19 साल NTPC में काम करता रहा बांग्लादेशी, देश के बिजली नेटवर्क सुरक्षा में लगी सेंध ?

By Defence Detective

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Bangladeshi national Atiq Hussain arrested by police in Bilaspur Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सिर्फ अवैध घुसपैठ की गंभीर समस्या और इससे आने वाली चुनौतियों की ओर ही ध्यान नहीं खींचा है, बल्कि देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों में थर्ड-पार्टी कर्मचारियों की पहचान जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

छत्तीसगढ़ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और बिलासपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने बिलासपुर में अतीक हुसैन नाम के एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। वह करीब 19 साल से यहां एनटीपीसी की यूनिट में काम कर रहा था।  

42 साल के अतीक हुसैन की गिरफ्तारी ने यह सवाल भी उठाया है कि आखिर कैसे एक बांग्लादेशी नागरिक, भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड पावर यूटिलिटी और महारत्न सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) NTPC लिमिटेड द्वारा चलाए जा रहे एक प्लांट में लगभग दो दशकों तक बिना किसी की नज़र में आए काम करता रहा।

NTPC में उसकी नौकरी कैसे लगी, और उसका काम क्या था?

अतीक सीधे NTPC का कर्मचारी नहीं था। वह BECO Lifts Private Limited के जरिए NTPC के सीपत प्लांट में काम करता था। उसका काम लिफ्ट इंस्टॉलेशन/मेंटेनेंससे जुड़ा था। इसका मतलब था कि वह प्लांट परिसर में लिफ्टों की देखभाल, मरम्मत और संबंधित तकनीकी काम करता था। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि उसका काम प्रशासनिक और ऑपरेशनल सुविधाओं में लिफ्ट इंस्टॉलेशन/मेंटेनेंस से जुड़ा था।

लेकिन उसे BECO में नौकरी किस प्रक्रिया से मिली, किसने उसके दस्तावेज सत्यापित किए और NTPC परिसर में उसे प्रवेश की अनुमति किस स्तर पर मिली—इन सवालों का पूरा जवाब अभी जांच में सामने नहीं आया है।

उसके पास से क्या-क्या दस्तावेज बरामद  हुए ?

पुलिस को उसके किराए के मकान से सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि भारतीय पहचान बनाने वाले कई दस्तावेज मिले हैं। बरामद दस्तावेजों में शामिल बताए गए हैं:

  • भारतीय पासपोर्ट
  • आधार कार्ड
  • PAN कार्ड
  • वोटर ID
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जाति प्रमाण पत्र
  • नौवीं कक्षा की मार्कशीट

इनमें से कई दस्तावेज गलत तरीके से हासिल किए गए थे और अब उनकी वैधता तथा इन्हें बनवाने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।  उसने 2018 में भारतीय पासपोर्ट बनवाया था। इसके बाद आधार, PAN, वोटर कार्ड और दूसरे दस्तावेज हासिल किए। उसके पास मंगला के एक निजी स्कूल की नौवीं कक्षा की कथित फर्जी मार्कशीट भी मिली है।

अतीक तक कैसे पहुंची पुलिस ?

अतीक पुलिस की नजर में अचानक नहीं आया। पुलिस के अनुसार, करीब 20 दिन पहले सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की पहचान और सत्यापन की कार्रवाई चल रही थी। इसी दौरान अतीक भी जांच के दायरे में आया।

अतीक सहित कुछ संदिग्धों को रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा गया था। लेकिन अतीक वहां से फरार हो गया। इसके बाद STF और जिला विशेष शाखा ने उसकी तलाश शुरू की। लगातार निगरानी और रेकी के बाद पुलिस को उसके सरकंडा इलाके में छिपे होने की जानकारी मिली। 24 सितंबर की सुबह सूर्या विहार कॉलोनी स्थित उसके किराए के मकान पर दबिश देकर उसे पकड़ लिया गया।

पूछताछ में उसने खुद को बांग्लादेश के नारायणगंज जिले का निवासी बताया । वह 2005 में अवैध तरीके से भारत  आया।  इसके बाद 2005 से 2007 तक तमिलनाडु में रहा। और फिर इसके बाद बिलासपुर आया।

 19 साल तक NTPC परिसर से जुड़े काम में कैसे बना रहा?

NTPC भारत की प्रमुख केंद्रीय ऊर्जा कंपनियों में से एक है और Maharatna Central Public Sector Enterprise है। NTPC का सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन बिलासपुर में स्थित है। इसकी मौजूदा स्थापित क्षमता 2,980 MW है और इससे छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा तथा केंद्रशासित क्षेत्रों को भी बिजली मिलती है। ऐसे प्रतिष्ठान में लंबे समय तक किसी थर्ड-पार्टी कर्मचारी का काम करना अपने आप में यह सवाल खड़ा करता है कि:

  • ठेकेदार कंपनी ने उसकी पहचान की जांच कैसे की?
  • उसके भारतीय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
  • प्लांट का एंट्री पास किस आधार पर जारी हुआ?
  • इतने वर्षों में उसके दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन हुआ या नहीं?
  • 2018 में बने कथित भारतीय पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं हुई?
  • क्या थर्ड-पार्टी कर्मचारियों के लिए नियमित re-verification पर्याप्त था?

इन सवालों के जवाब अभी जांच से निकलने बाकी हैं। सवाल ये है कि क्या NTPC की पूरी सुरक्षा व्यवस्था विफल हुई या अतीक ने किसी संवेदनशील सूचना तक पहुंच बनाई। इस सवाल का जवाब मिलना बेहद ज़रूरी है क्योंकि ये देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला हो सकता है।  

भारतीय एजेंसियों ने अब क्या कार्रवाई की?

मामले में अब कार्रवाई कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। STF और जिला विशेष शाखा ने संयुक्त अभियान चलाकर अतीक को पकड़ा। उसके किराए के मकान की तलाशी ली गई। भारतीय पहचान से जुड़े कई दस्तावेज जब्त किए गए। उसके भारत आने और अलग-अलग राज्यों में रहने की जानकारी जुटाई जा रही है। दस्तावेज बनाने में मदद करने वाले लोगों की तलाश की जा रही है। उसके संपर्कों और गतिविधियों की जांच की जा रही है।

फिलहाल उसे रायपुर के विदेशी नागरिकों के होल्डिंग सेंटर भेजा जा रहा है और उसके साथ ही बांग्लादेश में डिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

कुछ रिपोर्टों में पुलिस द्वारा उसके संपर्कों और संभावित गतिविधियों की जांच तथा जासूसी के एंगल की भी बात कही गई है। हालांकि अभी तक ऐसा साक्ष्य सामने नहीं आया है कि वह जासूसी कर रहा था या उसने NTPC से कोई संवेदनशील जानकारी हासिल की थी।

इस गिरफ्तारी का सबसे बड़ा मतलब क्या है?

अतीक हुसैन की गिरफ्तारी का सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वह बांग्लादेश से भारत कैसे आया। असल सवाल यह है कि फर्जी पहचान के साथ एक विदेशी नागरिक लगभग दो दशक तक एक बड़े केंद्रीय ऊर्जा प्रतिष्ठान से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट वर्क में कैसे बना रहा। इसलिए इस मामले से तीन स्तरों पर जांच की जरूरत सामने आती है:

पहला—दस्तावेज: फर्जी या गलत तरीके से हासिल भारतीय पहचान बनाने में कौन मदद कर रहा था?

दूसरा—कॉन्ट्रैक्टर वेरिफिकेशन: थर्ड-पार्टी कर्मचारियों की पहचान और दस्तावेजों की जांच कितनी गहराई से होती है?

तीसरा—क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी: बिजली, बंदरगाह, रेलवे, रक्षा उत्पादन और दूसरी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में लंबे समय तक काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की पहचान का समय-समय पर दोबारा सत्यापन कैसे हो रहा है?

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