट्रेनिंग और ऑपरेशनल क्षमता के प्रमाण के तौर पर पेश कर रहा है।
BLF ने इसके माध्यम से अब अधिक संगठित तरीके से यह संदेश देने की कोशिश की है कि बलूच विद्रोह में महिलाएं भी सीधे हथियारबंद अभियानों में शामिल हो रही हैं।
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बलूच आंदोलन में महिलाओं को सीधे युद्ध के मोर्चे पर उतारना पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के लिए एक नई और बेहद गंभीर सुरक्षा चुनौती साबित हो सकता है।
KAAD का पहला ऑपरेशन कितना कामयाब ?
BLF के मुताबिक KAAD का पहला बड़ा ऑपरेशन 22 सितंबर को तुरबत के पास जोसाक इलाके में हुआ। यहां चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC से जुड़े हाईवे पर पाकिस्तानी सेना के एक क्विक रिएक्शन फोर्स यानी QRF काफिले को निशाना बनाने का दावा किया गया। BLF के अनुसार काफिले में तीन सैन्य वाहन थे।
- संगठन का दावा है कि घात लगाकर किए गए हमले में छह पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए और कई घायल हुए। उसके मुताबिक कुछ सैन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
- इस ऑपरेशन में BLF की Qurban यूनिट के सहयोग का भी दावा किया गया है।
- BLF ने अपने एक लड़ाके चाकर मुराद के मारे जाने की पुष्टि की है, जिसे संगठन दिलीप जान के नाम से भी पहचानता था।
दूसरे ऑपरेशन को कब और कैसे दिया अंजाम ?
BLF ने KAAD के दूसरे ऑपरेशन को 25 सितंबर को कलात जिले के मंगोचर इलाके से जोड़ा है।
- महिला लड़ाकों ने क्वेटा-कराची हाईवे के तीन स्थानों पर नाकेबंदी की। वीडियो में महिला लड़ाकों को वाहनों को रोककर उनकी जांच करते हुए दिखाया गया है।
- मंगोचर की तरफ से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का एक बख्तरबंद वाहन और दो अन्य वाहन पहुंचे, जिसके बाद उन पर हमला किया गया। BLF के मुताबिक इस कार्रवाई में दो सैन्यकर्मी मारे गए।
- इसके बाद सुरक्षा बलों ने लड़ाकों को घेरने की कोशिश की। फिर मुठभेड़ में एक और सैन्यकर्मी मारा गया।
- इस तरह संगठन ने इस ऑपरेशन में तीन मौतों का दावा किया है।
यानी कि BLF के अपने दावे के मुताबिक दोनों ऑपरेशनों में 6+3 यानी कुल 9 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आखिर KAAD है क्या?
KAAD यानी Karima Armed Assault Division को BLF अपनी महिला लड़ाकू यूनिट के रूप में पेश कर रहा है। यानी यह BLF के भीतर काम करने वाली एक सशस्त्र महिला यूनिट है।
- इसका नाम दिवंगत बलूच कार्यकर्ता करीमा बलोच के नाम पर रखा गया है।
- BLF का कहना है कि इस यूनिट को कई सालों की ट्रेनिंग और तैयारी के बाद बनाया गया है।
- इसका उद्देश्य बलूचिस्तान में उसके सशस्त्र अभियान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
- BLF ने इसे बलूच समाज में लैंगिक भेदभाव और पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देने से भी जोड़ा है।
वीडियो क्यों महत्वपूर्ण ?
इस घटनाक्रम में सिर्फ हमले का दावा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वीडियो का जारी होना भी महत्वपूर्ण है। वीडियो में महिला कमांडर को लड़ाकों को ब्रीफ करते दिखाया गया है। इसके बाद सैन्य काफिले पर कथित हमला और हाईवे पर वाहनों की जांच की फुटेज दिखाई गई है।
ऐसे वीडियो विद्रोही संगठनों के लिए केवल ऑपरेशन का रिकॉर्ड नहीं होते। वे अपनी संगठनात्मक क्षमता, भर्ती और लड़ाकू क्षमता का संदेश देने का माध्यम भी बन सकते हैं।
बलूचिस्तान में सिर्फ BLF ही सक्रिय नहीं
KAAD का मामला बलूचिस्तान में चल रही व्यापक हिंसा से अलग नहीं है। सितंबर के इसी दौर में दूसरे बलूच सशस्त्र संगठनों ने भी अलग-अलग हमलों का दावा किया।
- Baloch Republican Army यानी BRA ने डेरा बुगती में एक एनर्जी फैसिलिटी पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया।
- वहीं Baloch Republican Guards यानी BRG ने हाजी शहर और एरी शहर में सरकारी प्रतिष्ठानों और पुलिस ढांचे पर कार्रवाई का दावा
CPEC के लिए क्यों बढ़ती है चिंता?
तुरबत और कलात की घटनाओं का एक अहम पहलू हाईवे और सैन्य आवाजाही है।
CPEC पाकिस्तान के अलावा चीन के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत सड़क, ऊर्जा और बंदरगाह से जुड़ा व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है। ऐसे में CPEC से जुड़े मार्गों पर सैन्य काफिले को निशाना बनाने का दावा सुरक्षा के सवाल को सीधे आर्थिक ढांचे से जोड़ देता है।
बलूचिस्तान में पहले भी चीन से जुड़ी परियोजनाएं और चीनी नागरिक सुरक्षा के मुद्दे का सामना कर चुके हैं। इसलिए यदि हाईवे और ऊर्जा ढांचा लगातार हमलों के दायरे में आता है, तो इसका असर केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। चीन के माथे पर भी चिंता की लकीरें आ जाती हैं।
चुनौतियों से कितना घिरा पाकिस्तान
इस घटनाक्रम का समय भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान एक साथ कई सुरक्षा मोर्चों का सामना कर रहा है। खैबर पख्तूनख्वा में भी सितंबर के अंतिम सप्ताह में बड़े हमले हुए हैं।
26 सितंबर को डेरा इस्माइल खान में एक पुलिस चेकपोस्ट पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और करीब 35 घायल हुए। TTP ने उस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
इसके अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी तनाव बढ़ा हुआ है। यानी बलूचिस्तान में BLF जैसी अलगाववादी हिंसा और उत्तर-पश्चिम में TTP से जुड़ी हिंसा पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र पर अलग-अलग दिशाओं से दबाव बना रही है।








