‘दिगंतरा’ का ‘मोजेक’: अंतरिक्ष में भारत की नई ‘नजर’

By Defence Detective

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igantara MOSAIC AI-powered space surveillance system for tracking satellites and space objects

देश की अंतरिक्ष सुरक्षा और स्पेस डोमेन अवेयरनेस (SDA) क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बेंगलुरु स्थित निजी कंपनी ‘दिगंतरा’ नेMOSAIC’ (मोजेक) नाम का एक स्पेस सर्विलांस सिस्टम पेश किया है। इस AI-powered Wide Area Sensing Architecture को इस तरह विकसित किया गया है कि यह अंतरिक्ष में मौजूद सैकड़ों चीजों को एक साथ खोजने, पहचानने और ट्रैक करने में मदद कर सके। यह देखी गई चीजों को ऑर्बिटल इंटेलिजेंस में बदल देता है।  

कंपनी के मुताबिक MOSAIC को एक वाइड-एरिया डिटेक्शन और कस्टडी लेयर के तौर पर काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह दिगंतरा की उस क्षमता को सपोर्ट करता है जिससे वह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) से लेकर जियोस्टेशनरी अर्थ ऑर्बिट (GEO) तक, सभी ऑर्बिटल रेंज में मौजूद वस्तुओं का पता लगा सकती है, उनकी पहचान कर सकती है और उन्हें ट्रैक कर सकती है।

यहां कस्टडी का अर्थ केवल किसी सैटेलाइट को एक बार देख लेना नहीं है, बल्कि उसके बारे में लगातार updated tracking information बनाए रखना है। यही क्षमता space traffic management और military Space Domain Awareness दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

“शुरुआत में हमने एक साधारण सवाल से शुरुआत की थी कि असल में ऊपर क्या है। अब हम इस बात का जवाब दे रहे हैं कि आपको इसके बारे में क्या जानना चाहिए और आप कितनी तेज़ी से जान सकते हैं। हम जो भी क्षमता विकसित करते हैं, जिसमें MOSAIC भी शामिल है, वह असल में उसी जवाब का एक और हिस्सा है। हमारा मकसद इन सेंसर्स को दुनिया भर में फैलाना है ताकि हम निगरानी बनाए रख सकें और स्वतंत्र रूप से कैटलॉग को मेंटेन कर सकें।”
ANIRUDH SHARMA, FOUNDER AND CEO, Digantara

क्या है MOSAIC और क्यों है महत्वपूर्ण?

अंतरिक्ष अब केवल संचार, मौसम और नेविगेशन का क्षेत्र नहीं रह गया है। सैटेलाइट्स सैन्य communications, intelligence, navigation, missile warning और surveillance में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, Low Earth Orbit (LEO) में satellites की संख्या बढ़ने के साथ orbital debris और दूसरे Resident Space Objects यानी RSOs की निगरानी भी चुनौती बन रही है। ऐसे वातावरण में किसी देश के लिए यह जानना बेहद महत्वपूर्ण है कि उसके आसपास ऑर्बिट में कौन-सी वस्तुएं मौजूद हैं, उनकी स्थिति क्या है और वे किस दिशा में जा रही हैं।

  • दिगंतरा का MOSAIC इसी समस्या को AI, optical sensors और distributed surveillance network के जरिए हल करने की कोशिश करता है।
  • इसे अंतरिक्ष की वस्तुओं का रियल-टाइम पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उनका विश्लेषण करने के लिए बनाया गया है।
  • कंपनी का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें भारत को महत्वपूर्ण ऑर्बिटल डाटा के लिए विदेशी कॉमर्शियल सोर्सेज पर कम निर्भर रहना पड़े।

कैसे करेगा काम ?

MOSAIC के शुरुआती डिप्लॉयमेंट में पांच नोड्स शामिल होंगे, जो अलग-अलग sensor stations के रूप में काम करने के बजाय एक साथ मिलकर एक कोऑर्डिनेटेड सर्विलांस नेटवर्क के तौर पर काम करेंगे।

प्रत्येक node में दो प्रमुख हिस्से हैं। पहला है Optical Head Unit, जिसका काम आसमान की high-precision imaging करना है। दूसरा है Electronics Head Unit, जो onboard processing, timing, communications और autonomous operations संभालता है।

इसका अर्थ है कि sensor केवल तस्वीर लेने वाला उपकरण नहीं है। डेटा की शुरुआती processing और system-level coordination भी node के स्तर पर की जा सकती है। इससे surveillance network को अधिक autonomous और responsive बनाने में मदद मिलती है।

यह सिस्टम बैटरी बैकअप के साथ सोलर पावर पर भी स्वतंत्र रूप से काम करेगा। इसे इस तरह से बनाया गया है कि यह “थार रेगिस्तान की गर्मी और हिमालय की ठंड” में भी काम कर सके।

कैसे होगी अंतरिक्ष में चीजों की पहचान?

MOSAIC की सबसे महत्वपूर्ण खूबियों में उसका AI और Machine Learning आधारित detection system है। Optical sensors से मिलने वाले sky observations में stars और दूसरे objects दिखाई देते हैं। AI/ML system इन observations को process करके stars और Resident Space Objects की पहचान करने में मदद करता है।

यह faint targets को भी detect करने के लिए बनाया गया है। यानी ऐसे अपेक्षाकृत कमजोर optical signatures वाले objects को भी खोजने का प्रयास किया जाएगा, जिन्हें पारंपरिक surveillance architecture के लिए पहचानना कठिन हो सकता है।

MOSAIC की एक अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषता “Lost-in-Space” attitude estimation है। सामान्य tracking व्यवस्था में किसी object के बारे में पहले से cue या अनुमानित location मिलने से tracking आसान हो जाती है। लेकिन MOSAIC का architecture ऐसे मामलों के लिए भी बनाया गया है जहां पहले से किसी object की जानकारी उपलब्ध नहीं हो।

सिस्टम optical observations के आधार पर अपने orientation और आकाश में object की स्थिति का अनुमान लगाने में सक्षम बनाया गया है। इसके कारण यह केवल existing catalogue को update करने वाला system नहीं रहता, बल्कि नए या पहले से अज्ञात objects को खोजने की दिशा में भी काम कर सकता है।

इससे बड़े orbital environment की निगरानी में मानव operators पर पड़ने वाला प्रारंभिक data-processing बोझ कम हो सकता है।

भारत की strategic autonomy के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

भारत के लिए indigenous space surveillance capability का महत्व केवल satellites की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। किसी conflict या crisis के दौरान satellite imagery और orbital tracking data की उपलब्धता decision-making की गति को प्रभावित कर सकती है।

Operation Sindoor के संदर्भ में Digantara और विभिन्न रिपोर्टों ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने domestic satellite assets के साथ commercial imagery का भी इस्तेमाल किया था। इससे यह सवाल सामने आया कि national-security decisions के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण data का कितना हिस्सा भारत के अपने नियंत्रण में होना चाहिए। MOSAIC को इसी व्यापक आवश्यकता के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि MOSAIC को Operation Sindoor के लिए इस्तेमाल की गई किसी specific operational capability का प्रत्यक्ष replacement बताना उचित नहीं होगा। इसका घोषित उद्देश्य एक broader, indigenous और persistent orbital surveillance infrastructure तैयार करना है।

यदि यह architecture बड़े स्तर पर deploy होता है, तो इससे भारत की Space Domain Awareness, satellite सुरक्षा, debris monitoring और भविष्य की strategic space-intelligence capabilities को मजबूती मिल सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि भारत अपने critical orbital data और surveillance infrastructure पर कितना अधिक स्वतंत्र नियंत्रण स्थापित कर पाता है। यही MOSAIC को भारत के तेजी से विकसित होते private space और defence-tech ecosystem में महत्वपूर्ण बनाता है।

दिगंतरा की पहले से मौजूद तकनीक का विस्तार

MOSAIC, दिगंतरा की पहली space-surveillance technology नहीं है। कंपनी पहले ही SCOT (Space Camera for Object Tracking) जैसे space-based surveillance systems पर काम कर चुकी है। भारत सरकार के Startup India से जुड़े दस्तावेजों में दिगंतरा के SCOT को Resident Space Objects को track करने वाला advanced space-surveillance sensor बताया गया है।

मार्च 2025 में Digantara ने अपने SCOT satellite को operational किया था। SCOT को पृथ्वी की orbit में लगभग 5 centimetres तक छोटे objects को track करने के लिए डिजाइन किया गया था और satellite ने South America के ऊपर अपना पहला image capture किया था।

इस लिहाज से MOSAIC को Digantara की sensing, tracking और data-processing capabilities के ground-network विस्तार के रूप में देखा जा सकता है।

सिर्फ satellite tracking नहीं, आगे navigation में भी उपयोग

MOSAIC की तकनीक का संभावित उपयोग space surveillance से आगे भी बढ़ सकता है। Digantara के अनुसार “Lost-in-Space” आधारित attitude estimation को भविष्य में GPS-denied environments में celestial navigation जैसे alternative navigation applications के लिए भी बढ़ाया जा सकता है।

युद्ध की स्थिति में यदि किसी क्षेत्र में satellite-navigation signals उपलब्ध न हों या उनमें interference हो, तो alternative navigation technologies महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि MOSAIC की वर्तमान घोषणा का मुख्य फोकस space surveillance और orbital intelligence है।

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