बलोचिस्तान में एक कमिश्नर और दर्जनों पुलिसकर्मियों का अपहरण, पुलिस चौकी भी उड़ाई

By Defence Detective

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Damaged police post in Balochistan amid rising security threats in Pakistan.

पाकिस्तान का अशांत प्रांत बलोचिस्तान लगातार भीषण हिंसा और अराजकता की चपेट में बना हुआ है। प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बल पूरी तरह लाचार नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में, हथियारबंद लोगों ने कम से कम 20 पुलिसकर्मियों को अपहरण कर लिया है। ये नवनियुक्त पुलिसकर्मी एक पुलिस प्रशिक्षण केंद्र से लौट रहे थे, तभी हथियारबंद लोगों ने उनके वाहन को बीच रास्ते में रोक लिया और उन्हें अपने साथ ले गए।

अपहृत कांस्टेबलों को जिले के दुर्गम और अत्यधिक संवेदनशील पहाड़ी इलाकों की ओर ले जाने की बात कही जा रही है। फिलहाल इनका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। बलूचिस्तान प्रांतीय सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस सुदूर और सुनसान पहाड़ी इलाके में विद्रोहियों का वर्चस्व होने के कारण प्रारंभिक ऑपरेशन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है

इसी बीच, दूसरी घटना में एक खाली पुलिस चौकी को भी ध्वस्त किए जाने की खबर सामने आई है। इन दो अलग-अलग घटनाओं ने बलोचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये घटनाएं पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के उन दावों की पोल खोलती हैं, जिनमें वे बलूचिस्तान में पूर्ण शांति और स्थिरता स्थापित करने की बात करते हैं।

एक अन्य घटना में रख्शान डिवीजन के कमिश्नर के अपहरण की भी बात सामने आई है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह पाकिस्तानी बलों की खुफिया विफलता का एक बड़ा प्रमाण है। यह भी कि बलोसिचस्तान में विद्रोह की आग बढ़ती ही जा रही है। हथियारबंद लोगों को विद्रोही होने का दावा किया जा रहा है।

कब और कहां हुई 20 पुलिसकर्मियों के अपहरण की घटना ?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को बलोचिस्तान के मस्तुंग जिले के गुर्गिना इलाके में इन पुलिसकर्मियों को अगवा किया गया। वे कलात स्थित पुलिस रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे थे और छुट्टी के दौरान अपने घरों की ओर जा रहे थे।

  • हथियारबंद लोगों ने यात्रियों को ले जा रही वैन को रास्ते में रोका और उसमें सवार पुलिसकर्मियों को अपने कब्जे में ले लिया। घटना कलात, मस्तुंग और नौश्की क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग के आसपास हुई।
  • यह इलाका पहाड़ी और अपेक्षाकृत दूरस्थ है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए तलाशी अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • अगवा किए गए पुलिसकर्मी बलूचिस्तान के नौश्की, खरान, चागई और वाशुक जिलों से संबंधित थे।

पुलिस चौकी को ध्वस्त करने की घटना कहां हुई ?

इस बड़े अपहरण के साथ ही, विद्रोहियों ने पाकिस्तानी राज्य के प्रतीक चिह्नों को निशाना बनाने की अपनी रणनीति के तहत किला अब्दुल्ला जिले में एक वारदात को अंजाम दिया। यहां एक अस्थाई और खाली पड़ी पुलिस चौकी को आधुनिक विस्फोटकों का उपयोग करके पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया।

हालांकि इस घटना के समय चौकी पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था, जिससे किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस वारदात के जरिए अलगाववादी समूहों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रांत के किसी भी कोने में सुरक्षा बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं है। ।

हमले के पीछे किसका हाथ?

अभी तक किसी भी संगठन ने इन अपहरणों और चौकी को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी नहीं ली है।  लेकिन हथियारबंद लोगों को बलूच विद्रोही बताया जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों और स्थानीय खुफिया एजेंसियों का पूरा संदेह बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य सक्रिय विद्रोही गुटों पर है।

इन घटनाओं से पुलिसकर्मियों की आवाजाही, दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और खाली सुरक्षा प्रतिष्ठानों की निगरानी जैसे मुद्दों पर अब सवाल उठना स्वाभाविक है।

कमिश्नर का भी हुआ अपहरण

डॉन समाचार पत्र के मुताबिक रख्शान डिवीजन के कमिश्नर असद उल्लाह काकर का 15 अक्टूबर 2026 को खारान जिले में अपहरण कर लिया गया। वह क्वेटा से खारान जा रहे थे, तभी बरशोंकी इलाके में नौश्की-खारान राजमार्ग पर अज्ञात बंदूकधारियों ने उनका वाहन रोक लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने उनके साथ मौजूद लोगों में से कम से कम एक को बाद में छोड़ दिया, जिसने अधिकारियों को घटना की सूचना दी।

इसी क्षेत्र में सितंबर में खारान के डिप्टी कमिश्नर मुनीर अहमद सोमरो का भी अपहरण किया गया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि संवेदनशील इलाकों में सरकारी अधिकारियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बलोचिस्तान में क्यों बिगड़ रहे हालात ?

बलोचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। यहां BLA और बलूच राजी आजोई संगर (BRAS) जैसे विद्रोही संगठन लंबे समय से पाकिस्तानी सेना, पुलिस और फ्रंटियर कोर (FC) को निशाना बनाते आ रहे हैं। ये संगठन बलोचिस्तान के प्रचुर खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी को उनके अधिकारों से वंचित रखने का आरोप पाकिस्तानी केंद्र सरकार पर लगाते हैं।

विद्रोही, आजादी, अधिक स्थानीय अधिकार और स्वायत्ता जैसी मांग कर रहे हैं। जबकि पाकिस्तानी हुकूमत दमन कर रही है। ऐसे में अलगाववादी हिंसा, हथियारबंद संगठनों की गतिविधियां और सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष की समस्या बनी हुई है।

सुरक्षा बलों पर भारी पड़ रहा विद्रोह ?

पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में साल 2026 में अब तक सुरक्षा बलों के निशाना बनने की गंभीर तस्वीर सामने आई है। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के आंकड़ों के मुताबिक,इस साल  13 अक्टूबर तक आतंकवाद-संबंधी घटनाओं में 731 सुरक्षा कर्मियों की मौत दर्ज की गई। इनमें सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के कर्मी शामिल हो सकते हैं।

डेटाबेस में 1 अक्टूबर तक सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा 704 था, जो 13 अक्टूबर तक बढ़कर 731 हो गया। यानी महज 12 दिनों के भीतर 27 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत दर्ज हुई है।

अक्टूबर की दर्ज अहम घटनाएं- सेना, पुलिस और अन्य बलों का अलग-अलग विवरण-

सुरक्षा बल / श्रेणीहालिया रिपोर्टों में स्थिति
पाकिस्तानी सेना / सैन्य काफिला5 अक्टूबर के हमले में कम-से-कम 9 सुरक्षा कर्मियों की मौत की रिपोर्ट; सभी की शाखा की पुष्टि नहीं।
फ्रंटियर कोर (FC)4 और 5 अक्टूबर की अलग घटनाओं में 2 जवानों की मौत की रिपोर्ट।
पाकिस्तान कोस्ट गार्ड11 अक्टूबर को 13 मौतों का BLA दावा
पुलिस20 प्रशिक्षु पुलिसकर्मी अगवा; 6 अक्टूबर को SHO और उनका गनमैन भी अगवा किए जाने की रिपोर्ट।
पाकिस्तानी नौसेनाइस अवधि में नौसेना के जवानों की मौत का कोई अलग, स्वतंत्र रूप से पुष्ट आंकड़ा इन स्रोतों से स्थापित नहीं होता।

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