नौसेना के युद्धपोत बेड़े (Warship fleet) की ताकत को बढ़ाते हुए देश का नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पैट्रोल वेसल (NGOPV) ‘श्रुति’ लांच किया गया है। कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लि. (GRSE) शिपयार्ड में इसकी लांचिंग के साथ स्वदेशी शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित कर दिया गया है। इस समय NGOPV का निर्माण एक साथ दो शिपयार्ड (GSL, गोवा और GRSE, कोलकाता) में किया जा रहा है। नौसेना के 11-शिप NGOPV प्रोग्राम के तहत GRSE चार NGOPV का निर्माण कर रहा है।
देश में ही डिजाइन और बनाया गया यह जहाज मौजूदा मल्टी डोमेन ऑपरेशन के लिए मैरीटाइम सर्विलांस, सर्च और रेस्क्यू समुद्र तटीय संपत्तियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत और एंटी-पायरेसी मिशन के रूप में मौजूदा गश्ती क्षमता को बढ़ाएगा। यह लॉन्च भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और अहम उपलब्धि है और यह भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के विज़न के अनुरूप है।
‘युद्धपोत निर्माण और खरीद के कंट्रोलर, वाइस एडमिरल संजय साधु ने कहा, “नौसेना की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि नेविगेशन की आज़ादी, हमारे समुद्री रास्तों की सुरक्षा और भारत से आने-जाने वाली ऊर्जा और ज़रूरी सामान की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करना भी है। पिछले दशक में, सरकार और उसकी अहम पॉलिसी पहलों की वजह से, हमने एक मज़बूत और तेज़ी से तकनीकी रूप से एडवांस डिफ़ेंस मैन्युफ़ैक्चरिंग और जहाज़ बनाने का इकोसिस्टम बनाने में ज़बरदस्त तरक्की की है।‘
Vice Admiral Sanjay Sadhu, controller of warship production and acquisition
NGOPV की क्या हैं खूबियां –
NGOPV (Next Generation Offshore Patrol Vessel) पहले बनाए गए Offshore Patrol Vessels (OPVs) की तुलना में काफी बड़ा और अधिक सक्षम है। इनमें ज्यादा समय तक समुद्र में रहने की क्षमता (endurance), मारक क्षमता (firepower) और विभिन्न प्रकार के अभियानों को अंजाम देने की काबिलियत (operational versatility) है।
- लंबाई: लगभग 113 मीटर
- चौड़ाई: 14.6 मीटर
- विस्थापन (Displacement): 3,000 टन
- अधिकतम गति: 23 नॉट (लगभग 43 किमी/घंटा)
- 14 नॉट (लगभग 26 किमी/घंटा) की Cruising speed पर 8,500 nautical miles (लगभग 15,700 किमी) की Endurance।
यानी 14 नॉट की सामान्य क्रूज़िंग गति पर ये पोत लगभग 15,700 किमी तक बिना बार-बार ईंधन भराए समुद्र में संचालन कर सकेंगे। इससे इन्हें लंबी दूरी की समुद्री गश्त, EEZ निगरानी, समुद्री सुरक्षा, तस्करी/अवैध गतिविधियों पर रोक औरSearch & Rescue जैसे मिशनों में काफी उपयोगी बनाया जा सकेगा। इतना ही नहीं यह-
- अपग्रेडेड सुपर रैपिड गन माउंट (SRGM), AK-630, स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल गन (SRCG) और Lynx U2 सहित अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर्स से लैस है।
- अंडरवाटर डिफेंस और इलेक्ट्रानिक वारफेयर के संदर्भ में यह एडवांस्ड टारपीडो डिफेंस सिस्टम (ATDS), ESM Varuna और नेक्स्ट जेनरेशन हेलीकॉप्टर हार्नेसिंग एंड ट्रैवर्सिंग सिस्टम (NGHHTS) की खासियत भी समेटे हुए है।
- इस जहाज़ को 24 अधिकारियों और 124 नाविकों के दल द्वारा संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
जहाज का नाम श्रुति क्यों ?
इसका नाम भारत की समृद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से लिया गया है । इस जहाज़ का नाम ‘श्रुति’ रखा गया है, जो चारों वेदों का संदर्भ देता है। जहाज़ के क्रेस्ट (प्रतीक चिह्न) डिज़ाइन में ‘अरसा मेजर’ तारामंडल और लाल-सफेद रंग का लाइटहाउस भी दिखाया गया है। नौसैनिक जहाज के क्रेस्ट में इन दोनों का इस्तेमाल सही दिशा, मार्गदर्शन और समुद्री सुरक्षा को दर्शाता है।
GRSE कितना महत्वपूर्ण ?
नौसेना को ताकतवर बनाने में GRSE ने भी अहम रोल निभाया है। पिछले कुछ दशकों में GRSE ने भारतीय नौसेना को 110 से अधिक युद्धपोत दिए हैं। जबकि नौसेना सहित, इंडियन कोस्ट गार्ड, विदेशी ग्राहकों और देशों के लिए 800 से ज्यादा जहाज बनाए हैं। 20 मई को ‘संघमित्रा’ की लांचिंग के बाद केवल तीन महीने के भीतर GRSE ने श्रुति को लांच कर दिखाया।








