हाल ही में पाकिस्तान ने भारत से लगी सीमा पर बड़ी संख्या में SH-15 wheeled self-propelled artillery guns तैनात किया है। इन सिस्टम को रणनीतिक रूप से संवेदनशील गुजरांवाला, सियालकोट और जलालपुर जट्टन में तैनात किया गया है। ये इलाके शकरगढ़ बल्ज के पास हैं और पश्चिमी थिएटर में भारत की ऑपरेशनल प्लानिंग के लिए अहम हैं। उत्तरी पंजाब और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के उन इलाकों में अतिरिक्त तैनाती देखी गई है जो एलओसी के सामने हैं। चीन से खरीदे गए इस हथियार को सीमा पर तैनात किए जाने को ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। यह वेपन सिस्टम चीन में PCL-181 के तौर पर जाना जाता है।
क्या है पाकिस्तान का SH-15 Artillery System?
यह पाकिस्तान के हथियार भंडार में पहली 52-कैलिबर आर्टिलरी गन है। जिसे इसने अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए चीन से खरीदा है और भारत से लगी सीमा पर तैनात किया है। यह 155mm 52 Caliber गन सिस्टम चीन के Norinco कॉरपोरेशन द्वारा बनाया गया है। हालांकि पाकिस्तान के पास अब इसे बनाने का लाइसेंस है। आपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के विरुद्ध इनका इस्तेमाल किया गया था।
- यह राकेट असिस्टेड-प्रोजेक्टाइल के साथ विभिन्न तरह के शेल्स दाग सकता है।
- इसकी रेंज 50 किलोमीटर के आसपास बताई जाती है।
- पाकिस्तान ने 2019 में इस आर्टिलरी गन के 236 पीस का आर्डर किया था। उसे 2022 में इसकी डिलीवरी शुरू हुई।
भारत के पास क्या जवाब है ?
तो सवाल है कि क्या भारत के पास SH-15 Artillery System का कोई जवाब है। तो इसका जवाब है – हां। वैसे तो भारत के पास K-9 वज्र के रूप में एक बेहद आधुनिका सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्ज़र मौजूद है। फिलहाल सेना के पास 100 K-9 वज्र हैं, 100 का ऑर्डर दिया जा चुका है, भविष्य में कुल संख्या 300 तक करने का लक्ष्य है। K-9 वज्र वैसे तो दक्षिण कोरिया की तोप है लेकिन लाइसेंस के तहत इनका निर्माण भारत में ही किया जाता है। Larsen & Toubro (L&T) और दक्षिण कोरिया की कंपनी Hanwha Aerospace संयुक्त रूप से इस भारत में बनाती हैं। लेकिन भारत के पास इसका एक देसी जवाब भी है, डीआरडीओ का 155mm Mounted Gun System (MGS)।
क्या है MGS ?
आधुनिक युद्ध में सिर्फ लंबी दूरी तक गोले दागना पर्याप्त नहीं है। दुश्मन की काउंटर-बैटरी फायर, ड्रोन निगरानी और सटीक मिसाइल हमलों के दौर में आर्टिलरी को तेजी से हमला करना और तुरंत स्थान बदलना पड़ता है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए भारत के DRDO ने Mounted Gun System (MGS) ने विकसित किया है, जो भारतीय सेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई देगा। DRDO का 155mm/52 कैलिबर Mounted Gun System (MGS) अब भारतीय सेना के यूजर ट्रायल चरण में आगे बढ़ चुका है। MGS को 8×8 हाई-मोबिलिटी वाले वाहन पर 155 mm / 52 कैलिबर के ATAGS आर्मामेंट सिस्टम (जिसे ARDE ने डिज़ाइन और विकसित किया है) को लगाकर बनाया गया है।
- MGS रेगिस्तान और ज़्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में ‘शूट एंड स्कूट’ (गोला दागने के तुरंत बाद वहां से हट जाने) की क्षमता के साथ काम कर सकता है।
- MGS की अधिकतम फायरिंग रेंज 45 किलोमीटर है और यह बहुत सटीक और लगातार फायर करने में सक्षम है।
- इसका कुल वजन 30 टन (15 टन तोप + 15 टन वाहन)। यह 40 टन के पुलों से आसानी से गुजर सकता है, जो इसे ज्यादातर इलाकों के लिए उपयोगी बनाता है।
- यह सिस्टम पिनपॉइंट एक्यूरेसी के साथ लक्ष्य को भेद सकता है।
- MGS का फ़ायदा यह है कि इसे तेज़ी से तैनात किया जा सकता है, यह मैकेनाइज़्ड फ़ोर्स की गति के साथ तालमेल बिठा सकता है।
- दुश्मन के ठिकानों को नष्ट कर सकता है और जवाबी हमले से पहले ही वहां से हट सकता है।
- यह सिस्टम रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों जैसे सियाचिन में भी आसानी से काम कर सकता है।
MGS की सबसे बड़ी खासियत ?
फायर करो → तुरंत हटो। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। शूट एंड स्कूट यानी फायर करके तुरंत वहां से हट जाने की क्षमता इसे युद्ध में बेहद प्रभावी बनाती है। इससे दुश्मन को जवाबी हमला करने का कम समय मिलेगा। पुरानी आट्रिलरी में सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि तोप को तैनात करने में काफी समय लगता था। यही नहीं फायरिंग के बाद उसकी लोकेशन को दुश्मन पकड़ सकता था। तथा काउंटर-बैटरी हमला हो सकता था।
MGS बनाम SH-15 ?
आधुनिक आर्टिलरी में किसी भी हथियार की बेहतरी का पैमाना केवल रेंज नहीं होती है। बल्कि मोबिलिटी, फायर कंट्रोल सिस्टम, एक्यूरेसी, एम्युनिशन क्वालिटी, बैटलफील्ड नेटवर्किंग जैसी बातें भी महत्वपूर्ण होती हैं। तेज तैनाती और गतिशीलता, हर इलाके में उपयोगी और स्वदेशी क्षमता के शानदार प्रदर्शन के साथ ऐसी सभी खासियतें एमजीएस को बेहद उन्नत हथियार बनाती हैं। एमजीएस, भारत का अपना विकसित हथियार है। 2023 में आर्मेनिया को इसकी छह यूनिट एक्सपोर्ट किया गया था। वहीं पाकिस्तान SH-15 एक तरह से चीन पर पूरी तरह निर्भर है।
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है MGS?
भारत सीमा पर चीन और पाकिस्तान के रूप में दोहरे खतरों से घिरा हुआ है। चीन-पाकिस्तान के SH-15 के मुकाबले MGS कम उन्नत नहीं है। बल्कि इसकी सबसे बड़ी ताकत high mobility और shoot-and-scoot capability इसे उस पर कहीं अधिक बढ़त देती है। ऐसे में यह दोनों दुश्मन सीमाओं पर भारतीय सेना के लिए बेहद कारगर हथियार साबित हो सकता है।








