भविष्य का हथियार
इंडियन नेवी के वो डिस्ट्रॉयर्स जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल से लैस हैं, इंडियन नेवी के जो डिस्ट्रॉयर्स AK 630M Close In Weapon System से लैस है, भारतीय नौसेना के जो डिस्ट्रॉयर्स बराक एयर डिफेंस से लैस हैं, एंटी सबमरीन रॉकेट्स और टॉरपीडो से लैस हैं, इंडियन नेवी के उन जांबाज़ योद्धाओं को एक नये और घातक हथियार से लैस किया जाने वाला है-इस हथियार का नाम है DURGA II…शक्ति और समृद्धि की देवी मां दुर्गा के नाम वाला ये हथियार एक लेज़र वेपन सिस्टम है। DRDO बहुत जल्द इंडियन नेवी के डिस्ट्रॉयर्स को इस लेजर वेपन सिस्टम की ताक़त देने जा रहा है। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ये लेज़र वेपन सिस्टम 100KW का होगा।ऐसा पहली बार होगा जब इंडियन नेवी के जंगी जहाजों पर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन को लगाया जाएगा।
सेनाओं को DURGA-KALI की ताकत
तो चलिये आपको DRDO के इस हथियार के बारे में बताते हैं। बताते हैं कि आख़िर DURGA II है क्या। DRDO के Directed Energy Arsenal Project में दो नाम हैं। पहला है DURGA II (दुर्गा-2) और दूसरा है KALI (काली)। DURGA II यानी Directionally Unrestricted Ray-Gun Array और KALI यानी Kilo Ampere Linear Injector…DURGA II, DRDO का मेन लेजर वेपन प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के तहत आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के लिए मोबाइल लेज़र हथियार बनाये जा रहे हैं। इन सिस्टम्स को ट्रकों और टैंकों के अलावा नेवल वेसेल्स पर लगाया जा सकता है।जबकि KALI पारंपरिक तरीके से लेज़र नहीं है। यह एक पार्टिकल बीम एक्सेलरेटर है जो हाई-एनर्जी पल्स निकाल सकता है और थ्रेट्स के इलेक्ट्रॉनिक्स को डिसेबल कर सकता है।
लेज़र वेपन की टेस्टिंग
2025 की शुरुआत में DRDO ने आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में नेशनल ओपन एयर रेंज में पहली बार अपने 30KW के डायरेक्टेड एनर्जी वेपन को टेस्ट किया था। ये ट्रक माउंटेड वेपन सिस्टम है।अपनी टेस्टिंग के दौरान इस वेपन ने अपनी डायरेक्टेड एनर्जी से ड्रोन को हवा में ही जला दिया था। 30KW के इस डायरेक्टेड एनर्जी वेपन के सफल परीक्षण के बाद ही DRDO ने 100KW के एनर्जी वेपन पर काम शुरू किया था जो अब DRUGA II की शक्ल में सामने आने वाला है। DURGA-II को खास तौर पर एंटी ड्रोन सिस्टम के तौर पर डेवलप किया गया है। हालांकि इससे दुश्मन की मिसाइलों, ग्लाइडेड वेपन्स और एयरक्राफ्ट को भी टारगेट किया जा सकता है। लेकिन ड्रोन इसका प्राइम टारगेट है।
क्या है DURGA-II की खूबियां ?
इस लेज़र वेपन सिस्टम की कई खासियतें हैं। पहली खासियत है Speed of Engagement। इसकी लेज़र बीम लाइट की स्पीड से ट्रैवल करती है। जैसे ही टारगेट आइडेंटिफाइ हो जाता है, लेज़र उसी वक्त उसे हिट कर देती है। मिसाइल की तरह इसे फ्लाइट टाइम लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती।दूसरी खासियत है इसका किफायती होना। एक इंटरसेप्टर मिसाइल के पर शॉट की कीमत कम से कम 30 से 40 हज़ार डॉलर होती है लेकिन DRUGA II के पर शॉट की कीमत अधिकतम कुछ 100 रुपये ही होगी। उतनी जितनी उस शॉट में एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा। तीसरी खासियत है इसका बेहद सटीक होना। ये वेपन सिस्टम हाई प्रिसिजन वाला है। ये ड्रोन के कमज़ोर हिस्सों पर सटीक निशाना लगाता है। उसके मोटर, सेंसर या विंग्स को डैमेज कर देता है। इससे ड्रोन या तो जल जाता है या फिर क्रैश कर जाता है। इसकी चौथी खासियत ये है कि ये कभी ख़त्म नहीं हो सकता यानी अनलिमिटेड एम्यूनिशन है, तब तक जब तक इसे पावर सोर्स मिलता रहे या ये खुद ओवरहीट ना हो जाए। इसी वजह से ये लगातार फायर कर सकता है और स्वार्म ड्रोन अटैक को भी काउंटर कर सकता है।
इसकी एक और बड़ी खासियत ये है कि ये एक साइलेंट वेपन है। कोई भी मिसाइल लॉन्च की जाए या फिर गन फायर किये जाएं तो उससे अच्छी खासी आवाज़ होती है। ये दुश्मन को उस हथियार के साथ-साथ उसके लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी भी दे देती है लेकिन ये लेज़र वेपन साइलेंट और स्टील्दी है। इसी ख़ूबी की वजह से बॉर्डर एरियाज़ में होने वाले कोवर्ट ऑपरेशन्स में भी ये कारगर साबित हो सकते हैं। ये समझना भी बेहद ज़रूरी है कि DRDO और नेवी DURGA II को अपने डिस्ट्रॉयर्स पर क्यों तैनात करना चाहते हैं। इसका जवाब ये है कि अब जंग में ड्रोन्स सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। डिफेंस और स्ट्रैटेजिक असेट्स को सबसे ज़्यादा ख़तरा ड्रोन्स से है। नेवल पॉइन्ट पर देखें तो ड्रोन्स समुद्र की सतह के बिल्कुल पास रह कर उड़ान भर सकते हैं। ऐसे में ये रडार की पकड़ से भी बच जाते हैं और इन्हें मिसाइल इंटरसेप्टर से मार गिराना टफ हो जाता है ऐसे में डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स को ऐसे हमलों से बचाव का एक साधन माना जा रहा है।
LASER वेपन डेवलपमेंट में कहां खड़ा है भारत ?
वैसे भारत डायरेक्टेड एनर्जी वेपन के मामले में काफी पीछे चल रहा है। सबसे पहले अमेरिका ने LaWS यानी AN/SEQ-3 Laser Weapon System को तैनात किया था। 30 किलोवाट वाले इस वेपन को 2014 में USS Ponce पर ट्रायल के लिए लगाया गया था। फिर 60KW के HELIOS को Arleigh Burke-Class Destroyers पर तैनात किया गया।चीन ने अपने Type 55 डिस्ट्रॉयर पर 30 KW के LW-30 और Silent Hunter डायरेक्टेड एनर्जी वेपन को लगाया है। हालांकि कहा जा रहा है कि अभी इसका ट्रायल ही चल रहा है। United Kingdom नेवी ने अपने फ्रिगेट्स में 50KW का Dragon Fire वेपन लगाया है। इसके अगले साल ऑपरेशनल होने की उम्मीद है।
इज़रायल ने Iron Beam का नेवल वर्जन तैयार किया है। 100KW वाले इस वेपन की टेस्टिंग चल रही है।इनके अलावा रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस वेपन सिस्टम पर तेज़ी से काम कर रहे हैं। अच्छी बात ये है कि भारत अपने 30KW के वेपन सिस्टम को टेस्ट कर चुका है इसलिए 100KW के सिस्टम का डेवलपमेंट उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती नहीं है। तो आने वाले कुछ सालों में उम्मीद है कि हमारे डिस्ट्रॉयर्स इस लेज़र वेपन से लैस हो जाएंगे और दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही भस्म कर देंगे।








