रूसी S-400 से मिलता-जुलता एयर डिफेंस सिस्टम लाया उत्तर कोरिया, कैसे तैयार हुई यह नई ‘स्काई शील्ड’?

By Defence Detective

Published On:

Date:

North Korea launches a surface-to-air missile during an air defence test on November 4, 2026.

उत्तर कोरिया ने अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उसने 4 नवंबर 2026 को नए एयर डिफेंस सिस्टम का टेस्ट किया है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने 5 नवंबर को बताया कि इस दौरान मिसाइल को लक्ष्य की ओर गाइड करने और हवाई लक्ष्य को पहचानने व ट्रैक करने की क्षमता जांची गई।

फिलहाल जमीन से हवा में मार करने वाले इस नए मिसाइल सिस्टम (Surface to air missiley system – SAR) का नाम, उसकी मारक दूरी और कई खास स्पेसिफिकेशन सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन टेस्ट के बाद इस मिसाइल की तुलना रूस के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले इंटरसेप्टर से हो रही है।

दक्षिण कोरिया के एक रक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक, समानता मिसाइल के गाइडेंस सेक्शन में दिखती है। रूस और उत्तर कोरिया के बीच पहले से जारी सैन्य सहयोग के चलते इस डिजाइन पर भी नजर है।

इसी दिन उत्तर कोरिया ने एक अलग ड्रिल में लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल से एयरफील्ड पर हमले का अभ्यास किया। दोनों गतिविधियां ऐसे समय में हुईं, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त हवाई अभ्यास ‘फ्रीडम फ्लैग’ कर रहे थे।

किस यूनिट ने किया टेस्ट, दक्षिण कोरिया ने क्या देखा?

नए एयर डिफेंस सिस्टम का टेस्ट उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन ((DPRK Missile Administration, DPRK- Democratic People’s Republic of Korea- उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम) ने किया। केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य किम जोंग-सिक ने इसकी निगरानी की।

  • दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के मुताबिक, उत्तर कोरिया के पूर्वी तट पर दक्षिण हमग्योंग प्रांत के सोंदोक इलाके से समुद्र की ओर कई मिसाइलें दागी गईं।
  • दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा कि वह लॉन्च की तैयारी पर नजर रख रही थी और उसने मिसाइलों को दागे जाने के बाद ट्रैक किया।
  • सोंदोक उस इलाके का नाम है जहां से दक्षिण कोरियाई सेना ने लॉन्च दर्ज किए। KCNA ने नए एयर डिफेंस सिस्टम की सटीक लॉन्च साइट नहीं बताई।

टेस्ट में और क्या-क्या परखा गया ?

उत्तर कोरिया ने इस परीक्षण में मिसाइल के साथ-साथ उसे लक्ष्य तक पहुंचाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम की भी जांच की। KCNA के मुताबिक, टेस्ट में मिसाइल में इस्तेमाल नई सामग्री और एक से अधिक गाइडेंस मोड की विश्वसनीयता परखी गई।

एजेंसी ने दावा किया कि सिस्टम ने लक्ष्य की पहचान करने, उसे ट्रैक करने और सेंसर से मिली जानकारी को प्रोसेस करने की क्षमता भी दिखाई।

मल्टी-गाइडेंस सिस्टम (Intelligent Multi-Guidance Mode)-  इसका मतलब है कि उड़ान के अलग-अलग चरणों में मिसाइल को दिशा देने के लिए अलग तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

  • हालांकि, उत्तर कोरिया ने यह नहीं बताया कि मिसाइल को उड़ान के दौरान जमीन से निर्देश मिलते हैं या अंतिम चरण में वह अपने सेंसर से लक्ष्य को पकड़ती है।
  • रडार जामिंग के बीच गाइडेंस मोड बदलकर लक्ष्य पर सटीक वार करने की क्षमता का भी कोई परीक्षण डेटा जारी नहीं किया गया है।

किससे दागी गई मिसाइल- KCNA की जारी तस्वीर के आधार पर NK News ने बताया कि मिसाइल को एक मोबाइल ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर (TEL) से दागा गया प्रतीत होता है। ऐसा वाहन मिसाइल को ले जाने, उसे लॉन्च की स्थिति में खड़ा करने और दागने के काम आता है।

  • वर्टिकल लॉन्च में मिसाइल ऊपर उठने के बाद लक्ष्य की दिशा में मुड़ सकती है।
  • सिस्टम कितनी दिशाओं में लक्ष्य को पकड़ और भेद सकता है, यह उसके रडार कवरेज और फायर कंट्रोल पर भी निर्भर करता है।

S-400 से समानता मिसाइल के किस हिस्से में दिखी ?

कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के महासचिव शिन जोंग-वू ने Reuters को बताया कि उत्तर कोरियाई मिसाइल का गाइडेंस सेक्शन रूस के S-400 में इस्तेमाल होने वाली मिसाइल जैसा दिखाई देता है।

यह तुलना मिसाइल के एक हिस्से की बनावट पर आधारित है। पूरे सिस्टम की रेंज, रडार की क्षमता और रूसी तकनीक के इस्तेमाल की पुष्टि बाकी है।

  • गाइडेंस सेक्शन में वे उपकरण होते हैं जो उड़ान के दौरान मिसाइल को लक्ष्य की ओर निर्देशित करते हैं।
  • शिन के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने इस मिसाइल को पहली बार नवंबर 2025 में सार्वजनिक रूप से दिखाया था।
  • S-400 में रडार, कमांड सिस्टम और लॉन्चर के साथ अलग-अलग इंटरसेप्टर इस्तेमाल होते हैं। शिन की तुलना गाइडेंस सेक्शन तक सीमित है।

सार्वजनिक जानकारी से यह तय नहीं होता कि उत्तर कोरियाई मिसाइल किस रूसी वेरिएंट से मिलती है या दोनों के अंदर लगे उपकरण कितने समान हैं।

क्या रूस से मिली है इसकी टेक्नोलॉजी ?

नवंबर 2024 में दक्षिण कोरिया के तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिन वोन-सिक ने कहा था कि रूस ने यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती के बदले प्योंगयांग को एयर डिफेंस मिसाइलें और उपकरण दिए।

  • यह मदद उत्तर कोरिया की राजधानी की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए थी। उन्होंने किसी मिसाइल मॉडल का नाम नहीं बताया था।
  • फिलहाल 4 नवंबर को टेस्ट की गई मिसाइल के विकास में रूस की भूमिका या इस खास सिस्टम के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सार्वजनिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

2020 के मिस्ट्री लॉन्चर की पहेली सुलझी ?

10 अक्टूबर 2020 को प्योंगयांग की सैन्य परेड में उत्तर कोरिया ने चार लंबे कैनिस्टरों वाला एक पहिएदार लॉन्चर दिखाया था। ट्यूबों की लंबी और पतली बनावट देखकर ब्रिटिश रक्षा थिंक टैंक IISS ने अनुमान लगाया था कि यह जमीन से दागी जाने वाली लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का लॉन्चर हो सकता है।

4 नवंबर 2026 के परीक्षण की तस्वीरों से एक नई संभावना सामने आई है। UNITED24 Media के मुताबिक, नए एयर डिफेंस लॉन्चर की बनावट 2020 में दिखे वाहन से मिलती-जुलती है। ऐसे में पुराना वाहन भी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का मोबाइल लॉन्चर रहा हो सकता है। उत्तर कोरिया ने दोनों के बीच संबंध की पुष्टि नहीं की है।

S-400 से तुलना अलग है। वह नई मिसाइल के गाइडेंस सेक्शन की बनावट पर आधारित है।  

300 किलोमीटर का आंकड़ा कहां से आया ?

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई सेना के शुरुआती आकलन के मुताबिक, 04 नवंबर को ट्रैक की गई मिसाइलें 300 किलोमीटर से कम दूरी तक उड़ीं। यह उन लॉन्च की दर्ज उड़ान दूरी का आकलन था।

नए एयर डिफेंस सिस्टम की अधिकतम इंटरसेप्शन रेंज अब भी अज्ञात है। KCNA ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण में किस तरह का लक्ष्य इस्तेमाल हुआ, उसे कितनी ऊंचाई पर इंटरसेप्ट किया गया या सिस्टम को सैन्य इकाइयों में कब तैनात किया जाएगा।

दूसरी ड्रिल में एयरफील्ड पर कैसे किया गया हमला?

उसी दिन उत्तर कोरिया के पूर्वी क्षेत्र में तैनात एक यूनिट ने लंबी दूरी की स्ट्रैटेजिक क्रूज मिसाइल से सिमुलेटेड एयरफील्ड टारगेट पर स्ट्राइक की। शिन जोंग-वू का आकलन है कि इस ड्रिल में संभवतः क्लस्टर वॉरहेड से लैस Hwasal-1 इस्तेमाल हुई।

NK News के मुताबिक, जारी तस्वीरों में रनवे पर छोटे विस्फोटक बिखरते दिखे। इस तरह का वॉरहेड एक ही स्ट्राइक में रनवे के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाकर उड़ानें बाधित कर सकता है।

‘फ्रीडम फ्लैग’ के बीच दोनों परीक्षण क्यों अहम हैं?

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त ‘फ्रीडम फ्लैग’ अभ्यास के दौरान हुए इन परीक्षणों को कुछ विशेषज्ञों ने प्योंगयांग का सैन्य संदेश माना है। दोनों गतिविधियां हवाई ताकत से निपटने के दो तरीके दिखाती हैं।

  • एयर डिफेंस सिस्टम का काम उड़ते लक्ष्य को पहचानकर उसे रोकना है। रनवे पर क्रूज मिसाइल की स्ट्राइक का मकसद लड़ाकू विमानों की उड़ानें जमीन पर ही बाधित करना हो सकता है।
  • नए इंटरसेप्टर की वास्तविक क्षमता का आकलन तब साफ होगा जब लक्ष्य के प्रकार, इंटरसेप्शन की दूरी और सिस्टम की तैनाती के बारे में ज्यादा जानकारी सामने आएगी।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया का संयुक्त हवाई अभ्यास ‘फ्रीडम फ्लैग 26 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ और 6 नवंबर 2026 तक चलेगा। यह साल 2026 का दूसरा फ्रीडम फ्लैग अभ्यास है। इस साल का पहला अभ्यास अप्रैल में हुआ था।

Leave a Comment

Related News