मशहूर यूट्यूबर और एक्टिविस्ट ध्रुव राठी के एक इंटरव्यू पर देश की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य हलकों में गहरा उबाल आ गया है। दरअसल ध्रुव राठी ने हाल ही में एसआईआर और ज्ञानेश कुमार की इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने के बाद एक यूट्यूबर पत्रकार को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने भड़काऊ बयान दिया।
ध्रुव राठी ने कहा, ‘पुलिस वाले एक साथ आवाज उठाएंगे तो क्या करेगी सरकार? सारी पुलिस फोर्स को एक साथ रिजाइन करवाना पड़ेगा। आर्मी वाले एक साथ आवाज उठाएंगे तो क्या करेगी सरकार? पूरी आर्मी को एक साथ रिजाइन करवाएगी? क्या करेगी? कुछ नहीं कर सकती फिर सरकार। एक डेमोक्रेटिक देश में जनता के हाथ में ताकत है, यूनिटी में ताकत है।‘
उनके इन बयानों को लेकर कानूनी कार्रवाई और तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो चुका है। इस बयान के सार्वजनिक होते ही सुरक्षा विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने इसे सामान्य राजनीतिक विरोध न मानकर, सीधे तौर पर देश के अनुशासित बलों को विद्रोह (Mutiny) और तख्तापलट (Coup) के लिए उकसाने की कोशिश करार दिया है।
CJP के आंदोलन और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ा है मामला
ध्रुव राठी बीते दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में सामने आए थे। इस आंदोलन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित वोट चोरी जैसे आरोप भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं।
राठी ने इस राजनीतिक माहौल में लोगों से एकजुट होकर अपनी बात रखने की अपील की। उनका तर्क था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की सामूहिक आवाज सरकार पर दबाव बना सकती है। इसी दौरान उन्होंने भड़काऊ बातें कहीं।
बॉलीवुड से भी एकजुट होने की अपील की
एक यूट्यूब पत्रकार को दिए इंटरव्यू में राठी ने बॉलीवुड कलाकारों से कहा कि वे एक साथ ट्वीट करें और सामूहिक रूप से अपनी बात रखें। उन्होंने अंग्रेजी के तीन शब्दों—Educate, Agitate, Organize—का भी उल्लेख किया। इसका आशय लोगों को जागरूक करने, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और संगठित होने से है।
- राठी ने तर्क दिया कि अगर फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग ही आवाज उठाएंगे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन अगर पूरी इंडस्ट्री एक साथ सामने आती है, तो सरकार सभी को जेल में कैसे डालेगी?
- इसके बाद उन्होंने पुलिस और सेना का उदाहरण दिया। जिस पर बवाल मच गया है।
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने क्या कहा ?
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ. विक्रम सिंह ने राठी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुलिस और सेना के कर्मियों को सरकार के खिलाफ एकजुट होने के लिए इस तरह संबोधित करना गंभीर मामला है।
- विक्रम सिंह ने संबंधित इंटरव्यू की सत्यता की जांच कराने, कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने और आरोप सही पाए जाने पर मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।
- उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 159 का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना के अधिकारियों या कर्मियों को उनके कर्तव्य से विमुख करने अथवा विद्रोह के लिए उकसाने से संबंधित कृत्य गंभीर अपराध हो सकते हैं।
- उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी NSA के तहत कार्रवाई की भी मांग उठाई।
एसपी वैद्य ने भी जताई आपत्ति
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उनकी मुख्य बात थी कि चुनी हुई सरकार के खिलाफ खड़े होने के लिए सेना और पुलिस का आह्वान करना एक “रेड लाइन” पार करने जैसा है। ध्रुव राठी पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
BNS की धारा 159 और NSA का क्या है मामला?
धारा 159 सैन्य कर्मियों को कर्तव्य से विमुख करने या उनमें विद्रोह भड़काने के इरादे से उकसाने जैसे कृत्यों से संबंधित है।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) सामान्य आपराधिक मुकदमे से अलग एक निवारक हिरासत का कानून है। इसके तहत केंद्र या राज्य सरकार निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने का आदेश दे सकती है, यदि आवश्यक कानूनी आधार पर यह संतुष्टि हो कि उसकी गतिविधियों को रोकना भारत की सुरक्षा, राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।
ध्रुव राठी के मामले में NSA की मांग करने वालों का तर्क यह हो सकता है कि सेना और पुलिस के सामूहिक रूप से सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। राष्ट्र की अखंडता के लिए खतरा हो हो सकता है।
ध्रुव राठी की गिरफ्तारी की खबर कितनी सही?
16 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर ध्रुव राठी की गिरफ्तारी को लेकर दावा वायरल हुआ। लेकिन नोएडा पुलिस ने साफ किया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस ने वायरल पोस्ट और वीडियो को भ्रामक बताते हुए लोगों से बिना पुष्टि के ऐसी जानकारी साझा नहीं करने की अपील की।
हालांकि, इससे पहले 10 अक्टूबर को ध्रुव राठी को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उन्हें देर रात छोड़ दिया था। राठी ने बाद में दावा किया कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि अगवा किया गया था।
क्या ध्रुव राठी के खिलाफ FIR दर्ज हुई?
16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली के वकील विवेक गर्ग ने ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत देकर FIR दर्ज करने और मामले की जांच करने की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राठी ने सेना और पुलिस को सरकार के खिलाफ भड़काने वाला बयान दिया।
कौन हैं ध्रुव राठी ?
ध्रुव राठी भारतीय यूट्यूबर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। हरियाणा के रोहतक में जन्मे राठी ने जर्मनी के कार्लज़ूए इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
वह लंबे समय से जर्मनी में रहते हैं और वहीं से अपने वीडियो बनाते रहते हैं। उनकी सार्वजनिक पहचान भारतीय राजनीति, सरकार की नीतियों, सामाजिक मुद्दों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वीडियो बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर की है।
उनकी अब भारतीय नागरिकता की बात सामने आई है।








