भारत से कितनी नफरत ? बांग्लादेश की शर्मनाक तस्वीर, बीएनपी नेता ने रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर को पैरों तले रौंदा

By Defence Detective

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leader Hafizul allegedly trampling a portrait of Rabindranath Tagore in Bangladesh

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद पतन के बाद वहां, भारत विरोध, हिंदुओं का दमन, मंदिरों पर हमले और साझा सांस्कृतिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाने की प्रवृत्ति और बढ़ गई है ? यहां से अब एक ऐसी तस्वीर आई है, जिसने भारतीयों को आक्रोश से भर दिया है।

हाल ही में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता हासिबुल इस्लाम माहरूफ ने फेसबुक पर एक ऐसी तस्वीर शेयर किया, जो बेहद शर्मनाक है। इस तस्वीर में वह नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जमीन पर पड़ी तस्वीर को पैरों तले कुचलता हुआ दिख रहा है। इस फेसबुक पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है।

यह मामला एक ऐसे समय में सामने आया है, जब इसके पहले हाल ही में ढाका में रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर पर काली स्याही पोतने की घटना मीडिया में रिपोर्ट हुई है। बांग्लादेश में टैगोर की विरासत को लेकर लगातार विवाद और हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों पर हमलों की खबरें भी चिंता बढ़ा रही हैं।

टैगोर भारत के महान साहित्यकार होने के साथ बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ के रचयिता भी हैं। ऐसे में उनकी तस्वीर का अपमान केवल भारत-विरोधी संदेश तक सीमित है या यह साझा बंगाली संस्कृति को भी निशाना बनाने वाली सोच का संकेत है?  मंदिरों, मूर्तियों और हिंदू नागरिकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के बीच यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है।

डिफेंस, जियोपॉलिटिक्स और सिक्योरिटी मामलों के एक्सपर्ट के लिए यह महज एक अपमानजक फेसबुक पोस्ट नहीं, बल्कि बांग्लादेश में गहरी जड़ें जमा रही कट्टरपंथ और भारत-घृणा की बानगी है।

कौन है हासिबुल इस्लाम माहरूफ और कब की है घटना ?

नोआखाली जिले में स्थित बांधेरहाट अब्दुल मलिक उकिल डिग्री कॉलेज में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के छात्र संगठन, ‘छात्र दल’ (Chhatra Dal) का शाखा अध्यक्ष हासिबुल इस्लाम माहरूफ ने यह फेसबुक पोस्ट 11 अक्टूबर 2026 को की, जिसने विवाद खड़ा कर दिया।

  • तस्वीर में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर को वह पैरों से कुचलता दिख रहा है। हालांकि इस मामले में कार्रवाई हुई।
  • नोआखाली जिला छात्र दल ने 13 अक्टूबर को मारुफ को संगठनात्मक पद से निष्कासित कर दिया।
  • संगठन की ओर से जारी सूचना में कार्रवाई की वजह अनुशासन का उल्लंघन बताया गया है।
  • बांग्लादेशी समाचार पत्र इत्तेफाक की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, निष्कासन के बाद हासिबुल ने फेसबुक पोस्ट में छात्र दल को ‘भारतीय दलाल दल’ कहा था।

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर इस्लामिक कट्टरपंथी सोच किस कदर हावी हो चुकी है। यह वही रबींद्रनाथ टैगोर हैं, जिन्होंने बांग्लादेश की आत्मा को सुर दिए, लेकिन आज के नए बांग्लादेश में उन्हें ‘भारतीय’ और ‘हिंदू’ पहचान से जोड़कर उनकी विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है।

निशाने पर भारतीय विरासत और सभ्यता ?

बांग्लादेश में भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों पर हमले से लेकर रवींद्रनाथ टैगोर के अपमान और भारतीय उत्पादों के बहिष्कार तक, कई घटनाओं ने दोनों देशों की साझा बंगाली पहचान पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, 1971 के मुक्ति संग्राम के इतिहास को नई पाठ्यपुस्तकों में प्रस्तुत करने के तरीके पर भी विवाद हुआ है। कुछ प्रमुख घटनाओं पर एक नजर-

  • इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र पर हमला: अगस्त 2024 में ढाका स्थित भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की खबरें सामने आईं। इस केंद्र में भारतीय संगीत, नृत्य, साहित्य और योग से जुड़े कार्यक्रम होते थे।
  • रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर का अपमान: अक्टूबर 2026 में नोआखाली में छात्र दल नेता हासिबुल इस्लाम मारुफ की उस फेसबुक पोस्ट पर विवाद हुआ, जिसमें टैगोर की तस्वीर पैरों के नीचे दिखाई गई थी। इसके बाद उन्हें संगठनात्मक पद से निष्कासित कर दिया गया।
  • ढाका में टैगोर के चित्र पर कालिख: अक्टूबर 2026 में ढाका में टैगोर के चित्र पर काली स्याही पोते जाने की रिपोर्ट आई। घटना को कथित भारत-विरोध से जोड़ा गया, हालांकि इसकी पूरी परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
  • भारतीय साड़ी का सार्वजनिक बहिष्कार: दिसंबर 2024 में BNP नेता रुहुल कबीर रिजवी ने भारतीय साड़ी को राजनीतिक विरोध के प्रतीक के रूप में सार्वजनिक रूप से फेंका। यह घटना भारतीय उत्पादों के बहिष्कार अभियान के दौरान सामने आई।
  • 1971 के इतिहास पर विवाद: 2025 की बांग्लादेशी पाठ्यपुस्तकों में शेख मुजीबुर रहमान और इंदिरा गांधी की कुछ ऐतिहासिक तस्वीरें हटाए जाने की रिपोर्ट आई। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि मुक्ति संग्राम में भारतीय सेना के योगदान का पूरा उल्लेख हटा दिया गया था।
  • लेडी जस्टिस की मूर्ति हटाने का विवाद: 2017 में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट परिसर से न्याय की प्रतीक मूर्ति हटाने की मांग धार्मिक कट्टरपंथी समूहों ने की थी। अंततः मूर्ति हटा दी गई। यह विवाद धार्मिक विचारधारा और सार्वजनिक सांस्कृतिक प्रतीकों के बीच टकराव का उदाहरण बना।

बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ कितना भेदभाव ?

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का सवाल अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। मंदिरों में तोड़फोड़, धार्मिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने, शिक्षकों पर दबाव और हिंदू नागरिकों की हत्या जैसी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद अल्पसंख्यक संगठनों ने हमलों की बड़ी संख्या दर्ज करने का दावा किया, जबकि दिसंबर 2025 में दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या ने इस खतरे को फिर उजागर किया।

  • मंदिरों और घरों पर हमले: अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता गिरने के बाद बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने 200–300 हिंदू घरों और कारोबारों में तोड़फोड़ तथा 15–20 मंदिरों को नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी दी थी।
  • दुर्गा पूजा से पहले 34 घटनाएं: 15 अक्टूबर 2026 को बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद ने मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने, मंदिरों पर हमलों और संबंधित हिंसा की 34 घटनाएं दर्ज होने की जानकारी दी। संगठन के मुताबिक, 11 मामलों में गिरफ्तारियां हुई थीं।
  • हिंदू शिक्षकों के इस्तीफे: द डेली स्टार की 31 अगस्त 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, एक अल्पसंख्यक छात्र संगठन ने दावा किया था कि 5 अगस्त के बाद 49 शिक्षक दबाव में इस्तीफा देने को मजबूर हुए। संगठन ने बाद में बताया कि इनमें से 19 को बहाल कर दिया गया।
  • दीपु चंद्र दास की हत्या: दिसंबर 2025 में 27 वर्षीय हिंदू कपड़ा कर्मचारी दीपु चंद्र दास पर धार्मिक अपमान का आरोप लगाया गया। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, भीड़ ने उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी।
  • 2026 के पहले छह महीनों में 44 मौतों का दावा: बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने जनवरी से जून 2026 के दौरान धार्मिक अल्पसंख्यकों के 44 सदस्यों की हत्या होने का दावा किया।
  • सालभर सुरक्षा की मांग: लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच बांग्लादेश के हिंदू संगठनों ने मांग की है कि मंदिरों और धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा केवल दुर्गा पूजा तक सीमित न रहे। 15 अक्टूबर 2026 को पूजा उद्जापन परिषद ने भी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पूरे साल सुरक्षा देने की अपील की।

टैगोर की विरासत पर यह नया विवाद ?

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगौर की विरासत पर बांग्लादेश में विवाद नया नहीं है। टैगोर की रचनाओं और सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर बांग्लादेश में विवाद का इतिहास पुराना है।

  • पाकिस्तान के दौर में भी रवींद्र संगीत और बंगाली सांस्कृतिक पहचान को लेकर टकराव देखने को मिला था।
  • जून 2025 में सिराजगंज जिले के शाहजादपुर स्थित ऐतिहासिक रवींद्र कचहरीबाड़ी परिसर में भी हमला और तोड़फोड़ हुई थी।

वह भारतीय राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के भी रचयिता हैं। उन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था।

बांग्लादेश की हरकतों के मायने ?

बांग्लादेश में बढ़ता भारत-विरोध और सांस्कृतिक घृणा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighborhood First) नीति के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बांग्लादेश की हरकतें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर सुरक्षा को लेकर सतर्क करती हैं। चीन-पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती जुगलबंदी भी बताती है कि उस पर लगातार नजर रखे जाने की जरूरत है।

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