भारत ने एक बार फिर अपनी रणनीतिक मिसाइल क्षमता का सफल प्रदर्शन करते हुए 6 अगस्त 2026 को अग्नि-4 (Agni-IV) मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित Integrated Test Range से Strategic Forces Command (SFC) की देखरेख में किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण में मिसाइल के सभी ऑपरेशनल और तकनीकी मानकों का सफल सत्यापन हुआ।

स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड और DRDO ने 6 अगस्त 2026 को ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से MRBM अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण किया। मैं SFC और DRDO को इस पाठ्यपुस्तक जैसे सटीक मिशन लॉन्च के लिए बधाई देता हूँ, जिसने अत्याधुनिक तकनीकों के साथ राष्ट्र की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट किया। -राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री, भारत
भारत ने 6–7 अगस्त के लिए बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में पहले एक NOTAM (Notice to Airmen) 2,530 किलोमीटर तक के लिए जारी किया था, लेकिन बाद में इसे अपडेट करते हुए 3,760 किलोमीटर तक बढ़ा दिया गया था। कुछ दिन पहले तक रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा थी कि भारत द्वारा जारी किए गए लंबे NOTAM के बाद अग्नि श्रृंखला की किसी मिसाइल का परीक्षण हो सकता है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि वह परीक्षण अग्नि-4 का था।
आखिर अग्नि-4 ही क्यों?
भारत के पास आज अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5 और MIRV तकनीक से लैस उन्नत अग्नि प्लेटफ़ॉर्म तक मौजूद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अग्नि-5 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सेवा में है, तब अग्नि-4 का परीक्षण क्यों किया गया? इसका जवाब है Operational Readiness। भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता केवल नई मिसाइलें विकसित करने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि पहले से सेवा में मौजूद मिसाइलें किसी भी समय पूरी तरह संचालन योग्य रहें। इसलिए Strategic Forces Command समय-समय पर User Trials करता है, जिनमें सेना स्वयं मिसाइल का संचालन कर उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि करती है। 4,000 किलोमीटर की रेंज अग्नि-4 को चीन के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों तक पहुँचने में सक्षम बनाती है।
Agni-4 की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
- मारक क्षमता: लगभग 4,000 किलोमीटर
- ईंधन: दो-चरणीय ठोस ईंधन (Solid Fuel)
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: रोड मोबाइल लॉन्चर
- वारहेड: पारंपरिक या परमाणु
- उच्च सटीकता: आधुनिक नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम
- तेज़ तैनाती: मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म के कारण कम समय में लॉन्च की क्षमता
चीन के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?
भारत की परमाणु नीति “Credible Minimum Deterrence” और “No First Use” पर आधारित है। इसका उद्देश्य युद्ध शुरू करना नहीं, बल्कि किसी भी विरोधी को परमाणु हमले से रोकने के लिए विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है। पाकिस्तान के विरुद्ध भारत के पास पहले से पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता है। लेकिन पिछले एक दशक में चीन ने अपने परमाणु हथियारों, मिसाइलों और मिसाइल साइलो का तेजी से विस्तार किया है। ऐसे में अग्नि-4 और अग्नि-5 जैसी मिसाइलें भारत की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा हैं।
अग्नि-4 और अग्नि-5 में क्या अंतर है?
अक्सर लोग मानते हैं कि अग्नि-5 आने के बाद अग्नि-4 की भूमिका खत्म हो गई होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। दोनों मिसाइलें भारत की परमाणु रणनीति में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाती हैं। भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता कहाँ तक पहुँच चुकी है? आज भारत के पास एक बहु-स्तरीय रणनीतिक मिसाइल नेटवर्क मौजूद है। इससे भारत की Second Strike Capability और अधिक विश्वसनीय होती है, जो किसी भी परमाणु प्रतिरोधक रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।
| Agni-4 | Agni-5 |
|---|---|
| लगभग 4,000 किमी रेंज | 5,000 किमी से अधिक रेंज |
| टू-स्टेज सॉलिड ईंधन | थ्री-स्टेज सॉलिड ईंधन |
| क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता | लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता |
| सेवा में और नियमित यूज़र ट्रायल | सेवा में, उन्नत संस्करण में MIRV क्षमता का भी प्रदर्शन |
- Agni-I: पाकिस्तान केंद्रित
- Agni-II: पश्चिमी चीन तक
- Agni-III और Agni-IV: चीन के भीतर गहराई तक
- Agni-V: लंबी दूरी की रणनीतिक क्षमता
- Advanced Agni (MIRV): एक मिसाइल से कई स्वतंत्र लक्ष्यों पर प्रहार की क्षमता
क्या यह केवल एक नियमित परीक्षण था?
तकनीकी रूप से इसे User Trial कहा जा सकता है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से इसका महत्व कहीं अधिक है। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और चीन लगातार अपनी मिसाइल तथा परमाणु क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, अग्नि-4 का सफल परीक्षण यह संदेश देता है कि भारत अपनी मौजूदा रणनीतिक मिसाइलों की विश्वसनीयता और युद्धक तैयारी को लगातार मजबूत बनाए हुए है।
अग्नि सीरीज़ की मिसाइलें
- Agni-I पाकिस्तान-केंद्रित सामरिक मिसाइल
- Agni-II चीन तक पहुँचने वाली पहली मोबाइल बैलिस्टिक मिसाइल
- Agni-III भारी पेलोड और लंबी दूरी
- Agni-IV Composite Motor, Ring Laser Gyroscope, अधिक सटीकता
- Agni-V Canister Launch, तीन-चरणीय प्रणाली, तेज़ तैनाती
- Agni-P हल्की, अधिक सटीक, नई पीढ़ी की Composite संरचना
- Advanced Agni (MIRV) एक मिसाइल से कई स्वतंत्र लक्ष्यों पर वार (MIRV)
- Agni-VI लंबी दूरी, संभावित MIRV/MARV, अगली पीढ़ी की रणनीतिक क्षमता








