भारत बंगाल की खाड़ी में एक नए मिसाइल परीक्षण की तैयारी में है। IDRW के मुताबिक 25 और 26 सितंबर 2026 के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन में करीब 600 किलोमीटर लंबा समुद्री क्षेत्र परीक्षण से जुड़े संभावित खतरे वाले इलाके के रूप में मार्क किया गया है। इसका मतलब है कि इस दौरान इस समुद्री कॉरिडोर में सामान्य हवाई और समुद्री आवाजाही को लेकर सुरक्षा प्रतिबंध लागू रहेंगे।
इसका लांच प्वाइंट भारत का ईस्टर्न टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स होगा। हालांकि भारत इस दौरान किस मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है? अभी इसका आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
मिसाइल परीक्षणों से पहले इस तरह के नोटिस जारी करना सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य परीक्षण क्षेत्र में नागरिक विमानों और जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करना है।
600 किलोमीटर के मायने?
यहां सबसे अहम बात समझना जरूरी है कि नोटिफिकेशन में अगर करीब 600 किलोमीटर का क्षेत्र दिखाई दे रहा है, तो इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि भारत 600 किलोमीटर मारक क्षमता वाली मिसाइल ही दागने वाला है।
मिसाइल टेस्ट के लिए समुद्र में एक सुरक्षा कॉरिडोर तय किया जाता है। इसके अंदर लॉन्च के बाद मिसाइल की संभावित उड़ान, ट्रैकिंग, टेलीमेट्री और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र को ध्यान में रखा जाता है।
इसलिए NOTAM/टेस्ट नोटिफिकेशन की लंबाई = मिसाइल की वास्तविक रेंज नहीं।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के पास अलग-अलग श्रेणियों की कई मिसाइल प्रणालियां हैं जिनकी क्षमताएं इस इलाके के आसपास के परीक्षण प्रोफाइल से जुड़ सकती हैं। इसलिए सिर्फ 600 किमी देखकर किसी एक मिसाइल का नाम लेना अटकल होगी।
यह बैलिस्टिक मिसाइल होगी या क्रूज मिसाइल?
अभी इसका जवाब नहीं दिया जा सकता। क्योंकि जारी नोटिफिकेशन से केवल परीक्षण क्षेत्र और समय की जानकारी मिलती है। इससे यह तय नहीं होता कि परीक्षण:–
- बैलिस्टिक मिसाइल का होगा,
- क्रूज मिसाइल का,
- एंटी-शिप मिसाइल का,
- या किसी दूसरी मिसाइल प्रणाली का।
इसलिए किसी खास हथियार को इस टेस्ट से जोड़ना तब तक उचित नहीं होगा, जब तक रक्षा मंत्रालय, DRDO या संबंधित आधिकारिक एजेंसी की ओर से पुष्टि नहीं आती।
यही इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि भारत ने टेस्ट का संकेत दिया है, लेकिन हथियार की पहचान अभी छिपी हुई है।
भारत के पूर्वी तट पर लगातार बढ़ रही टेस्टिंग क्षमता
इस टेस्ट की टाइमिंग ऐसे समय पर आई है जब भारत अपने मिसाइल और हथियार परीक्षण ढांचे को भी विस्तार दे रहा है।
हाल में पश्चिम बंगाल के जूनपुट में नए मिसाइल और हथियार परीक्षण केंद्र प्रोजेक्ट को फिर से आगे बढ़ाने की जानकारी सामने आई थी। यह फैसिलिटी बंगाल की खाड़ी के किनारे होगी और DRDO की परीक्षण क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।
इससे पूर्वी समुद्री क्षेत्र का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि, 25-26 सितंबर का करीब 600 किमी वाला टेस्ट नोटिफिकेशन सीधे जूनपुट सुविधा से जुड़ा है, ऐसा कहने के लिए अभी पर्याप्त आधिकारिक प्रमाण नहीं है।
भारत के पास पहले से ओडिशा तट पर मिसाइल परीक्षण के लिए प्रमुख सुविधाएं मौजूद हैं। इसलिए बंगाल की खाड़ी में किसी नए परीक्षण नोटिस को भारत के व्यापक मिसाइल टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में देखना अधिक उचित है।








